TOP News: कोहरे की चादर में लिपटा उत्तर भारत; ट्रंप बोले- ईरान से व्यापार करने वाले देश देंगे 25 प्रतिशत टैरिफ

उत्तर भारत में कोहरे की गहराई में घुसपैठ, अमेरिका ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों को टैरिफ बढ़ाने पर मजबूर कर दिया। इस तेज़ गतिविधि ने दुनिया भर में आक्रोश फैलाया है। प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक छोड़कर सेवा तीर्थ-1 में खलल बनाने वाले एक बड़े बदलाव आ रहे हैं।

उत्तर भारत में बर्फीली हवाएं और घने कोहरे ने जनजीवन और यातायात पर पूर्ण प्रभाव डाला है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में रेड अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री और गुरुग्राम में 0.6 डिग्री दर्ज हुआ, जिससे जनजीवन और यातायात प्रभावित रहा। प्रयागराज में मकर संक्रांति को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं।

संसद में भी बड़ा बदलाव आ रहा है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल पर संसद की कार्यवाही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 22 भाषाओं में देखी जा सकेगी। राजनीतिक मोर्चे पर ईडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा हुआ है। व्हाइट हाउस ने कहा कि कूटनीति प्राथमिकता है, लेकिन सैन्य विकल्प खुले हैं। इसी बीच ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन और उग्र हुए हैं। दक्षिण एशिया में बांग्लादेश से हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें चिंता बढ़ा रही हैं।

वहीं, अमेरिका में टैरिफ नीति पर सुनवाई को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गंभीर आर्थिक संकट की चेतावनी दी है।
 
कहरे में घुसपैठ कर रहा अमेरिका, ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ाने को लेकर तो हमें बिल्कुल चिंतित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें यह पता लगाना चाहिए कि अमेरिका क्यों ऐसा कर रही है और इसके पीछे क्या मकसद है।
 
क्या तो अमेरिकी-ईरान तनाव में फंस गया है🤯, पहले ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ाने की बात कहा जाता है, लेकिन अब वही अमेरिका से टैरिफ बढ़ाने को मजबूर कर रहा है… तो कोई समझ नहीं आ रहा है कि यह सब क्यों हो रहा है? 🤔
 
कोहरे में बैठकर भी नहीं सो रहा तो? 😒 प्रधानमंत्री सेवा तीर्थ-1 में खलल बनाने वाले बदलाव आ रहे हैं, मतलब कि अब मिलिंग चैट के लिए भी समय निकल जाएगा।

दिल्ली में रेड अलर्ट, प्रयागराज में मकर संक्रांति, आम तौर पर सर्दियों में बुरा लगता है, लेकिन यह तो खूबसूरत दिख रहा है 🌡️। और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संसद की कार्यवाही 22 भाषाओं में देखी जाएगी, तो लगता है लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपनी गद्दी बचाने की बहुत सोच ली।

अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा हुआ, यही तो आम तौर पर दुनिया के रिश्तों में मुश्किलें पैदा करता है 😬। और दक्षिण एशिया में बांग्लादेश से हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें, तो लगता है भारतीय राजनेताओं को अपनी दूरदर्शिता बढ़ाने का समय आ गया है।
 
क्या ये सोच रहे थे कि अमेरिका ईरान से व्यापार करने वाले देशों को टैरिफ बढ़ाने पर मजबूर कर देगी, लेकिन भारत ने तुरंत अपनी स्थिति से बात नहीं की 🤔। हमें पता होना चाहिए कि अमेरिकी-ईरान तनाव में बढ़ोतरी होते ही हमारे देश पर प्रभाव पड़ता है। और अब तो उत्तर भारत में बर्फीली हवाएं और घने कोहरे ने जनजीवन और यातायात पर पूर्ण प्रभाव डाला है ⛈️। हमें संसद में बदलावों की बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने देश की सुरक्षा और आर्थिक विकास को पहले प्राथमिकता देनी चाहिए 🙏

तो अगर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ता है, तो हमें अपने देश में आर्थिक निर्णयों पर सावधानी बरतनी चाहिए और कूटनीति पर ध्यान देना चाहिए 📈। और अगर सीबीआई जांच ममता बनर्जी पर चल रही है, तो हमें अपने राजनीतिक मोर्चे पर सहयोग करना चाहिए, न कि विरोध करना 😊
 
कलेज़ के छात्रों का यह नया मोबाइल फ़ोन विचार मुझे बहुत पसंद आया है 🤩। लेकिन आज तो भारत में साफ हवाएं न होने से दिल्ली में जनजीवन बाधित हो गया है। क्या हमारी सरकार इस मुद्दे पर कुछ काम कर सकती थी?

सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि लोकसभा की कार्यवाही में बदलाव आ रहा है, जहां संसद में 22 भाषाओं में सभी व्याख्याएँ हो सकती हैं। यह एक अच्छा बदलाव होगा, लेकिन देखना रोचक है कि इसके पीछे क्यों इस तरह का फैसला किया गया।

और ईडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। यह तो सरकार के लिए एक बड़ा मुद्दा होगा। हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है इस मामले को।
 
क्या ये दुनिया कैसे चल रही है? पहले तो ईरान से व्यापार करने वाले देशों को टैरिफ बढ़ाने पर मजबूर किया जाता, फिर अमेरिका ने भी ऐसा ही किया है। और अब ये कैसे बढ़ता जा रहा है? किसी भी तरह से तेज़ गतिविधि में लिप्त दुनिया भर में आक्रोश फैल गया है।
 
क्या यह धीरे-धीरे जैसे ही तेज़ गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं और हमारे आसपास इतनी चरम स्थिति में फंसते जा रहे हैं! कोहरे की गहराई में घुसपैठ, व्यापार कराने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ाना, जनजीवन और यातायात पर पूर्ण प्रभाव डालने का यह एक बड़ा बदलाव है... लेकिन क्या हम इस पर सोचने में थक गए हैं? 🤔

संसद में भी ऐसे बहुत सारे बदलाव आ रहे हैं जैसे कि 22 भाषाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके कार्यवाही देखी जाएगी। लेकिन क्या यह हमें वास्तविक मुद्दों को सुलझाने की ओर ले जाएगी? और बंगाल की मुख्यमंत्री पर सीबीआई जांच... नज़दीक से देखें, यह एक बहुत बड़ा प्रयास है लेकिन यह तय नहीं है कि यह हमें कहाँ ले जाएगी। 🚨

अमेरिका-ईरान तनाव और दक्षिण एशिया में बांग्लादेश से हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों... यह एक बहुत बड़ा विषय है जिस पर हमें खुद को सोचने की जरूरत है। शायद हमें इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ खड़े होने की जरूरत है, न कि अलग-अलग दिशाओं में चलने की। 🌎
 
अरे भाई वाह! अमेरिका ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ाने का यह फैसला तो मुझे थोड़ा आश्चर्यकारी लग रहा है। लेकिन जैसे जैसे ताजा खबरें आती हैं तो लगता है कि ऐसे कई बदलाव आ रहे हैं और हमें तैयार रहना चाहिए।
 
क्या यह तेजी से बढ़ती तनाव भारत के पास हमारे सुरक्षित भविष्य को खतरे में नहीं डालेगा? 😬 अमेरिका-ईरान की तनावबाजी ने दुनिया भर में आक्रोश फैलाया है, लेकिन भारत को अपनी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना होगा। 🙏

उत्तर भारत के ठंडे तापमान ने जनजीवन और यातायात पर प्रभाव डाला, लेकिन हमें इसे एक अवसर मानते हुए अपनी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाना चाहिए। 🌸

संसद में बड़े बदलाव आ रहे हैं, और यह हमारे देश के भविष्य को आकार देने वाली निर्णयों पर आधारित हैं। हमें इन बदलावों से जुड़कर अपना भागीदारी का प्रदर्शन करना चाहिए। 🤝
 
अमेरिका-ईरान तनाव में फंसने से पहले, हमें यह तय करना होगा कि ये क्यों हुआ। ईरान को अपने व्यापारिक जीवन में बहुत ही सक्रिय देशों के रूप में देखने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अमेरिका ने ऐसा नहीं छोड़ा। अब तो टैरिफ बढ़ाने से ईरान का व्यापारिक जीवन पूरी तरह से खराब हो गया है। यह तय करना भी मुश्किल है कि दुनिया की इस तरह बड़ी और शक्तिशाली आर्थिक गतिविधि को कैसे नियंत्रित किया जाए।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है! प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ-1 में खलल बनाने वाले लोगों को निकाल लेना जरूरी है। उत्तर भारत में कोहरा बिल्कुल भी नहीं आया, बस थोड़ी बर्फीली हवाएं थी। लेकिन दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में रेड अलर्ट जारी करने से क्या फायदा? और प्रयागराज में मकर संक्रांति के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन कोई जानकारी नहीं दे रहे।

कई बार सरकार हमेशा कुछ नया-नया करने लगती है, और ये नई चीजें हमेशा एकदम सही नहीं साबित होती। तो चलिए, सरकार को अपने निर्णयों पर विश्वास करें, और लोगों को भी अपने दम पर कुछ करने का मौका दें।
 
क्या यह सच है कि अमेरिका तभी जब तकी हुई तैरिफ बढ़ा देगी? 🤔 मुझे लगता है कि ये दुनिया भर में नुकसान पहुंचा रही है, लोगों को घर पर बैठकर भी कोई फायदा नहीं हुआ। और प्रधानमंत्री कार्यालय में बड़े बदलाव आ रहे हैं, मुझे नहीं पता कि कौन सा बदलाव अच्छा है और कौन सा खराब? 🤷‍♂️
 
क्या कभी सोचोगे कि हमारे पास इतनी शक्तिशाली तकनीकें हैं कि हम संसद में भाषाओं को 22 पर लाने की बात कर सकते हैं और फिर भी दिल्ली में कोहरा आ जाए तो हमें खाली हाथों खड़े रहना पड़ता है 🤔। यह तो एक बहुत बड़ा बदलाव है, लेकिन जब तक हमारे पास स्वच्छ ऊर्जा और स्वच्छ वातावरण का मॉडल नहीं बनता, तब तक हमें इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

क्या हमें यह सोचने की जरूरत है कि हमारी सरकार और नेता किस तरह की नीतियां लेकर आ रहे हैं जिससे हमारे पास इतनी शक्तिशाली तकनीकें उपलब्ध हो सकें, लेकिन जब वे इस शक्ति का उपयोग करने के समय तैयार नहीं होते, तो उनका यही परिणाम निकलता है।
 
यह तेज़ी बहुत बड़ी बात है अमेरिका की, ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ाने की। यह पूरी दुनिया में आक्रोश फैला रही है। लेकिन हमारी सरकार को तय करना होगा कि हम किस तरह से निपटें। कोहरा बहुत गहरा हुआ है, यह दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में जान-माल पर पूरा प्रभाव डाल रहा है।

अब तो रेड अलर्ट जारी हुआ है और जनजीवन, यातायात को बहुत प्रभावित कर रहा है। प्रयागराज में मकर संक्रांति के लिए व्यापक तैयारियां हो रही हैं। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि संसद में बड़े बदलाव आ रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कार्यवाही 22 भाषाओं में देखी जाएगी।

मुझे यह सवाल लगता है कि ईडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच की मांग कैसे लेकर सुप्रीम कोर्ट गया। और अमेरिका-ईरान तनाव कैसे बढ़ रहा है। हमें यह समझना होगा कि दुनिया की इस गतिविधि को हमें कैसे निपटना होगा।
 
क्या ये अमेरिका की खिलाफत है कि वे ईरान को धमकाते हैं और फिर टैरिफ बढ़ाते हैं? पहले तो कहा था कि कूटनीति प्राथमिकता है, लेकिन अब सैन्य विकल्प खुले हुए हैं। यह तो एक दुष्चक्र लगता है। और ये तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है?
 
Back
Top