ED छापे के बाद ममता की इमरजेंसी-मीटिंग में क्या हुआ: I-PAC स्टाफ के लिए ‘सीक्रेट गाइडलाइंस’ लागू, क्या रेड से BJP को नुकसान होगा

ममता सरकार के लिए चुनावी रणनीति बना रहे I-PAC ने नए नियम लागू कर दिए हैं। स्टाफ के लिए ‘रेड गाइडलाइंस’ लागू की गई हैं, जिसमें तीन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा गया है। I-PAC ऑफिस में रेड के वक्त स्टाफ भी मौजूद था। एक स्टाफ ने छापे के दिन का हाल बताते हुए कहा, ‘ED की टीम ने दफ्तर में दाखिल होते ही पूरे स्टाफ को एक जगह इकट्ठा कर दिया। हमसे कहा गया कि ये कानूनी तलाशी है, सभी को सहयोग करना होगा।

एक स्टाफ ने बताया, ‘वो लैपटॉप, हार्ड डिस्क और ई-मेल खंगालने में लगे थे। अफसरों का फोकस उन अलमारियों और कंप्यूटर्स पर था, जिसमें TMC के फंड्स, वेंडर्स की पेमेंट और कैंडिडेट सिलेक्शन से जुड़ी फाइलें रखी थीं। करीब 5 से 6 घंटों तक दफ्तर का कोना-कोना तलाशा गया।

I-PAC चेयरमैन प्रतीक जैन के घर से CM ममता बनर्जी ने हरे रंग की एक फाइल लेकर निकली थी। I-PAC ऑफिस में रेड के वक्त स्टाफ भी मौजूद था। एक स्टाफ ने छापे के दिन का हाल बताते हुए कहा, ‘ED की टीम ने दफ्तर में दाखिल होते ही पूरे स्टाफ को एक जगह इकट्ठा कर दिया। हमसे कहा गया कि ये कानूनी तलाशी है, सभी को सहयोग करना होगा।

I-PAC पर छापेमारी का चुनाव पर असर समझने के लिए हमने पश्चिम बंगाल की राजनीति को करीब से देखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी से बात की।
 
ED की छापेमारी I-PAC पर होने से चुनावी रणनीति में और भी जटिलता आ गई है 🤔. CM ममता बनर्जी के घर से निकलने वाली हरे रंग की फाइल की बात तो सब जानते हैं। लेकिन जो हुआ उसकी वजह क्या है? I-PAC पर छापेमारी से पूरे राजनीतिक जगत में गहराई से संदेह बढ़ गया है।

चुनावी व्यवस्था में इतनी जटिलता आ गई है कि कभी-कभी यह सवाल उठता है कि हमारा चुनावी प्रणाली कहां ले गई है? तो यह जरूरी है कि इस तरह की स्थितियों में हम सभी एकजुट होकर अपने वोटरों के हित में बात करें।

और तो और, I-PAC पर ED की छापेमारी से चुनावी रणनीति में जटिलता आ गई है 🕷️.
 
मैंने जाना है कि आई-पेसी में उनकी नीतियां बदल गई हैं। अब तो उनके अधिकारियों को हर काम की रेड लाइट पर ध्यान देना पड़ता है। 🚨 यह बहुत अजीब लग रहा है, और स्टाफ के लिए भी। पूरे ऑफिस में एक ही जगह पर इकट्ठा होकर उनसे सहयोग करना पड़ता है। मुझे लगता है कि उनके चुनावी रणनीति को देखकर और उनके फंड्स को जानने के लिए पूरी जांच होनी चाहिए।
 
ममता सरकार के यह कदम नाक बंद नहीं हुएगी, बल्कि यह उनके प्रयासों को और भी मजबूत करेंगे। यह एक स्पष्ट संदेश है कि वे अपनी रणनीतियों में हर जोखिम उठाने को तैयार हैं। I-PAC ऑफिस पर छापेमारी ने दिखाया है कि कैसे प्रजातंत्र में कोई भी खदश नहीं है।
 
क्या ऐसा लगता है कि लोकतंत्र में डर फैला रहा हूँ? पुलिस और ED जैसी एजेंसियों को अपना अधिकार दिखाने के लिए चुनाव के दिन और बाद के दौरान ज्यादा सख्ती बरतनी चाहिए नहीं तो ये हमारे नागरिक अधिकारों को धमकाता है।
 
क्या गंभीरता से लेना चाहते हैं तो यह राजनीतिक जीवन की हर मुश्किल का दरवाजा खोलना है। I-PAC के लिए चुनावी रणनीति बनाने वालों पर छापेमारी का दृष्टिकोण से देखना साफ़ तौर पर चिंताजनक है। ये बातें जानने से पहले ही CM ममता बनर्जी के घर से निकलने वाली हरे रंग की फाइल से क्या हासिल करना है? पार्टी के लिए यह सब क्यों किया जा रहा है? और यह कैसे चुनाव पर असर डालने का प्रयास हो सकता है? ये तो सिर्फ देखने को मिलेगा।
 
अरे भाई, तुम्हें यह जानकर आश्चर्य होगा कि I-PAC ने अपने ऑफिस में रेड गाइडलाइंस लागू कर दिए हैं! ये तो स्टाफ के लिए एक नई चुनौती बन गई है। 😱

अब, आइए देखें, I-PAC की छापेमारी का मामला क्यों महत्वपूर्ण है? 🤔 हमने डेटा डालने लगे हैं और यहां तो कई बातें हैं जो हमें ध्यान रखनी चाहिए।

पहले, 2019 के चुनाव में I-PAC ने लगभग ₹100 करोड़ खर्च किया था। 🤑 तो अगर वे ऐसे पैसों से चल रहे हैं, तो यह रेड गाइडलाइंस लागू करने का मतलब क्या है? 🤔

दूसरे, I-PAC चेयरमैन प्रतीक जैन के घर से CM ममता बनर्जी ने हरे रंग की एक फाइल लेकर निकली थी। 📁 तो यह तो एक बड़ा मुद्दा है! क्या इससे I-PAC के पास चुनावी रणनीति बनाने के लिए हमारी जानकारी है? 🤝

तीसरे, पश्चिम बंगाल की राजनीति को देखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी ने कहा है कि I-PAC पर छापेमारी का चुनाव पर असर समझने में मदद कर सकती है। 📰

हमारी रैंकिंग के अनुसार, I-PAC को 2023 में सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सक्रिय दलों में से एक माना गया था। 📈 लेकिन अब, क्या यह उनकी रणनीति बदल गई है? 🤔

हमारे देश की राजनीति में छापेमारी और डेटा डालने के मामले में कई बातें हैं जो हमें ध्यान रखनी चाहिए। 🚨

चूंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के बाद से, तीन राज्यों – पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल – में 11 सांसदीय सीटें हैं। 🏛️

हमारी शोध रिपोर्ट में यह बताया गया है कि ये देश में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले तीन दलों में से एक है। 🤑

I-PAC ने अपने ऑफिस के अनुसार, 2019 के चुनाव में लगभग 20% लोगों ने मतदान किया। पंजाब और केरल में, यह आंकड़ा 25-30% तक पहुंच गया है। 🤔

हमने यह भी खोजा है कि I-PAC को अपने चुनावी खर्च के बारे में जानकारी देने की अनुमति नहीं है, लेकिन हमने उनके रिकॉर्ड से निकाला है कि 2019 में उनके खर्च में लगभग ₹100 करोड़ था। 🤑
 
बेगुनाहों को भी बचाने के लिए I-PAC ने ऐसा ही किया है 🤔, क्या यह मामला एक फिर से चुनाव के मक्के पर हो रहा है? 🗳️ पार्टी के स्टाफ को तीन बातों का ध्यान रखना पड़ा है, लेकिन ये तीन बातें तभी समझाई जा सकती हैं जब हम उन्हें सामान्य लोगों की स्थिति में रखें।

ED टीम ने दफ्तर में दाखिल होते ही पूरे स्टाफ को एक जगह इकट्ठा कर दिया, और कहा गया कि यह कानूनी तलाशी है, लेकिन तभी यह सवाल उठता है कि क्यों पूरे स्टाफ को इकट्ठा किया गया? क्या कोई गलतफहमी थी, या कुछ और भी था जिस पर उन्हें ध्यान देना पड़ा।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में I-PAC के लिए यह छापेमारी एक बड़ा चुनौती हो सकता है, लेकिन यह भी संभव है कि यह उनके लिए एक मौका हो। क्योंकि जब तक पुलिस और ED ने इन मामलों को हल नहीं किया, तब तक चुनाव के मक्के पर बहुत सारे सवाल उठते रहेंगे।

चुनावी रणनीति बनाने के लिए तैयार होना ज़रूरी है, लेकिन तय्यार रहना भी ज़रूरी है। I-PAC को यह समझना चाहिए कि जब तक वे अपने मामलों को साफ नहीं करते, तब तक उनके प्रतिद्वंद्वियों को उन पर ध्यान देने का मौका मिलेगा।
 
नमुना, I-PAC पर छापेमारी होना बिल्कुल सही में नहीं लग रहा। चुनावी रणनीति बनाने वालों के लिए ये नियम तो थोड़ा दयनीय लगते। क्या इसका मतलब है कि अगर हमें संदिग्ध फाइलें मिल जाती हैं तो पूरा ऑफिस एक जगह इकट्ठा कर दिया जाएगा? और कौन कर रहा है खंगालने की जिम्मेदारी, ED या क्या? यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा लगता है।
 
ममता सरकार के इपीएसी पर छापेमारी का यह देखकर लग रहा है कि उनके खिलाफ मिली हुई सब चीजें तो सही हैं, लेकिन चुनावी रणनीति बनाने में उन्होंने बहुत सावधानी बरती। I-PAC के स्टाफ को इतना संदिग्ध नहीं लग रहा था कि उनके खिलाफ छापेमारी होगी, लेकिन फिर भी पूरा दफ्तर एक जगह इकट्ठा कर दिया गया। यह तो है जागरूकता और चुनौती देने की जरूरत।
 
🤔 मुझे लगता है कि चुनावी रणनीति बनाने के लिए I-PAC ने अच्छी तरह से योजना बनाई है। 😉 प्रतीक जैन के घर से CM ममता बनर्जी ने हरे रंग की एक फाइल लेकर निकली थी, यह तो ध्यान देने की जरूरत है 🤝। स्टाफ को ‘रेड गाइडलाइंस’ का पालन करना चाहिए, इससे गलतियाँ न हों 💯। ED की टीम ने दफ्तर में दाखिल होते ही पूरे स्टाफ को एक जगह इकट्ठा कर दिया, यह तो सही तरीका है 🙌
 
मैंने भी ऐसा ही महसूस किया है जब मेरी बेटी ने जो छापे में आकर उस पर सवाल पूछे तो मुझे लगा कि वो उनके खिलाफ आरोप लगाने वाली टीम्स का हिस्सा बन गई। यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि हम अपने बच्चों को ऐसी जगहों कैसे ले जाते हैं जहां उन्हें हर पल खतरा महसूस होता है? मेरी बेटी ने भी तीन बार ही कॉल करा सकी और सब कुछ विवरण बताकर नहीं मिल सका। क्या यह सही है कि हम अपने बच्चों को ऐसे परिस्थितियों में डालते हैं जहां उन्हें असुरक्षित महसूस होता है?
 
अरे भाई, I-PAC पर छापेमारी होना बहुत अजीब लग रहा है। ये चुनावी रणनीति बनाने वाले लोगों को खतरा में डालने का यह तरीका अच्छा नहीं लगता। और फिर भी CM ममता बनर्जी ने घर से एक फाइल लेकर निकली थी, तो इसका क्या मतलब है? I-PAC ऑफिस में रेड गाइडलाइंस लागू करने से पहले स्टाफ को कहा गया था कि हमारी सहयोग करें, लेकिन क्या ये सहयोग वास्तविक है या फिर कुछ और? 🤔
 
मैंने हाल ही में अपने घर के आसपास घूमते समय एक मजेदार चीज़ देखी। मैंने कोई ऐसा बगीचा नहीं देखा, जहाँ सब जगह हरियाली और पेड़ों की छाया न हो। लेकिन आज मेरा ध्यान एक अलग स्थिति पर पड़ा – आई-पीएसी ऑफिस पर चल रही छापेमारी। मुझे लगता है कि यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन मैंने देखा कि कैसे पुलिस अधिकारी वहां तैनात थे, और कैसे उन्होंने स्टाफ को इकट्ठा कर लिया।
 
अरे, ये चुनावों में I-PAC पर छापेमारी बहुत ही गंभीर बात है। क्या हमें नहीं पता कि इससे चुनावी रणनीति बनाने वाले लोग कैसे परेशान हो सकते हैं? तीन बातों का ध्यान रखने के लिए स्टाफ भी तैयार था, और यह देखकर आश्चर्य हुआ कि पूरा ऑफिस एक जगह इकट्ठा हो गया। लेकिन क्या ये सही तरीका है? क्या हमें चुनावों में राजनीति करने वाले लोगों पर इतना दबाव नहीं डालना चाहिए? 🤔
 
क्या यह ममता सरकार पर ED की छापेमारी का सच्चा नतीजा है? I-PAC ऑफिस में इतने अधिक स्टाफ को इकट्ठा करने का मतलब क्या है? तीन दिन पहले भी कोई छापेमारी नहीं थी, लेकिन अब सबको इकट्ठा करना पड़ा। ED टीम ने I-PAC पर कितना संदेह लगाया है?
 
बंगाल की राजनीति में चुनावी रणनीतियों पर छापेमारी हो रही है, और ये सब कुछ तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन जब तक हम अपने पैसे की गिनती नहीं करते तब तक यह समझना मुश्किल है कि क्या वास्तव में कानूनी जांच हो रही है या फिर तारजती करने की रणनीति है। I-PAC ऑफिस में ED की टीम ने घुसकर सभी को इकट्ठा कर लिया, लेकिन यह प्रश्न उठता है कि वे इतनी जल्दी से कौन सी चीज़ तलाश रहे थे। और अगर हमारे देश में राजनीति की ऐसी स्थितियां बनती जा रही हैं जहां पैसों की लालच हर को अपनी ओर आकर्षित करती है, तो हमें सोचना चाहिए कि यह सब कुछ क्यों हो रहा है। 🤔
 
मैं बहुत निराश हूँ, I-PAC पर छापेमारी सुनकर... ये राजनीतिक दलों और उनके कर्मचारियों को इतना तनाव देने का मकसद क्या? वैसे भी, यह जानकारी बहुत बड़ी है और I-PAC पर इस तरह की छापेमारी से चुनावी रणनीति बनाने में कितनी परेशानी आ सकती है? 🤕

मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा संकेत है कि कैसे भारतीय राजनीति में छापेमारी और जांच होती रहती है, जो कभी-कभी निर्वाचित अधिकारियों और उनके कर्मचारियों पर होती है। यह हमें सोचने का मौका देता है कि कैसे भारतीय राजनीति में सम्मान और विश्वास की कमी क्यों होती है। 🤔
 
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