मलेशिया में PM मोदी ने कहा कुछ ऐसा, प्रधानमंत्री इब्राहिम से जयशंकर तक नहीं रोक पाए हंसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेशिया में अपने दौरे के दौरान तमिल भाषा और संस्कृति को बिलकुल भी नहीं समझा। उन्होंने कहा, "तमिल लोगों ने अपने प्रतिभाशाली योगदान से मानवता की सेवा की है।" इस दौरान उन्होंने उपराष्ट्रपति थिरु सीपी राधाकृष्णन, विदेश मंत्री एस जयशंकर, और कई अन्य नेताओं सहित तमिलनाडु से जुड़े सभी वरिष्ठ नेताओं का खास तौर पर उल्लेख नहीं किया।

मोदी ने अपने इस बयान से देश के लोगों में बहुत हंसी फैलाई। कई लोगों ने कहा, "यह क्या थोड़ी जिम्मेदारी नहीं है?" यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा और संस्कृति पर अपने बयान में सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन वह यह कर पाए कि उन्होंने खुद भी हंसी मार ली।
 
मोदी जी को फिक्र करनी चाहिए कि तमिल लोगों ने अपने प्रतिभाशाली योगदान से मानवता की सेवा की है तो उन्हें कम से कम तमिलनाडु विशेषाधिकारों पर बोलकर चुनाव लड़ना चाहिए, नहीं तो यह बयान फेल होने का शायद ही मौका रह गया होगा 😂
 
मोदी जी को तमिल भाषा और संस्कृति को समझने की जरूरत थी, ना? वे तो अपने दौरे में खूब सी बातें किया, लेकिन उन्होंने तमिल लोगों को कुछ नहीं कहा। यह बहुत ही अजीब है… मुझे लगता है कि वही जिम्मेदारी निभाने वाले बनने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वाकई तो ऐसा पूरा नहीं हुआ 🤔😐
 
Wow 😂 मलेशिया में तमिल भाषा और संस्कृति पर मोदी जी के बयान से देश के लोगों में बहुत हंसी फैल गई। यह तो थोड़ी जिम्मेदारी होती, लेकिन मोदी जी ने खुद भी हंसी मार ली। उनका बयान तमिल समुदाय के प्रति संवेदनशीलता दिखाने वाला नहीं लगा।
 
मोदीजी ने मलेशिया में तमिल भाषा और संस्कृति पर बयान दिया, लेकिन उनका मतलब यह था कि वो बिलकुल नहीं समझे, तो फिर ये कैसे कह रहे हैं कि तमिल लोगों ने अपने प्रतिभाशाली योगदान से मानवता की सेवा की? यार, ये बहुत ही अजीब बात है। मुझे लगता है कि सरकार में भी गलतियाँ हो सकती हैं, लेकिन ऐसी गलतियों को लेकर देश के लोगों को हंसी फैलाना न्यायसंगत नहीं है।
 
मोदी का बयान तो सचमुच एक दिलचस्प मामला है... क्या हमें लगता है कि वे अपने बयान में इतनी सावधानी बरतनी चाहिए थीं? लेकिन फिर भी, क्या हम उनके समर्थकों को अपने दृष्टिकोण पर चलने की अनुमति नहीं देते? पार्टी के हिसाब से तो मोदी जी की बात सही है, लेकिन लोगों का डर और असुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है... क्या हमें अपने नेताओं पर उम्मीद कैसे करनी चाहिए?
 
बात तो यह है कि मोदी जी ने तमिल भाषा और संस्कृति पर बोलते समय थोड़ा सावधानी बरतनी चाहिए। देश के विभिन्न वर्गों के लोगों को लगता है कि यह एक आम तौर पर होनी चाहिए, न कि इस तरह के बयान करना जिससे दूसरों में असहमति पैदा होती है।
 
मोदी जी को शायद तमिल समाज का तौर-तरीका नहीं था 🤣, फिर बात करते हैं उनके बयान से, वाकई यह हंसी फैलने का मौका था 😂। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री जी ने अपने बयान में थोड़ा गंभीरता नहीं दिखाई, फिर भी तो तमिल संस्कृति की महत्ता पर उनकी बात सुनने योग्य नहीं है 🤔। शायद वे तो खुद थे नशबंद थे 😴, और उन्हें लगता है कि तमिल भाषा और संस्कृति पर वार्ता करने की जिम्मेदारी दूसरों पर छोड़ देनी चाहिए 💪। लेकिन जब यह तो उन्होंने खुद ही मुस्कराते हुए बयान दिया 🎤, तो शायद उनके साथ में और कोई बात नहीं करनी चाहिए 😅
 
मोदीजी को मलेशिया जा कर तमिल लोगों की बात नहीं समझी तो फिर वो कैसे बोले 🤔? मुझे लगता है कि उन्हें थोड़ा अधिक प्रशिक्षण लेना चाहिए जिस देश में वह जा रहे हैं उसकी संस्कृति को समझने का। तमिल भाषा और संस्कृति बहुत ही समृद्ध है, लेकिन अगर हमारे नेताओं को समझ नहीं आती तो फिर उनकी प्रतिज्ञा कैसे रखी जाए? 🤷‍♂️
 
मोदी जी, तुम्हारे दौरे में तमिल भाषा और संस्कृति पर इतनी अनजानी क्या थी? 🤔👀 तो तुमने खुद ही बोला, "तमिल लोगों ने अपने प्रतिभाशाली योगदान से मानवता की सेवा की है"... तो फिर तुम्हारे दौरे में भी उनसे कोई बात नहीं क्यों की? 🤷‍♂️ यह तो हमारे लोगों को हंसी मारता है...
 
मोदी जी के बयान ने मुझे बहुत ही खेद दिलवाया 🤦‍♂️। तमिल भाषा और संस्कृति को इतनी हल्के में नहीं लिया जा सकता। यहाँ पर हमारी समृद्ध संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नेताओं को अपने बयानों से देश के लोगों का दिल छू लेना चाहिए। मोदी जी को यह सीखनी चाहिए कि हमारी संस्कृति और भाषा को सम्मान करना बहुत जरूरी है। 🙏
 
मोदी जी का बयान सुनकर मुझे हंसी आ गई 🤣। वह तो तमिल लोगों के प्रति बहुत समझदार नहीं थे। उन्होंने तमिल भाषा और संस्कृति को बिलकुल भी नहीं समझा, यह तो है तो बहुत बड़ी गलती 🤦‍♂️। मुझे लगता है कि वह खुद भी हंसी मार लिया 🎉

मेरी सोचते समय, मैं याद करता हूँ जब मैं छोटा था, मेरे दादाजी ने हमें तमिल सिनेमा देखने को कहा था। हमने पहली बार 'कालीनDRU' को देखा था और हम सभी हंसते-हंसते रिसhte थे। वह वो समय था जब मैंने सबसे पहले तमिल सिनेमा देखा था।

अब, जब प्रधानमंत्री जी ने तमिल भाषा और संस्कृति को बिलकुल भी नहीं समझा, तो मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है। हमें ऐसे नेताओं की उम्मीद करनी चाहिए जिन्होंने तमिल लोगों की बात सुनी और उनकी समस्याओं को समझा। 🤝

मुझे लगता है कि मोदी जी ने खुद भी हंसी मार ली है। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि आगे वे तमिल लोगों के प्रति अधिक संवेदनशील होंगे। 🤞
 
मोदी जी का तमिल भाषा और संस्कृति पर बयान बहुत ही दुखद है। क्या उन्हें पता था कि तमिल लोगों ने अपने पूर्वजों की बुद्धिमत्ता और समृद्धि से दुनिया भर में फैलाई हुई है? तमिल साहित्य, शिक्षा, और कला को देखकर मुझे बहुत गर्व होता है। लेकिन जब हमारे प्रधानमंत्री ने इन सभी चीजों पर इतना जोर नहीं दिया, तो यह एक बड़ा संकेत लगता है कि वे तमिल भाषा और संस्कृति के महत्व को समझने में असमर्थ हैं।

मुझे लगता है कि मोदी जी को अपने बयान में थोड़ी जिम्मेदारी बरतनी चाहिए थी। उन्होंने तमिल लोगों के प्रति सम्मान और आदर दिखाने की जरूरत थी, न कि यह कहकर हंसी मारनी कि वे अपनी भाषा और संस्कृति को नहीं समझा।
 
मुझे लगता है कि सरकार को तमिल भाषा और संस्कृति की महत्ता को समझने की जरूरत है, ताकि वे अपने बयानों में सावधानी बरत सकें। अगर प्रधानमंत्री जी ने तमिल लोगों के योगदान पर चर्चा की, तो वह बहुत अच्छा होता। लेकिन खुद भूल जाना और हंसी मार लेना... 🤣

मुझे लगता है कि हमें अपनी सरकार से उम्मीद करनी चाहिए, न कि उनकी गलतियों पर हंसना। अगर हमें पता होता, तो मैं प्रधानमंत्री जी से बात करूँगा और उन्हें समझाऊँगा कि तमिल भाषा और संस्कृति क्यों महत्वपूर्ण हैं। 🙏
 
मोदीजी, तुम्हारा तमिल भाषा और संस्कृति को बिलकुल नहीं समझने का बयान बहुत मजाकिया है 🤣, क्योंकि जब तुम्हारे परिवार के दोस्त हिंदी में बात कर रहे होते हैं तो कुछ ना सुनकर भी समझ लेते हैं। और अब तुम्हारा यह बयान तमिल लोगों में बहुत प्यार नहीं करेगा।
 
मोदी का बोल देखकर तो मुझे लगना है कि वो तमिल लोगों की साहसिकता और समृद्धि को जान नहीं पाये। यह तो जिम्मेदारी है, लेकिन लगता है कि उनकी जिम्मेदारी खुद ही समझने में असमर्थ है। तमिल भाषा और संस्कृति को बिलकुल भी नहीं पहचाना, यह एक बड़ा दुर्भाग्य है। लोगों को तो यही उम्मीद थी कि सरकार की टिप्पणियों में विविधता का सम्मान किया जाए। लेकिन लगता है कि मोदी के लिए यह एक बड़ा मुद्दा नहीं है। 😐
 
मोदी जी का बयान तो मजाक है 🤣, तमिल सांस्कृतिक विरासत पर उनकी बातचीत बहुत कमजोर थी। उन्होंने तमिलनाडु के सभी वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख नहीं किया, जबकि वह अपने बयान में कितनी जिम्मेदारी लेकर आये? 🤔 यही बात तो देश के लोगों ने साफ कर दी हैं और अब वे उनके बयान पर हंस रहे हैं। हमें उम्मीद है कि मोदी जी अपने अगले बयान में ध्यान रखेंगे और तमिल भाषा और संस्कृति को समझेंगे। 👍
 
मोदी को थोड़ा मानसिक स्वास्थ्य चिंता की समस्या है 🤔। तमिल भाषा और संस्कृति को बिलकुल नहीं समझने का अर्थ यह नहीं है कि वह लोगों की जिम्मेदारी नहीं करते। यह मात्र एक गलत बयान था, जिस पर हमें तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
 
मोदी जी को थोड़ा ध्यान देना चाहिए, यार, हमारे देश में इतनी विविधता है कि हमें सबको साथ में नहीं रखना पड़ता। तमिल भाषा और संस्कृति का सम्मान करने की जरूरत है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा देश एक ज्यादातर हिंदू देश है। लेकिन, ये तो बिलकुल सही नहीं है मोदी जी, तमिल लोगों ने अपना योगदान दिया है, और हमें उनका सम्मान करना चाहिए। 🤔
 
मोदी जी को लगता है कि तमिल भाषा और संस्कृति को समझने के लिए कोई चीज नहीं है, और यह सच है कि वे अपने बयानों में कभी-कभी गलतियाँ कर देते हैं... 🤦‍♂️

लेकिन ये सच नहीं है कि उन्होंने तमिल लोगों का उल्लेख करने से रुका है। शायद वे सोच रहे थे कि केवल तमिल भाषा और संस्कृति को ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु राज्य की समस्याओं को हल करने के लिए बात करें।

लेकिन देश के लोगों में यह बयान सुनकर बहुत हंसी फैल गई, और इसका मतलब है कि मोदी जी को अपने बयानों में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। लेकिन मैं समझता हूँ कि वे अपने देश के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, और शायद वे इस बयान से भूल गए हों... 🙄

मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री जी को अपने बयानों में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन मैं उन्हें खुलकर नीतीश कुमार जैसे बनवाने की कोशिश नहीं करूँगा... 😊
 
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