Shamli: श्मशान घाट से मानव अस्थियां चुराने पर गांव में जमकर हंगामा, दो महिलाएं गिरफ्तार; तांत्रिक की तलाश शुरू

गोपाल के देहांत के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर पहुंचे परिजनों ने उन्हें एक चिता में जलाकर राख कर दी। यह घटना हुई थी जब सुबह की पहली किरण पड़ती तो दोनों महिलाएं चिता से अस्थियां निकालकर अपने पास ले गए। ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी।

गोपाल के परिजनों ने बताया कि उनके पिता मिट्ठन बीमारी के कारण ही देहांत कर गए थे। वे शव अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट पर पहुंचे थे। वहीं चिता में जलाए जा रहे शव को देखकर ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया।

पुलिस ने बताया कि दोनों महिलाओं को पकड़ लिया गया था और उन्हें पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। साथ ही पुलिस ने उनके घर से मानव अस्थियां भी बरामद कीं।

ग्रामीणों ने बताया कि महिलाओं ने अपनी बात कहकर उन्हें शव की राख से इलाज करने की बात की थी। पुलिस को यह जानकारी मिली है कि आरोपियों ने इस तरह का इलाज इसलिए किया था।
 
अरे वाह, यह तो बहुत ही अजीब सी घटना हुई है! गोपाल के परिजन शव अंतिम संस्कार करने जा रहे थे लेकिन दोनों महिलाएं चिता से अस्थियां निकालकर अपने पास ले गए। यह तो बहुत ही अजीब सी बात है कि क्यों उन्होंने ऐसा किया। और फिर ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस को भी जानकारी दी। मुझे लगता है कि यह तो बहुत ही गंभीर मामला हो सकता है।
 
क्या देखा, ये दोनों महिलाएं तो बहुत दुखी थीं, उनके पिता भी बीमार से मर गए थे, और उन्हें पता नहीं था कि उनके पिता की असली मृत्यु कैसे हुई, अब वो अपनी बेटियों ने भी ऐसा ही किया है 🤔। लेकिन यह सुनकर दुख हुआ, महिलाओं ने शव जलाकर राख कर दी, और ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया, इसकी जांच पुलिस कर रही है, क्या उनकी बात सच में थी या नहीं? 🤷‍♀️

मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही दुखद घटना है, जहां महिलाएं अपने पिता की मृत्यु से जूझ रही थीं, और अब उनकी बेटियों ने भी ऐसा ही किया है। लेकिन यह सुनकर भी तो बहुत दुख हुआ, क्योंकि शव जलाकर राख करना एक बहुत ही गंभीर मामला है, और इसकी जांच पुलिस कर रही है।

मुझे लगता है कि इस घटना की जांच पूरी करने के बाद, हमें पता चलेगा कि महिलाओं ने क्यों ऐसा किया, और उनकी बात सच में थी या नहीं। लेकिन यह सुनकर तो बहुत दुख हुआ, और हमें उम्मीद है कि जांच के बाद, न्याय किया जाएगा। 🤞
 
😊 मुझे लगता है कि यह घटना हमें एक गहरी बात सिखाती है। जब हम अपने प्रियजनों को खोने पर दुखित रहते हैं, तो कभी-कभी हम अपने आप को भटकते और गलत निर्णय लेते हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि दुख में मनसिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है। 💔 परिवार के बंधन को मजबूत बनाने के लिए, हमें अपने आप को शांत और समझदार रखना चाहिए। कभी-कभी, हमें स्थिति को समझने के लिए थोड़ी रुकना ही पड़ता है और फिर सही निर्णय लेना चाहिए। 🙏 यह घटना हमें खोजने वाली मूल्यवान सीख देती है।
 
🤔 गोपाल की मौत के बाद क्या हुआ, यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उसके परिजन शव अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट पहुंचे, लेकिन वहां चिता में जलाए जा रहे शव को देखकर ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। यह तो बहुत अजीब लग रहा है। पुलिस ने महिलाओं को पकड़ लिया था, लेकिन अब पता चल गया है कि उन्होंने शव की राख से इलाज करने की बात कही थी। 🤷‍♀️ यह तो बहुत दुखद है।
 
बस कुछ समझने की जरूरत है, यार! यह तो एक अजीब सी घटना है। उन महिलाओं ने क्या सोचा था? शव की राख में इलाज करने की बात तो क्यों?! और ग्रामीणों ने इतनी जल्दी पकड़ लिया कैसे? यह तो एक बड़ा विवाद होने की जरूरत है!
 
😐 यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है... गोपाल के परिजनों ने शव के अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट पर जाने की बात कही थी। परिजनों ने उस चिता में जलाए जा रहे शव को देखकर ग्रामीणों से हंगामा कर दिया। 🤔 यह तो उनकी मर्जी नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा ही किया। पुलिस ने पकड़ लिए, परिजनों को चिंता होगी। 😕
 
मुझे ये घटना बहुत दुखद लगी है... गोपाल के परिजन शव अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट पर गए तो ग्रामीणों ने उनकी बात समझ नहीं पाई। मुझे लगता है कि शव को जलाकर राख करने का तरीका तो अलग-अलग संस्कृतियों में अलग-अलग तरीके से किया जाता है, लेकिन यहां पर ग्रामीणों ने उनकी बात समझ नहीं पाई। 🙏💔

मुझे लगता है कि आरोपियों को पकड़कर जल्द से जल्द मुकदमा चलाया जाना चाहिए ताकि शव को जलाकर राख करने की बात कहकर उनकी पीड़ा कम हो सके। 🚔👮‍♀️
 
यह तो बहुत ही दुखद घटना है 🤕, गोपाल के परिजनों ने ऐसा कुछ नहीं कहा था की उन्हें शव जलाने के लिए कहना पड़े। चाहे वो मिट्ठन बीमारी से हुआ हो या फिर कोई और समस्या। तो कैसे उनके परिजनों ने ग्रामीणों को कह दिया कि अपनी अस्थियां शव जलाकर पानी में भिगो दो। यह तो बहुत ही अजीब बात है।
 
मुझे लगता है कि ये घटना बहुत दुखद है, लेकिन फिर भी यह प्रश्न उठता है कि क्या हमारे समाज में ऐसे स्थिति बनाए रहने को सहन करना चाहिए? 🤔

कुछ महिलाओं ने अपने घरों में शव की राख लगाने का प्रयास किया, जिससे उनके परिजनों को बहुत दुख हुआ। यह घटना तो भी नहीं थी कि किसी ने उनकी बात सुनकर मदद करे, बल्कि लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी।

मुझे लगता है कि हमारे समाज में ऐसे विचारों को फैलने से रोकने की जरूरत है। शव को जलाना एक अनुचित गतिविधि नहीं है, लेकिन शव को घर में रखकर इलाज करने का तरीका भी सही नहीं है। हमें अपने समाज में ऐसे स्थितियों को रोकने की जरूरत है और लोगों को सही ज्ञान देने की जरूरत है।
 
मुझे ये तो देखकर हैरानी हुई की क्या लोग इतने भ्रमित होते हैं? शव अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट पर पहुंचना तो एक आम बात है, लेकिन चिता में जलाए जा रहे शव को निकालने की तैयारी कर देना... ये तो कुछ और है। और फिर ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। मुझे लगता है कि यह सब कुछ थोड़ा बिल्कुल भी नहीं समझता।
 
बड़ा मजाक है! एक मौसमी कहानी, पर दोनों महिलाएं मौसमी नहीं थीं, वो चिता से राख लेकर घूमने निकल पड़ी थी 🤣। तो क्या उनका इलाज शव की राख से होगा? खैर, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और उनके घर से मानव अस्थियां बरामद कर ली, अब उनका इलाज तो शायद इंसानी दवाइयों से होगा 💊
 
ऐसी चीजें कभी नहीं होनी चाहिए, लेकिन ऐसी भी चीजें होती हैं जिनके पीछे कई कारण होते हैं। यह घटना बहुत शर्मिंदगी की बात है, खासकर जब दो महिलाएं शव जलाने के लिए तैयार थीं। मुझे लगता है कि उनके पास अच्छी नींद नहीं आ रही थी, या फिर वे बहुत परेशान थी।

लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि ग्रामीण जीवन में ऐसी स्थितियां हो सकती हैं जहां लोगों को नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। हमें उनकी बात समझनी चाहिए और उनकी जरूरतों को भी समझना चाहिए।

उसके अलावा, यह घटना हमें एक बार फिर से सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे समाज में शव जलाने के लिए व्यवस्था करने की जरूरत है। ताकि ऐसी चीजें कभी न हों। 🤕
 
क्या सोचते हैं? जब हमें पता चलता है कि शव जलाने वाले लोग दुःखी महिलाएं थीं, तो मुझे लगता है कि हमें उनकी भावनाओं को समझने की जरूरत है। परिजनों को शव जलाने की जरूरत नहीं थी, लेकिन अगर उन्हें ऐसा करने की जिज्ञासा थी, तो फिर से विचार करें। हमेशा अपने निर्णयों को समझने और फिर से विचार करने की कोशिश करें।
 
क्या लोग अब भी ऐसा सोचते हैं कि शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर नहीं जा सकते? और चिता में जलाए जाने वाले शव को देखकर ग्रामीणों की यह तरह की हिंसा क्यों होती है? पुलिस तो अब भी इतनी बीमारी है कि शव अंतिम संस्कार करने वाले लोगों को पकड़ लेने में नहीं सकी। और आरोपियों ने शव की राख से इलाज कैसे किया? यह तो सिर्फ कोई मजाक ही था। 🙄💀
 
श्वास के अभाव में लोगों की जान जू रही है 🤕। सामान्य लोगों को भी ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में अपनी जिंदगी बदलने का मौका मिलता है। यह तो वास्तव में दुखद बात है कि एक मरीज का शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर पहुंचते हुए, उसकी राख को जलाकर किसी भी तरह से इलाज करने का प्रयास किया जाता है। यह देखकर मेरा दिल टूटने का थोड़ा सा मौका मिलता है 🤣
 
जानलेवा घटनाओं के बाद भी हमें सामाजिक समर्थन और समझदारी की जरूरत है। ये दो महिलाएं अपने प्रेमी के शव को जलाकर राख बनाने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन उनकी बात समझने के बजाय उन्हें पकड़ लिया गया। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर हमें ध्यान देने की जरूरत है।
 
गोपाल के देहांत पर ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए, पुलिस को तुरंत ब्रीफिंग करनी चाहिए कि ग्रामीणों ने क्यों पकड़ लिया 🙄. और यह भी सोचते समय कि क्या वास्तव में महिलाएं अपने पिता को शव की राख से इलाज करना चाहती थीं? यह तो कुछ भी नहीं है, जानवरों की तरह नहीं होना चाहिए 🐕. और पुलिस ने मानव अस्थियां बरामद कर ली हैं यार, यह तो बहुत सीरियस है 😬.
 
क्या ये देखकर मन भी घबराहट में आ गया है। दोनों महिलाएं इतनी विरोधाभासी, जो एक साइड पर आत्महत्या की बात करती हैं और दूसरी साइड पर शव जलाने की बात करती हैं। उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करिए तो फिर कुछ नहीं रह जाता। यह बहुत ही विवादित मामला है, लेकिन अगर हमारे देश की ऐसी समस्याओं से निपटना चाहते हैं तो हमें उनकी बात सुननी और समझनी होगी। 🤗
 
गोपाल जी की बहाना तो जहरीली साबित हुई। उनके परिजनों ने ऐसा पागलपन कर दिखाया कि सारा ग्राम तेज आ गया 🤯. शव जलाने की बात में कुछ समझ नहीं आ रही थी, लेकिन महिलाओं ने ऐसा इलाज बताकर कि खैर, अब उनको शिकायत करना बाकी है 😐. पुलिस ने अच्छी तरह से काम किया, न केवल आरोपियों को पकड़ा, बल्कि उनके घर से भी मानव अस्थियां बरामद हुईं, जो बहुत बड़ी बात है 👍.
 
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