ओवैसी के ‘हिजाब वाली PM’ के बीच राहुल गांधी का पुराना बयान वायरल, देश के सबसे बड़े सवाल पर जो कहा… सुनकर चौंक जाएंगे!

राहुल गांधी ने 16 साल पहले 'हिजाब वाली PM' पर बयान दिया था, जिसे अब उनके ओवैसी के हालिया बयान के बाद फिर से सामने लाया गया है। राहुल गांधी ने उस समय अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा से पूछा था, 'भारत को पहला मुस्लिम प्रधानमंत्री कब मिलेगा।' इस पर उन्होंने कहा, 'इस सवाल का उत्तर है तय करने के लिए हमें देश की भलाई को सबसे ऊपर रखना चाहिए।'

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया, 'यह सवाल तब पूछा जाएगा जब उस व्यक्ति को यह याद होगा कि वह देश के लिए क्या कर सकता है।' उनके इस बयान में एक महत्वपूर्ण बात कही गई थी, जिस पर अब ओवैसी का हालिया बयान सामने आया है।
 
राहुल गांधी के उस बयान को फिर से लेकर, यह देखकर हैरान हूं कि कई लोग इसे तोड़फोड़ में डालते हैं। उनका सवाल था भारत को पहला मुस्लिम प्रधानमंत्री कब मिलेगा, लेकिन उन्होंने सही कहा, यह सवाल तब पूछा जाएगा जब हमारे देश के नेताओं को अपने देश की भलाई को सबसे ऊपर रखने की जरूरत होती है।

ओवैसी का बयान सुनकर लगता है कि लोग उस समय के राहुल गांधी के बयान को समझने में विफल रहे हैं। यह सवाल इसलिए पूछा गया था ताकि हम अपने देश के नेताओं को उनकी क्षमताओं पर लेकर, उनकी योग्यताओं पर लेकर नहीं, उनकी धर्म पर लेकर पूछें कि वे क्या कर सकते हैं।
 
यह बयान तो 16 साल पहले दिया गया था, लेकिन लगता है कि कुछ लोग अभी भी इसे ध्यान में नहीं रख रहे हैं। राहुल गांधी ने वास्तव में एक महत्वपूर्ण बात कही थी, जो आज भी बहुत जरूरी है। देश की भलाई सबसे ऊपर रखना हमेशा सही निर्णय लेने की शुरुआत करता है। ओवैसी जी का बयान तो कुछ समझ नहीं आ रहा, लगता है कि वह गलत संदर्भ में बोल रहे थे।
 
राहुल गांधी के बयान को फिर से लेकर आ रहा है तो मुझे लगता है कि यह उनके समय के मूड की बात कर रहा है। वो समय था जब हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन अब यह सवाल पुनः उठने पर मुझे लगता है कि हमें इस पर खुद पर विचार करना चाहिए। क्या हम वास्तव में अपने देश को पहली बार मुस्लिम PM बनाने के लिए तैयार हैं?
 
राहुल गांधी जी के उस पुराने बयान को देखकर मुझे लगता है कि वे ने समय में बदलाव की जरूरत महसूस की थी। आजकल जब भारत एक बहुसांस्कृतिक और बहुलवेशी देश बन चुका है, तो ऐसे बयान सुनने में थोड़ा पुराने लगते हैं। लेकिन फिर भी, राहुल गांधी जी का बयान एक महत्वपूर्ण बात कहता है - हमारे देश में शिक्षा और विचारों को बहाल करने की जरूरत है। 🤔
 
ओवैसी का यह बयान बहुत ही गंभीर है, लेकिन तय कर दें कि वह कह रहे हैं कि भारत में पहली बार किस तरह का नेता बनेगा, और इस पर उनके बयान से कितनी गलतफहमी फैलेगी। राहुल गांधी का बयान बहुत ही समझदार था, वह तो बस देश की भलाई पर ध्यान दे रहे थे, न कि किसी व्यक्तिगत कारण से।
 
मुझे लगता है कि यह सब तो बहुत भूलकर चली जा रही है... मैंने 8वीं class में पढ़ाया था, उस समय हमने एक बार 'भारत की PM कौन बनेगी?' जैसा सवाल सोचा था। हमने तो फिर से सोचा था कि यह सवाल किसे पूछना चाहिए और कैसे... और अब राहुल गांधी जी ने एक बार फिर से ऐसा ही सवाल उठाया है। मुझे लगता है कि हमें अपने देश को लेकर कुछ और सोचना चाहिए, शिक्षा का बहुत महत्व है, अगर हम अच्छी शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं तो फिर सब कुछ आसान हो जाता है... 💡
 
राहुल गांधी ने 16 साल पहले तो वह सवाल पूछा था, लेकिन उस समय बहुत सारे लोगों ने उनके द्वारा उठाए गए सवाल पर राय नहीं दी। लेकिन अब जब ओवैसी का बयान हुआ है, तो यह सवाल फिर से सामने आया है। मुझे लगता है कि जीवन में हमेशा नये सवाल पूछने और उनके उत्तरों पर विचार करने की जरूरत होती है। अगर हम देश की भलाई को सबसे ऊपर रखेंगे, तो शायद हम उस व्यक्ति को देख सकेंगे जो देश के लिए कुछ ऐसा कर सकता है जिससे हमारा देश और आगे बढ़े।
 
ओवैसी का बयान देखकर मुझे बहुत निराशा हुई है 🤕। राहुल गांधी जी का 16 साल पहले उस छात्रा से पूछे गए सवाल अभी भी महत्वपूर्ण है। यह सवाल हमें देश की भलाई को सबसे ऊपर रखने की जरूरत को दर्शाता है, न कि किसी व्यक्तिगत लोग के बारे में। ओवैसी जी का बयान सुनने पर लगता है कि हम अभी भी अपने देश की भलाई को सबसे ऊपर नहीं रख पा रहे हैं। 🤔
 
राहुल गांधी के उस बयान को देखकर मुझे याद आता है जब हमारे देश में ऐसा सवाल कभी नहीं उठाया गया था। वाकई तो यह सवाल कितना निर्णायक और भेदभावपूर्ण है। राहुल गांधी ने उस समय सही कहा, जिस पल में वह बोले, हमें सबसे पहले देश की भलाई को सोचना चाहिए। लेकिन आज जब ओवैसी जी ने ऐसा बयान दिया है, तो यह सवाल फिर से ताज़ा हो गया है। मुझे लगता है कि अगर हम इसे एक सवाल के रूप में नहीं देखते, बल्कि इसे एक शिक्षा के रूप में देखते हैं तो यह बहुत अच्छा होगा।
 
राहुल गांधी जी के उस बयान को फिर से सुनने पर मुझे लगता है कि वह बिल्कुल सही कह रहे थे। लेकिन, फिर मैंने सोचा कि शायद वह गलत भी कह रहे थे, क्योंकि ओवैसी जी का बयान देखकर लगता है कि उन्हें यह सवाल पूछना चाहिए। क्या राहुल गांधी जी सही थे या नहीं? मुझे नहीं पता। लेकिन, ओवैसी जी का बयान सुनकर लगता है कि उन्हें यह सवाल पूछना चाहिए।
 
मैंने कभी नहीं सोचा था कि राहुल गांधी का 16 साल पहला बयान अब इतना मायनेदार हो गया है 🤔। मुझे लगता है कि उनका यह बयान तब अच्छा था जब उस समय उन्होंने अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता थी। लेकिन अब, जब ओवैसी ने ऐसा बयान दिया है, तो मुझे लगता है कि यह भी एक महत्वपूर्ण बात कह रहा है। शायद इस बारे में हमें और चर्चा करनी चाहिए कि क्या हमारे प्रधानमंत्री का धर्म उनकी सरकार को निर्धारित करता है या नहीं 🤷‍♂️
 
मैं समझ नहीं पाया, जब तक कि ओवैसी ने ऐसा बयान नहीं दिया। अगर राहुल गांधी ने 16 साल पहले ऐसा कहा था, तो फिर क्यों अब यह फिर से सामने आया है? मुझे लगता है कि दोनों के बयान काफी अलग हैं। राहुल गांधी का बयान तब था जब वह अभी तक एक प्रधानमंत्री नहीं बने थे, और अब ओवैसी ने ऐसा बयान दिया है। मुझे लगता है कि यह दोनों के विचारों को एक साथ लाने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह एक अलग दिशा में जाने का प्रयास है।
 
बोलते हुए तो राहुल गांधी बहुत अच्छा कह रहे थे, लेकिन सोचते हुए तो लगता है कि उनका यह बयान अब एक पुराना मुद्दा बन गया है। वास्तव में उन्होंने देश की भलाई को सबसे ऊपर रखने की बात कही, लेकिन अब यह सवाल उठता है कि क्या हमें अपने देश के नेताओं को पहले ही उनकी व्यक्तिगत राजनीति से मुक्त कर देना चाहिए। 🤔
 
राहुल गांधी ने तो बस यही कहा था कि भारत को पहला मुस्लिम प्रधानमंत्री कब मिलेगा, लेकिन फिर तय नहीं किया कि वो कब मिलेगा। ओवैसी का बयान तो एक तरफ है, परंतु राहुल गांधी का बयान दूसरी तरफ है। दोनों के बीच कोई अंतर नहीं है क्या? बस यही सवाल है...

कुछ लोग कहेंगे कि राहुल गांधी ने उस समय एक छात्रा से पूछा था, तो फिर क्यों वो अपने बयान में देश की भलाई को सबसे ऊपर रख रहे हैं। यह सवाल उतना आसान नहीं है जितना ओवैसी ने कहा है।
 
मैंने जो देखा है वो बहुत ही अजीब है… राहुल गांधी का उस समय का बयान तो मुझे लगता है कि अब वो बहुत ही अलग दिशा में चल रहे हैं। क्या उन्होंने कभी सोचा था कि उनके बयान को एक्सप्लेन करने के लिए इतना समय लगेगा? 🤔

मेरे लिए यह सवाल तो बहुत ही गंभीर है और मुझे लगता है कि इस पर कोई आसान जवाब नहीं है। राहुल जी ने उस समय कहा था कि देश की भलाई सबसे ऊपर रखनी चाहिए, लेकिन आज तो यह सवाल फिर से सामने आया है और अब किसी को नहीं पता है कि कैसे इसका जवाब दिया जाए।

मुझे लगता है कि इस सवाल का उत्तर देने के लिए हमें अपने देश की समस्याओं को समझना चाहिए और अपने नेताओं से उम्मीद करनी चाहिए कि वे सच्चाई के प्रति खुले रहें। 💬
 
मैं समझ नहीं पाया कि यह बयान तो कब कितने दिन पहले हुआ था? और यह क्यों फिर से सामने आ रहा है? मेरी बहन ने बेटे को पढ़ाया है कि जब कोई भाषण करता है, तो उसे सोच-विचार करना चाहिए।
 
राहुल गांधी का यह बयान तो बहुत ही सोच-समझकर दिया गया था। और फिर भी लोगों ने उनकी बात पर सवाल उठाया है। मुझे लगता है कि उनका मतलब यह नहीं था कि हमें पहले एक मुस्लिम प्रधानमंत्री चाहिए। यह सिर्फ एक सवाल था जो उन्होंने पूछा था। और इसका जवाब लोगों ने दिया है। अब ओवैसी जी का बयान तो अलग बात है। लेकिन मुझे लगता है कि राहुल गांधी का बयान सिर्फ एक व्यंग्य था, जो उस समय की स्थिति को दिखाया था। और इसके पीछे कुछ अच्छी बातें भी हैं।
 
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