Supreme Court: 'बंगाल में SIR को जानबूझकर रोका जा रहा', EC ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया अतिरिक्त हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई है, जहां चुनाव आयोग (ईसीआई) ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को जानबूझकर रोकने की कोशिश की जा रही है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कराया है, जहां उन्होंने बताया है कि एसआईआर को रोकने की कोशिश में राज्य सरकार, सत्तारूढ़ दल के नेता, पार्टी कार्यकर्ता और अन्य लोग शामिल हैं।

आयोग ने कहा है कि एसआईआर में बाधा डालना गंभीर सांविधानिक चिंता का विषय है, और यह प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की जा रही है। आयोग ने बताया है कि कई जगहों पर धमकी, हिंसा और जबरन रुकावट की घटनाएं हुईं, जिनमें दफ्तरों में घुसना, सरकारी कागज़ फाड़ना और मतदाता फॉर्म जलाना शामिल है।

आयोग ने कहा है कि राज्य सरकार ने चुनाव आयोग के निर्देशों की खुली अवहेलना की है, और कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। आवश्यक अधिकारियों की तैनाती भी नहीं की गई है।

आयोग ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेताओं के भड़काऊ बयानों से स्थिति खराब हुई है, और अधिकारियों को खुलेआम नाम लेकर धमकाए जाते हैं। आयोग ने कहा है कि एसआईआर को पटरी से उतारने की साजिश में मैदानी अधिकारियों को आर्थिक और व्यक्तिगत रूप से परेशान करना भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह प्रक्रिया को जानबूझकर रोकने की कोशिश करना गंभीर सांविधानिक चिंता का विषय है, और वह इस प्रक्रिया में किसी भी तरह से बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! एसआईआर को रोकने की कोशिश में राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल के लोग क्या कर रहे हैं? यह तो बिल्कुल भ्रष्टाचार की तरह दिख रहा है! आयोग ने सही कहा है, कि एसआईआर में बाधा डालना गंभीर सांविधानिक चिंता का विषय है। और यह तो सुप्रीम कोर्ट के लिए भी एक बड़ा काम है कि उन्होंने इस प्रक्रिया में किसी भी तरह से बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा। 🙏🏽👍

मुझे लगता है, कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए, और हमें उम्मीद है कि आयोग और सुप्रीम कोर्ट इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक चलाएंगे। यह तो एक बड़ा मौका है, जिस पर हमें अपने देश की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए उपयोग करना चाहिए। 💪🏽
 
ज्यादातर लोग तो ईसीआई की जांच का नाम नहीं लेते हैं और फिर जब वे ऐसा करते हैं तो सबको बेचैनी होती है… 😒 चुनाव में मतदाताओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, और अगर कोई राजनीतिक दल या उसके नेता यहां तक कि जांच के खिलाफ भी खड़े हो गए तो हमारे देश की संस्था गंभीर चिंतित होनी चाहिए।

क्या लोगों को पता है कि सुप्रीम कोर्ट का रुझान इतना बदल गया है? अब उन्हें भी कुछ नहीं कहना है। पहले कभी मतदाताओं के अधिकार पर बहुत ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब यह तो सब कुछ के बाद में देखा जाता है।

लोकतंत्र में जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता और भाषण की स्वतंत्रता नहीं बची, तो हमारा देश कैसे आगे बढ़ेगा? 🤔
 
मैं तो बस यकीन है कि एसआईआर को रोकने की हर कोशिश फेल होने वाली है। यह पूरा मामला चुनाव आयोग के लिए बहुत बड़ा जिम्मेदारी है, और वह इस पर कोई भी ध्यान नहीं छोड़ेंगी। मुझे लगता है कि राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल ने बस अपने खेल को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट तो फिलहाल उनकी सभी कोशिशों का मुकाबला कर लेगी।

मुझे लगता है कि इस मामले में चुनाव आयोग की बात सही है, और सत्तारूढ़ दल के नेताओं को अपने बयानों से सावधान रहना चाहिए। जानबूझकर मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश करना बहुत ही गंभीर अपराध है।

इस मामले में हमें उम्मीदें रखनी चाहिए, और सुप्रीम कोर्ट की बात पर भरोसा करना चाहिए।
 
राज्य चुनाव में क्या अटकलें थी, मुझे लगता है कि आरोप लगाने से पहले और बाद में जो सब हुआ, वो बहुत अजीब है। और यह तो सुप्रीम कोर्ट में चली गया, यार तो अब तय हुआ है कि आरोप लगाए गए सब सच हैं। लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा सब क्यों हुआ? और सत्तारूढ़ दल के नेताओं को भड़काऊ बयान देने की जिम्मेदारी कौन उठाता है? मैं तो समझ नहीं पा रहा हूँ।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ी बात है कि चुनाव आयोग ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की जा रही है। यह तो एक बहुत बड़ा मुद्दा है, जिसमें चुनावी निष्पक्षता और सांविधानिक मूल्यों पर सवाल उठाया गया है।

मुझे लगता है कि एसआईआर की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करना गंभीर चिंताजनक है, खासकर जब यह चुनावी निष्पक्षता के साथ जुड़ा हुआ है। मैं उम्मीद करता हूं कि सुप्रीम कोर्ट की इस राय पर अमल होगा, और आरोप लगाए गए अपराधियों को उचित कानूनी कार्रवाई दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की यह राय न केवल चुनावी निष्पक्षता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संविधान के सांविधानिक मूल्यों और सिद्धांतों को भी बचाती है।
 
🤣🏃‍♂️ चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को बताया है कि तुम्हारे चुनाव में धमकी और हिंसा कैसे शामिल होती है? 🚫😱

[मeme: एक पुलिसवाला जो बोल रहा है, "तुमने मुझे रुकवाने की कोशिश क्यों किया, तो मैं आपको रुकवाऊंगा!"] 🤣
 
बिल्कुल, यह बहुत बड़ी बात है 🤯। चुनाव आयोग की बात सही है, एसआईआर को रोकने की कोशिश में कई लोग शामिल हैं। यह अच्छा है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस प्रक्रिया को जानबूझकर रोकने की कोशिश करना गंभीर सांविधानिक चिंता का विषय है। लेकिन हमें उम्मीद है कि राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल के नेताओं द्वारा ऐसी बातों को मानने की जरूरत नहीं होती। हमें उम्मीद है कि इस मामले में न्याय प्राप्त होगा।
 
Wow 😮, आरोप लगाने का यह तरीका तो बहुत ही गंभीर है 🤯। चुनाव आयोग की जांच और सत्तारूढ़ दल के कार्यों पर नजर रखने में सुप्रीम कोर्ट की बात करने वाली है 😊। यह प्रक्रिया तो बहुत जरूरी है, चुनाव में स्वच्छता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए 💪
 
क्या लोग अब तक समझ गए हैं कि चुनाव आयोग तो बस खेल खेलता है, कोई मजाक है? एसआईआर को रोकने की कोशिश में जो सब कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह से भ्रष्टाचार का परिचय देता है।

राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल के नेताओं के बयान तो बस धमकी हैं, लेकिन कोई अंदरूनी राजनीतिक जानकार नहीं होता तो यह सब क्यों स्वीकार नहीं करता?

किसी भी तरह से मुझे लगता है कि यह प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करना सिर्फ एक मामला है, लेकिन जब तक चुनाव आयोग और न्यायपालिका के बीच ऐसी घटनाएं लगातार होती रहती हैं, तभी हमें अपनी नागरिकता की गंभीरता पर विचार करना चाहिए।

मुझे लगता है कि लोगों को सिर्फ़ खुद को मत बेचना चाहिए, और यह प्रक्रिया को रोकने की कोशिश तो बस एक बड़ा झूठ है।
 
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