रिपब्लिक डे पर चीफ गेस्ट की कुर्सी कितनी कीमती: पहली बार यूरोपियन यूनियन को न्योता क्यों मिला; क्या है 'मदर ऑफ ऑल डील्स'

भारत ने पाकिस्तान और चीन को भी बतौर चीफ गेस्ट इनवाइट किया है। 1998, 2008, 2016 में फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, रूस के नेताओं को आमंत्रित किया गया।
 
मुझे लगता है कि यह अच्छी सोच वाली नीति है। अगर हमारे पड़ोसी देशों के नेताओं को भारत में आमंत्रित किया जाए तो फिर हमें अपने पड़ोसी प्रति एक अच्छी मानसिकता को दिखाने में सक्षम होते हैं। और अगर फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, रूस जैसे देशों को भारत में आमंत्रित किया गया तो यह हमारी अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। और पाकिस्तान को भी आमंत्रित करना एक अच्छा फैसला है, अगर वे अपने देश के लिए कुछ कर सकते हैं तो फिर भारत को उनका सहयोग मिलना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि भारत की इस तरफ़ में बढ़ती दुनिया की दिशा में यह एक अच्छा संकेत है। लेकिन सोचिए, हमारे पड़ोसी, पाकिस्तान और चीन, उन्हें भी आमंत्रित करना एक अच्छा विचार था। ये तो भारत की सीमाओं तक दूर नहीं हैं। मुझे लगता है कि हमें अपने पड़ोसियों के साथ खुशी और मैत्रीपूर्ण बातचीत करनी चाहिए, न कि ज्यादा अल्पसंख्यक होने पर ताजगी। भारत को अपनी शक्ति और महत्व को दुनिया के सामने दिखाना होगा, लेकिन सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से।
 
ਪਾਕ ਅਤੇ ਚੀਨ ਵਿੱਚ ਭੀ ਗਰम बਜ਼ੁਰਗ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਦੇਖਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਮੈਂ ਸੋਚਿਆ ਹੈ ਕਿ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਲੋਕਪ੍ਰਿਯਤਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੀ ਸੀ, ਅਤੇ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰਨ ਵਾਲੀਆਂ ਮੁੱਲ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਸੀ 🤔

ਫ਼ਰੰਸ, ਬ੍ਰਿਟਨ, ਇੰਡੋਨੈਸ਼ੀਆ, ਅਤੇ ਰੂਸ ਵਾਲੀਆਂ ਮੁੱਲਾਂ ਦਾ ਭਾਰਤ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਸੀ, ਪਰ ਮੈਂ ਯਕੀਨੀ ਹਾਂ ਕਿ ਉਹ ਜਗਤ ਵਿੱਚ ਅਤਿ ਵਧੀਆ ਅਦਬ ਰੱਖਣ ਵਾਲੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੇ ਨੁਕਸਾਨ ਉੱਥੋਂ ਹੀ ਹੋ ਗਏ ਸਨ

ਅੱਜ, ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਲੋਕਪ੍ਰਿਯਤਾ ਦੇ ਪਟਲੇ ਉੱਡਣ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤੀਆਂ ਦੀ ਗ਼ਲਤ ਸੁਝਾਈ ਜ਼ਮੀਨ 'ਤੇ ਪੈ ਗਈ ਹੈ, ਅਤੇ ਫਰਕ ਭਾਵ ਨਿਰਬੰਧ ਆਦਿ ਸਾਰੇ ਵਿਚਾਰ ਜ਼ਮੀਨ 'ਤੇ ਪਈ ਗਈਆਂ ਹਨ
 
चीनी और पाकिस्तानी दोस्तों को भी आमंत्रित किया गया तो तो मुझे खुशी हुई। सोच लीजिए, पहले हम केवल फ्रांस, ब्रिटेन जैसे उन देशों के नेताओं को आमंत्रित करते थे। अब भारत अपनी छाप डाल रहा है और विश्व में अपना प्रभाव बढ़ाने की ओर बढ़ रहा है।
 
ਕੁਝ ਲੋਕ ਸोचतੇ ਹਨ ਕਿ ਜਿਹੜਾ ਵੀ ਦੇਸ਼ ਅਪਣੇ ਚੀਫ ਗੈਸਟ ਇਨਵਿਟੇਡ ਲੈਂਦਾ ਹੈ, ਉਹ ਖਰਬ ਕਮਜ਼ੋਰ ਪਰਵਤਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਨੂੰ ਸਮਝਣ ਲਈ ਥੋੜ੍ਹੇ-ਠੋੜ੍ਹੇ ਕੰਮ ਆਉਣਗੇ। ਪਰ ਅਸੀਂ ਦਿੱਖਾਵੇਂ, ਭਾਰਤ ਨੇ ਚੀਫ ਗੈਸਟ ਇਨਵਿਟੇਡ ਲੈਣ ਲਈ ਹਿੱਸੇ ਦੇ ਬੇਅੰਤ ਪਾਏ ਰਹੇ ਹਨ।
 
ਸੋ ਇਹ ਕੁਝ ਮਾਰੀ ਗੈਲ ਦੇ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ... 😅 ਪਰ ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮੈਂ ਖੁਸ਼ ਹਾਂ ਕਿ ਆਪਣੇ ਵੀ ਨੇਤਾ ਬਾਰੇ ਚੀਜ਼ ਕੋਈ ਦੱਸੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਪਛਾਣ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੰਮਾਂ 'ਤੇ ਆਪਣੀ ਖੁਸ਼ੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲ ਜਾਈਏ... 😊

ਉਹ ਦਿਨ, 1998, 2008, 2016, ਇੰਤਜ਼ਾਮ ਕਰੋ-ਕਰੋ ਕੀ ਆਏ ਸਨ... 😅 ਪਰ ਆਜ ਦੇ ਚੀਫ ਗੈਸਟ ਇਵੈਂਟ 'ਤੇ, ਮੈਂ ਭਾਵੇਂ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਲਿਖਿਆ, ਪਰ ਅਜਿਹੇ ਗੁਰੂਤਵਪੂਰਣ ਚੀਜ਼ 'ਤੇ ਸੋਚਦਾ ਹਾਂ... 🤔
 
भारत जैसी देशों में हमेशा ही बहुत सारे देशों के नेताओं को आमंत्रण भेजना अच्छा लगता है। यह साबित होता है कि हम एक विश्वशांतिपूर्ण और सहयोगी दुनिया में रहना चाहते हैं। 🌎

मुझे लगता है कि अगर कोई भी देश भारत जैसा ही स्थिति बनाना चाहता है, तो उसे अपने नेताओं को भारत के साथ अच्छा संबंध बनाने का प्रयास करना चाहिए। भारत में हमें बहुत सारे देशों के लोग आते रहते हैं और वहां पर हम उनकी आमंत्रणों का जश्न मनाते हैं। 🎉

मुझे लगता है कि अगर हम अपने देश में और भी बेहतर गेस्ट नाइट का आयोजन करें, तो उसे बहुत सारे लोगों का ध्यान आकर्षित करने में सफल होने की संभावना है।
 
बात तो है भारत की बुलंदी! पाकिस्तान और चीन को भी बुलाया गया है, यह अच्छा है, लेकिन क्या है हमारे देश के बाहर से आये मेहमाननवाजों के लिए जगह? फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, रूस जैसे देशों के नेताओं को पहले ही आमंत्रित किया गया था, तो भारत को तो अपना खेल खेलना पड़ा है 🤔

लेकिन फिर से, यह अच्छी बात है कि हमारे देश में विदेशी नेताओं को आमंत्रित किया जा रहा है, इससे हमारे देश की स्थिति और समृद्धि का पता चलता है। चीन को भी बुलाया गया है, तो क्या यह हमें अपने पड़ोसी के साथ अच्छे संबंध बनाने का संदेश देने के लिए है? 🤞
 
यह बहुत अच्छी बात है कि भारत अब एक विश्व नेता बन रहा है, जो दुनिया भर के लोगों को आमंत्रित कर रहा है। 1998, 2008, और 2016 में फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, और रूस के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन अब हमारे देश ने इस पैटर्न को आगे बढ़ाया है। चीन को भी शामिल करना एक अच्छा फैसला है, खासकर जब चीन अपनी आर्थिक और सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है।

यह भारत के लिए एक अच्छा मौका है कि दुनिया भर के नेताओं को अपने साथ बैठने का अवसर मिले। हमें उम्मीद है कि इस सभी विशेषज्ञों के साथ चर्चा करने से हमारे देश को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
 
क्या यह सुनिश्चित है कि भारत की सरकार वास्तव में चीफ गेस्ट इनवाइट देने के लिए पाकिस्तान और चीन को भी आमंत्रित कर रही है? मुझे लगता है कि हमें इसकी पुष्टि करनी चाहिए। 1998, 2008, और 2016 में फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, रूस जैसे देशों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन पाकिस्तान और चीन के मामले में कुछ संदेह है। हमें यह जानने की जरूरत है कि वास्तव में भारत की सरकार ने इन देशों को आमंत्रित करने के लिए क्या विचार किया था। 🤔

मुझे लगता है कि हमें यह जानने की जरूरत है कि पाकिस्तान और चीन को आमंत्रित करने के पीछे की वजह क्या है। क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा है? या फिर क्या वास्तव में भारत की सरकार ने इन देशों के साथ नए संबंध बनाने पर विचार किया था। 🤷‍♂️
 
क्या ये अच्छी मूव है भारत सरकार की, एक बार फिर से दुनिया भर के नेताओं को आमंत्रित करना? 1998, 2008, 2016 में कौन थे वे राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री जिन्हें आमंत्रित किया गया था, और उन्होंने हमारे देश को कैसे प्रभावित किया। मुझे लगता है कि अगर फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया और रूस के नेताओं को भी आमंत्रित किया जाता, तो हमारी अर्थव्यवस्था और तकनीकी मामलों में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। लेकिन अगर पाकिस्तान और चीन को भी आमंत्रित किया जाता, तो यह अच्छा संकेत है कि हम अपने पड़ोसी देशों के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
 
बोलते हैं तो भारत पाकिस्तान और चीन पर भी स्वागत किया है... यह अच्छी बात है, लेकिन क्या वास्तव में पाकिस्तान और चीन ने इन आमंतरणों को ठीक से ठिकाने पर ले रहे हैं? मुझे लगने कुछ ऐसा है जैसे भारत की बाजारों में अच्छे व्यापारिक अवसर ढूंढ रहा हो।
 
भारत में विदेशी मेहमानों की संख्या बढ़ रही है... यह अच्छा है, लेकिन हमारे सामाजिक स्तरों पर ध्यान देने की जरूरत है। पाकिस्तान और चीन जैसे देशों को आमंत्रित करना ठीक है, लेकिन हमें अपने मेहमानों के साथ सहजता बनाए रखने की कोशिश करें। फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, रूस जैसे देशों को आमंत्रित करने से हमारी वास्तविकता में बदलाव आया है। अब पाकिस्तान और चीन भी हमारे मुख्य गेस्ट हैं... यह अच्छा नहीं लग रहा है? हमें अपनी पहचान बनाए रखने की जरूरत है, न कि दूसरों को अपनी जगह पर स्थापित करने की।
 
पाकिस्तान और चीन को भी आमंत्रित कर दिया? यह तो अच्छा है लेकिन मुझे लगता है कि इससे बिलकुल भी फायदा नहीं होगा। जैसे फ्रांस, ब्रिटेन आदि नेताओं को पहले आमंत्रित किया गया था, अब पाकिस्तान और चीन को भी आमंत्रित करना तभी सही है अगर हमारे लिए उनके देशों से कुछ नया और अच्छा आ रहा हो। otherwise यह भी तो फालतू में काम होगा।
 
मैंने पढ़ा है कि भारत ने पाकिस्तान और चीन को भी मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। यह तो बहुत अच्छी बात है, मुझे लगता है कि हम अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छी संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मैंने सोचा कि क्या वास्तव में यह सच है कि 1998, 2008 और 2016 में फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया और रूस के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था? मैंने अपने दोस्त से पूछा, लेकिन उसने नहीं बताया। तो मुझे लगता है कि यह जानकारी कभी नहीं आई होगी।
 
मैंने देखा है कि भारत सरकार कैसे दूसरों की जिंदगी में खुशी लाने की कोशिश करती है। पाकिस्तान और चीन को भी बुलाया गया है, उनकी जिंदगी में खुशियाँ लाने की कोशिश हो रही है। मैं सोचता हूँ कि 1998, 2008, 2016 में फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, रूस के नेताओं को आमंत्रित करने की बात भी बहुत ही अच्छी है। लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने देश की जिंदगी में खुशी लाने की सोचेंगे और साथ ही साथ दूसरों को भी बुलाने की कोशिश करेंगे।

जैसे जब हाल ही में हमने नेपाल के प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया था, वे भी बहुत खुश थे। और अब पाकिस्तान और चीन को बुलाने से उनकी जिंदगी में भी खुशियाँ आएंगी। लेकिन हमें यह सोचेंगे कि दूसरों की जिंदगी में खुशियाँ लाना हमारे देश की जिंदगी को भी अच्छा बनाएगा।
 
बाकी दुनिया क्यों बोलती है ? हमें सिर्फ अपनी जगह पर भेजने की जरूरत नहीं , बल्कि पूरे विश्व में अपना हाथ आजमाना चाहिए . पाकिस्तान और चीन ने भी शामिल होने का फैसला किया है , यह अच्छा संकेत है . हमें अब दिखाना है कि हम वास्तव में एक बेहतरीन मेजबान हैं ।
 
मैंने देखा है कि भारत सरकार ने अब पाकिस्तान और चीन को भी चीफ गेस्ट इनवाइट जैसा सम्मान देना शुरू कर दिया है। मुझे लगता है यह अच्छी बात है, लेकिन एक सवाल है कि क्या हमें पहले से ही पाकिस्तान और चीन को इस तरह से सम्मान देना चाहिए?
1998, 2008, 2016 में फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, रूस जैसे देशों के नेताओं को आमंत्रित करने की बात अच्छी है, लेकिन अब तो पाकिस्तान और चीन भी शामिल हैं।
मुझे लगता है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे देश के नागरिकों की जिंदगी में कोई फायदा नहीं होता है, लेकिन बाहरी देशों के लिए तो कुछ भी बुरा नहीं है।
 
बिल्कुल समझने वाले को यह अच्छी खबर है कि हमारा देश अब भी दुनिया में महत्वपूर्ण गंतव्य बना हुआ है। पाकिस्तान और चीन को भी भारत ने शीर्ष दर्जे की आमंत्रण दी, यह बात सोचकर मुझे खुशी हुई। हमारे देश ने पहले ही कई अन्य देशों के नेताओं को आमंत्रित किया था, जैसे कि फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, और रूस। यह दिखाता है कि हमारी सरकार विश्व में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। साथ ही, यह भारत को एक मजबूत और समृद्ध देश बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत भी है 🇮🇳
 
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