स्कैन कर बांग्लादेशी बताने वाली मशीन का सच क्या: SHO बोले- मजाक था, लोगों ने कहा- बिहार से हैं, पुलिस बार-बार कागज मांग रही

बस्ती में पुलिस ने बांग्लादेशी कहने वाला 52 साल का व्यक्ति बताया कि हमारे घर पर जाकर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश की, लेकिन वहीं मजाक था।
 
अरे ये तो क्या हुआ? बस्ती में पुलिस ने बांग्लादेशी कहने वाले 52 साल के लड़के को घर पर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश करने के लिए कहा, लेकिन लगता है उन्होंने मजाक नहीं उड़ाया। क्या यहाँ किसी भी कारण से ऐसा होने का मौका मिल गया? और क्या पुलिस वाले सोच रहे थे कि ये लड़का तो बांग्लादेशी होगा, तभी उन्हें पता चलेगा कि कौन सा देश वह यहाँ रहता है? 🤔

मुझे लगता है कि पुलिस वालों को थोड़ी और शिक्षा की जरूरत है, जैसे कि यह कि घर पर किसी को आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश करना न काम आ सकता है। लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि यह तो एक मजाक था, और पुलिस वाले बस्ती में तो अच्छे-अच्छे होंगे, नहीं तो ऐसा होता नहीं। 🙃
 
मुझे ये बात बहुत हैरान कर दी कि कैसे पुलिस अपने काम में इतनी गड़बड़ी कर रही है। 52 साल का व्यक्ति, जो कि बांग्लादेशी कहने वाला है तो फिर भी क्यों घर पर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश कर रही थी, यह सोच नहीं पाती कि यह व्यक्ति उनका नागरिक है। चाहे वह बांग्लादेशी हो या फिर भारतीय, घर पर जाकर पहचान लेने की मंशा अच्छी नहीं होती। इसके अलावा, अगर पुलिस ने पता नहीं था तो फिर क्यों घर पर गयी, यह भी बहुत हैरान कर देता है। 🤔💥

आजकल की बातें सुनते हुए लगता है कि कैसे लोग अपने नागरिक अधिकारों को नहीं समझ पाए। हमें सरकार और पुलिस को ऐसी घटनाओं में सुधार करने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर बहुत सोच-समझकर विचार करने की जरूरत है। पुलिस कैसे ऐसा व्यक्ति पहचानती है और उसके घर पर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश करती है? यह बहुत शर्मनाक है कि एक 52 साल का व्यक्ति जो अपनी मातृभाषा बांग्लादेशी नहीं बोलता, लेकिन उसकी पहचान भारतीय है, उसे ऐसा इलाज दिया जा रहा है।

मुझे लगता है कि हमें अपनी संविधान की धारा 21 को समझने की जरूरत है। वहां कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी समय, किसी भी जगह पर अपनी पहचान पत्र दिखाने की जरूरत नहीं है। लेकिन यहां पुलिस ने ऐसा कर दिया जैसे वह व्यक्ति एक अपराधी है।
 
क्या ये सच है कि पुलिस बांग्लादेशी कहने वाले व्यक्ति को घर पर जाकर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वहीं मजाक था? मुझे लगता है कि यह तो कुछ बड़ा मुद्दा हो सकता है, चाहे व्यक्ति कौन सा देश हो।

मेरे अनुसार, पुलिस की तरफ से जो काम किया गया, वह गलत था। जो भी लोग अपने घरों में पहचान पत्र दिखाने से हिचकिचाते हैं, वह तो बिल्कुल सही कर रहे हैं। क्योंकि जब हमारे पास पहचान पत्र नहीं होते, तो फिर हम कैसे विश्वास करें कि यह व्यक्ति सड़क पर खड़ा होकर हमारा पहचान पत्र दिखाकर मुझे जेल ले रही है।

मैं इस बात पर चिंतित हूं, क्योंकि जब पुलिस अपने अधिकार को बाहर लाया, तो वहीं से कोई अच्छाई नहीं आई।
 
[चिट्ठी से फटा हुआ पेज] 😂🚫 52 साल का व्यक्ति बस्ती में घुसकर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश करता है? 🤣 यार, वो घर पर आया तो निकल गया! 😅

[बस्ती पुलिस स्टेशन की फोटो] 🚔👮‍♂️ जब साहब घर में घुसने आते हैं तो मजाक है? 🤦‍♂️

[व्यक्ति की गाली-गलoch वाली फोटो] 😂🙈 यार, तुम्हारा बोलचाल भाई साहब! 😅
 
मेरी राय है यह बहुत ही डरावनी बात हो रही है, पुलिस की हरकत तो समझने की जरूरत है। क्या उनका सिर्फ इसलिए आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश करना है? हमारे घर पर जाकर कुछ नहीं तो फिर क्यों? मुझे लगता है कि ऐसा करना न तो पुलिस की जिम्मेदारी है, न ही यह लोगों की स्वतंत्रता।
 
वाह, यह तो एक मजेदार मामला है 🤣 basi mein police ne bengali kahaane wala 52 saal ka vyakti bataya ki uske gharon par ja kar aadhaar aur pahilwan patra dekhne ki koshish ki, lekin wo sab takhakosh thaa 😂. toh ek baar to baat hai ki police bhi galat ho sakte hain, lekin yeh bhi sach hai ki kuch log aadhaar aur pahilwan patra ke liye bahut tahazzuk se padte hain. maine bhi apne gaon mein basi hota tha toh mera bhai 22 saal ka tha tab, uss samay police ne mujhe pata lagakar aadhaar aur pahilwan patra dekhne ki koshish ki thi, lekin main toh bahut chota tha.
 
मुझे यह बात खेद है कि ऐसा हुआ। मैं बस्ती जैसे छोटे से शहरों में रहते हूँ और कभी भी ऐसा नहीं सुना है। पुलिस ने वह व्यक्ति पकड़ने की कोशिश की, लेकिन दिखाई दिया कि वह उन्हारे आधार और पहचान पत्र देखने के लिए जा रहा था। मैं समझता हूँ कि ऐसी स्थितियाँ हो सकती हैं, लेकिन यह भी सच है कि पुलिस को अपनी जिम्मेदारी बहुत अच्छी तरह से संभालनी चाहिए। मुझे लगता है कि बस्ती के लोगों को एक दूसरे की मदद करने और समझदार रहने की जरूरत है। यह जानकारी सुनने के बाद मैंने सोचा कि शायद हमें अपने आसपास के लोगों की बात सुननी चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए।
 
बस्ती में हुआ यह घटना तो बिल्कुल भी समझ नहीं आ रही। पुलिस ने कहा कि उन्होंने घर पर जाकर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश की, लेकिन वहीं मजाक था। तो फिर यह तो क्या था? क्या कोई गलतफहमी हुई या कुछ और?

मैं सोचता हूं कि जैसे हमारे देश में छात्रों की बीमारी है तो बस्ती के लोगों की भी ऐसी ही बीमारी है। देखो, पुलिस ने कोई गलतफहमी कर ली और घर पर जाकर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश की। यह तो सरकारी अधिकारियों का काम नहीं है, यह एक छोटे से गाँव में पुलिस का काम है।
 
मुझे इस मामले की गंभीरता से चिंता है 🤔। पुलिस ने एक व्यक्ति को बांग्लादेशी कहने के आधार पर अपने घर पर जाकर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश की। यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है क्योंकि इससे हमें लगता है कि पुलिस ने व्यक्ति को अपनी संपत्ति पर बिना किसी सबूत के नजरान्दाज कर दिया है। 🚫

इसके अलावा, यह मामला हमें यह सवाल उठाता है कि क्या हमारी पुलिस जागरूकता और संवेदनशीलता पर थोड़ा सा ध्यान देने की जरूरत है? 🤷‍♂️ एक व्यक्ति को बांग्लादेशी कहने के आधार पर उसकी पहचान करने की प्रक्रिया में सावधानी बरतनी चाहिए। यह हमारे समाज की भावनात्मक स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए।
 
मैंने पढ़ा है कि बस्ती में पुलिस ने बांग्लादेशी कहने वाले 52 साल के व्यक्ति को आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश की, लेकिन मजाक था। यह बहुत अजीब है कि पुलिस ऐसा क्यों कर रही है? क्या वे वास्तव में संदिग्ध लोगों को ढूंढने के लिए आधार और पहचान पत्र देखने का तरीका नहीं जानते?

मुझे लगता है कि इस तरह की घटनाएं हमारे समाज में एक बड़ा परेशानी का कारण बन रही हैं। पुलिस को अपने काम में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और लोगों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस अपने काम में ईमानदारी और न्याय के साथ काम करे।
 
अरे, यह तो बहुत बुरा है... पुलिस सिर्फ अपना काम कर रही है, लेकिन फिर भी ऐसे मामले होते हैं जहां व्यक्ति को गलत पहचान दी जाती है। 52 साल के व्यक्ति को यह बातें न करनी चाहिए, और पुलिस को समझना चाहिए कि यह एक गलतफहमी है। क्योंकि आधार और पहचान पत्र के साथ जाकर घर पर जाना जरूरी नहीं है, और इससे कुछ भी फायदा नहीं होता। लेकिन ऐसा लग रहा है कि पुलिस ने अपने काम को सही तरीके से नहीं समझा।

आजकल ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जहां लोग गलत पहचान दी जाती है, और इससे बहुत दर्द होता है। ऐसा तो किसी भी नागरिक से हो सकता है... यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
 
मुझे ये बात बहुत गुस्सा कर देती है 🤬। क्या पुलिसवालों को पता नहीं होता कि आधार और पहचान पत्र बनाने से पहले तो पासपोर्ट और इडी कार्ड को भी जांचना पड़ता है? 🤔 और क्या उन्हें पता है कि बांग्लादेशी कहने वाला व्यक्ति कितनी मुश्किल से अपनी पहचान साबित कर पाएगा? 😓

मुझे लगता है कि हमारे देश में अभी भी बहुत सारे लोगों को अपनी पहचान साबित करने की ज़रूरत है, और यह एक बड़ी समस्या है। 🤦‍♂️ अगर पुलिसवाले अधिक समझदार और सहानुभूतिपूर्ण होते, तो ये तरह की घटनाएं न होतीं। 🙏
 
मुझे बस्ती में ऐसा नियमित तौर पर सुनने को मिलता है... पुलिस यहां हर किसी को आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश करती है, लेकिन कभी-कभी मजाक होता है... 52 साल का व्यक्ति बोल रहा था कि पुलिस ने उसके घर पर जाकर आधार और पहचान पत्र देखने की कोशिश की, लेकिन वहीं कुछ ऐसा हुआ जिससे पुलिस पर मुस्कुराना पड़ा... यह तो अच्छा है कि पुलिस ने पहले से ही ऐसे व्यक्ति को पहचान लिया है, लेकिन फिर भी हमें लगता है कि यह सब थोड़ा देर से हुआ है... 🤔

मुझे लगता है कि पुलिस को अपने काम में और अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन फिर भी हमें उम्मीद करनी चाहिए कि ऐसे मामलों की संख्या कम होगी। यह एक अच्छी बात है कि पुलिस ने पहले से ही ऐसे व्यक्ति को पहचान लिया है, अब हमें उम्मीद करनी चाहिए कि ऐसे मामलों में सुधार होगा। 🚔
 
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