‘पंडित हो मंदिर में घंटी बजाओ, भीख मांगो‘: UGC के नए नियमों पर रोक से सवर्ण खुश, SC/ST/OBC बोले- भेदभाव रुकना शोषण कैसे

UGC ने नए नियमों में एक नया सिर्फ 'जातिगत इक्विटी' कमेटी बनाने की बात कही थी। यह कमेटी उस सामाजिक और आर्थिक वंचित वर्ग को पहचानने के लिए होगी जिसे UGC नियम में शामिल नहीं किया गया।
 
ज़रूर, इस नई योजना के बारे में मुझे लगने लगा कि यह बहुत फ़ायदेमंद हो सकती है। जातिगत इक्विटी कमेटी का उद्देश्य वास्तव में उन लोगों को सुनना और उनकी बात समझना है जो हमारे समाज में अक्सर भूलकर छोड़े जाते हैं। इससे हमारे शिक्षा प्रणाली में भी बदलाव आ सकता है ताकि हमारे सभी बच्चों को समान अवसर मिल सके। यह एक अच्छी पहल होगी अगर इसे सही तरीके से लागू किया जाए।
 
नये नियमों में जातिगत इक्विटी कमेटी बनाने की बात तो है लेकिन क्या यह कमेटी वास्तव में समाज की वंचितता को दूर करने के लिए काम करेगी या फिर बस एक नई स्टेज पर वंचित वर्गों को खड़ा करेंगे।

मेरा कहना है कि अगर हमारे पास जाति और आर्थिक वंचितता के मुद्दों का समाधान करने के लिए एक अच्छी प्लान बनेगा तो फिर तो यह कमेटी बहुत फायदेमंद होगी। लेकिन अगर बस हमारे पास नाम बदलने की बात कहेंगे और वास्तविक में कुछ नहीं करेंगे तो इससे कोई फायदा नहीं होगा।

कमेटी को तो साफ साफ बताना चाहिए कि यह कौन-कौन से वर्गों को समझने के लिए बनाई गई है और हमारे पास इन्हें कैसे समाप्त करने का रास्ता है। अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर इसमें भी कोई वास्तविक परिवर्तन नहीं होगा।
 
नये नियमों में 'जातिगत इक्विटी' कमेटी बनाने की बात सुनकर मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा कदम है। हमारे देश में जिन लोगों को समाज और अर्थव्यवस्था में वंचित माना जाता है, उन्हें पहचानने और उनकी जरूरतों को समझने के लिए यह कमेटी बहुत महत्वपूर्ण है। हमें अपने देश की एकता और समावेशन की बात को ध्यान में रखते हुए, ये कमेटी निश्चित रूप से हमारे विकास में मदद करेगी।
 
अरे, ये नई नियम बिल्कुल सही नहीं होंगे। तो तुमने सोचा है कि हमारे देश के पास किसी भी तरह का आर्थिक वंचित वर्ग नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि ये सच नहीं। मैंने अपने गांव में वो लोगों को देखा है जो शायद बachelors से परीक्षाएं पास करने के लिए हर दिन 5-6 घंटे तक पढ़ते रहते हैं, और फिर भी उन्हें नौकरी में कोई रिकार्ड नहीं है। ये तो हमारा एक बड़ा समस्या है... 🤔
 
नया नियम तो ही ठीक है, लेकिन जातिगत इक्विटी कमेटी बनाने से पहले क्या सोचा जाए? हमारे देश में कई छोटे-छोटे और बड़े सामाजिक और आर्थिक वंचित वर्ग हैं, उन्हें पहचानने के लिए एक समन्वयक कमेटी की जरूरत है, तभी हम समझ सकते हैं कि यह जातिगत इक्विटी कमेटी क्या करेगी। और सोचते हैं कि युवाओं को बेहतर शिक्षा के माध्यम से वंचित निकलने दिया गया है तो फिर हमारे देश में युवाओं की प्रगति कैसे करेगी?
 
अरे दोस्त, यह तो बहुत ही रोचक बात है! 😮 मुझे लगता है कि UGC ने यह कमेटी बनाने से पहले सोचा होगा कि हमारे देश का शिक्षा प्रणाली ठीक से कैसे चलेगी।

मैं तो सोचता हूँ कि जातिगत इक्विटी की बात में कुछ और भी है। हमारे देश में कई जगह ऐसे लोग रहते हैं जिनकी शिक्षा में कोई खास समस्या नहीं है, लेकिन फिर भी उनके पास अच्छी नौकरी या अच्छा स्थान नहीं है। तो मुझे लगता है कि इस कमेटी को हमारे देश के हर एक हिस्से में जाकर उन लोगों को पहचानने की जरूरत है।

मैं सोचता हूँ, क्या अगर हमारे देश में और भी ऐसे निजी विश्वविद्यालय बनेंगे, तो इससे शिक्षा प्रणाली पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
 
मुझे लगता है कि ये नया नियम बिल्कुल अच्छा हो सकता है, परंतु बहुत देर से विकसित होना चाहिए। जातिगत इक्विटी कमेटी बनाने से उन लोगों को मौका मिलने की संभावना अधिक होगी जिन्हें अब तक नियम में शामिल नहीं किया गया।

मैं सोचता हूँ कि इस कमेटी को ऐसे सदस्यों की भर्ती करनी चाहिए जो वास्तविक समस्याओं को समझें। इससे उन्हें समस्याओं का समाधान निकालने में मदद मिलेगी। और अगर हमारे देश में सामाजिक और आर्थिक वंचित वर्ग में बदलाव लाना चाहते हैं, तो यह कमेटी सबसे अच्छा तरीका होगा।
 
yeh to kuch achha hai ki UGC ne jatigati ekvitya komiti banane ka plan tay kar diya hai. Maine socha tha ki ye komiti aasani se ban gayi hogi kyunki ise samajik aur arthik vanchit varg ko pehchana ja sakta hai. maine socha ki ye ek achha prayaas hai jo UGC ke nai nirdeshon ka pradarshan karta hai.

lekin, maine socha ki is komiti mein kya mahatvpaurn logon ka chayan hota hai? ya phir uss komiti mein samajik aur arthik vanchit varg ka prateek banne wale logon ko pehchanakar uski baat karne ka mauka milta hai? maine socha ki ye to ek achha safalta ki kahaani ban sakta hai agar ismein sahi log chunke gaye aur unhone sahi nitiyan banaayi.
 
नई सिर्फ जातिगत इक्विटी कमेटी बनाने की बात में लगता है कि ये कमेटी तो कोई और 'सांप की झड़ी' होगी, क्योंकि देखा गया है कि जब कभी ऐसी कमेटी बनती है, तो सब से पहले ही लोग उसके नाम पर हाथ फेंक देते हैं और कह देते हैं कि 'वाह, दो बच्चे एक ही माता से?'. लेकिन मुझे लगता है कि यह कमेटी जरूरी है, खासकर जब UGC नियमों में वंचित वर्ग को शामिल नहीं किया गया है। तो आइए देखें, क्या इस कमेटी में शामिल लोग सोचते हैं कि कैसे हमारे देश के आर्थिक और सामाजिक वंचित वर्ग को सम्मान दिया जाए।
 
मुझे लगता है कि ये अच्छा विचार है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस कमेटी को गहराई से समझने और उस पर चर्चा करने के लिए समय दिया जाए। जातिगत इक्विटी की बात होने पर मुझे यह सवाल आता है कि हमारा यह समाज एकमात्र 'वंचित वर्ग' नहीं है, न ही सबकुछ ठीक से समान है।

क्या ये कमेटी सिर्फ आर्थिक वंचना को देखेगी या सामाजिक रूप से, भावनात्मक और मानसिक स्तर पर भी जाएगी? क्या हमारे पास ऐसे लोग हैं जिनके पास अच्छे शैक्षिक अवसर नहीं हैं लेकिन उनके मन को खुश रखने के लिए पर्याप्त काम है?
 
मुझे लगता है कि इस बारे में कुछ सोच-समझकर करना चाहिए। 'जातिगत इक्विटी' कमेटी बनाने की बात तो अच्छी है, लेकिन इसके पीछे क्या विचार हैं? हमारा शिक्षा प्रणाली इतनी जटिल हो गई है कि अब हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को भी समान अवसर मिलें। लेकिन कमेटी बनाने से पहले हमें पूछना चाहिए कि ये कमेटी कैसे कार्य करेगी और इसके निर्देशित क्या हैं। तो मुझे लगता है कि थोड़ा सोच-समझकर इस पर आगे बढ़ना चाहिए।
 
नए नियमों में जातिगत इक्विटी कमेटी बनाने की बात सुनकर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ। मैं समझता हूँ कि सरकार सामाजिक वंचितता को दूर करने के लिए यह एक अच्छा कदम हो सकता है। लेकिन, मुझे लगता है कि यह कमेटी कितनी सक्षम और प्रभावी होगी, इसका समय होगा। हमें उम्मीद रखनी चाहिए कि इस कमेटी से वंचित वर्गों को समान अवसर मिलेंगे और उनकी आवाज़ सुनी जाएगी।
 
नियमों में एक नई कमेटी बनाने से पहले हमें सोचें कि यह कमेटी क्या करेगी, यह तय करना होगा। जातिगत इक्विटी कमेटी नाम सुनकर लगता है कि यह कमेटी पूरी तरह से आर्थिक वंचित वर्ग को ध्यान में रखेगी। लेकिन हमें यह भी सोचना होगा कि कौन से लोग इस कमेटी में शामिल होंगे, उनकी जरूरतें और समस्याएं क्या हैं?
 
मुझे ये तो अच्छी बात लगती है कि UGC ने ऐसी कमेटी बनाने की प्लान कर रही है। मैं जानता हूं कि कुछ छात्रों और विश्वविद्यालयों को यही चिंता होती है कि कोई भी समूह बेहतर नहीं है दूसरे। लेकिन अगर हमारे पास ऐसी कमेटी बन जाए जिसे जाति, धर्म, वर्ग आदि में विभाजन न हो, तो यह बहुत अच्छा होगा।

मुझे लगता है कि ये कमेटी हमें सोचती रहेगी कि शिक्षा में समानता और सामाजिक समरसता कैसे बनाई जाए। इसमें देश भर के विभिन्न प्रकार के छात्रों और विश्वविद्यालयों को शामिल करने की जरूरत होगी। अगर हम सब एक ही में खड़े होकर, सोचते रहते हैं तो शायद हम जल्द ही अपने देश को बेहतर बना पाएंगे।
 
यह तो बहुत अच्छी बात है! 🙌 UGC ने अब वास्तव में सामाजिक और आर्थिक वंचित वर्गों की ओर दिशा दिखाई है। जातिगत इक्विटी कमेटी बनाने से हमारे देश में शिक्षा प्रणाली में समानता और न्याय की बहुत जरूरत है, तो अब यह तय हुआ। इससे छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों को भी मदद मिलेगी, जिन्हें बिग संचालन में जगह नहीं मिल पाई थी। 🚀
 
नई योजना में जातिगत इक्विटी कमेटी बनाने की बात हुई। लगता है यह बहुत सारे लोगों को अच्छा लगेगी, पर यह सोचिए कि हमारे देश में इतने भेदभाव के कारण यह कमेटी तो बस एक चित्रकला बन जाएगी। जितने भी वंचित वर्ग हैं उनकी आवाज़ सुनने का ख्याल नहीं कर रही है। अगर वास्तव में हमारी सरकार इन लोगों के लिए कुछ करना चाहती है तो उन्हें अपने आप से नहीं, पार्टियों या समूहों के नाम पर छुपाया जाना नहीं चाहिए।
 
नई नीति के बारे में सुनकर मुझे लगता है कि यह अच्छा दिशानिर्देश है। जातिगत इक्विटी कमेटी बनाने से हमारे विश्वविद्यालयों में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को भी समावेश में लाया जाएगा। इससे उन्हें अपने करियर के अवसरों के पास आने में मदद मिलेगी। लेकिन हमें यह ध्यान रखना होगा कि इस कमेटी में सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को ही शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें उनके योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर भी चुना जाएगा। 🤔
 
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