भारत से दोस्ती या दुश्मनी, चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा: लूटे हथियारों से खून-खराबे का खतरा, हिंदुओं को जमात की जीत से डर

भारत से दोस्ती या दुश्मनी, चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा: लूटे हथियारों से खून-खराबे, हिंदुओं को जमात की जीत से डर

चुनाव की तैयारियां बहुत बारीकी से की गई हैं, और सबसे बड़ा गठबंधन बनाने में BNP ने कामयाब रहा है। BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान कहते हैं कि हम भारत से अच्छी दोस्ती चाहते हैं, लेकिन भारत में कुछ स्पेशल नहीं है। समझ नहीं आता है कि शेख हसीना को पनाह क्यों दी है, इससे रिश्ते अच्छे नहीं हो पाएंगे।

BNP ने 5 अगस्त को जो वादा किया था, उस पर कुछ नहीं कर पाया। जमात-ए-इस्लामी ने पहले छात्रों के आंदोलन का इस्तेमाल किया, अब उनकी पार्टी का कर रही है। जमात ही NCP को चला रही है, वह अपनी हुकूमत कायम करके पाकिस्तानी एजेंडे को लागू करना चाहती है।

पाकिस्तान ने हम पर जुल्म किया, सताया और कभी हमें बराबर का नहीं समझा। भारत ने हमें जुल्म और गुलामी से आजादी दिलाई। आज भारत बड़ी ताकत बन चुका है।
 
मुझे लगता है कि पाकिस्तान के साथ संबंध में हमारी रणनीति बिल्कुल सही नहीं हो रही है, भारत को बहुत सोच-समझकर कार्य करना चाहिए, कोई जल्दबाजी नहीं।
 
मुझे लगता है कि BNP ने बहुत ही दूरदर्शी रणनीति बनाई है, लेकिन मैं समझ नहीं पाया कि शेख हसीना को पनाह देने से उनके वादों पर विश्वास करना सही था। अगर हम भारत के साथ अच्छी दोस्ती बनाना चाहते हैं, तो हमें अपने देश की जिम्मेदारियों को समझना होगा।

जमात-ए-इस्लामी ने पहले छात्रों के आंदोलन का इस्तेमाल किया, अब उनकी पार्टी कर रही है, और मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही खतरनाक स्थिति है। हमें अपनी सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए जागरूक रहना चाहिए। भारत ने हमें जुल्म और गुलामी से आजादी दिलाई, और अब हमें अपने देश को मजबूत बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
 
यार, यह सब बातें है कि पाकिस्तान को निश्चित रूप से कुछ चिंता होगी, लेकिन हमारी चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि क्या हम अपने देश की जमातों की जीत से खुश हैं? जमात की जीत से कुछ भी अच्छा नहीं होता, यह तो केवल एक राजनीतिक गठबंधन है। और पाकिस्तान ने हमें बहुत सारे लूटे हथियार दिए हैं, वहां के लोगों को खून-खराबे में डालने की बात करें, यह तो उनका मकसद है।

हमारे चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि हम अपने देश की राजनीति से वाकिफ न हो, और हमारे देश के लिए जो भी फैसले लेते हैं वो हमारे लोगों के लिए सही नहीं होते। पाकिस्तान के बारे में ज्यादा बात करना पड़ता है, वहां के लोगों ने हमें बहुत सारे शिक्षित और आधुनिक बनाया है।
 
मैंने भारत में ऐसा कभी नहीं देखा, जहां पार्टियाँ दूसरों को जमा करने के लिए कह रही हों और फिर संघर्ष कर रही हों। शेख हसीना को पनाह देने से पहले उन्हें अपने खिलाफ गवाहों की जांच क्यों नहीं किया गया? 🤔
 
मुझे लगता है कि भारत और बांग्लादेश के बीच क्या हो रहा है, मुझे नहीं समझ में आता। पहले हम दोस्त थे, फिर दुश्मन बन गए। अब तो यह सोच में आ गया है कि क्या हिंदुओं और मुसलमानों की जीत का मतलब हमारे देश में क्या है? मुझे लगता है कि हमें शांति और समझ की जरूरत है, न कि लड़ाई और आक्रमण। लेकिन जब भी हमारी सुरक्षा और समाजिकता को खतरा होता है, तो देश का मूड बदल जाता है। 🤔👀
 
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मैं इस चुनाव से बहुत थोड़ा परेशान हूँ। बीते दिनों भारत और पाकिस्तान की दोस्ती, बीते दिनों में बदल गयी। तो आज क्या होगा, यह समझने में खत्म नहीं होता।

पकिस्तान ने हम पर बहुत जुल्म किया, लेकिन भारत ने हमारी आजादी से उन्हें रोक दिया। आज भारत बड़ी ताकत बन गया है, और पाकिस्तान भी चुनौती प्राप्त करता रहेगा।

हमें अपनी जमात की जीत पर खुश रहना चाहिए, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमारी सरकार मुस्लिमों के लिए है, और उनको वोट देने के बाद भी हम उनकी सुरक्षा करेंगे।

लेकिन पाकिस्तान के नेताओं से हमें अच्छी दोस्ती चाहिए, खिलाफत न क्यों?
 
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