यूपी, बिहार, बंगाल से हैं अजनाला के 282 शहीद: DNA और दांतों से खुलासा, तमिलनाडु-कनाडा से परिवार सामने आए; सरकारें क्यों सोई हैं

अजनाला में 282 शहीदों के कंकाल, जिन्हें अंग्रेजों ने जिंदा दफनाया था, उनकी पहचान हो गई है। ये शहीद 1857 के विद्रोह के बाद सैनिक थे। इनमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे, जबकि एक से तीन परिवार तमिलनाडु में रहते हैं।

जांच से पता चला है कि ये शहीदों को अंग्रेज अधिकारी कूपर ने जिंदा दफनाया था। इसके बाद उन्हें एक लोहे के बक्से में रखकर छोड़ दिया गया था, जिसमें उनके अवशेष सुरक्षित रहे।

यह बताते हुए प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा, ‘पहली बार यह पता चला कि अजनाला में 1857 में अंग्रेजों को खत्म करने वाले शहीदों के अवशेष हैं, हमारे पास एक ईमेल आ गया। इस ईमेल में लिखा था कि आपका परिवार भी ब्रिटिश आर्मी में था। आपके दादाजी ने 1857 के विद्रोह में भाग लिया था।’
 
बीते हुए 168 वर्षों से जिंदा दफनाया गया शहीदों के अवशेष मिल गए, तो क्या खत्म होने वाली ऐसी कहानी अब बंद हुई? यह तो सचमुच दिल पर लगी बुराई है जैसे हमारे देश को भी किया गया। ये शहीदों ने अपने पिता और दादा की मेहनत के लिए स्वतंत्रता लेने की लड़ाई लड़ी थी।
 
अजनाला से यह जानकारी बहुत प्रेरक है 🙏, हमें अपने इतिहास और शहीदों को नहीं भूलना चाहिए। ये शहीद 1857 के विद्रोह के बाद सैनिक थे, जिन्हें अंग्रेज अधिकारी ने जिंदा दफनाया था। यह बहुत ही दर्दनाक तथ्य है कि उन्हें इस तरह से छोड़कर रखा गया था, लेकिन अब उनकी पहचान हो गई है और हमें उनकी याद में शांति और सम्मान के साथ जीना चाहिए।
 
अजनाला में शहीदों के अवशेष मिले हैं और यह एक बड़ा झटका है। मुझे लगता है कि ये सारी चीज़ें इस तरह से रह गईं क्योंकि भारतीय इतिहास में इन्हें बहुत कम महत्व दिया गया। अगर हमारे पास इतने शहीद थे, तो फिर उन्हें कभी नहीं याद किया गया। यह एक बड़ा आर्थिक नुकसान होगा, अगर मृतकों की पहचान हुई और उनके परिवार को भुगतान करना पड़े।
 
ਸੋ, ਇਹ ਗੱਲ ਬਹुत ਰोचਕੜ ਵਾਲੀ ਹੈ। ਅजनालਾ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਨਿਵਾਸੀ ਕੁੱਝ ਤਾਂ ਬਦਲ ਗਏ ਹੋਣ, ਮੈਂ ਅੰਜਣ ਛੇਤੀ ਆਪਣੀ ਖੋਜ ਵਿਚ ਸੁੱਟ ਦਿਆਂਗਾ
 
अजनाला में शहीदों के अवशेष खुदाई करने पर मुझे अच्छा लगा, लेकिन फिर सोचते हुए यह देखकर मुश्किल होता है कि अंग्रेजों ने जिंदा दफनाएं थे... यानी उनको मरने के बजाय जीवित रहने दिया था। यह तो बहुत ही अजीब और मनसिखवाला काम था। मुझे लगता है कि उन्हें मरने के बजाय जीवित रहने का मौका देने से कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि उनके परिवारों को भी खुश नहीं होगा, खासकर जब उन्हें पता चलेगा कि उनके परिजन यहां खत्म हुए थे।
 
🤔 अजनाला में शहीदों के अवशेष मिलने से लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझने की जरूरत है। 1857 का विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। याद करें, अंग्रेजों ने हमारे देश पर कब्जा किया और लोगों को शांति से नहीं रहने दिया।

क्या हमने अपने देश की सच्चाई को समझ लिया है? ये सवाल हमें लगता है कि हमारे इतिहास को समझने की जरूरत है। 📚
 
क्या यह तो एक बहुत ही रोचक खोज है ना? ये शहीदों के अवशेष जिंदा दफनाने की बात सुनकर मुझे लगता है कि हमारी इतिहास की कहानी में बहुत सारे रहस्य छुपे हुए थे। और यह तो एक विश्वसनीय जांच के बाद पता चल गया है। लेकिन लगता है कि इसे जिंदा दफनाने का निर्णय बहुत ही अजीब सा था, खासकर जब हमें बताया जाता है कि ये शहीद अधिकांश उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से आते थे। क्या यह तो अंग्रेजों की भयावहता को दिखाने की कोशिश थी? 🤔

लेकिन फिर भी, यह खोज हमें बहुत कुछ सीखने का मौका देती है। और मुझे लगता है कि यह एक ऐसी कहानी है जो हमें हमारे इतिहास के बारे में अधिक जानने के लिए प्रेरित करती है। और इसके अलावा, यह भी एक ऐसी याद दिलाती है कि हमारा परिवार, हमारी जमीन पर क्या गुजरा है, और यह कैसे हमें अपनी पहचान को समझने में मदद करता है। 🙏
 
बिल्कुल, ये तो सिर्फ अंग्रेजों की गलती है, जिन्होंने खुद को शहीद ठहराया था 🙄। उन्होंने अपनी नाक में दाने लगाए थे, लेकिन अब उनके अवशेष मिल गए हैं तो वे खुश होंगे। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के लोग शहीद हुए थे? यह तो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी है, जिसमें हमने अंग्रेजों से लड़ाई मचाई थी। जिंदा दफनाने की बात? यह तो एक अजीब सी बात है, लेकिन अब उनके अवशेष मिल गए तो वे शांति से पूर्वजों की ओर चले जाएंगे।
 
अगर इस तरह की जानकारी निकलती, तो हमें अपने इतिहास के बारे में और गहराई से समझने का मौका मिलेगा, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। ये लोग वीरगाथा की कहानियां हैं, जो हमें आज भी प्रेरित करती हैं। अगर उनकी पहचान हुई, तो यह एक बड़ा कदम है, न कि सिर्फ उन्हीं लोगों के परिवारों के, बल्कि हम सभी देशवासियों के लिए।
 
ਬੀਤੇ ਸਮੇਂ ਦੇ ਗੁਰੂਆਂ ਕੋਲ ਹਾਈਵے 'ਤੇ ਚڑھ ਕੇ ਇਹ ਜਣਨੀਯ ਘਟਨਾ ਦੱਸੀ ਜਾਏ, ਉੱਥੇ 1857 ਦੇ ਵਿਦਰੋਹੀਆਂ ਦੇ ਕੰਧ ਭੰਨ ਲੈਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਸ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਯਾਦਗਾਰ 'ਚ ਕਿਆ ਵਿਖਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ?
 
अगर इतने से शहीदों के अवशेष पैदा हो गए तो क्या उनके परिवार को शुक्रिया करनी चाहिए? ना तो अंग्रेजों की दुरता और ना ही हमारे देश के इतिहास में एक नए दौर की शुरुआत। ये शहीदों की कहानी सुनकर लगता है कि उनके परिवार भी बहुत गर्व महसूस करेंगे।
 
Wow! 🤯 सैनिकों को जिंदा दफनाया गया था, यह बहुत दुखद है। उनके अवशेष खोजे गए और पता चला कि उन्हें अंग्रेज अधिकारी ने रख कर छोड़ा था। 😔

Interesting! 👀 जिसे ईमेल मिला था उसके बाद पता चला कि दादाजी ने विद्रोह में भाग लिया था, यह एक बड़ी खोज है। हमें उनकी स्मृति में शांति और सम्मान के साथ रहना चाहिए। 🙏
 
अरे ये तो बहुत ही दुखद और दिलचस्प बात है 🤕। मैंने सुना है कि अजनाला में 282 शहीदों के अवशेष पाए गए हैं जिन्हें अंग्रेज अधिकारी कूपर ने जिंदा दफनाया था। यह तो बहुत ही दर्दनाक और ऐतिहासिक बात है 🤯। मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझने और सम्मान करने की जरूरत है, खासकर जब वह इतिहास जिंदा लोगों से जुड़ा होता है। मेरी माँ के दादाजी ने भी ब्रिटिश आर्मी में सेवा की थी, और मैंने हमेशा उन्हें उनके बलिदान के प्रति सम्मान करने की कोशिश की हूँ। यह एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक मोड़ है, और मुझे आशा है कि हम इसे समझेंगे और सम्मान करेंगे।
 
ख़ब़र में देखा, 282 शहीदों के अवशेष पाये गये। यह तो बहुत बड़ा ख़ग़ीया है। उन्हें जिंदा दफनाने वाले अंग्रेजी अधिकारी कूपर ने यह दम घटाया था। उनकी पहचान साफ़ हो गई, लेकिन यह तो सिर्फ़ शहीदों की बात नहीं है। यह भी पूछने वाला है कि उन्हें कैसे जिंदा दफनाया गया था, और क्या इसी तरह के अन्य लोग भी उनके साथ हुए?
 
नरेंद्रा 🤯🕊️, ये जानकारी तो बहुत ही दुखद है, 282 शहीदों के अवशेष मिले, और उनकी पहचान साफ़ हो गई है। यह तो हमारे इतिहास की एक गहरी चोट है जिसने हमें अपने वीरता और बलिदान को कभी नहीं भूलने की जरूरत है। मेरी आंखों में पानी आ गया है, ये तो इतनी दुखद बात है कि अंग्रेजों ने इन शहीदों को जिंदा दफनाया था। उनकी यह भी कहानी हमारे साथियों के लिए एक सबक है। हमें हमेशा अपने परिवार और समाज के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि हम कभी ऐसी दुखद स्थिति न पहुँचें।
 
Back
Top