क्या लोकसभा में पीएम मोदी को खतरा था: स्पीकर बिरला ने क्यों टाली उनकी स्पीच; किस 'अप्रत्याशित घटना' का संकेत दिया

😕 यह सब कुछ तो बहुत ही भयानक है ना... जैसे बाजियां में आतंकवादियों के घुसपैठ के दौरान सांसदों और अन्य लोगों की गोलीबारी, ऐसे ही 2023 में दो युवक का भी खतरा बन गया। तो अब कहेंगे कि सदन में शांति कैसे बनाई जाएगी? 🤔

लेकिन तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि संसद में हंगामे के दौरान कई ऐसे लोग भी शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी आवाज उठाते हैं जैसे कि प्रदर्शन और अन्य तरीके। तो हमें उन्हें भी रिसर्च करूंगा 📊
 
मुझे लग रहा है कि भारतीय संसद में ऐसे कई घटनाएं होती रहती हैं जो देश के प्रति निश्चिंता की बात कहती हैं। पहले तो यह आतंकवादी हमले थे, फिर यह घुसपैठ और सदन पर हंगामा। लेकिन मुझे लगता है कि इन सभी घटनाओं में एक बात सार्थक नहीं हो पा रही है। लोगों को जागरूक करने की जरूरत है, ताकि वे ऐसी गलतियां न करें जिससे देश के प्रति खतरा बने।

मुझे लगता है कि हमें संसद में सभी की बात समझनी चाहिए और उन्हें अपनी-अपनी समस्याओं को समझाना चाहिए। ताकि वे सदन में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राय व्यक्त कर सकें।

कोई भी ऐसा काम नहीं है जिसे हम आज़माए बिना लोगों को समझाने की जरूरत न हो।
 
बेटियों को भी ऐसे दृश्य देखना बुरा लगता है 🤕। सदन में घुसपैठ करने वाले लोगों को तुरंत बाहर निकाल लेना चाहिए और उन्हें सावधानियां बरतनी चाहिए। यह देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है 🚨। बच्चों को घर पर ही पढ़ाई करनी चाहिए, स्कूल में घुसपैठ करने की बात नहीं करनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह सब एक बड़ा विज्ञापन है 🤑 सदन पर हंगामा करने वालों को बाहर निकालने की चीजें बहुत मीडिया में आ रही हैं, लेकिन क्या ये सचमुच जनता की समस्याओं का समाधान कर पाएंगी? 🤔 मुझे लगता है कि यह सब एक बड़ा व्यवसाय है, जिसमें सरकार और प्रशासन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
 
🤔 तात्पर्य यह है कि जब हम एक-एक करके ऐसी घटनाओं का अंदाजा लगाने लगते हैं तो दिल खुश नहीं होता 🙅‍♂️, लेकिन संसद में घेरे खट्टे होने पर सबकुछ बदल जाता है और चुनावी नतीजों का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है।

हमें याद रखना होगा कि संविधान का भी हमारे लिए एक खिलाफी नहीं है 🙏, बल्कि यही उसका सबसे बड़ा प्रयोग है, और जब वह खिलाफी बनती है तो वह बदलाव की शुरुआत होती है।

और जैसा कि महान नेता नेहरू जी ने कहा था, "प्रत्येक देश को अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई में एक खास अनुभव होता है"।
 
मुझे लगता है कि सदन में ऐसी घटनाएं न होने चाहिए। लेकिन जब ऐसा होता है, तो हमें समझना चाहिए कि यहां पर कई तरह के विचार हैं और अलग-अलग लोग अलग-अलग राय रखते हैं। मेरे अनुसार, सदन में शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण है और सभी सदस्यों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार मानना चाहिए। लेकिन अगर ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो पुलिस और अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वह इसे नियंत्रित करें। 🤔
 
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