पीयूष गोयल की बातें बहुत ही मजेदार हैं! वे हमेशा अपने शब्दों से अच्छा साहस बनाते हैं। अगर पारस्परिक टैरिफ शून्य कर दिया जाए तो यह एक बड़ा मैच होगा, लेकिन क्या अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर तो वाकई इस मैच जीत सकते हैं? मुझे लगता है कि उन्हें बहुत साहस और चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन पीयूष गोयल की बातें हमेशा हंसने का मौका देती हैं और यहां तक कि ये ट्विट ज्यादा मजेदार है!
यह तो बहुत बड़ी बात है! पीयूष गोयल से मजाक उड़ाने की कोशिश करना ठीक नहीं है, लेकिन मजाक में फंसना ठीक है । अगर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को टैरिफ शून्य पर बैठाने की जरूरत है तो शायद वे अपने देश के लिए खेल नहीं खेल रहे हैं । पीयूष जी ने सही कहा है, अगर अमेरिका इस मैच जीतता तो शायद उनके खिलाड़ी कम थक जाएंगे। कम से कम व्हाइटवाश की जरूरत नहीं है ।
पीयूष गोयल की बातें सुनकर लगता है कि वे किसी खेल की कमजोरियों की बात कर रहे हैं, न कि भारत की आर्थिक ताकत की। अगर हमारे देश में शेयर बाजार ऐसा चल रहा है जैसे अमेरिका, तो इसका मतलब क्या है? क्या हम खिलाड़ियों की तरह खेलने वाले देश हैं?
और मजाक उड़ाते समय भी पारस्परिक समझदारी बहुत जरूरी है। अमेरिकी राजदूत को मजाक में नहीं लेना चाहिए। इससे हमारे देश की छवि खराब होती है और हमारे संबंधों पर प्रभाव पड़ता है।
यार, यह पीयूष गोयल की बोली है... पर ये सच नहीं हो सकता! अगर टैरिफ शून्य कर दिया जाए तो शायद कोई मैच निर्णय ही होता। हमें किस तरह के खेल में रुचि लेनी चाहिए?
पीयूष गोयल ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को मजाक में फटाया है? यह एक अच्छा संकेत है कि भारत के पास खेलों में अपनी ताकत है। लेकिन प्राथमिकता यहीं नहीं रह सकती, हमारी अर्थव्यवस्था और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। अगर हम अपने सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को हल करेंगे, तो खेलों में जीतने की बात करना आसान है।
पीयूष गोयल की बात सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगा । अगर पारस्परिक टैरिफ शून्य होने पर अमेरिका हमेशा जीतता, तो यह सच नहीं कहा जा सकता। भारत और अमेरिकी क्रिकेट टीमें अलग-अलग देशों में खेलती हैं और उनकी तकनीक, फिटनेस और स्ट्रैटेजी अलग होती हैं। बाहरी टैरिफ शून्य करने से भारतीय टीम की प्रदर्शन स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ेगा ।
ये बात मुझे बहुत ही मजेदार लगती है! पीयूष गोयल जी की बात सुनकर लगता है कि वे खेलों की दुनिया में माहिर हैं । और अगर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जी भारत में अपनी टीम का प्रदर्शन करते, तो शायद हमारी टीम उनसे अच्छी होती। लेकिन फिर भी, पीयूष जी ने मजाक में कहा है कि अगर पारस्परिक टैरिफ शून्य होता, तो अमेरिका जीत जाता। यही बात सच हो सकती है, परंतु खेलों में कई कारक आутमेंट होते हैं, जैसे कि मौसम, प्रतिद्वंद्वी टीम की स्थिति, और खिलाड़ियों की रणनीति । लेकिन फिर भी, यह मजाक बहुत ही मनोरंजक है!
यह तो बिल्कुल भी रोचक नहीं है... पीयूष गोयल के मजाक करने से पहले उन्हें थोड़ी शांति और विचारशीलता का अभ्यास करना चाहिए। अमेरिकी राजदूत के साथ मजाक मारने से किसी को भी गलतफहमी होने की संभावना नहीं है, लेकिन यह दिखाता है कि हमारे नेताओं की व्यक्तिगत बुद्धिमत्ता और विदेश नीति पर ध्यान देना जरूरी है। तो चलिए, पीयूष गोयल स्वस्थ रहते रहें और अपनी राजनीतिक जिंदगी को इस तरह की चालचालों से दूर रखें।