पेरेंटिंग– बेटी का स्कूल में एक लड़के पर क्रश है: क्या 16 साल की उम्र में ये ठीक है, बच्चों से रिलेशनशिप पर कैसे बात करें

बेटी से इस बारे में बातचीत कैसे करें, ताकि वह समझ सके कि उसके दोस्तों को पॉकेट मनी लाना ठीक नहीं है?

पेरेंट्स, यह अच्छी बात है कि आपकी 16 साल की बेटी क्लास 10 में पढ़ती है। वहाँ उसे खुद अपनी बातें सुनने और समझाने का महत्व थोड़ा ज्यादा महसूस होना चाहिए। जब बच्चा अपने दोस्तों को पॉकेट मनी लाते हुए देखता है, तो तुलना करना स्वाभाविक है। ऐसे में उसे डांटें नहीं, बल्कि समझाएं कि हर परिवार के नियम, जरूरतें और आर्थिक स्थिति अलग होती हैं।

यह कहानी हमें बताती है कि 10 साल का बेटा पॉकेट मनी मांगता है, क्योंकि उसके दोस्तों को मिलती है।
 
मुझे याद है जब मैं छोटा था, तो मेरे दोस्त पॉकेट मनी लेकर आये थे, और मैं उनका खिलाड़ी, खुश, चुपचाप रह गया। लेकिन एक दिन मेरी माँ ने मुझसे बात की कि फिर भी जो दूसरों से पैसे लेकर आया है, वह अपने पैसे खरीदारी करने जा रहा है। और मैंने कहा माँ, अगर मेरा दोस्त मुझसे पैसे लेता है तो वह खुश रहेगा, लेकिन मैं उसके साथ बैठकर सीखता हूँ।

मैंने उस दिन सोचा कि फिर भी मुझे अपने दोस्तों से पैसे मिलेंगे, और मैं उनसे सीखूंगा। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई, मुझे समझ आया कि हर किसी की आर्थिक स्थिति, परिवार के नियम, सब अलग होते हैं।
 
बेटियों को खुद सीखने दो, उनकी समझ बढ़ जाएगी। अगर बच्चा अपने दोस्तों को पॉकेट मनी लाने वाला देखता है, तो उसे समझाएं कि हर परिवार का आर्थिक स्थिति अलग होती है। बेचारा भाई किसी भी मामले में अपने दोस्तों की जरूरतें नहीं जानता।
 
मुझे लगता है की हमें अपने बच्चों को यह समझाना चाहिए की पॉकेट मनी मांगने से उनके दोस्तों के साथ उनकी खासतय परहेज बन जाती है। मेरे भाई की बेटी क्लास 10 में पढ़ती थी, उसे हमेशा अपने पैसे और उसके दोस्तों के पैसे की तुलना करने का शौक था। लेकिन जब वह बड़ी हुई तो उसने मुझसे बताया कि अगर हमें नियम बनाने हैं तो हमारे बच्चों को पता चलेगा की उनके दोस्तों से पैसे लेना ठीक नहीं है।
 
अरे, यह तो बहुत ही जरूरी बात है। पॉकेट मनी लेने से बच्चों को गलत समझौता करना पड़ता है और वे जिम्मेदार नहीं महसूस करते। हमें अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि हर परिवार की आर्थिक स्थिति अलग होती है, इसलिए उन्हें हमेशा बातचीत करके समझना चाहिए। जैसे कि मैंने अपनी बहन के साथ भी ऐसी स्थिति देखी है जब वह अपने दोस्तों से पॉकेट मनी लेती थी, तो उसने मुझसे कहा कि उसे नहीं पता था कि उसके परिवार की स्थिति और भी गंभीर है।
 
मुझे लगता है कि पिताजी बहुत सहानुभूतिपूर्ण हैं... उनकी बेटी को समझाने की तरीका तो बिल्कुल सही है... हमेशा बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि हर परिवार में आर्थिक स्थिति, नियम और जरूरतें अलग-अलग होती हैं... पॉकेट मनी लेने की बात अच्छी नहीं है, लेकिन इसे समझने की जरूरत है... बच्चों को यह महसूस कराना चाहिए कि उनके दोस्तों में भी परिवार की अलग-अलग स्थितियाँ हो सकती हैं...
 
मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है और हमें अपने बच्चों को समझाने की जरूरत है कि पॉकेट मनी लेना ठीक नहीं है, लेकिन हमें उनकी बात भी सुननी चाहिए। मैंने तो कभी नहीं सोचा था कि मेरी 10वीं क्लास की बेटी ऐसे में डांटी जाएगी, लेकिन अब मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों को समझाने की जरूरत है और उन्हें सिखाने की जरूरत है।
 
ऐसा तो मजेदार है 🤣, लेकिन फिर भी यह एक महत्वपूर्ण बात है । मेरी राय में बच्चे को समझाना चाहिए कि पॉकेट मनी लेना और देना उनके नियंत्रण में नहीं है। उसके परिवार की जरूरतें अलग हैं, तो फिर भी वह अपने दोस्तों को अच्छा व्यवहार करे। यह सब एक शिक्षा का मौका है 👏, जिसमें वह समझ सकता है कि सही और गलत कैसे पहचानें।
 
पॉकेट मनी लेने की बात करने से पहले हमें अपनी बेटियों को समझाना चाहिए कि हर परिवार में कुछ अलग होता है, तो क्यों न उनके दोस्तों के परिवार में भी ऐसा ही हो।
 
पॉकेट मनी लेने वाले बच्चों को समझाने की बातें अच्छी हैं, लेकिन हमें अपनी बेटियों को सिखाना चाहिए कि सच्ची दोस्ती में किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुँचता। जब हम उनकी बातें समझाएँ, तो शायद वे सोचेंगे कि हम उन्हें कम से कम करते हुए कह रहे हैं। 🤔
 
बेटियों को ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं है, बस उन्हें अपने स्वार्थ को पहचानने दें, लेकिन एक बात याद रखनी चाहिए, पॉकेट मनी लेना कभी भी अच्छा नहीं है 🤑 ना तो बच्चों के लिए, ना ही उनके परिवार के लिए। अगर बेटी अपने दोस्तों से पॉकेट मनी मांगती है, तो उसे समझाने की जरूरत नहीं है कि यह ठीक नहीं है, बल्कि उसे सोचाने की जरूरत है कि अगर उसका परिवार भी इस तरह की जिंदगी जीता है, तो वह कैसा महसूस करेगा?
 
मुझे लगता है की माता-पिता अपने बच्चों को समझाने की जिम्मेदारी संभालने की बात कर रहे हैं लेकिन मेरा दिल कहीं और है 🤔 तो, पॉकेट मनी लेने की बात करते हुए हमें सोचते रहना चाहिए। कभी-कभी बच्चों को अपने दोस्तों के साथ मजाक में रखा जा सकता है और उन्हें समझाया जा सकता है कि यह तो एक खिलौना है, लेकिन वास्तविकता तो अलग है।
 
पॉकेट मनी लेने की बात चीज़ थोड़ी जटिल है 🤔। मेरी राय में बच्चों को समझाना कि पॉकेट मनी लेना ठीक नहीं है, लेकिन उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि दोस्तों के साथ सहानुभूति रखना और उनकी जरूरतें समझना। यह तो एक अच्छा सबक है 📚
 
मैंने अपनी बेटी के दोस्तों से बातचीत करते समय यही चिंता करते रहते हूँ कि वे समझेंगे या नहीं… उनके माता-पिता भी ऐसा ही सोचते हैं जैसे हमारे पास कोई परिवारिक नियम नहीं है जो हर किसान को मानना पड़ता हूँ। मेरी बेटी क्लास 10 में पढ़ रही है, लेकिन वह अभी भी अपने दोस्तों से पॉकेट मनी लेने वाले बच्चों के साथ खेलती है… मुझे लगता है कि हमें उन्हें समझाना चाहिए कि हर परिवार की आर्थिक स्थिति अलग होती है, और पॉकेट मनी लेना भी एक समस्या है। मैंने अपनी बेटी से कहा है कि जब वह अपने दोस्तों से पॉकेट मनी लेती है, तो उसे समझाना चाहिए कि यह हमारे परिवार के नियम नहीं है और हमें इसके बजाय खुशियाँ माननी चाहिए। 💬
 
मुझे लगता है कि युवाओं को यह समझने में आसानी होती है कि पैसे से जुड़ी बातें ठीक से नहीं चल सकती। उनके दोस्तों से पॉकेट मनी लेना एक अच्छा तरीका नहीं है, लेकिन जब हम उन्हें समझाएं कि पैसे की कमी या जरूरतें अलग-अलग परिवारों में हो सकती हैं, तो वे समझने लगते हैं। मुझे लगता है कि इस दौरान माता-पिताओं को भी अपने बच्चों को सही तरीके से समझाना चाहिए।
 
बेटी की खुशियों को समझना और उसे सावधान करना एक अच्छा विचार है लेकिन पॉकेट मनी की बात करने के सामान्य तरीके से बच्चों को समझाना आसान नहीं है 🤔

कुछ दिनों पहले मैंने देखा था एक फिल्म 'धोनचक्क' में एक ऐसी परिस्थिति जिसमें लड़की अपने दोस्त से पैसे लेने को मजबूर होती है और वह बिल्कुल सही नहीं करती।

लेकिन अगर हमारी बेटियों को समझाएं कि हर परिवार का आर्थिक स्थिति अलग है, तो वे अच्छे निर्णय ले पाएंगी।
 
बिल्कुल सही कहा गया है, मैंने खुद भी अपने बच्चे के साथ ऐसी बातें हुई हैं जब वह अपने दोस्तों से पैसे लेते थे। तो अगर हमारी बेटी भी ऐसा करती है तो समझाएं उसे कि हर परिवार अलग होता है। मेरी राय में ये बात जरूरी है कि हम अपने बच्चों को सही रास्ता दिखाएं।
 
Back
Top