अराघची ने ब्रिटेन घुमाया फोन, राजदूतों को दिखाए गए वीडियो, मैंक्रों की डिमांड... ईरान में प्रदर

भारतीय विदेश मंत्री सुष्मिता स्वराज ने गुजरात में हुए प्रदर्शनों पर अपनी बात कहकर कहा, "बीते दिनों में इज़राइल को लेकर भी कई देशों ने अपने बयानों में बदलाव देखा है। ऐसा लगता है कि उन्हें इस विषय से अलग रहने का मौका मिल रहा है।

इस बीच, ईरान के राजदूतों ने भारतीय विदेश मंत्री सुष्मिता स्वाराजी को फोन कर उनकी बात सुनने का फैसला किया है।

सुष्मिता स्वाराजी ने कहा, "भारत और ईरान के बीच राजनीतिक संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं और इन दिनों भी हमारे देशों के बीच इसी तरह के रिश्ते बने हैं। लेकिन फिर भी ऐसे में हम अपने देश को समझने की जरूरत है और सोचते हुए अपना समाधान तय करते हैं।

इस विषय पर दोनों देशों ने विश्वासपात्र दोस्त बनाए हैं और हमारे रिश्तों में पूर्ण समझदारी है। लेकिन एक बार ऐसी स्थिति आ जाती है जब तीनों कुछ अलग होते हैं।

भारत-ईरान संबंध सबसे पहले 1950 में दोनों देशों के बीच हुए प्रथम व्यापार समझौते से शुरू हुआ था। इसके बाद कई अनेक समझौते हो रहे हैं।

हाल ही में, भारत ने ईरान के लिए पहली बार एफटीएआई मार्ग पर भेजा तेल। यह एक बड़ा कदम है।
 
सब से ज्यादा अहम बात यह है कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को समझने और समझौते करने की जरूरत है। अगर हम एक दूसरे को अच्छी तरह से नहीं समझते तो फिर कैसे संबंध बनाए रख सकते हैं? 🤔

मुझे लगता है कि भारत और ईरान के बीच रिश्तों में पूर्ण समझदारी होनी चाहिए। लेकिन अगर हमारे देशों को अलग-अलग दृष्टिकोण हैं तो फिर हमें अपना समाधान सोचकर तय करना होगा। 📝

आजकल दुनिया में बहुत सारी बदलाव आ रहे हैं। हमें अपने समय के अनुसार समझौते करने और नई समस्याओं को हल करने की जरूरत है। 🌎
 
सबसे ज्यादा गुप्त मामले हमेशा साफ नहीं दिखते। यह बात ईरान के राजदूतों ने बहुत ही सही कही। भारत और ईरान के बीच तो हमेशा अच्छे संबंध रहे, लेकिन कभी-कभी ऐसी स्थिति आती है जब दोनों देशों में अलग-अलग विचार होते हैं। तो यह बात सुनने के लिए जरूर इंटरेस्टिंग है। और फिर भी हमें अपने देश को समझने की जरूरत है और अपना समाधान तय करना चाहिए। 🤔
 
🤔 ये तो देखो सुष्मिता स्वाराजी जी की बातें! उन्होंने कहा है कि भारत-ईरान रिश्ते अच्छे रहे हैं और हमेशा अच्छे रहेंगे, लेकिन फिर भी क्या हम अपने देश को समझते हैं? ये तो बिल्कुल आसान नहीं है! 🤷‍♂️

मेरी सवाल यह है कि ईरान के राजदूतों ने सुष्मिता स्वाराजी जी को फोन कर उनकी बातें सुनने का फैसला किया, लेकिन इससे हमें कोई फायदा नहीं होगा? ये तो सिर्फ एक राजनीतिक खेल है! 😒

और तेल भेजने का यह कदम? यह तो ईरान के लिए एक बड़ा मौका है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। 📉

मुझे लगता है कि हमें अपने रिश्तों को समझने और सोचते हुए समाधान तय करने की जरूरत है, न कि बस बातें करने पर ध्यान केंद्रित करना। 😊
 
सुष्मिता स्वाराजी को फोन करने की बात सुनकर अच्छी लगती है 📞💬, यह ईरान के राजदूतों ने अच्छा फैसला किया है। उनकी बात सुनने के बाद हमें यह पता चलेगा कि वे वास्तव में क्या कह रहे हैं। भारत-ईरान संबंध बहुत मजबूत है और इस पर विश्वास होना चाहिए। तेल बेचने जैसी नई गड्ढ़ी खोदने से दोनों देशों के बीच और भी गहराई आ सकती है।
 
अरे, ईरान के साथ हमारा संबंध देखकर तो खुश हूँ, लेकिन फिर भी सोचता हूँ कि क्या हमारे पास इज़राइल की तरह ऐसी शक्तिशाली अर्थव्यवस्था नहीं है? 🤔

भारत ने ईरान को तेल बेचने का एक बड़ा कदम उठाया है, लेकिन क्या हमारे पास इस तरह की स्थिति में फंस जाएँगे? 🚨

हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हमारा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है, न कि उसकी कमजोरी को बढ़ाता है। 💸
 
मुझे लगता है कि सुष्मिता स्वाराजी जी बहुत सही कह रही हैं... विश्वासपात्र दोस्त बनना और समझदारी के साथ चलना जरूरी है। लेकिन तो भारत-ईरान संबंधों में कभी-कभी कुछ ऐसा भी होता है जिसे समझने की जरूरत है। मुझे लगता है कि ईरान के राजदूतों ने सही मायने में उनकी बात सुनने का फैसला करना एक अच्छा कदम है।

तो यह तो दिख रहा है कि भारत और ईरान के बीच अच्छे रिश्ते बने हैं... लेकिन फिर भी हमें अपने देश को समझने की जरूरत है और सोचकर समाधान खोजने की कोशिश करनी चाहिए।

मुझे लगता है कि एफटीएआई मार्ग पर भेजा तेल एक अच्छा कदम है। इससे हमें ईरान से बहुत पैसा कमाने का मौका मिलेगा।
 
Back
Top