इलेक्शन कवर करने बांग्लादेश पहुंचा दैनिक भास्कर: इजराइल, लेबनान, सीरिया के बाद अब बांग्लादेश से एक्सक्लूसिव खबरें, पढ़िए और देखिए कल, यानी 4 फरवरी से

बांग्लादेश में चुनाव का समय आ गया है, लेकिन इसकी तैयारी में एक अनोखापन है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बीत गए हैं और अब यहाँ वोटिंग की तैयारी हो रही है।

इस चुनाव में एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बन गई है। इस्लामिक कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने भारतीय राजनीति को अपना लक्ष्य बना लिया है, और वे हिंदुओं पर हमलों को बढ़ावा देने में सक्षम हो गए हैं। यह चुनाव एक भारत विरोधी साहसिक पल बन गया है।

इस बीच, हमने इस चुनाव की तैयारी में कई देशों की दिशा पर नज़र रखी है। इजराइल, लेबनान, और सीरिया में भी ऐसे ही पल देखे गए हैं। लेकिन अब यह बांग्लादेश की बारी है।

इस चुनाव को जीतने वाली पार्टी कौन होगी, इसके उत्तर हम आपको बताने में सफल रहेंगे। इसके अलावा, हमने इस चुनाव से जुड़े कई अन्य पहलुओं पर भी नज़र रखी है, जैसे कि अल्पसंख्यकों के हालात और सियासत के अहम किरदारों के इंटरव्यू।

चुनाव की तैयारी में एक अनोखापन है। हम आपको कल, यानी 4 फरवरी से, बांग्लादेश के ग्राउंड जीरो से एक्सक्लूसिव रिपोर्ट देने वाले हैं। तो पढ़ते और देखते रहिए दैनिक भास्कर एप।
 
बंगाल में चुनाव आ गया है लेकिन यह बहुत खतरनाक स्थिति बन गई है। जमात-ए-इस्लामी ने इतना आतंक फैलाया है कि अब योग्य व्यक्तियों को मतदान करने के लिए खुद पर चिंता करनी पड़ेगी।

मुझे लगता है कि बंगाल की जनता तैयार नहीं है। ये चुनाव देश के भविष्य को खतरे में डाल सकता है।

मैंने सोचा है कि हमें वोटिंग में भाग लेने से पहले अपने आसपास की जगहों पर जांच करनी चाहिए।

तो चलिए मतदान में बैठें और अपने देश के भविष्य के लिए लड़ें।
 
मुझे लगता है कि यह चुनाव बंगाल में बहुत ही जटिल होगा। लेकिन मेरा मन ये नहीं करता कि जमात-ए-इस्लामी वाकई भारतीय राजनीति पर नज़र डाल रहे हैं। उनको लगता है कि भारत देश किसी जिम्मेदार व्यक्ति की तरह है, और वे उसे अपने खिलाफ बदलने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बंगाल में कई ऐसे लोग हैं जो जमात-ए-इस्लामी से अलग दृष्टिकोण रखते हैं।

मुझे लगता है कि यह चुनाव एक बहुत बड़ा मौका है, और हमें इसका सही तरीके से उपयोग करना चाहिए। हमें अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करना चाहिए, और अपने देश के भविष्य को निर्धारित करने में भाग लेना चाहिए। 🗳️
 
बांग्लादेश में चुनाव की बात करें, तो लगता है कि यहाँ पर कई चीजें बदलने की संभावना है। 18 महीने से शेख हसीना सरकार गिरी थी, और अब वोटिंग की तैयारी हो रही है। यह अच्छा है कि लोग अपने बोलबाले में अपने मत का उपयोग करने का मौका मिल रहा है।

इस चुनाव में ऐसे कई पहलू देखिए गए हैं जो हमें आश्चर्यचकित कर रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी ने भारतीय राजनीति पर बहुत बड़ा प्रभाव डालने का प्रयास किया है, और यह अच्छा नहीं है। लेकिन, चुनाव में जीतने वाली पार्टी कौन होगी, यह देखने के लिए हम खुश हैं।

मुझे लगता है कि बांग्लादेश के लोग अपने देश के भविष्य को सुधारने के लिए बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने कई मुसलिम देशों में भी अपनी प्रतिभा और समर्थन को दिखाने का फैसला किया है। इजराइल, लेबनान, और सीरिया जैसे देशों में भी ऐसे पहलू देखे गए हैं, और हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश का चुनाव भी उसी तरह होगा। 🤞
 
मैंने कल ब्रिटेन की बीमारी की पढ़ाई कर रहा था, मेरी बहन ने बताया कि उसका भाई मुंबई से वापस आया है और वह अपनी पत्नी को स्वस्थ दिखाने में लगे हुए है। उनकी बेटी बहुत खुश है, मैंने उन्हें एक्सेस फ्री चॉकलेट गिफ्ट कर दिया था।
 
बंगाल में चुनाव आ गया है, लेकिन क्या यही सब सच है? जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टियाँ बांग्लादेश में तो फैले हुए दिखती हैं, लेकिन कुछ भी निकाल नहीं सakte. यह चुनाव हिंदुओं पर हमलों का मौका बन गया, तो क्या यह सच है?

मैंने बातें करते समय अपने दोस्तों और परिवार से पूछा कि वे कैसे महसूस कर रहे हैं, लेकिन हर एक की अलग से जवाब था। कुछ लोग कहते हैं कि यह चुनाव हमारे लिए अच्छा है, जबकि दूसरों को लगता है कि यह खराब है। मुझे लगता है कि बंगाल में चुनाव की जीतती पार्टी को खुश रखने के लिए हमें अपने मतपते पर सोच-विचार करना होगा।

चुनाव के दौरान हमें किसी भी पार्टी की पकड़ में नहीं आना चाहिए, लेकिन यह जरूरी है कि हम अपने देश को बेहतर बनाने के लिए सोचें। 4 फरवरी से दैनिक भास्कर एप पर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट देखने वाले हैं, तो पढ़ते और देखते रहिए! 💬
 
बात बांग्लादेश चुनाव में तो बहुत धूम हो रही है 🤯, लेकिन ज्यादा ध्यान हमें उन परियोजनाओं की जा रही हैं जो विकास के दिशा में नहीं हो रही हैं। सरकार बदलने से पहले भी बहुत कुछ सुधरा नहीं जा पाया। बात अल्पसंख्यकों की, वह तो एक बड़ी समस्या बन गई है। 😔
 
बात ये कि बांग्लादेश में चुनाव का समय आ गया है, लेकिन यहाँ की राजनीति में बहुत सारे असामान्य पल आते रहते हैं। वोटिंग की तैयारी हो रही है, लेकिन जमात-ए-इस्लामी नामक पार्टी इस चुनाव में भारत विरोधी साहसिक पल बन गई है। हमने देखा है कि इजराइल, लेबनान और सीरिया जैसे देशों में भी ऐसे ही पल देखे गए हैं।

मुझे लगता है कि इस चुनाव को जीतने वाली पार्टी तय नहीं हुई है। लेकिन हम बात करने के लिए तैयार हैं। मैंने देखा है कि अल्पसंख्यकों के हालात और सियासत के अहम किरदारों के इंटरव्यू बहुत महत्वपूर्ण हैं। तो पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर एप।
 
[एक मeme दिखाता है जहां बांग्लादेश की सरकार की तस्वीर पर "बंदूक" की जगह "टंबल" लिखा हुआ है।]

[वोटिंग में लोगों के चेहरे को एक अलग दिशा में देखने वाले वोटर की एक छवि से बने एक और मeme दिखाता है]
 
बंगाल में चुनाव की तैयारी हो रही है लेकिन मुझे लगता है कि यह तय कर देना चाहिए कि हम वोटिंग में कौन सी पार्टियाँ शामिल हैं और उन्होंने अपने उम्मीदवारों को कैसे चुना है। भारतीय राजनीति में ऐसी गड़बड़ी कैसे आ गई है कि अब इस्लामिक कट्टरपंथी पार्टियाँ हिंदुओं पर हमलों को बढ़ावा देने वाली बात कर रही हैं? 🤔

आजकल तो हर चुनाव में ऐसी नई गड़बड़ी लगती है और सोचता हूँ कि हम सभी इस चुनाव में क्या जीतेंगे या खो देंगे। भारतीय राजनीति में ऐसा कुछ ना होना चाहिए। यह तय कर देना चाहिए कि हमारी राजनीति में किस प्रकार के विचारों और व्यक्तित्वों को जगह मिले।
 
मेरा विचार है कि बांग्लादेश में चुनाव की तैयारी में एक बड़ा खतरा बन गया है। जमात-ए-इस्लामी पार्टी ने अपने कट्टरपंथी दृष्टिकोण से देश की राजनीति को धक्का देने की कोशिश कर रही है, जिससे विवाद और तनाव बढ़ सकते हैं। मुझे लगता है कि इस चुनाव में निष्पक्षता और समझदारी की जरूरत है, ताकि हम देश के भविष्य को सुरक्षित बना सकें। हमें वोटिंग के दिन एक अन्यायपूर्ण स्थिति नहीं देखनी चाहिए।
 
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