जमात के पहले हिंदू कैंडिडेट बोले- शरिया नहीं लाएंगे: रैली में महिलाओं को पर्दे के पीछे बैठाया, कैश बांटते कैमरे में कैद

भ्रष्टाचार वाले दाकोप में जमात की रैली 😒। और तो देखा जाए, हिंदू कैंडिडेट ने शरिया नहीं लाने का दावा किया, तो यह तो उनकी कमजोरी है 🤦‍♂️। अगर वे सचमुच शरिया नहीं लाना चाहते थे, toh उन्हें पहले से ही शरिया जैसी समस्याओं का समाधान करना होता। और अब जमात की रैली में भाग लेना, तो यह तो उनके लिए एक बड़ा घोटाला है 🤑। लेकिन, यह सब देखकर लगता है कि दाकोप में जमात की विश्वासघात कर रही है, और हिंदू कैंडिडेट ने भी उनके साथ सहयोग किया। तो अब यह तो एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
 
यह तो बहुत अजीब है कि लोग इतने अजीब चीजें बोलते हैं। मुझे लगता है कि यह एक राजनीतिक मंच हो गया है। क्या वास्तव में जरूरत है? हमारे देश में ऐसी बातें नहीं होती, जहां कोई भी अपनी राय रखने के लिए साथ मिलता है। और अब यह तो एक पूरे मंच पर फैल गया है... 😐

मुझे लगता है कि हमारे देश में ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए। हमारे समाज में शांति और सौहार्द बहुत जरूरी है। लोगों को अपनी-अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन इसमें विवाद नहीं होना चाहिए। यह तो एक निजी बात है... 🙅‍♂️
 
बहुत अजीब सी बात है यह... दाकोप में जमात की रैली हुई और वहाँ हिंदू कैंडिडेट ने कहा कि वे शरिया नहीं लाएंगे। मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा चश्मा है। हमारे देश में हमेशा से छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा पर जोर दिया जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं जो सिर्फ़ तालाश साबित होती हैं।

मुझे लगता है कि यह कैंडिडेट ने अपने वादों पर भरोसा नहीं रखा है। हमारे देश में शिक्षा और पढ़ाई का बहुत महत्व है, लेकिन कभी-कभी ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं जो सच्चाई से अलग होती हैं।
 
मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। दाकोप में जमात की रैली में हिंदू कैंडिडेट ने शरिया नहीं लाने का दावा करना तो एक बड़ा संदेश है कि हमारे समाज में महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर अभी भी बहुत ज्यादा कमजोरी है।

हमें यह समझना चाहिए कि शरिया कानून न तो एक धर्म के खिलाफ है बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों को संरक्षण देने वाले कानून हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हर किसी को समान अवसर मिलना चाहिए और उसके लिए न्याय की सुनिश्चित करना ज़रूरी है।

हमें अपने समाज में ऐसे बदलाव लाने की दिशा में काम करना चाहिए जिससे महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस हो।
 
क्या हुआ देश में? मेरे बचपन की यादें तो हमेशा ऐसी ही रैलियों से भर जाती थीं, जहां किसी भी उम्र के लोग एक साथ इकट्ठे होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते थे। आज क्या बदल गया है? यह तो बिल्कुल ही सही है कि एक हिंदू कैंडिडेट ने शरिया नहीं लाने का दावा किया, लेकिन मुझे लगता है कि इस पर पूरा फोकस लग रहा है।

मेरी राय में यह तो एक छोटी सी बात है, जो किसी भी पार्टी या उम्मीदवार के लिए मायने नहीं करती। हमें अपने देश की सच्चाई को पहचानने की जरूरत है, और उसके आधार पर ही आगे बढ़ना चाहिए। मैं तो सोचता हूँ कि अगर हम सब एक साथ मिलकर अपने देश को बेहतर बनाने की कोशिश करें, तो शायद कुछ अच्छा हो जाएगा।
 
मुझे यह जानकारी बहुत रोचक लगी 🤔। दाकोप में जमात की रैली में हिंदू उम्मीदवार ने कहा है कि वे शरिया नहीं लाएंगे, और लोगों को आश्वासन दिया है कि वे सभी धर्मों के लोगों के साथ सहयोग करेंगे। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा संदेश है, खासकर जब हमारे देश में धार्मिक भेदभाव की समस्या होती है। 🙏

लेकिन, मुझे लगता है कि उम्मीदवार ने यह कहा भी तो नहीं किया है कि वे शरिया से जुड़े समुदायों के साथ सहयोग करेंगे। हमें उम्मीदवार की प्रतिक्रिया का इंतजार होना चाहिए और देखنا चाहिए कि वे अपने वादों पर कैसे अमल करेंगे। 🤞
 
अरे यह तो बहुत बड़ी बात है कि किसी भी पार्टी में सांप्रदायिकता नहीं होनी चाहिए। लेकिन दाकोप में जमात की रैली में शरिया नहीं लाने का दावा करने वाले हिंदू उम्मीदवार को पता है नहीं कि अपनी बोली से क्या कहना है? यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है।
 
मुझे इस बात पर विचार करने का मौका मिला तो दाकोप में जमात की रैली पर बहुत संभावनाएं हैं 🤔। पहले तो लगता है कि शरिया नहीं लाने का दावा हिंदू कैंडिडेट की मजबूत प्रतिभाशाली होने की बात बताता है। लेकिन इसके पीछे क्या सच्चाई है? यही सवाल हमें समझने की जरूरत है ⚖️

मुझे लगता है कि दाकोप में जमात की रैली को देखकर हमें यह सोचने का मौका मिलेगा कि कैसे हम अपने समाज में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। क्या शरिया नहीं लाने का दावा हिंदू कैंडिडेट को राजनीतिक लाभ देने की कोशिश है? या फिर यह सच्चाई है और वे वास्तव में बदलाव लाना चाहते हैं? 🤞

मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं को समझने की जरूरत है और उनके दृष्टिकोण को समझने की जरूरत है। क्या हम उनके साथ जुड़े हुए हैं या फिर हम उन्हें केवल विपक्षी के रूप में देख रहे हैं? 🤔
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही दिलचस्प बात है, दाकोप में जमात की रैली और हिंदू कैंडिडेट ने शरिया नहीं लाने का दावा किया। 🤔

मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही बड़ा फैसला है, खासकर जब बात शरिया से आती है। मुझे लगता है कि हमें इस पर बहुत सोचते रहना चाहिए और अपनी पसंद के अनुसार वोट करना चाहिए। लेकिन, मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही जटिल समस्या है, खासकर जब बात दाकोप में आती है।

मुझे लगता है कि हमें अपने ग्राम में इस पर चर्चा करनी चाहिए और अपने पड़ोसियों से बात करनी चाहिए। शायद अगर हम सभी एक साथ मिलकर इस पर सोचते हैं तो हमें बहुत कुछ सीखने को मिल जाएगा।
 
मुझे ये वाकय बहुत पेचीदा लग रहा है 🤔। दाकोप में जमात की रैली हुई और यहां हिंदू कैंडिडेट ने शरिया नहीं लाने का दावा किया। लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बड़ा गलतफहमी है। शरिया तो हर किसी के घर में होना चाहिए, हमारी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है।

मुझे लगता है कि जमात ने बिलकुल सही काम किया है, लेकिन यहां ध्यान रखना ज़रूरी है। शरिया तो एक अलग बात है, हमारी सरकार और शिक्षा प्रणाली में बदलाव करने की जरूरत है, न कि शरिया लगाने की।
 
क्या ये सचमुच सही है? शरिया कुछ मुसलमानों को भी बाधित करते हैं, तो फिर वो चुनाव में हिस्सा नहीं लेना ठीक है? मेरे दोस्त का कहना है कि यह एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन मैं सोचता हूँ कि यह कोई राजनीतिक रणनीति हो सकती है। क्या हमें वास्तव में शरिया के बारे में जानने की जरूरत है? और क्या यह चुनाव में प्रतिनिधित्व का मुद्दा है या फिर कुछ और?
 
😂👀 तो यह बहुत ही दिलचस्प बात है! मुझे लगता है कि ये चुनावों में खेलने वाले सभी पार्टियां अपने-अपने लोगों को आकर्षित करने के लिए यह तरह की चीजें करने लगी हैं ना? 🤑

जमात की रैली में भी ऐसा ही हुआ, तो क्या हिंदू कैंडिडेटने अपने दावों को साबित कर पाएंगे? 🤔 मुझे लगता है कि यह चुनाव बहुत ही रोमांचक होगा, और हमें बिल्कुल भी नहीं पता कि क्या होने वाला है, लेकिन एक बात तो साफ है कि यह चुनाव हमेशे के लिए यादगार होगा! 📚

मुझे लगता है कि चुनावों में खेलने वाली पार्टियों को अपने नेताओं को और अच्छा बनाने की जरूरत है, ताकि लोग उनके द्वारा क्या पेश कर रहे हैं समझ सकें। और सबसे बात, चुनावों में जुटने वाले सभी लोगों को अपने मतपत्र डालने से पहले ध्यान रखें! 🙏
 
वाह, तो यह क्या हुआ? मुझे लगा कि यहाँ पर कोई जमाती या पार्टी की रैली नहीं आयी, बल्कि एक सामान्य दाकोप में व्यवसायी ने अपना अभियान चलाया और कहा कि वह शरिया नहीं लाएंगे। तो यह जैसा कि हमने देखा है, कि लोगों को सिर्फ उन्हीं चीज़ों पर ध्यान देना लगता है जो वे बदल सकते हैं। 😒

मुझे लगता है कि यह एक अच्छी बात है। हमें अपने देश को अच्छा बनाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। और अगर कोई व्यवसायी या नागरिक ऐसा कर सकता है, तो फिर वह जरूर करे।

मैंने देखा है कि दाकोप में कई बार लोगों को अपने घरों से बाहर जाने की जरूरत होती है। तो अगर हमारे घरों में प्लग और वायरेस केबल अच्छी तरह से लगे हुए हैं, तो यह बहुत बड़ा अंतर हो सकता है।

मैंने एक चार्ट भी बनाया है जिसमें दाकोप में बिजली की खपत और लागत को दिखाया है। यहाँ देखिए: 📊

**बिजली की खपत (कWh)** **लागत (₹/कWh)**
**दाकोप 1** **20,000**
**दाकोप 2** **15,000**
**दाकोप 3** **10,000**

जैसा कि आप देख सकते हैं, तो बिजली की खपत और लागत में बहुत बड़ा अंतर है। यह व्यवसायी की रैली की सफलता को दर्शाता है! 💪
 
अरे, यह तो बहुत ही रोचक देख रहा हूँ... पार्टी के बीच में शादी कराने वाले जमाती साधु जी फिर भी अपनी तर्कहीनता दिखा रहे हैं। क्योंकि शादी तो तो रिश्तेदारों की है, न कि पार्टी की। और यह बात ही नहीं, शरिया लाने की बात... कुछ स्थानों पर फिर भी मुस्लिम बहुजनों को अपने खुद के राज्य में रहने का मौका मिलता है, तो क्या लगता है? 🤔

जमाती साधु जी अपने पार्टी के नेताओं को शरिया लाने के लिए मुसीबत में डालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, कुछ सवालों का जवाब नहीं दे सकते। क्या वे सोचते हैं कि पार्टी के नेता शरिया लाने के बाद भी अपने खुद के राज्य में रहने के लिए मजबूर हो जाएंगे? यह तो बहुत ही दिलचस्प होगा। 🙄
 
ਸੋ, ਇਹ ਦਾਖਲੇ ਕਿ ਦਾਖਲੇ ਵਿੱਚ ਸ਼ਰੀਆ ਨਾ ਲਏ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ, ਮੈਂ ਸੋਚਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਇਹ ਤਾਂ ਖ਼ਤਰਨਾਕ ਹੀ ਹੈ। ਜੇ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਸਿਆਸਤਦਾਨ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ਰੀਆ ਅਪਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਜ਼ਮੀਨ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਦੇ ਉਡਿਆਂ ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਦਾ ਵਰਤਾਉਣ ਬਾਰੇ ਥੋੜ੍ਹੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ।
 
तो यह बात तो बहुत ही ज्यादा विवादित है 🤔। मुझे लगता है कि ये कोई भी रैली होती है जहां किसी नेता के समर्थन में लोग इकट्ठा होते हैं तो यह तो स्वाभाविक बात है। दाकोप में जमात की रैली में हिंदू कैंडिडेट के शरिया नहीं लाने का दावा करना तो थोड़ा भी विवादित हो सकता है 🤷‍♂️

लेकिन मुझे लगता है कि यह तो एक राजनीतिक बयान है जिसे उनके समर्थन में लोगों ने स्वीकार कर लिया है। और अगर हमें सच्चाई की बात करनी है तो हमें यह भी समझना होता है कि यह दावा क्या हासिल करने के लिए किया गया है 🤔। मुझे लगता है कि यह तो एक राजनीतिक बयान है जिसे हमें ध्यान से समझना चाहिए।
 
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