Parliament: 'अगर संसद में चर्चा नहीं हुई, तो विपक्ष को होगा नुकसान', रिजिजू ने कांग्रेस पर साधा निशाना

संसद में विपक्षी सांसदों ने कार्रवाई का दौर शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर हमारी पार्टी की बात नहीं सुनी जाती, तो उसका नुकसान भी होगा। लेकिन सरकार ने कहा है कि वह सदन में कोई विधेयक पारित करने में सक्षम है।

संसदीय कार्य मंत्री ने सांसद राहुल गांधी को मिलने के लिए बहुत शर्तें रखी थीं। उन्होंने कहा है कि अगर हमारी पार्टी की बात नहीं सुनी जाती, तो उसका नुकसान भी होगा। लेकिन सरकार ने कहा है कि वह सदन में कोई विधेयक पारित करने में सक्षम है।

कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल स्पीकर से मिला था। उन्होंने मांग की थी कि राहुल गांधी को दो मिनट अलग से बोलने का मौका मिले। सरकार ने कहा है कि बजट पर बहस के दौरान किसी को अलग से बोलने का मौका क्यों दिया जाए।

इस पल्ला फेंकते हुए, किरेन रिजिजू ने कहा, "अगर हमारी सरकार संसद सही ढंग से चलनी है, तो सभी सांसदों को बोलने का मौका देना होगा।"
 
मुझे लगता है कि लोकसभा में विपक्षी दलों ने सरकार पर बहुत दबाव डाला है। अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो इसका मतलब यह है कि उनकी सरकार अस्थिर हो रही है। 🤔

लेकिन, मुझे लगता है कि अगर सरकार अपने विचारों और योजनाओं को अच्छे से समझ लेती, तो उन्हें किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करना चाहिए। लेकिन, यह देखना जदोजहद है कि सरकार अपने विचारों को कैसे प्रस्तुत करेगी।

मुझे लगता है कि अगर कांग्रेस नेताओं ने अलग से बोलने का मौका लेने की मांग की, तो यह सरकार को एक चुनौती देने की तरह लग रहा है। लेकिन, अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो इसका मतलब यह है कि उनकी सरकार अस्थिर हो रही है। 🤦‍♂️
 
Wow 😮, इस तरह की पल्ला फेंकते हुए किरेन रिजिजू ने बहुत बोला है 🗣️. सरकार को यह सुनना पड़ रहा है कि हमारी सरकार संसद सही ढंग से चलनी है 😊. लेकिन अगर विपक्षी पार्टी में तालमेल होने लगे, तो निर्णय लेने में भी सुधार आएगा 🤔.
 
राजनीति कैसी है 🤷‍♂️, कभी भी विपक्षी नेताओं को सुनने की जोरदार बातचीत करने का मौका नहीं मिलता, लेकिन अगर हमारी सरकार अच्छी तरह से चल रही है तो सभी सांसदों को बोलने का मौका देना चाहिए। संसद में विधेयक पारित करने में सरकार बहुत सक्षम होनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक सहयोग भी जरूरी है। अगर विपक्षी नेताओं की बात नहीं सुनी जाती, तो उनका नुकसान भी होता। 🤔
 
राहुल जी, अगर आपकी बात सुनी नहीं जा रही है तो शायद हम सबकी बातें भी नहीं सुनी जा रही हैं...😕 नागरिकों की आवाज़ क्या कहकर दबाई जा सकती है?
 
🤔 समझ नहीं आता कि अगर उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता, तो क्या फायदा होगा? 🤑 बहुत सारे विषय पर चर्चा करनी चाहिए, न कि एक ही राहुल गांधी पर ध्यान केंद्रित करना। 📺 सरकार द्वारा की गई हर पल्ला को जवाब देने की जरूरत है, न कि उन्हें सिर्फ बोलने का मौका दिया जाए। 💬
 
राजनेताओं को सबसे ज्यादा तुरंत सुनना चाहिए, और अगर उनकी पार्टी की बात नहीं सुनी जाती, तो सरकार को अपने नुकसान भी होने देना चाहिए 🤔। लेकिन सरकार वालों ने कहा है कि वह सदन में कोई विधेयक पारित करने में सक्षम है, तो फिर क्या हुआ ? 🚫

किसी को अलग से बोलने का मौका देना चाहिए, लेकिन बजट पर बहस के दौरान तो यह नहीं कही जा सकती, सरकार ने अपनी बात रखनी है। सरकार वालों को अपने देश को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए, और इससे लोगों को फायदा भी होता है 🌟
 
मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है कि सरकार और विपक्षी सांसदों दोनों एक-दूसरे की बात सुनें। अगर हमारी पार्टी की बात नहीं सुनी जाती, तो उसका नुकसान भी होगा। लेकिन सरकार ने कहा है कि वह सदन में कोई विधेयक पारित करने में सक्षम है। यह बहुत अच्छा है कि कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल स्पीकर से मिला। लेकिन सरकार ने कहा है कि बजट पर बहस के दौरान किसी को अलग से बोलने का मौका क्यों नहीं दिया जाए।
 
नहीं मानूंगा कि राहुल जी को अलग से बोलने का मौका दिया गया, यह तो हमारी सरकार की बड़ी खामी है। अगर सरकार सचमुच संसद सही ढंग से चलना चाहती है, तो राहुल जी को अलग से बोलने का मौका देना चाहिए, नहीं तो यह तो बहस के समय पार्टी की भावनाओं को आंखें डालकर नष्ट कर रही है।
 
राहुल गांधी जी को न्यूनतम समय दिया गया है तो भी विपक्षी सांसदों ने इस पर सवाल उठाया है। सरकार की मंशा यह होनी चाहिए कि पार्टियों के बीच मध्यस्थता और सहयोग बढ़े। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर बहस का दौर ज़्माना निकल जाएगा।
 
मुझे लगेगा कि सरकार ने यह पल्ला फेंककर लोकतंत्र को भी ठेस पहुंचाया है... क्या विधेयकों की बात सुनने में इतना महत्व नहीं है? मुझे लगता है कि अगर सरकार सचमुच सदन में सक्षम है, तो उन्हें अपनी नीतियों को संसदीय कार्य मंत्री तक पहुंचाना चाहिए... लेकिन फिर भी, यह पल्ला फेंकने से लगता है कि विपक्षी सांसदों की बात भी नहीं सुनी जा रही है... 🤔
 
वाह, ये बहुत ही रोचक है! अगर कोई विपक्षी सांसद बोलता है तो क्या नुकसान होगा? इसकी जगह सरकार कह रही है कि सदन में कोई विधेयक पारित करने में सक्षम हैं... लेकिन मुझे लगता है कि अगर किसी को बोलने का मौका नहीं दिया जाता तो बहस भी नहीं होती।
 
क्या लगता है कि विपक्षी दल अपने नेताओं को बोलते समय सरकार के प्रति इतनी भल्कुल चिकनी थी। अगर वह सच में सरकार को कड़ी आलोचना करते तो फिर तो क्यों इतनी मुश्किल स्थिति में पड़ जाते? 😐

मुझे लगता है कि विपक्षी दल को एक बार फिर से अपनी राजनीतिक लालचों से निकलने की जरूरत है। अगर वे सच में सरकार को बदतर बनाने की कोशिश करते तो फिर क्यों सरकार खुश रहती? 😊

कांग्रेस के नेताओं का दावा लगातार बदल रहा है, पहले कहा था कि सरकार को बदतर बनाने की जरूरत नहीं है, अब कह रहे हैं कि सभी सांसदों को बोलने का मौका देना होगा। तो क्या सच में वे अपने नेताओं के लिए जिम्मेदार हैं या फिर? 🤔
 
सरकार का इस पल्ला फेंकना ठीक नहीं था, चाहे वह किसी भी प्रकार का हो। क्या उन्हें यह नहीं पता कि विपक्ष में से कोई भी बोलते हैं तो उनकी सांसदों को नुकसान पहुंचेगा। सरकार को समझना चाहिए कि राजनीति एक खेल है, जिसमें हर दूसरे व्यक्ति की बात सुननी होती है।
 
क्या हुआ, यह देखकर आश्चर्य हुआ कि सदन में इतनी खलल डाल रहे विपक्षी सांसद अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कैसे चुनौती जुड़वा सकते हैं? 🤔

मुझे लगता है कि अगर सरकार और विपक्ष मिलकर दूसरों की बात सुनें तो हमारे देश में बहुत सारी समस्याओं का समाधान निकल आएगा। लेकिन यह तो कहना मुश्किल है कि सरकार कितनी प्रतिबद्ध है? 🤷‍♂️

लेकिन, जब कांग्रेस नेताओं ने स्पीकर से मिलने के लिए बहुत शर्तें रखीं, तो यह देखकर आश्चर्य हुआ कि क्या वे वास्तव में पार्टी की बात सुनना चाहते थे या फिर अपने हितों को आगे बढ़ाना चाहते थे। 🤔

इसलिए, यह तो कहना है कि हमें देखना होगा कि सरकार और विपक्ष मिलकर कैसे संसद की गतिविधियों को बेहतर बनाते हैं। और अगर सरकार अपने दावों को सच्चाई में बदलना चाहती है तो दूसरों की बात सुनना जरूरी है। 💬
 
मेरे लिए यह सुनने में है कि जानवर भी अपने प्रभाव पर ध्यान देते हैं और चीजों की समझ में आते हैं तो सरकार को बहस करते समय सभी सांसदों को बोलने का मौका देना चाहिए, यह तो एक अच्छा विचार है 🐒

लेकिन अगर हमारी सरकार सचमुच ऐसा करने की कोशिश कर रही है तो शायद उनके पास बहस करते समय सभी सांसदों को बोलने का मौका देने की कला नहीं होगी, फिर भी यह अच्छा विचार है 🤔

मुझे लगता है कि अगर हमारी सरकार सचमुच अपने प्रभाव पर ध्यान देती है तो शायद सभी सांसदों को बोलने का मौका देना उनके लिए एक अच्छा विचार होगा, और चीजें इस तरह होने लगेंगी जैसा हमने सोचा था 🌈

लेकिन अगर सरकार सचमुच ऐसा नहीं करने की कोशिश कर रही है तो फिर भी यह अच्छा विचार है कि हम सभी सांसदों को बोलने का मौका दें और उन्हें अपनी बात कहने का मौका दें, यह निश्चित रूप से एक अच्छा विचार होगा 💡
 
बेटा, ये बहुत बड़ा संघर्ष हो रहा है सरकार और विपक्षी दल के बीच... 🤕 मुझे लगता है कि हर किसी को अपना सवाल उठाने का अधिकार होना चाहिए, चाहे वह सरकार या विपक्षी हो। लेकिन देखो, बात यह है कि अगर हमें अपने हितों की रक्षा करनी है, तो हमें सावधानी से चलना होगा। 😔 मुझे लगता है कि सरकार को संसद में विपक्षी दल की बात सुनने के लिए तैयार होना चाहिए, न कि उन्हें निकालकर रखना चाहिए। 👊
 
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