रूसी तेल खरीद को लेकर क्या होगा भारत का स्टैंड? विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने किया साफ

रूसी तेल खरीद से भारत की स्थिति कैसे जुड़ी रहेगी, यह पूछने के बाद विदेश सचिव ने बताया कि भारत को ऊर्जा खरीद में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखना चाहिए। वहीं, अमेरिका-वेनेजुएला से तेल खरीदने पर भी विदेश सचिव ने कहा, 'हमारी ऊर्जा खरीद की रणनीति किसी एक देश पर आधारित नहीं होगी। हम कई देशों से ऊर्जा खरीदते हैं और इस क्षेत्र में विविधता जुटाए रखने पर जोर देंगे।
 
अगर भारत तेल खरीदने की बात कर रहा है तो यह हमारे भविष्य की सुरक्षा की बात है, लेकिन यह भी सच है कि ऊर्जा एक निश्चित सीमा तक मिलती है और अगर हमें बहुत ज्यादा खींच नहीं पा रहे तो यह हमारे लिए कितना फायदेमंद होगा? लेकिन अगर हम राष्ट्रीय हितों पर ध्यान देते हैं तो शायद हमारी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा, जैसे कि अगर हम अपने पड़ोसी देशों से ऊर्जा खरीदते हैं तो उनके साथ संबंध और भी मजबूत होते हैं। लेकिन यह तो समझना जरूरी है कि हमारी इस रणनीति में विविधता आनी चाहिए, ताकि अगर एक देश हमारे लिए नहीं मिल सके तो फिर दूसरे से मिलने की कोशिश करें।
 
बात करते ही तो रूसी तेल खरीदने से भारत की हालत अच्छी रहेगी, यार? पेट्रोल-डीजल की कीमतें गिरने की उम्मीद है, लेकिन अगर विदेश सचिव की बात मानें तो हमें ऊर्जा खरीद में सोच-समझकर चलना चाहिए। अमेरिका, वेनेजुएला जैसे देशों से नहीं हमारी संपत्ति पर आधारित होना चाहिए, बल्कि कई जगहों से खुशनुमा ऊर्जा खरीदनी चाहिए तो ठीक है।
 
अगर भारत तेल खरीदने में अमेरिका-वेनेजुएला से नहीं रहता, तो वह सोचने पर लाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को तेजी से देश के बाहर कैसे बढ़ाया जा सके। जैसे मैंने हाल ही में मुंबई में यात्रा की थी, वहाँ मैंने एक दुकान में खासतौर पर ताजे नारंगी और संतरे खरीदे थे, वो भी काफी महंगे। अगर हमारे पास पर्याप्त तेल उपलब्ध होता, तो उसमें भी कमीशन न मिलने से दुकानों को तो लाभ ही होगा 🤔, और फिर भारतीय अर्थव्यवस्था में विविधता जुटाने पर कैसा ध्यान देना चाहिए।
 
बात तो ये थोड़ी ही समझ में आ गई, रूसी तेल खरीदने से भारत की स्थिति अच्छी न होगी क्योंकि हमारा बहुत अधिक स्वाधीनता और आत्मनिर्भरता सिद्धांत है, लेकिन ऊर्जा की मांगें ऐसी नहीं होती कि हमे एक ही देश पर निर्भर रहना पड़े।
 
रूसी तेल खरीद से भारत की आर्थिक स्थिति अच्छे हो सकती है 🤔, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। विदेश सचिव ने सही कहा कि ऊर्जा खरीद में हमारा ध्यान कई देशों से नहीं एक देश पर ही रहना चाहिए। भारत को अपनी आर्थिक स्थिति और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ऊर्जा खरीद की रणनीति बनानी चाहिए। इससे हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता बढ़ सकती है 🚀
 
रूसी तेल खरीदने से भारत को अच्छा मौका मिलेगा, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऊर्जा खरीद में हमारा राष्ट्रीय हित जुड़ा रहे। देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल खरीदने की रणनीति बनानी चाहिए। यह एक अच्छा विचार है कि अमेरिका-वेनेजुएला से भी ऊर्जा खरीदा, इससे देश को विविधता मिलेगी और हम अपने ऊर्जा संचालन को स्थिर रख सकेंगे।
 
मुझे लगता है कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए तेल खरीद की रणनीति बनानी चाहिए, लेकिन यह हमेशा एक ही देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इससे हमारी अर्थव्यवस्था में संतुलन बना सकते हैं और तेल की कीमतों पर अधिक प्रभाव डाल सकते हैं।
 
तो तेल की बात आती है तो मुझे लगता है कि हमें अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए, लेकिन विविधता भी बहुत जरूरी है। कुछ देशों से ऊर्जा खरीदने से हमारी स्थिति मजबूत होती जाएगी, तो दूसरी बात यह कि हमें अपने पड़ोसियों और दुनिया भर के देशों से संबंध बनाने चाहिए। भारत को ऊर्जा एक महत्वपूर्ण विकास क्षेत्र है तो हमें इस पर बहुत ज्यादा ध्यान देना चाहिए 🌎
 
रूसी तेल खरीदने से भारत को एक नई ऊर्जा सुरक्षा रणनीति बनानी पड़ेगी। पहले हमारा ध्यान अमेरिका-वेनेजुएला पर था, लेकिन अब रूस भी खिलौना नहीं है, तो फिर क्या होगा? ऊर्जा मांग बढ़ने पर हमें एक दूसरे देशों से बात करनी चाहिए। मुझे लगता है कि सरकार ने सही कदम उठाया है।
 
रूसी तेल खरीदने से भारत की स्थिति कैसे जुड़ी रहेगी, यह पूछने के बाद विदेश सचिव ने बताया कि हमें ऊर्जा खरीद में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखना चाहिए। लेकिन भारत में तेल दोहन करने की स्थिति, हमारे ग्रिड की असुविधा, और ऊर्जा की खपत बढ़ने की समस्याएं, को देखते हुए तो ज्यादा नहीं समझाया जा सकता 🤔

अमेरिका-वेनेजुएला से तेल खरीदने पर भी विदेश सचिव ने कहा, 'हमारी ऊर्जा खरीद की रणनीति किसी एक देश पर आधारित नहीं होगी।' लेकिन क्या हमें अपने संसाधनों और तकनीकी प्रगति को अच्छी तरह से उपयोग करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए? 😊
 
रूसी तेल खरीदने से भारत को कुछ फायदा हो सकता है लेकिन हमें यह ध्यान में रहना चाहिए कि किस स्तर तक हम विदेश से ऊर्जा खरीद रहे हैं और उसकी बजट पर। तेल की खपत बढ़ने से हमारे बजट पर दबाव पड़ सकता है। लेकिन अगर हम सही रणनीति अपनाते हैं और हमें समय पर मूल्य को कम रखा जाए तो हम इसका फायदा उठा सकते हैं।
 
चलो देखो, रूसी तेल खरीदने से भारत की कोई बुराई नहीं होगी, लेकिन हमें यह सोचकर ही ऊर्जा खरीद में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखना चाहिए। ठीक है, अब अमेरिका-वेनेजुएला से तेल खरीदने पर भी विदेश सचिव ने बोला, हमारी ऊर्जा खरीद की रणनीति किसी एक देश पर आधारित नहीं होगी, हम कई देशों से ऊर्जा खरीदते हैं और इस क्षेत्र में विविधता जुटाए रखने पर जोर देंगे। तो फिर हमें रूसी तेल खरीदने से निराश नहीं होना चाहिए, बस यह सोचकर ऊर्जा खरीद की रणनीति बनानी चाहिए। 🤔
 
अगर रूसी तेल खरीदने से भारत की स्थिति अच्छी हो गई है तो फिर भी हमें ऊर्जा की खपत कम करने पर ध्यान देना चाहिए। हमारे पास बहुत सारे छोटे-मोटे खेल हैं जिनसे हम अपने घरों में ऊर्जा की बचत कर सकते हैं।
 
भारत को तेल खरीदने की कोई भी बात समझाने से पहले हमें अपनी खुद की ऊर्जा स्थिति को समझना होगा। जैसे कि हमारे पास प्राकृतिक गैस की भारी मात्रा नहीं है, तो हमें विदेश से ऊर्जा खरीदने पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन यह जरूरी है कि हम अपने राष्ट्रीय हितों को भी ध्यान में रखें।

मुझे लगता है कि सरकार को ऊर्जा से जुड़े विभिन्न देशों से समझौता करने की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें अपनी प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करना चाहिए। तेल खरीदने से भारत की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा, बस यही काम करेगा।
 
तेल खरीदने की बात करें, यह तो एक बड़ा सवाल है... हमारे पास तो बहुत सारे देश हैं जहां से हम ऊर्जा खरीद सकते हैं। लेकिन फिर भी, हमें अपने नशे में ही किसी एक जगह पर भरोसा करने लगते हैं... और इसका मतलब यह है कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा में कमजोरी आ जाती है।
 
रूसी तेल खरीदने से भारत की खजाने को फटा नहीं देगा 🤑 लेकिन विदेश सचिव ने सही कहा, हमारी ऊर्जा खरीद में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखना चाहिए। तेल की कमी होने पर भी हम तेल से नहीं बनते हैं 🌳 तो हमारी ऊर्जा नीति में विविधता लानी ज़रूरी है। रूसी तेल खरीदने से हमें अपनी स्वतंत्रता भी नहीं चलेगी 🚫
 
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