यूपी, बिहार, बंगाल से हैं अजनाला के 282 शहीद: DNA और दांतों से खुलासा, तमिलनाडु-कनाडा से परिवार सामने आए; सरकारें क्यों सोई हैं

आज भारतीय इतिहास का एक नया मोड़ आया है। पंजाब के अजनाला में 282 शहीद सैनिकों के कंकाल निकलकर सामने आ गए हैं। यही नहीं, इनमें से जांच के दौरान पता चला है कि ये सैनिक उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से थे।

1857 क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले इन सैनिकों को उस समय अंग्रेज अधिकारियों ने जिंदा दफनाया था। उनकी आज तक पहचान नहीं हो सकी। यह एक बहुत ही दर्दनाक और बेचैन घटना है।

कुछ परिवारों ने फोन-मेल किए, लेकिन सुरक्षा के कारण अभी तक इन्हें संपर्क करने में दिक्कत हो रही है।

सुरेंद्र कोछड़ नाम के एक व्यक्ति ने इस नरसंहार को इतिहास के पन्नों से ढूंढा और फिर कुएं की खुदाई करवाकर इसका पता लगाया।

इस कुएं में 1857 क्रांति के समय मरे हुए ये सैनिक थे। 2023 में सर्दियों की रात हुई, जिसमें एक ईमेल आया, जिसमें लिखा था कि उसके दादा ब्रिटिश राज में सैनिक थे, और उन्हें अंग्रेज सरकार ने वारंट भी निकाला।

ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, ‘मुझे जलियांवाला बाग हत्याकांड की जानकारी थी, लेकिन अजनाला केस कभी नहीं सुना था। अजनाला में कंकाल मिले, तो जांच की जिम्मेदारी अलग-अलग टीम को दी गई। हम लोग हैदराबाद के साथ मिलकर काम करने लगे।’

अंग्रेजों ने इन कंकालों पर चूना और कोयला डाला, जिससे उनके डीएनए खराब हो गए।

जांच के बाद पता चला कि ये सैनिक गंगा घाटी के आसपास रहने वाले थे। 26वीं नेटिव इन्फैंट्री बटालियन के सैनिक भी इनमें शामिल हो सकते हैं।

इन शहीदों के परिवारों के लिए इंसाफ होना एक बड़ी चुनौती बन गई है। उन्हें अपने पूर्वजों की पहचान मिलना और उनका सम्मान मिलना भी अब एक सपना लगता है।
 
बस पुरानी बात तो यही है... क्या याद होगी? 1857 क्रांति के समय ऐसे ही बहुत से लोग जिंदा दफनाए गए थे, और आज उनकी पहचान मिलने की उम्मीद है। लेकिन क्या भारत सरकार अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने में सक्षम है? यह सवाल हमेशा से रहा है, लेकिन इसका जवाब अभी तक नहीं मिला है...
 
ਅੰਗਰੇਜ਼ਾਂ ਦੁਆਰਾ ਬ੍ਰਿਟਿਸ਼ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਘਾਟੀ ਨਾਲ ਹੋਏ ਇਸ ਨਰਸੰਹਾਰ ਨੂੰ ਪੜ੍ਹਦੇ ਤਾਂ ਮੈਨੂੰ ਬਹੁਤ ਡਿੱਗਵਾਂਦਾ ਹੈ।

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ਅੰਜਣਸ਼ਾਹ ਪੇਂਟਾਨਜ ਨੇ ਲਿਖਿਆ, "1857 ਦੀ ਕ੍ਰਾਂਤੀ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ।"

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ਜਿਸ ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ 282 ਸ਼ਹੀਦ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਹੇ ਹਨ, ਉਸ ਪਿੰਡ ਦਾ ਨਾਮ ਕਈ ਪਲਟ ਆਉਂਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।

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अजनाला में शहीद सैनिकों के कंकाल निकलने से जिंदगी की गहराई दिखने लगी है 😔। उन्हें अपने पूर्वजों की पहचान मिलना और उनका सम्मान मिलना अब एक बड़ा सपना लगता है। यह एक बहुत बड़ी दर्दनाक घटना है जिस पर हमें खेद होना चाहिए। 🤕
 
यह तो बहुत दुखद बात है 🤕। मैंने सुना है कि इन शहीद सैनिकों को पहले अंग्रेज अधिकारियों ने जिंदा दफनाया था, लेकिन अब उनकी पहचान हो गई है। यह तो बहुत दर्दनाक है, हमें यह समझना चाहिए कि ये सैनिक अपने देश और राष्ट्र की सेवा करने आए थे। अब उनके परिवारों को इंसाफ मिलना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन मैं उम्मीद करता हूँ कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ इनकी मदद करेंगी।
 
बुरी तरह की गल्लत हुई है यहां। 1857 क्रांति के बाद भी भारतीय सरकार ने अपने इतिहास को छुपाया है। यह तो एक बहुत बड़ी मुश्किल है, लेकिन अब हमें सोचना होगा कि इस तरह के अपराधों को कैसे रोका जा सकता है? पुलिस और सरकार की दिक्कतें कितनी हैं, यह तो समझ में आता है। लेकिन अब भी ऐसे कई केस हैं जहां सुरक्षा की बात निकलने से पहले सब कुछ दब जाता है।

अगर हम अपने इतिहास को खोलते हैं और सच्चाई बताते हैं, तो फिर भी इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं।
 
ये तो सच्चाई है 🙅‍♂️, हमारे देश की गहरी जड़ों में भी कई ऐसी बातें छुपी हुई हैं जिनकी खोज करने के लिए हमें बहुत साहस और धैर्य की आवश्यकता होती है। ये अजनाला नरसंहार एक दर्दनाक घटना है, जिसे हमें इतिहास के पन्नों में नहीं छुपाया जा सकता।

इन शहीदों को उनके परिवारों को पहचानने और उनकी सम्मानित करने के लिए हमें एक साथ मिलकर काम करना होगा। तो आइए, हम सबको इस चुनौती को स्वीकार करना होगा और देश की सच्चाई को खोजने के लिए अपना सहयोग देना होगा।
 
बिल्कुल, यह एक बहुत ही दुखद घटना है... 🤕 लेकिन क्या हमें यह नहीं चिंता करना चाहिए कि ये सैनिक 1857 क्रांति में शामिल थे, तो फिर उनकी पहचान निकलने में इतना समय लग गया? 🤔

और अब जब उन्हें पहचान लिया जा रहा है, तो उनके परिवारों को इंसाफ मिलने में इतना समय लग रहा है, तो क्या हमें इसकी जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए? 🤷‍♂️

लेकिन फिर भी, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना है... और हमें इसे सुनना चाहिए, ताकि हम ऐसी बातों को कभी नहीं देखें जो मानवता को दर्क बनाएं। 💔
 
ये बहुत ही गहरी जिम्मेदारी है सरकार द्वारा इन शहीदों के पैरिवारों के साथ काम करने की। हमें अपने इतिहास को समझना चाहिए और उसी के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।

मुझे यह सोचकर बहुत दुःख होता है कि शहीदों के परिवारों को उनकी पहचान नहीं मिल पाई। ये एक बड़ा न्याय होगा अगर सरकार और जानकारी वाले लोग इन्हें सही से पहचानें और सम्मान करें।

किसी भी घटना के पीछे कई कारण होते हैं, लेकिन हमेशा इसकी सच्चाई खोजने की दिशा में बढ़ना चाहिए।
 
मुझे यह जानकारी बहुत दुखद है 🤕। 1857 क्रांति के बाद भी हमारे देश में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं जो हमारे इतिहास को दर्दनाक बनाती हैं। यह सोचकर मुझे बहुत उदासी महसूस होती है कि हमारे पूर्वजों की पहचान तक पहुंचना इतना मुश्किल है। शहीदों के परिवारों को सम्मान और इंसाफ मिलना चाहिए, यही सच्चाई है।

मैं उम्मीद करता हूं कि इस घटना से हमें सबक मिलता है और हम अपने देश के इतिहास को समझने की कोशिश करते हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों से निवेदन है, शहीदों के परिवारों को उनके पूर्वजों की पहचान मिलने का हर संभव प्रयास करें।
 
अजनाला नरसंहार का यह खुलासा बहुत दर्दनाक है 🤕। इतिहास की सच्चाई कभी-कभी इतनी दुखद और दर्दनाक होती है, जिससे हमें रोपने की जरूरत है। इन सैनिकों ने अपने पिता पुत्र की लड़ाई लड़ी थी, लेकिन उनकी मातृपिता आज भी इंसाफ नहीं पा सकती है 🙏। यह एक बड़ा सवाल उठाता है, कि इतने समय बीत गए, फिर भी हमें अपने इतिहास को सही ढंग से समझने की जरूरत है।
 
यह तो बहुत ही दुखद बात है... 😔 आगरे में 282 शहीद सैनिकों के कंकाल निकलकर सामने आए हैं और यह जानकर मुझे खेद हो रही है कि उनकी पहचान नहीं हुई थी। क्या आज कल भारतीय इतिहास की ऐसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि हमारा इतिहास कितना दर्दनाक और गहरा है। जिस तरह से उन्हें जिंदा दफनाया गया था, वैसे ही उनकी आज भी पहचान नहीं हो सकी। यह बहुत ही दुखद है कि परिवारों ने फोन-मेल किए, लेकिन सुरक्षा के कारण अभी तक इन्हें संपर्क करने में दिक्कत हो रही है।
 
बड़ा शोक है यही पर, पुराने दिनों को याद करना ही नहीं बल्कि उसके सबक लेने की जरूरत है। 1857 क्रांति में जो हुआ था, वह आज भी हमारे सामने खड़ा है, और यह एक बहुत बड़ी सवाल उठाता है कि इतिहास इतना ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है? 🤕

यदि यह शहीदों को पहचानने में समस्या है, तो सरकार से उनके लिए पुनर्विवेकन की मांग करनी चाहिए। हमारे इतिहास में ऐसी कई घटनाएं हैं जिनके बारे में हमें पता नहीं है। और अगर ऐसा हुआ, तो इसके बाद क्या होगा? 🤔

मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी शिकायत है, और हमें अपनी सरकार से जवाब देना चाहिए। हमें उन्हें बताना चाहिए कि इतने सालों बाद भी उनके पूर्वजों को पहचान नहीं मिली। यह एक बहुत बड़ा सवाल है और इसका जवाब जरूर मांगना चाहिए। 💪
 
Wow 😱 यह तो बहुत भयानक है जैसे सैनिक मर चुके और अभी भी उनकी पहचान नहीं मिली। सिर्फ किसी कुएं में खुदाई करके पता चल गया। परिवारों के लिए इंसाफ होना एक बड़ा कर्ज है।
 
तो ये बात बिल्कुल सच है कि अंग्रेजों ने इन शहीदों को जिंदा दफनाया था, और उनकी पहचान नहीं हो सकी। यह तो एक बहुत ही दर्दनाक और बेचैन घटना है। लेकिन आज हमारे पास अब तक की सबसे बड़ी खोज हुई है और ये सब कुछ सुरक्षित मिल गया है।

मुझे लगता है कि इन शहीदों को सम्मान देने का समय आ गया है, लेकिन हमें उनकी पहचान मिलने के लिए इंसाफ होने की उम्मीद भी करनी चाहिए।

अगर हमारे पास इतनी जानकारी होती, तो शायद इन शहीदों को उनका योगदान मिल पाता। लेकिन यह सब कुछ सुरक्षित हुआ है, और अब इन्हें सम्मान देने का समय आ गया है।

मैं खुश हूं कि हमारी जानकारी ने इन शहीदों को पहचानने में मदद की।
 
यह तो बहुत दर्दनाक है... 1857 क्रांति के बाद भी इतने ज्यादा लोगों को फास कर दिया गया था। मैं समझ नहीं पाता कि हमारे सिर्फ इतिहास को याद करना है, न ही वहां से सबक सीखना।

इन शहीदों के परिवार की मदद करने के लिए सरकार को बेहतर मिलाना चाहिए, ताकि वे अपने पूर्वजों की पहचान कर सकें और उनका सम्मान मिले। यह एक बड़ी चुनौती है, लेकिन हमें उम्मीद करनी चाहिए।

कोयला और चूने से डीएनए खराब होना, तो बस इतना ही नहीं... इन शहीदों के परिवार को यह जानकर मुश्किल होगी, लेकिन फिर भी हमें उनकी मदद करनी चाहिए।
 
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