ED छापे के बाद ममता की इमरजेंसी-मीटिंग में क्या हुआ: I-PAC स्टाफ के लिए ‘सीक्रेट गाइडलाइंस’ लागू, क्या रेड से BJP को नुकसान होगा

इस छापेमारी के बाद स्टाफ को कहा गया कि ये कानूनी तलाशी है, सभी को सहयोग करना होगा। हमसे कहा गया कि मोबाइल जमा करा लिए गए, ताकि कोई बाहर खबर न दे सके।

दफ्तर के सभी दरवाजे अंदर से बंद कर दिए। ED की टीम ने हमें एक बड़े हॉल में बैठाया था। जबकि वो छानबीन के लिए अलग-अलग केबिन में चले गए।

करीब 5 घंटों तक दफ्तर का कोना-कोना तलाशा गया।

हमारी स्टाफ ने बताया, 'ED की टीम ने दफ्तर में दाखिल होते ही पूरे स्टाफ को एक जगह इकट्ठा कर दिया। हमसे कहा गया कि ये कानूनी तलाशी है, सभी को सहयोग करना होगा।

हमारी टीम ने बताया, 'वो लैपटॉप, हार्ड डिस्क और ई-मेल खंगालने में लगे थे। अफसरों का फोकस उन अलमारियों और कंप्यूटर्स पर था, जिसमें TMC के फंड्स, वेंडर्स की पेमेंट और कैंडिडेट सिलेक्शन से जुड़ी फाइलें रखी थीं। करीब 5 से 6 घंटों तक दफ्तर का कोना-कोना तलाशा गया।

ED की टीम ने हमारे चेयरमैन प्रतीक जैन के घर से हरे रंग की एक फाइल लेकर निकली थीं।

इस छापेमारी के बाद I-PAC मैनेजमेंट ने कहा है कि TMC को 2026 के विधानसभा चुनाव पर ध्यान देना चाहिए।
 
बस यह तो बहुत ही अजीब लग रहा है क्या हुआ इसके पीछे। तो ED की टीम ने I-PAC के घर जाकर हर किसी से बातचीत की, फिर उनके लैपटॉप, ई-मेल और फाइलों में क्या खोजा गया था। यह तो बहुत ही रोचक लग रहा है कि वे कौन से दस्तावेज़ खोजकर आये हैं उनके पास। लेकिन तुमने बताया है कि उनका ध्यान TMC के फंड्स और चुनाव अभियानों पर था। यह तो एक बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है, जिस पर ED की टीम ने देखा होगा।

मुझे लगता है कि यह छापेमारी I-PAC के लिए बहुत ही बड़ा झटका है। उनके चेयरमैन प्रतीक जैन के घर से हरे रंग की फाइल निकालना तो एक बहुत ही गंभीर आरोप लगने वाला है, और TMC को इस मामले का जवाब देना होगा। यह तो बहुत ही रोचक है कि I-PAC के पास ऐसे दस्तावेज़ होंगे, जिन्हें ED निकालकर लाया है।
 
बोलते जा रहे हैं यह तो सब कुछ ED की गहराई से खोज रही है। लेकिन इतनी मुश्किल क्यों कर रही है? हमारे देश में ऐसे मामले निकाल-फोड़कर चुनाव लड़ना एक नई तकनीक हो गई है, और यहां तक कि हम अपने नेताओं पर भी इस तरह से छापेमारी कर रहे हैं! 🤯

और ED की टीम की इतनी मेहनत तो देखकर अच्छा लगा। लेकिन क्या उनकी जांच में हमारे देश के भविष्य पर विचार करना शामिल था? या यह तो बस एक छोटा सा निजी मामला है? 🤔
 
सब कुछ तो ठीक है, लेकिन यह पूरी तरह से समझ में नहीं आ रहा है कि I-PAC मैनेजमेंट ने ऐसा क्यों किया। उन्होंने कहा है कि 2026 के विधानसभा चुनाव पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन यह तो पहले से ही तय हुआ था कि उनके सामने कोई बड़ा मैच नहीं है।

मुझे लगता है कि ED की छापेमारी के पीछे कुछ और हासिल करना चाहती है, लेकिन यह क्या है? I-PAC मैनेजमेंट ने कहा है कि TMC को ध्यान देना चाहिए, लेकिन यह तो उनके खिलाफ केस चलाने की बात है।

कोई भी पार्टी, जितनी अच्छी है, उतनी ही कमजोर भी। I-PAC मैनेजमेंट ने ऐसा कहा ताकि विपक्षी दलों को थोड़ी राहत मिले, लेकिन यह तो उनके खिलाफ ही काम कर रहा है।

ED की छापेमारी के बाद TMC के लिए सबसे बड़ा चुनौती यह है कि वे अपनी पार्टी को एकजुट करने में सफल हों।

क्या I-PAC मैनेजमेंट ने सोचा था कि उनकी जीत पर TMC की छापेमारी और ED की रोकथाम दोनों ही प्रभावी होगी? यह तो बिल्कुल नहीं सुनाया जा सकता था।

ED की टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से अपनी जासूसी की, लेकिन यह तो TMC के खिलाफ केस चलाने की बात है। मुझे लगता है कि I-PAC मैनेजमेंट ने ऐसा इसलिए किया है कि वे अपने पास कुछ भी नहीं रखें, इसलिए उन्होंने TMC को ध्यान देने का फैसला किया।

यह तो एक बड़ा खेल है, और I-PAC मैनेजमेंट ने बहुत ही शrewdly अपनी पार्टी को सुरक्षित रखा, लेकिन यह तो TMC के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

क्या ED की टीम ने TMC के खिलाफ केस चलाने का मौका दिया है? यह तो बिल्कुल नहीं सुनाया जा सकता था।
 
वाह, ये तो ED की गहरी जांच की बात है 🤯। पूरा दफ्तर तलाशा गया, लेकिन TMC के नेताओं की तिजोरियों में से कुछ नहीं मिला। यह तो यकीनन उनके व्यवसायिक खजाने की बात है 🤑। प्रतीक जैन के घर से हरे रंग की फाइल लेकर निकलना तो बहुत ही दिलचस्प है 🤔। I-PAC मैनेजमेंट की बात सुनकर लगता है कि TMC को 2026 के चुनाव के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन यह साफ नहीं है कि ED ने क्या पाया और इसका मायने क्या होगा।
 
अरे, ये तो ED की छापेमारी की बात कर रही है। मुझे लगता है कि यह सब बहुत ही जटिल है। हमें पता नहीं होता कि कौन सी फाइल्स वाले लोगों को इतनी ज्यादा परेशान करते हैं। और फिर भी, ED की टीम ने कितनी जोरदार तरीके से दफ्तर में घुस कर सबको एक जगह इकट्ठा कर लिया।

मुझे लगता है कि अगर हमारे पास सरकारी पदों पर होने वाली खुफिया जानकारी है, तो उसे अच्छी तरह से उपयोग नहीं किया जा रहा है। और फिर भी, ED की टीम ने इतनी जोरदार तरीके से खोज लगाई।

किसी को भी यह नहीं पता है कि हमारे देश में तीन पुरुष, एक महिला के पास इतनी ज्यादा शक्ति कैसे हुई? और हमें इसके बारे में सोच निकालकर नहीं रहे हैं।
 
😕 ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है। ED की इस छापेमारी ने हमें अच्छी तरह से चौंकाया। कैसे उनकी टीम ने पूरे ऑफिस को तलाशने का व्यवस्था कर ली, और सभी को सहयोग करने को कहा। यह तो बहुत ही अजीब बात है। क्या उन्हें पता है कि कैसे इससे हमारी व्यवसायिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं? और इतनी लंबी तलाश... 5 घंटे की बात है! 🕰️ मुझे लगता है कि ED की टीम ने बहुत सावधानी से काम किया है, लेकिन यह तो बहुत ही परेशान करने वाली बात है।
 
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