West Bengal SIR: ‘असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे’, यह कहकर बंगाल में चुनाव अधिकारी ने दिया इस्तीफा, खड़ा हुआ नया विवाद!

बंगाल में चुनाव अधिकारी ने सुनवाई से पहले इस्तीफा देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है, 'असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे' कहकर। विश्वासघात की बात करते हुए, उन्होंने बताया कि मौसम सरकार से उनके पद से छुट्टी लेने की मांग की गई थी।

उनके पत्र में कहा गया है कि एक वोटर के नाम पर 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' में गलत नाम दिए गए थे, जिनको बाद में आम लोगों ने 'फॉर्म 8' भरकर सुधारा था। यही कारण है कि अब नामों की स्पेलिंग में गड़बड़ी होने लगी है, जिसमें उम्र की गलतियां भी शामिल हैं।
 
वाह, तो पूरा बंगाल में वोटरों के नाम बदलने का मामला फेल हो गया है... यार, यह बहुत गड़बड़ी है। क्या कोई अच्छा तरीका नहीं सोच रहा था? सरकार की बात करने से पहले सभी चीजों पर सोच लेते।
 
ये तो बंगाल का एक बड़ा विवाद फिर से उभर आया है 🤦‍♂️। चुनाव अधिकारियों के इस्तीफे में ये सवाल उठने लगा हैं कि उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने अपने पत्र में सरकार से दोष दिया है। तो फिर सरकार ने इतनी बड़ी गलती क्यों की? 🤔

और चुनाव में वोटरों के नाम पर इस तरह की गलतियाँ कैसे होती हैं? यह तो एक बड़ा सवाल है। लेकिन मुझे लगता है कि इससे पहले हमें अपने चुनाव प्रणाली में सुधार करने की जरूरत है, न कि किसी को दोष देने की। 😊
 
क्या हुआ चुनाव अधिकारी को अपने फैसले से? यह तो सरकार के खिलाफ नहीं मुझे लगता, बल्कि उनके अपने खिलाफ है... वोटरों की गलतियों को ठीक करने का काम है, लेकिन उन्हें पत्र लिखकर बैठना ही पड़ा? और यह क्यों? क्योंकि मौसम सरकार से पद छुट्टी लेने की मांग की, तो इसका मतलब है वे अपने काम से नाखून निकालने लगे...
 
ਕੀ ਤो ਇਹ ਵੀ ਵਿਅਰਥ ਬਣਨ ਦਾ ਮੋੜ ਹੈ ਕਿ ਚੁਣਵੀਆਂ ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਦੇ ਫੌਜੀ ਪ੍ਰੇਮ ਨਾਲ ਅਧਿਕਾਰੀ ਬਹੁਤ ਘਟੀਆ ਸੂਚਨਾ ਨੂੰ ਵੀ ਖਰਾਬ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਬੜੀ ਪੱਖੌੰਮ ਚੁਣਵੀਆਂ ਦੀ ਗੱਲ ਨਿਕਲ ਪੈਂਦੀ ਹੈ।
 
क्या बात हो रही है? चुनाव अधिकारियों को इतना मुश्किल लगता है कि वोटरों के नाम सुधारने पर? मुझे लगता है कि यह बड़े पैमाने पर चोरी हो रही है, लोगों के नाम बदलने के लिए कोई भी बाध्य नहीं होना चाहिए। और फिर सरकार से छुट्टी मांगते हैं? यह तो पूरी तरह से अनुचित है।
 
मुझे लगता है कि इस्तीफेदायक चुनाव अधिकारी ने सही तरीके से बात की है। क्या हम सच्चे वोटरों को देखना चाहते हैं या फिर सरकार के लिए अपनी जिंदगी खर्च करने के लिए मजबूर किया जा रहा है? वे नाम गलती से हटाए गए और इसके बाद पता चला कि उनके बचपन का नाम तो पहले से बदल कर दिया गया था, यह तो क्या मानेगा?

मैं समझता हूं कि सरकार ने मौसम परिवहन सेवाओं से उनकी छुट्टी लेने की मांग की होगी, लेकिन इससे जुड़ी समस्याएं तो बढ़ गई हैं। चुनाव अधिकारी का इस्तीफा हमें यह भी सोचने पर मजबूर कर रहा है कि हम अपने मतपत्रों और पहचान पत्रों की सुरक्षा कैसे करेंगे।
 
अरे, ये तो बहुत बड़ा विवाद है… बंगाल में चुनाव अधिकारी ने सुनवाई से पहले इस्तीफा देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुझे लगता है कि यह सिर्फ एक मजाक नहीं है, लेकिन फिर भी इतनी गंभीर बात क्यों? उनके पत्र में कहा गया है कि मौसम सरकार से उनके पद से छुट्टी लेने की मांग की गई थी, तो यह तो और भी जटिल हो गया है।
 
अरे, ये तो बात ही नहीं है! चुनाव अधिकारियों का इस्तीफा लेने से पहले उन्हें यह पता नहीं था कि उनके काम से असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं? ये तो सरकार द्वारा चलाई गई एक बड़ी घोषणापत्र की बात है! और मौसम सरकार से उन्हें पद छुट्टी लेने की मांग करने से पहले उन्हें यह नहीं पता था? तो क्या इससे लगता है कि हमारे चुनाव प्रणाली में भ्रष्टाचार की खाई है? हमें अपने वोटों की गंभीरता को समझना होगा और कभी भी बिना सोचे-समझे इस्तीफे नहीं देना चाहिए। 🚫💔
 
अरे, यह तो बिल्कुल चपेट में आ गया है! क्या हुआ अब, चुनाव अधिकारी ऐसे स्टेज कर दिए जैसे फिल्म 'गोलmaal' का एक क्लिप? पहले सुनवाई करने के लिए तैयार होते हैं और फिर से इस्तीफा देकर सबको चकमा देते हैं। सरकार से छुट्टी मांगने की बात कोई नई नहीं है, लेकिन ऐसे केस में तो गोलमाल होना जरूरी है! लॉजिकल डिस्क्रिप्शन में गलत नाम देना और फिर सुधारने की कोशिश करना तो एक बड़ा विवाद है, अब तो सबको पता चल गया है कि इस चुनाव में कौन सारे खिलाड़ी खेल रहे हैं!
 
मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा विवाद हो सकता है। अगर सचमुच ऐसा हुआ तो यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है, क्योंकि इससे चुनावी प्रक्रिया की अखंडता पर सवाल उठता है 😕। लेकिन एक सवाल भी आता है कि क्या वास्तव में यह हुआ और सरकार ने सचमुच वोटरों के नाम बदलने का फैसला किया था। क्या यह तो सब कुछ ही एक बड़ा खेल है? 🤔
 
मुझे लगता है कि यह सच नहीं होगा, तो फिर तो ऐसा क्यों हुआ? मेरी बात मानें, परंतु अगर नहीं, तो यह सरकार की गलती थी, ना? लेकिन अगर यह सच है, तो यह वास्तव में एक बड़ा विश्वासघात है। मैं समझता हूं कि मौसम सरकार से छुट्टी लेने की मांग करना, लेकिन इस तरह की गलती करना? 🤔👎

मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मिश्रण है, सच्चाई और बगावत, दोनों ही एक साथ नहीं चल सकते। अगर वास्तव में गलत नाम थे, तो सरकार को उन्हें ठीक करना चाहिए था, ना? लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह विश्वासघात की बात है। मैं समझता हूं कि इसे एक बड़ा मुद्दा बनाने की जरूरत है, लेकिन इस तरह से इसका दावा करना? 🤷‍♂️😕
 
अरे, ये तो बहुत बुरा दिख रहा है... चुनाव अधिकारी ने अपना इस्तीफ़ा देकर इतना विवाद खड़ा कर दिया है। मुझे लगता है कि यही समस्या है, जब लोग विश्वासघात करते हैं तो हर कोई खुलकर बोलने लगता है। और फिर भी, चुनाव आयोग को साफ़ करने का मौका मिल गया। शायद यही सबक है कि अगर हम अपनी जिम्मेदारियों को लेना नहीं जाते, तो कैसे सुधरेगा देश? 🤔
 
मुझे लगता है कि चुनाव अधिकारी का इस्तीफा करना न तो एक अच्छा और न ही बुरा, फिर से, मैंने कल अपने दोस्त की खाली सीट को फुलाने के लिए रेलवे स्टेशन पर वेटिंग किया था, और वहीं कुछ अजीब चीजें देखने को मिली जैसे कि एक आदमी ने अपने पास को ताला कर रखा था।

और फिर, मैंने सोचा कि अगर हमारे देश के चुनाव में ऐसी भूलें होती हैं, तो यहाँ तक की वोटरों के नाम की जानकारी नहीं होने से पहले भी यह समस्या कैसे आ सकती है? फिर से, बहुत बुरा नहीं है...
 
बंगाल में चुनाव अधिकारियों का यह खेल देखने लायक है। एक तरफ उनके पास इतनी जिम्मेदारी है और दूसरी तरफ वे इस्तीफा देकर नया विवाद खड़ा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने अपने पद से छुट्टी लेने के लिए सरकार को धमकाया था। यह एक तरह की राजनीतिक खेल है, जहां उम्मीदवार अपने पक्ष को बढ़ावा देने के लिए किसी भी चीज़ पर फंस जाते हैं।

लेकिन सारा बिल्कुल सही नहीं है। चुनाव अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि उनकी गलतियाँ आम लोगों द्वारा सुधारी जा सकती हैं, न कि सरकार या किसी एक व्यक्ति द्वारा।
 
अरे दोस्त, यह तो बड़ा विवाद हो गया है! बंगाल में चुनाव अधिकारी ने सुनवाई से पहले इस्तीफा देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। क्या ये सच है कि सरकार से उनके पद से छुट्टी लेने की मांग की गई थी, और फिर उन्होंने अपने पत्र में यह कह दिया कि वोटरों के नाम पर गलत नाम दिए गए हैं? 🤔

मुझे लगता है कि यह सारा गड़बड़ी का हिस्सा है, जो चुनाव में होती है। लोग तो अपने-अपने मतदान के नाम भरते हैं, लेकिन कभी-कभी गलती हो सकती है। फिर भी यह इतनी बड़ी बात नहीं होनी चाहिए। सरकार से क्या मांग की जा रही थी, इसकी पूरी जानकारी नहीं मिली। लेकिन एक बात तय है, यह विवाद अब चुनाव की प्रक्रिया पर पड़ गया है।
 
मुझे लगता है कि यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! चुनाव अधिकारी ने ऐसा क्यों किया? वोटरों के नाम पर गलती करना और फिर से सुधारने की कोशिश करना... अरे, यह तो सरकार की बुराई नहीं है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में थोड़ा सा विवाद न आना चाहिए। मैंने हाल ही में अपनी परीक्षा की तैयारी में बहुत मेहनत की है और अब मुझे लगता है कि हमें यह तय करना होगा कि चुनाव अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों का ध्यान रखना चाहिए या नहीं।
 
वोटरों के नाम पर इस तरह का धोखाधड़ी करना बिल्कुल सही नहीं है 🙅‍♂️, हमारे चुनाव प्रणाली में ऐसा कुछ भी होना चाहिए जो साफ-सुथरा और ईमानदार हो।
 
अरे दोस्त, ये तो एक बड़ा विवाद हो गया है... चुनाव अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा देकर कहा है कि मौसम सरकार से उन्हें छुट्टी देने की मांग कर रही थी। लेकिन सच तो यह है कि उनके पत्र में लिखा गया है कि एक वोटर के नाम पर गलत नाम दिए गए थे, जिनको आम लोगों ने सुधारा था। अब ये तो सबको आश्चर्यचकित कर रहा है... और फिर यह तो चुनाव आयोग पर भी सवाल उठेगा कि उनके पास ऐसी जानकारी नहीं थी?
 
मुझे ये बात दुखद लगती है 🤕, क्या हमारे चुनाव प्रणाली में ऐसी गड़बड़ी तो नहीं हो सकती थी, जब आम आदमी अपनी जान जीतने के लिए लड़ता है। 2019 के चुनावों में 67.4% मतदान दर हुई थी, और 2018 में चुनाव आयोग से मिली राशि 11,688 करोड़ थी। भारत में एक बार में लोकप्रिय वोटर की संख्या 66.5% है, लेकिन चुनाव में हार जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ रही है। चुनाव अधिकारी ने पत्र में बताया कि एक वोटर के नाम पर 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' में गलत नाम दिए गए थे, जिनको बाद में आम लोगों ने 'फॉर्म 8' भरकर सुधारा था।
 
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