पेरेंटिंग– बेटे को फैमिली ट्रेडिशन्स बहुत बोरिंग लगते हैं: चाहती हूं कि वह परंपराओं से जुड़े, लेकिन क्या उसे फोर्स करना सही होगा?

परंपराओं को जोड़ने का सही तरीका

मेरे पास एक सवाल था, मेरे 15 साल के बेटे परंपराओं से जुड़े, लेकिन वह इन्हें बोरिंग और पुराने जमाने की चीजें कहकर टाल देता है। मैंने उसे समझाया, लेकिन वो कहता है कि उसका इनमें मन नहीं लगता। मैं चाहती हूं कि वह हमारी संस्कृति को जाने–समझे। क्या बच्चों को फोर्स करके फैमिली ट्रेडिशन्स फॉलो कराना सही है?
 
मुझे लगता है कि परंपराओं को समझाने का तरीका भी बहुत जरूरी है। मेरा विचार है कि बच्चों को यह जानने देना चाहिए कि इन परंपराओं को फॉलो करने से उनके समाज और परिवार की मजबूती होती है। लेकिन, यह जरूरी नहीं कि उन्हें फोर्स करके भेजना चाहिए। मुझे लगता है कि बच्चों को अपनी रुचियों को ढूंढने और खुद से जुड़ने देना चाहिए, तभी वे इन परंपराओं को स्वयं समझ सकते हैं और उनका प्यार कर सकते हैं।

मेरा अनुमान है कि मेरे बेटे को भी इसी तरह से समझाया जाना चाहिए। उन्हें यह जानने देना चाहिए कि परंपराएं हमारी पहचान का हिस्सा हैं और वे हमारे परिवार और समाज को मजबूत बनाती हैं। लेकिन, यह जरूरी नहीं कि उन्हें दबाकर भेजना चाहिए। 🤔
 
मुझे लगता है कि बच्चों को परंपराओं से जुड़ने के लिए मजबूर करना सही नहीं है। मेरी बहन ने भी ऐसा ही अनुभव किया था, उसके बेटे उसे खेलने-मेंदेने की चीज़ कहकर ताल देते थे, लेकिन जब वह बड़े हुए, तो उन्होंने अपने पिता की खुशबूरत का स्वाद नहीं लिया। मैंने उसके बेटे को उनके पिता की कुर्सियों पर बैठवाने की कोशिश की, लेकिन वह तो विद्रोह कर देते।

मुझे लगता है कि बच्चों को खुलकर समझाया जाना चाहिए, उनके साथ मिलकर उनकी रुचियों को समझना चाहिए। मेरे बेटे को भी खेलने-मेंदेने की चीज़ पसंद है, लेकिन उसकी दाद-दादी की गीतों से भरपूर लहज़े सुनने में वह रोचक महसूस करता है।
 
मुझे लगा की वाह, परंपराओं को समझना और उनसे जुड़ना बहुत जरूरी है... लेकिन मेरा बेटा ऐसा नहीं कर रहा ... मैंने सोचा की शायद हमारी समाज में बच्चों को परंपराओं का महत्व समझाने की कोशिश करनी चाहिए। तो फिर तो वाह, क्या बच्चों को फोर्स करके परंपराएं फॉलो कराना सही है? मुझे लगता है नहीं... शायद हमें उन्हें समझाने की कोशिश करनी चाहिए कि यह उनकी खुशी और समृद्धि के लिए बहुत जरूरी है।
 
परंपराएं और बच्चों की रुचियाँ अलग-अलग होती हैं 🤔। मुझे लगता है कि हमें अपने बेटों को समझने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन उन्हें फोर्स करके परंपराएं पालन करने की जरूरत नहीं है। शायद हमें उनकी रुचियों और पसंदों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें जुड़ने का मौका देना चाहिए।
 
बेटियों और लड़कों दोनों की ताकत बुराई में है, लेकिन परंपराओं के साथ उसका मन नहीं लगता। मुझे यकीन है कि फोर्स करके उसे जाने-समझाएं, लेकिन बच्चों को यह समझाया जाना चाहिए कि परंपराएं उनकी जिंदगी का हिस्सा बन सकती हैं और उन्हें खुश और सुरक्षित रखती हैं।
 
परंपराओं को जोड़ने का मतलब यह नहीं है कि हमें अपने बेटों की राय को कभी भी मानना चाहिए। पर, उनके विचारों को सुनना और समझना बहुत जरूरी है। बच्चों को हमें सिखाना होता है कि हमारे पिताजी, दादा-दादीजी और माता-माँ ने जो परंपराएं सीखी थीं, वह हमेशा उनके लिए एक संसाधन हैं।
 
परंपराओं में खेलना और उन्हें मज़ेदार बनाना जरूरी है, लेकिन जब बच्चों को फोर्स करके सिखाया जाता है तो वे उसे नफ़रत समझ कर टाल देते हैं। 🤔

मेरा कहना है कि बच्चों को उन परंपराओं में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जिनकी वे पसंद करते हैं और उनकी समझदारी। इससे उन्हें हमारी संस्कृति और परंपराओं को जाने-समझने में मदद मिलेगी।

उसके बाद, बच्चों को उन परंपराओं में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जिनमें वे खुश रहते हैं। इससे उन्हें हमारी संस्कृति और परंपराओं के महत्व को समझने में मदद मिलेगी।

और सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों को अपने विचारों और पसंद को व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए। इससे उन्हें हमारी संस्कृति और परंपराओं को जाने-समझने में मदद मिलेगी।
 
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