यार जान, यह तो एक वाकई से अच्छा मौका है! अगर कोई लोग अपने केस को खुद लड़ने का मौका देते, तो यह उनकी बहादुरी को दिखाता। और अगर वो 12 साल बीतने के बाद भी बरी हो जाए, तो यह तो एक सच्चा विजय कहलाता है।
मुझे लगता है कि ऐसे मामलों में न्यायपालिका की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, जो लोगों को न्याय दिलाने में मदद करती है। और अगर हमारे पास सुधार करने के तरीके हैं, तो हमें उन्हें अपनाने की कोशिश करनी चाहिए।
मैंने एक ऐसा मामला सुना था जहां लड़की ने अपने दुष्ट दादाजी को अदालत में झेलने की कोशिश की, और फिर 15 साल बाद ही उन्हें बरी कर दिया गया। यह तो एक सच्चा उदाहरण है कि न्याय पूरी तरह से न्यायपालिका पर निर्भर नहीं करता।