‘पंडित हो मंदिर में घंटी बजाओ, भीख मांगो‘: UGC के नए नियमों पर रोक से सवर्ण खुश, SC/ST/OBC बोले- भेदभाव रुकना शोषण कैसे

UGC के नए नियमों पर रोक लगने से SC/ST और OBC स्टूडेंट्स की हालत बिगड़ गई है, जिन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

नए नियम में EWS, दिव्यांग और महिलाओं को एक ही इक्विटी सेल में शामिल कर लिया गया है। लिंग के आधार पर और जाति के आधार पर भेदभाव अलग-अलग चीजें हैं।

बदलाव से SC/ST और OBC स्टूडेंट्स की स्थिति बिगड़ गई है क्योंकि वे अब एक ही इक्विटी सेल में शामिल नहीं हो पाते।
 
नए नियमों से बचने के लिए हमारे समाज के सबसे कमजोर वर्ग, जैसे कि SC/ST और OBC स्टूडेंट्स, बहुत परेशान हुए हैं 🤕। उनकी पढ़ाई में भी बाधा आ गई है, ताकि वे अपने दाखिला फॉर्म भरने के लिए पासपोर्ट और आईडी कार्ड बनाने के लिए बाहर निकलना पड़ें। यह बहुत बड़ा बोझ है 🤯

जाति और लिंग के आधार पर अलग-अलग सुविधाएं देने से हमें समानता की दिशा में कदम बढ़ना चाहिए। SC/ST और OBC स्टूडेंट्स को भी अपने अधिकारों का लाभ उठाने का मौका मिलना चाहिए, न कि उनके पासपोर्ट और आईडी कार्ड जैसे छोटे-छोटे बाधाओं से।
 
मुझे लगता है कि यह बदलाव बहुत बड़ा गलतफहमी का कारण बनेगा। EWS, दिव्यांग और महिलाओं को एक इक्विटी सेल में शामिल करने से उनकी जरूरतों को समझने में समस्या आ सकती है।

मैं सोचता हूँ कि हमें अलग-अलग समूहों की जरूरतों को समझने और उनके लिए अलग-अलग समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। SC/ST और OBC स्टूडेंट्स के लिए अलग-अलग इक्विटी सेल बनाने से उनकी समस्याओं को हल करने में मदद मिल सकती है।

🤔 diagram:
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| SC/ST/OBC |
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| एक अलग स्थान |
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| EWS, दिव्यांग और महिला |
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| एक अलग स्थान |
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नया नियम तो हुआ, लेकिन समझ नहीं आ रही की इसका फायदा कौन से लोगों को मिलेगा। SC/ST और OBC स्टूडेंट्स को अपनी एक अलग इक्विटी सेल मिलती थी, अब यह वैसे ही खत्म हो गई है। जाति और लिंग का अंतर तो दूर नहीं हुआ। उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है, बस इतना कहकर पर्याप्त नहीं। हमें सुनिश्चित करने की जरूरत है कि युवाओं को उनके हक में लाया जाए।

😕👎
 
जानिए, ये नियम तो कैसे बदल गए? पहले SC/ST और OBC स्टूडेंट्स अलग-अलग इक्विटी सेलों में आते थे, लेकिन अब सभी एक ही इक्विटी सेल में आने लगे। इससे उनका चयन प्रक्रिया बिगड़ गई है, जिससे भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

मुझे लगता है कि ये बदलाव अच्छा नहीं था, क्योंकि SC/ST और OBC स्टूडेंट्स को अलग-अलग जरूरतें होती हैं और उन्हें अलग-अलग समाधान की जरूरत है। अब जब सभी एक ही इक्विटी सेल में आते हैं, तो उनकी जरूरतों को ध्यान में नहीं रखा गया है।

कुछ लोग कहते हैं कि यह बदलाव इक्विटी बढ़ाने के लिए था, लेकिन मुझे लगता है कि यह बदलाव वास्तव में उनकी जरूरतों को ध्यान में नहीं रखा गया है।
 
😕 ये तो बहुत चिंताजनक है, जब तक बदलाव न हो, तब SC/ST और OBC स्टूडेंट्स की जगह बुरा होने लगी है 😔। उनकी हालत अब भी बहुत मुश्किल है। नए नियम में ईडब्ल्यूएस, दिव्यांग और महिलाओं को एक ही इक्विटी सेल में शामिल करना अच्छा था, लेकिन जाति आधारित भेदभाव अलग-अलग चीजें हैं। 🤔
 
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