सदानंदन मास्टर ने अपने पहले भाषण के दौरान अपने कृत्रिम पैर से देश वासियों को आश्चर्यकारी चौंकाया था। उन्होंने राज्यसभा में बीजेपी के नामांकित सांसद के रूप में पदभारती ली है, और पहली बार चर्चा में हिस्सा लेने वाले सदानंदन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी 'नैतिक शक्ति और दृढ़ विश्वास' को यह भाषण दर्शाता है।
केरल के त्रिशुर में रहने वाले सदानंदन मास्टर ने अपने पहले भाषण के दौरान अपनी 'नैतिक शक्ति और दृढ़ विश्वास' को साबित करने का प्रयास किया, लेकिन इससे संसद में और पूरे भारत में लोग हैरान रह गए। सदानंदन ने सोमवार को राज्यसभा में अपने पहले भाषण के दौरान अपने कृत्रिम पैर निकालकर दिखाए थे, जिस पर काफी हंगामा हुआ और माकपा ने इसकी कड़ी आलोचना की।
केरल में राजनीतिक हिंसा के लिए मशहूर इलाकों में, सदानंदन मास्टर 1994 में अपने घर पर हमले का सामना कर चुके थे, जिसके बाद उनके दोनों पैर कट गए थे। इस हमले ने उनकी राजनीतिक यात्रा को प्रभावित किया, और उन्होंने SFI छोड़कर आरएसएस में शामिल हुए।
राज्यसभा में, सदानंदन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने राजनीतिक हिंसा के इतिहास से लोगों को प्रभावित करने वाली घटनाओं का उल्लेख किया है। उनकी पहली बार चर्चा में हिस्सा लेने वाली भाषण ने उन्हें राजनीतिक हिंसा से जुड़े इतिहास पर सवाल उठाने के लिए कहा।
केरल के त्रिशुर में रहने वाले सदानंदन मास्टर ने अपने पहले भाषण के दौरान अपनी 'नैतिक शक्ति और दृढ़ विश्वास' को साबित करने का प्रयास किया, लेकिन इससे संसद में और पूरे भारत में लोग हैरान रह गए। सदानंदन ने सोमवार को राज्यसभा में अपने पहले भाषण के दौरान अपने कृत्रिम पैर निकालकर दिखाए थे, जिस पर काफी हंगामा हुआ और माकपा ने इसकी कड़ी आलोचना की।
केरल में राजनीतिक हिंसा के लिए मशहूर इलाकों में, सदानंदन मास्टर 1994 में अपने घर पर हमले का सामना कर चुके थे, जिसके बाद उनके दोनों पैर कट गए थे। इस हमले ने उनकी राजनीतिक यात्रा को प्रभावित किया, और उन्होंने SFI छोड़कर आरएसएस में शामिल हुए।
राज्यसभा में, सदानंदन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने राजनीतिक हिंसा के इतिहास से लोगों को प्रभावित करने वाली घटनाओं का उल्लेख किया है। उनकी पहली बार चर्चा में हिस्सा लेने वाली भाषण ने उन्हें राजनीतिक हिंसा से जुड़े इतिहास पर सवाल उठाने के लिए कहा।