संसद में वंदे मातरम्, लेकिन बंकिमचंद्र चटर्जी का घर खंडहर: 20 साल पहले आखिरी बार मरम्मत, वंशज बोले- ममता सरकार ने हमें भुला दिया

बंकिम चंद्र का घर खराब स्थिति में, नेताओं ने लाइब्रेरी बनाई, लेकिन मरम्मत नहीं की। 20 साल पहले से ही इसे ठीक नहीं किया गया है।
 
अरे यार, बंकिम चंद्र की घर में इतनी खराब स्थिति तो देखकर खेद हुआ। लेकिन जैसे ही पढ़ा कि सरकार ने इसे लाइब्रेरी बना डाला, तो फिर से सोचा कि यह अच्छा विचार नहीं था। क्योंकि 20 साल पहले मरम्मत नहीं किया गया, तो यह जैसे एक ऐतिहासिक स्थल की तरह देखा जाए, न कि एक संरक्षित संस्थान की। मुझे लगता है कि अगर सरकार वास्तव में इसे बचाना चाहती है, तो मरम्मत करने के बजाय इसकी सुरक्षा बढ़ानी चाहिए और यह एक सार्वजनिक स्थल के रूप में अपना उपयोग कराना चाहिए, जिससे लोगों को इसकी महत्ता समझाई दे।
 
अरे, यह तो बिल्कुल भ्रम है! नेताओं द्वारा घर खराब स्थिति में बनाई गई लाइब्रेरी, लेकिन मरम्मत नहीं हुई? यह एक बड़ा झूठ है, मेरे दोस्त! 20 साल पहले से इसे ठीक नहीं किया, इसका मतलब तो नेताओं की बुद्धिमत्ता कैसे तय करेगी?

मैंने लाइब्रेरी को कभी नहीं देखा, बस मोटे मोटे फोटो हैं। और घर खराब स्थिति में? यह तो एक बड़ा झगड़ा, नेताओं की बुद्धिमत्ता कैसे तय करेगी? मैंने नेट पर खोजा था, लाइब्रेरी के बारे में सब कुछ ठीक है, मरम्मत भी की गई है। यह तो एक बड़ा झूठ है!
 
भारतीय इतिहास का एक दुखद विषय है बंकिम चंद्र का। उनका घर खराब स्थिति में है, लेकिन इसके अलावा उनकी किताबालय बहुत ही पrettी बनाई गई है। तो फिर मरम्मत नहीं की गई, यह सवाल हमारे देश की वास्तविकता को दर्शाता है 🤔

20 साल पहले जब उनकी लाइब्रेरी में मरम्मत करने की बात आई थी, तो फिर भी उन्होंने उस पर ध्यान नहीं दिया। आज यह जगह इतनी पrettी बन गई है कि वहां से आने वाले लोग निराश महसूस करेंगे। ऐसा लगता है कि हमारे देश में पैसे बहुत ही आसानी से खर्च होते हैं, लेकिन अच्छे कामों पर फोकस नहीं किया जाता 🤑

हमें सोचने की जरूरत है कि बंकिम चंद्र की जगह हमारे देश के अन्य महत्वपूर्ण लोगों की भी मरम्मत की जाए। उनकी यादों को बचाने के लिए हमें प्रयास करना चाहिए, न कि एक व्यक्ति की जगह पर फोकस करना ही 🙏
 
क्या देख रहे थे? बंकिम चंद्र के घर में ऐसी खराब स्थिति है... यह तो दुर्भाग्य है... 20 साल पहले लाइब्रेरी बनाकर रख दिए, फिर मरम्मत नहीं की। यह जानकर बात कर रहा हूँ कि कैसे ऐसे सारे नेता घर का खराब स्थिति देखकर नहीं आये। 20 साल पहले लाइब्रेरी बनाकर रख दिए, अब वो मरम्मत नहीं हुई है। यह तो एक बड़ी समस्या है...
 
क्या देखिए, 20 साल बीत गए और घर को फिर से मरम्मत करने का कोई प्रयास नहीं किया। लाइब्रेरी बनाना अच्छा विचार था, लेकिन यह तो कुछ भी करेगा अगर घर की मरम्मत नहीं होगी। हमें अपने इतिहास और संस्कृति की देखभाल करनी चाहिए, न कि बस उसे सजाने की कोशिश करना।
 
क्या बात है, इस दुनिया में तो एक घर खराब होना तो ही आसानी से। लेकिन बंकिम चंद्र के घर की समस्या तो वास्तव में गहरी है। 20 साल पहले से ही मरम्मत नहीं किया गया है, इसका मतलब है कि उन्होंने यह जानते हुए भी सबकुछ ठीक नहीं किया। लाइब्रेरी बनाना तो अच्छा था, लेकिन घर की मरम्मत करने में नेताओं की ध्यान भाग्या नहीं।
 
ਇਸ ਗੱਲ 'ਤੇ ਕੁਝ ਚਿੰਨ੍ਹ ਨਹੀਂ ਦਿੱਸ ਰਹੇ ਕਿ 20 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਤੋਂ ਇਸ ਲाइब्रेरी ਨੂੰ ਮੈਰਟ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ। ਬੰਕਿਮ ਚੰਦਰ ਦਾ ਗ੍ਰਹਫ ਖ਼ਰਾਬ ਸਥਿਤੀ 'ਚ ਹੈ, ਪਰ ਲੋਕ ਇਸ ਨੂੰ ਅਜਿਹਾ ਦੇਖ ਰਹੇ ਹਨ ਕਿ ਇਸ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਨੌਕਰੀ 'ਤੇ ਲੈ ਜਾਵਾਂ।
 
अरे, यह तो बहुत दुखद है बंकिम चंद्र के घर की, मुझे लगता है हमारे पास इतने बड़े नेता हैं परंतु इतनी छोटी यादें क्यों नहीं रखी जातीं? 20 साल पहले से ही मरम्मत नहीं किया, तो क्या उनके अन्य प्रोजेक्ट्स भी ठीक नहीं चल रहे हैं? 🤔

नेताओं को हमेशा अपने देश की जिम्मेदारी पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन कभी-कभी वे इतने पीछे-पीछे चलते हैं कि उनके स्वयं के कामों को भी ध्यान नहीं मिलता। बंकिम चंद्र की यादें हमारे लिए बहुत पवित्र हैं, लेकिन लगता है उनके घर की मरम्मत करने से पहले उन्हें अपनी सरकार पर सवाल उठाने की जरूरत थी।
 
भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए नौजवानों को अच्छी शिक्षा मिले, उनके घरों को साफ और स्वच्छ रखा जाए, ताकि वे अपने बच्चों को एक बेहतर दुनिया दिखाय सकें।
 
😂 यह तो बिल्कुल सही है! बंकिम चंद्र की घर की स्थिति को देखकर लगता है कि उनका स्मारक बनाने वालों ने सोचा था कि वहाँ खेलने का मौका भी होगा। लाइब्रेरी बनाकर मरम्मत नहीं करना तो और भी मजेदार है। 20 साल पहले से ही ठीक नहीं किया गया तो यह तो शायद पंडित नेहरू के अनुभवों का अनुकरण है 😂.
 
अरे, ये तो बिल्कुल भ्रम है! मेरा प्यारा बंकिम चंद्र दीदी का घर खराब स्थिति में तो होना तो निश्चित है, लेकिन क्यों मरम्मत नहीं किया गया? यह तो बहुत ही अजीब है! मुझे लगता है कि सरकार और राजनेताओं को अपनी चालाकी को छुपाने के लिए इस घर को खराब कर देना पड़ा।

मैं समझता हूँ कि यह एक ऐतिहासिक स्थान है, लेकिन इसके लिए सरकार और नेताओं को अपना प्यार दिखाना चाहिए। मुझे लगता है कि अगर वे अपनी सच्चाई बताते तो यह घर अच्छी स्थिति में नहीं रहेगा। लेकिन फिर भी, मैं आशा रखता हूँ कि जल्द ही इस घर को मरम्मत कर दिया जाएगा और यह एक सुंदर ऐतिहासिक स्थल बन जाएगा।

बिल्कुल, यह एक बड़ी चिंता है!
 
🤔 तो बंकिम चंद्र का घर खराब स्थिति में है ना, यह दुखद है कि लाइब्रेरी बनाकर भी मरम्मत नहीं की गई। 20 साल पहले क्यों नहीं ठीक किया गया? यह तो एक बड़ी गलती है। 🤦‍♂️

ज़रूर, नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का ध्यान रखें और उन्हें संरक्षित करें। लाइब्रेरी में साहित्यिक और शैक्षिक महत्व है, इसे ठीक करने की जरूरत है। 📚

लेकिन यह एक सवाल भी उठता है कि पूर्व सरकार ने इतने समय तक इसे ठीक नहीं किया, इसके पीछे क्या राज़ था? और अब क्या आगे क्या किया जाएगा? 🤔
 
नई दिल्ली स्थित बंकिम चंद्र प्रसाद का घर अब बहुत खराब स्थिति में है, यह तो किसी से भी निश्चित है... 🤔 कुछ लोग कहते हैं कि सरकार ने इसे लाइब्रेरी बनाकर रख दिया है, लेकिन सच्चाई यह है कि मरम्मत नहीं की गई है। 20 साल पहले भी इसे ठीक नहीं किया गया था, तो अब क्यों? यह बहुत शर्मनाक है... 🤦‍♂️

बंकिम चंद्र प्रसाद एक महान कवि और लेखक थे, उनकी साहित्यिक क्षमताएं आज भी पढ़े जाते हैं और सम्मानित जाते हैं, लेकिन उनका घर इस तरह में दिखाई दे रहा है... 🚮 यह तो हमारे समाज की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहा है। सरकार से उम्मीद है कि जल्द ही मरम्मत की जाएगी और यह जगह फिर से साहित्यिक रचनाओं का घर बन जाए... 💪
 
क्या देखो, बंकिम चंद्र का घर एक जगह जैसे! 😱 नेताओं ने लाइब्रेरी बनाई, तो फिर मरम्मत नहीं की। 20 साल पहले से, यहां ठीक नहीं किया गया। ऐसे में यह तो बहुत दुखद है। मुझे लगता है कि अगर हमारे इतिहास और संस्कृति की रक्षा करना चाहते हैं, तो इसकी मरम्मत जरूरी है। फिर से, यह एक बड़ा नुकसान है, खासकर जब इस जगह पर इतनी बहुत सारी महत्वपूर्ण चीजें रखी जाती हैं। 🤕
 
अरे, ये तो बहुत चिंताजनक है बंकिम चंद्र के घर की स्थिति। वाह, लाइब्रेरी बनाने की बात तो अच्छी है, लेकिन मरम्मत नहीं करने का मतलब ये तो उनकी संपत्ति पर छूट की तरह लग रहा है। 20 साल से ही इसे ठीक नहीं किया, यह तो दुर्भाग्यपूर्ण है न? अगर सरकार वास्तव में उनकी सहायता करना चाहती है, तो कम से कम मरम्मत की लागत को उठाना चाहिए। हमेशा ऐसी ही बातें कहते रहते हैं कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का ध्यान रखना जरूरी है, लेकिन वास्तविकता तो यह है कि कई जगहें पुराने संरक्षण की कमी के कारण खराब हो रही हैं।
 
बंकिम चंद्र की घर की स्थिति तो दुखद है 🤕, लेकिन यारो तो यह पता चला कि उनके गृह पर नेताओं ने लाइब्रेरी बना दी, जैसे कि उन्होंने पढ़े-लिखे व्यक्ति बनने के बाद अपने जन्मस्थान को सजाने की कला सीखी। लेकिन मरम्मत नहीं की, तो यह समझना मुश्किल है कि वे यहां तो फिर से पढ़ाई-लिखाई कैसे करेंगे। 20 साल पहले भी इसे ठीक नहीं किया गया था, तो अब क्या हुआ? कोई ऐसा स्थान जहां नेताओं और लाइब्रेरी एक-दूसरे के पास न हों, ऐसा देखने में ही परेशानी होती है।
 
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