संडे जज्बात-कंगना सांसद है तो मैं भी पंजाबी शेरनी हूं: उसने 100 रुपए मेरी कीमत लगाई, उससे लड़ने के लिए मैंने जमीन बेची, 7.5 लाख कर्ज लिया

वह लड़की बहुत साहसी है 🤩, लेकिन यह भी सच है कि अदालत में खड़े होने का सही मतलब समझ में आता है। उसको या उसकी सरकार से डरने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि उनसे बात करने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने की ताकत चाहिए।
 
दिलचस्प बात है यह, लोगों को ऐसा देखकर आश्चर्य होता है कि भारतीय अदालतों में महिलाओं को इतनी स्वतंत्रता और शक्ति दी जा रही है। यह तो हमारे देश की एक अच्छी बात है, लेकिन लगता है कि अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

मुझे लगता है कि ऐसे मामलों में जाने वाली महिलाएं ने बहुत साहस और तयातकता दिखाई होगी, इसलिए मैं उन्हें बधाई देना चाहता हूं। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अदालतों में ऐसी मामले कम नहीं हैं, जहां महिलाओं को न्याय नहीं मिल पाता है, और वे अपने अधिकारों की लड़ाई जीतने के लिए बहुत कठिन परिश्रम करती हैं।

इसलिए, हमें ऐसे मामलों में भी जुड़ने की जरूरत है जहां महिलाओं को न्याय नहीं मिलता, और उन्हें अपने अधिकारों की लड़ाई जीतने में मदद करने की जरूरत है।
 
वाह, यह लड़की दिल्ली की है ना, तो बहुत साहसी है। अदालत के बाहर भी वह खुद को पकड़ लेती है, खाली हाथ। मुझे लगता है उसकी माँ को हकीकत बतानी चाहिए, कि बेटी तो अभी भी जिंदगी से लड़ती है। यह लड़की हमारे देश की आत्माओं की तरह है, हमें अच्छा दिखाती है और हमें खुश करती है। 🙌
 
अरे, यह सचमुच बहुत अजीब बात है 🤔। आजकल के दिनों में, हमारे देश में अदालत में जाने वाले लोग खुद को ही परेशान कर रहे हैं। पुराने समय में, अगर कोई व्यक्ति अदालत में खड़ा होता था, तो उसका मतलब यह नहीं था कि वह अपने दुश्मन को खत्म करने के लिए आया हुआ है। नहीं, ऐसा कभी नहीं हुआ था। आजकल, यह सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाज़ी है 🙄। पुराने समय में, हमारे दादा-दादी अदालत में जाते थे, लेकिन वह अपने पति-पत्नी को छोड़कर नहीं जाते थे। वे अपने परिवार के साथ रहते थे और हंसते-मुस्कराते भी थे। आजकल, यह सब तो बहुत बदल गया है। मुझे लगता है कि हमारे देश में लोगों ने अपने आप को इतना खो दिया है कि अब वे अपने परिवार और समाज के प्रति जागरूक नहीं हैं।
 
🤔 यह तो बहुत ही दिलचस्प है कि क्या हुआ, यह तो पता नहीं चलता, लेकिन यह बात तो सच है कि अदालत में जाने से पहले खाली हाथ आते हैं...

नहीं, नहीं, नहीं... ऐसा नहीं हो सकता। अदालत में जाने से पहले हमेशा अच्छी तैयारी करनी चाहिए। यहाँ एक छोटी सी चार्ट देखिए, यह बताता है कि बिना तैयारी के क्या होता है...

चार्ट में दिखाया गया है कि 90% लोग जाने से पहले अच्छी तैयारी करते हैं, जबकि 10% लोग नहीं करते हैं और उस पर ही शिकायतें होती हैं। यह तो हमेशा सच ही है।

लेकिन यह तो एक छोटी सी बात है, यह दुनिया बहुत बड़ी है, जहाँ कई चीजें होती हैं, इसलिए हमें कभी नहीं रुकना चाहिए और हमेशा अच्छे काम करने की कोशिश करनी चाहिए।
 
वाह, यह तो बहुत भावुक है! मैं समझ नहीं पाऊंगी कि क्या उसे अदालत में जाने के लिए इतनी कोशिश करनी पड़ी? 😕

मुझे लगता है कि वह अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए बहुत साहसी है। अदालत में जाने से पहले उसने अपने विचारों को सही से समझना चाहिया, ताकि वह अपने दावे को पूरा कर सके। 🤔

लेकिन, मुझे लगता है कि अदालत में जाने के बाद क्या होगा, यह जानने के लिए मैं इंतजार कर रही हूँ। 🤞
 
🌟 यह तो बहुत ही बड़ा नेतृत्व का न्याय है! एक ऐसी महिला जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रही है, अदालत में खड़ी होने के लिए तैयार है। 🤝

मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा संदेश है - हमें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए, और किसी भी परिस्थिति में धमकी या डर न लगना चाहिए। 🌊

इस महिला की साहसिकता और आत्मविश्वास को हम सभी से सीख सकते हैं। हमें अपने समाज में बदलाव लाने के लिए एकजुट होना चाहिए, और अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। 💪
 
बात बोलती है... 😒 यह तो एक बहुत ही रचनाकारी बयान है। मेरे लिए यह बहुत ही दिलचस्प है कि किसी ने खाली हाथ अदालत में जाने का फैसला किया है और फिर तो ऐसी बातें कह रहे हैं जैसे उन्हें अदालत में खड़े रहने से डर लगता है। यह तो एक नई दुनिया है... 😂

लेकिन मुझे लगता है कि यह बयान निश्चित रूप से ध्यान आकर्षित करेगा। लोगों को यह सोचने पर मजबूर करेगा कि अदालत में खड़े रहने के बाद भी अपने विचार व्यक्त करने की काबिलियत कैसे साबित करते हैं। यह एक बहुत ही रोचक दिशा है... 💡
 
अगर मेरे दोस्तों को पता है कि मैंने खाली प pocket mein kuch paise bacha le hoon to uski bhi toh meri baat nahi rahi. lagta hai ki khud ko thakan se bhar diya gaya hai. ab unke government ke sath yeh ladna kaisa hota hai? ya phir unka thoda samman kyun nahi ki jaata? mein sochta hoon ki agar school mein hum aise hi padte toh kaisa humne apni study kaam par kaiya dhyan de sakta.
 
ये ट्रोल की चाल है क्या 🤣 इस देश में लड़कियां और महिलाएं अपने स्वामित्व की बात कर रही हैं तो मुझे लगने लगता है कि वे अपने पति की जेब खोलकर अपनी बातें कर रही हैं। अदालत में खाली हाथ जाना और सरकार से डरना तो यही है जैसे कि हमारे देश की राजनीति में कुछ नया लाया गया है।
 
बिल्कुल हाँ, यह बात तो सच तो है कि कुछ लोगों को अपनी बुराइयों के लिए दोषी मानने से बचना चाहते हैं। अदालत में जाने और वहां अपनी बुराई का बदला लेने की बात तो सिर्फ़ एक पल की देरी है। अगर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से उन्हें कोई नुकसान नहीं होता, तो क्यों वे अदालत में जाते हैं? यह तो बस अपनी शरारत करने की और दूसरों पर ध्यान आकर्षित करने की बात है। 🤔
 
तुम्हारे दिमाग में ऐसा विचार कैसे आया कि अदालत में खाली हाथ जाना अच्छा है? मुझे लगता है कि तुम्हारी सरकार से डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन अपने भविष्य को सोचकर यह फैसला लेना चाहिए। क्योंकि अदालत में खाली हाथ जाना एक बड़ा खतरा है, जहां तुम्हारे पैसे खर्च होते हैं और फिर भी तुम्हें राहत नहीं मिलती। मुझे लगता है कि तुम्हें अपने परिवार को साथ लेकर इस फैसले पर विचार करना चाहिए।
 
ये तो मेरी बात नहीं सुनेगी, लेकिन मैं खुलकर कहूँगा कि हमारे देश के अदालतों में सुधार की जरूरत है। पुलिस और अदालत में सब्जकट की समस्या बहुत ज्यादा है। ये तो मेरा विश्वास नहीं है कि अदालत में न्याय हमेशा होता है। मैंने देखा है कि अदालत में भी बेइज्जतियाँ होने वाली हैं। यह तो पूरा सिस्टम खेल है, जिसमें लोगों को न्याय नहीं मिलता।
 
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