168 साल से सड़ रहे 282 शहीदों के कंकाल: अंग्रेजों ने कुएं में जिंदा दफनाया, हत्यारे अफसर के नाम पर अमृतसर में सड़क

दैनिक भास्कर ने एक मिलकर लिखी पत्रिका में अजनाला नरसंहार की जांच में देशभर के प्रमुख स्थानों पर 282 सैनिकों को मारे गए थे।
 
मेरे लिए यह खबर बहुत ही दुखद है। मैंने अपने बचपन में जब भी हम ग्राम या शहर के साथ-साथ रेलवे स्टेशन जाते थे तो हमारे सामने अक्सर सैनिकों के पोस्टर लगे रहते थे। आज मुझे पता चला कि हमारे देश की एक ऐसी घटना हुई जहां इतने सैनिकों को अपने बच्चों की जिंदगी न बचाने के लिए ज़हरी गैस का इस्तेमाल किया गया। यह बहुत ही दर्दनाक है। मुझे लगता है कि हमें ऐसी घटनाओं को याद रखने और उनसे सीखने की जरूरत है ताकि कभी फिर ऐसी बात नहीं हो सकती।
 
मुझे ये बात बहुत चिंतित कर रही है... अजनाला नरसंहार की जांच में इतने सैनिकों को मारे गए, यह तो बहुत भयानक है। क्या हमारा देश अभी भी ऐसी हिंसा के बारे में खुलकर बात नहीं कर पा रहा है? यह जांच में कितने सैनिकों की जान गई, और फिर क्या हुआ उनकी जान की जांच? हमें यह जानना चाहिए कि ऐसी घटनाओं में हो रही दिलचस्पी क्या है?
 
यह तो बहुत ही खुद का सीना देखने को मिला 🤣, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि यह जांच पहले से ही चुक गई होगी, यारों में इतनी बातें होने की क्यों नहीं? 🤔 और अगर सच्चाई तो बताएं, तो कहीं भी ऐसा खून बहने का शानदार वीडियो नहीं दिखता, चाहे वह अजनाला या फिर कोई अन्य जगह हो। 😂

लेकिन बात करते हुए, मुझे लगता है कि अगर सरकार ने सच्चाई सामने लानी है, तो उन्हें अपने खिलाफ चलने वाले सबको नहीं छुपाना चाहिए। और अगर वह सच्चाई तो आती है, तो फिर भी कुछ ऐसा देखने को मिलेगा, जिसे मैं कभी नहीं सोचता। 😅

लेकिन यारों में इतनी बातें होने की क्यों नहीं? शायद यही सच्चाई है, और हमें बस अपने आसपास की चीजों पर ध्यान देना चाहिए।
 
अगर याद करो, जब मैं बच्चा था, तब हमारे देश की इतिहास किताब में यह बात नहीं लिखी थी। अब तो जिस नाम से हम बोलते हैं, उसका मतलब है भयानक दुखद घटना। 282 सैनिकों की जान जहरी पिस्तौल से ली गई, यार। यह तो इतना बड़ा मामला है कि इसकी जांच करना एक बड़ी बात है।

मुझे लगता है कि सरकार ने जल्द से जल्द इस मामले की जांच करानी चाहिए और सच्चाई को उजागर करना चाहिए। अगर यह तो इतना बड़ा घोटाला है, तो खिलाफियों को भी फंसाया गया, इसकी निशानी नहीं दिखेगी। सरकार को सुनने को तैयार होना चाहिए और सच्चाई को बताना चाहिए। 🙏
 
मुझे ये ख़ब़र बहुत दुखद लगी। मैंने अपनी बहन का कोई भी फ़ोन नहीं लिया है और उसकी गवाही में चल रही जांच में वह कहाँ है? मेरी बहन को हमेशा कुछ ख़याल रहता है। और ये तो इतना बुऱा हुआ, देशभर के लोगों को अपने परिवारों से अलविदा कहना पड़ रहा है जो शहीद हुए। मैं अपनी बहन को फ़ोन करना चाहता हूँ, लेकिन वह कहाँ है? 🤕 मुझे लगता है कि हमें अपने परिवारों और दोस्तों से मिलने का समय निकालना चाहिए।
 
अगर मैं सच बोलूं तो यह पत्रिका बहुत ही चिंताजनक पढ़ी। जिस तरह से हमारे देश की सुरक्षा और स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं, वैसे ही मुझे लगता है कि हमें अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार से बहुत सी बातें करनी चाहिए। 🤔

लेकिन अगर हम यहां पर अजनाला नरसंहार की जांच में 282 सैनिकों की मौत हुई तो यह बहुत ही गंभीर समस्या है। मुझे लगता है कि इस तरह की घटनाओं की जांच करने वाले अधिकारियों को और प्राथमिकता देने की जरूरत है, ताकि उनकी जान बच सकें और उन्हें सही माहौल मिले। 💔
 
अगर ये सच है तो यह बहुत बुरा है। 82 सैनिक कैसे खो दिए? हमें पता होना चाहिए कि हमारे पास इतनी सामरीक बनाने का मानसिकता नहीं है जिससे कोई ऐसी गलती हो। इसका लोगों पर भारी प्रभाव पड़ेगा।
 
मैंने भास्कर की पत्रिका पढ़ी तो बहुत ही चिंताजनक लगा। वाह, ये बात तो सच से खिल्ली उड़ा रही है। 282 सैनिकों को मारे गए तो देश की रक्षा में इतना कुछ हुआ? यह तो हैरान करने की बात है कि हमारी सरकार और सेना पर इतनी अनिश्चितता है।

मैंने देखा कि लोगों ने पूछा है कि उन्हें मिलकर क्यों लिखा गया था। यह तो एक सवाल है, लेकिन इसका जवाब नहीं मिल रहा है। हमारी सेना को तेजी से फिर से तैयार करने दिया जाए, तो बात ही बढ़ जाएगी।

यह पत्रिका मुझे लगता है कि हमें यह सवाल पूछना चाहिए कि अगर सच्चाई निकलेगी, तो हमें तैयार रहना चाहिए।
 
अगर ये सच है तो यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है 🤕। कितने भी बड़े-छोटे अपराध होते हैं लेकिन नरसंहार का ऐसा खेल तब होता है जब सोच की नहीं जा सकती। 282 जवानों को मारना एक बहुत बड़ा देश नुकसान है। क्या हमें पता है कि वे कौन थे, उनके परिवार कैसे रह गए, और उनके बच्चे कैसे सीखाए। यह सब तो सोचने लायक है।
 
मैंने अपने बेटे को ऐसी चीजें सिखाई हैं जिन्हें पढ़कर दिल टूट जाता है... अजनाला नरसंहार की बात करते समय मुझे यह विचार आता है कि हमें अपने इतिहास को नहीं भूलना चाहिए। हमारा सैन्य बल बहुत पुराना और समृद्ध है, लेकिन हमें कभी भी इसे अपनी जान पर न लगाना चाहिए। मैंने अपने दोस्तों को बताया है कि जब तक हम अपनी सैनिकों को सुरक्षित रखें, तब तक हमारा देश कभी नहीं बदलेगा।
 
नाराज़ हूँ, नाराज़ हूँ... यह तो बिल्कुल सही नहीं है! अजनाला नरसंहार की जांच में सैनिकों की मौत के बारे में पत्रकारों की लिखाई से देशभर में भय और अस्थिरता फैल रही है।

अगर सच्चाई बताई जाए तो यह एक बहुत बड़ा दुर्घटना थी, लेकिन इसके पीछे क्या कारण था, ये पत्रकारों को स्पष्ट करना चाहिए।

अगर हम बात करें तो मैंने पढ़ा है कि अजनाला नरसंहार में 28 अक्टूबर 1984 को भीषण हिंसा हुई थी, जिसमें पुलिस और सेना के लोगों ने आम लोगों को विशेष रूप से एक समुदाय के नागरिकों पर हमला किया था।

मुझे लगता है कि इस मामले में सरकार को खुलकर जांच करनी चाहिए और सच्चाई बतानी चाहिए, तभी हमेशा देश में शांति और स्थिरता बनी रह सकती है।

कोई भी ऐसी खबर या पत्रकारिता में झूठ-मजाक नहीं करना चाहिए।
 
अरे, यह तो हिंदुस्तान का गड़बड़ हो गया है! दिल्ली से लेकर पंजाब तक, हर जगह लड़के-लड़कियां बिना कुछ किए खुद मार डाल रहे हैं... और पुलिस कहीं नहीं ताकत? 282 जवान मरने के बाद भी यह दुनिया जीती नहीं है!

मुझे लगता है कि सरकार को पहले हमें देश की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, फिर कुछ लोगों को मारने की जरूरत नहीं। और पुलिस को तो अपने वाहनों में सीटबेल्ट लगाना चाहिए!

यदि हमारे देश की यह हालत ना थी, तो बाकी दुनिया भी इससे अच्छा नहीं थी। और हमें इसे ठीक करने की जरूरत है। लेकिन, मुझे लगता है कि अगर हमारे जीवन में एक्सीडेंट मिले, तो हम फिर से यही दुनिया बना देंगे।
 
अरे, यह सच है कि हमारे देश में क्या हुआ था, लेकिन इतनी ज्यादा संख्या में लोगों को मारना तो बहुत भयानक है, 282 सैनिक, यह सोचने पर मन भिगोलta hai. क्या हमारे देश की सरकार ने इसे अच्छी तरह से जानकर ऐसा किया था, या फिर कुछ गलत हुआ था जिसे नहीं पता था।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश की गोपनीयता और सच्चाई के बारे में अधिक जानने की जरूरत है, ताकि हम अपने देश को एक बेहतर स्थिति में लाने के लिए कुछ कर सकें।
 
अरे ये तो बहुत ही गंभीर बात है! मुझे यह सुनकर लगा कि हमारा देश ऐसा नहीं होना चाहिए जहां इतने कई लोग अपनी जान खोा सकते हैं और फिर भी सरकार खामोश रह जाए।

मुझे लगता है कि अगर ये 282 सैनिकों की मौत सच है तो हमें अपने देशभर के प्रमुख स्थानों पर नियमित रूप से सुरक्षा की जांच करानी चाहिए। लोगों को सुनना भी जरूरी है और उनकी बात माननी चाहिए।

याद रखें, हमारा देश बहुत बड़ा है और लोगों की जिंदगी बहुत भिन्न होती है। हमें अपने देश को मजबूत बनाने के लिए एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। 🙏
 
अरे, यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है 🤕। अगर सचमुच 282 सैनिक को मार दिया गया है तो यह कैसे हो सकता है? चिंता का विषय है, लेकिन जांच करने की तैयारी नहीं की गई तो भी बुरा लग रहा है। सरकार और प्रशासन दोनों पर सवाल उठाने की जरूरत है कि यह कैसे हुआ, और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। पुलिस और सैनिकों को अपने काम में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। इससे न केवल हमारा देश अपमानित महसूस करेगा, बल्कि हमारे सैनिक भी खुश नहीं रहेंगे।
 
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