अरे, देखो यह भारत-यूरोप का पहला फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज, तो हाल ही में शुरु हुआ था, लेकिन अब ये समझ आ गया है कि यूएस में लोग इसका बहुत कम फायदा उठा रहे हैं।
यदि हमारे देश की बात करें, तो भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के पास अच्छी-अच्छी सेवाएं हैं, लेकिन विदेश में इसकी तुलना नहीं कर सकते। यूरोप में फोन कनेक्शन देना आसान है, लेकिन इंटरनेट की गति नहीं और भारत में ब्रॉडबैंड की कीमतें बहुत ज्यादा हैं।
अब इस फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज पर, यूएस के लोगों ने इसका विशेष फायदा नहीं उठाया, क्योकि वहां तो हमेशा अच्छी-अच्छी सेवाएं मिलती हैं। और अब भारत में भी इस तरह की सुविधाओं की जरूरत नहीं है, हमारे टेलीकॉम कंपनियों ने बेहतरीन सेवाएं देना शुरु कर दिया है।