RO वाटर से बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर: विराट रामायण मंदिर में दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग, कंबोडिया के विरोध से बदला नक्शा

बिहार के मोतिहारी जिले में अयोध्या के राम मंदिर से ही दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग बन रहा है। विराट रामायण मंदिर में 56 फीट ऊंचाई का इसी तरह का शिवलिंग लगाया गया है, जो अयोध्या के राम मंदिर की तुलना में दोगुना बड़ा है।
 
😊 राम मंदिर से जुड़ी यह बात मुझे थोड़ा अजीब लगती है । पहले तो मुझे लगने लगा कि ये एक मजाक है, लेकिन फिर सोचते हुए मुझे लगता है कि शायद यह सच हो सकता है। रामायण में विराट रामायण मंदिर की कहानी बहुत प्रसिद्ध है, और यदि ऐसा है तो यह हमारे संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।

लेकिन मेरा सवाल यह है कि क्या यह शिवलिंग हमारी धार्मिक परंपराओं से संबंधित है? क्या इसका निर्माण और स्थापना हमारे पवित्र ग्रंथों में वर्णित नहीं है? अगर नहीं, तो यह एक रचनात्मक अभिव्यक्ति है या एक ऐतिहासिक सत्य? 🤔
 
मैंने देखा है कि बिहार के मोतिहारी जिले में बन रहा शिवलिंग तो बहुत ऊंचा है, 56 फीट! यह विराट रामायण मंदिर में लगाया गया है। मैंने सोचा था कि अयोध्या के राम मंदिर का शिवलिंग भी बहुत ही बड़ा है, लेकिन 56 फीट तो वास्तव में बहुत बड़ा है! मैं चाहता हूं कि इस तरह के भव्य शिवलिंग बनाने से हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म के पवित्र स्थलों पर एक नई ऊंचाई दिखाई दे। 🙏💫
 
अरे, ये वाकई बहुत बड़ी बात है 🤯। मुझे लगता है कि यह शिवलिंग बनाने की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा समय लेगा। और फिर भी, क्या यह दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग बन सकता है? 🤔 मुझे लगता है कि इसके लिए कुछ अन्य विकल्प भी हो सकते हैं जैसे कि इसे कहीं और बनाने का विचार।
 
😊 मैंने देखा है कि बिहार के मोतिहारी जिले में राम मंदिर से ही कुछ नया-नया बन रहा है। यह तो एक अच्छी बात है, लेकिन तो इतनी बड़ी ऊंचाई का शिवलिंग लगाने का मतलब क्या? क्या हमें अपने देश में सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए ऐसे महाविस्तार पर लगाने हैं?
 
यार, यह बहुत अच्छी खबर है! अयोध्या के राम मंदिर से बिहार के मोतिहारी जिले में ऐसा बड़ा शिवलिंग बन रहा है, जो हमारे देश की विराट रामायण मंदिर में लगाया गया शिवलिंग से दोगुना है। यह बहुत गर्व की बात है कि हमारे देश में इतनी सुंदर और बड़ी धर्मस्थलों की संख्या बढ़ रही है। मुझे लगता है कि इस तरह के बड़े-बड़े शिवलिंग लगाने से हमारे देश की पवित्रता और सुंदरता बढ़ेगी।
 
मैंने देखा है कि लोग विराट रामायण मंदिर के निर्माण को बहुत प्यार से कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि हमें अपने धर्म और संस्कृति को बनाए रखने में खुशी मिल रही हो। लेकिन, मैं सोचता हूँ कि शिवलिंग का निर्माण एक बड़ा काम है। जितनी जल्दी हम उसे पूरा करेंगे, उतनी ही जल्दी हम अपने धर्म और संस्कृति को आगे बढ़ा सकते हैं।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही विशेष और रोचक जानकारी है 🤔। यह शिवलिंग नirmaण की प्रक्रिया और ताकतें क्या हैं? मुझे लगता है कि हमें इस तरह की सुंदर और महत्वपूर्ण संरचनाओं को बनाने वालों के लिए धन्यवाद देना चाहिए। इसके अलावा, यह शिवलिंग कैसे बनाया जाता है और इसके निर्माण में लगने वाली मेहनत क्या है? 😊
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही रोचक बात है 🤔। मोटिहारी से अयोध्या तक शिवलिंग बनाने की कला पूरी भारत में अद्वितीय है। लेकिन जब बात आती है तो यह बहुत बड़ा परियोजना होने की संभावना है, जिसमें कई लोगों की सेहत और सुरक्षा पर नजर रखना होगा। जैसे शायद दीवार बनाने के लिए प्लेसमेंट्स को चुनना होगा, और निर्माण में लगेगी बहुत सारी तकनीक 🤖
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही भौतिकवादी और विज्ञान-परीक्षित शिवलिंग लगाने का फैसला कर दिया गया है। मंदिरों में ऐसे लंबे और पतले स्तंभ लगाए जाते हैं तो ये मन्दिरों की खूबसूरती को बढ़ा नहीं सकते बल्कि इनकी भौतिक विशेषताओं को बढ़ा देते हैं। इसके बजाय मंदिरों को ऐसा बनाना चाहिए जिसमें श्रोताओं का ध्यान आकर्षित कर सके और उनके मन में पवित्रता और सुकून महसूस हो।
 
यह देश कैसे आगे बढ़ रहा है... मुझे लगता है कि यह बहुत ही अच्छा विचार है, जो हमारी संस्कृति और इतिहास को भी पहचानता है। राम मंदिर का निर्माण एक नए युग की शुरुआत हो सकता है, जहां हमारे देश की समृद्धि और विविधता को दिखाया जा सके। लेकिन, मुझे लगता है कि इसके पीछे कुछ लोगों की राजनीतिक मंशाएं भी हो सकती हैं।

मैं सोचता हूं कि हमें यह तय करना चाहिए कि यह शिवलिंग न केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग किया जाएगा, बल्कि यह देश की इकाईता और समृद्धि को भी दर्शाता है।
 
मैंने बीते दिनों की यादें उठाने से मनाई, जब हमारे देश में ऐसी खूबसूरत परियावरण बनाए जाते थे, जो आज भी हमारे लिए एक सुंदर कल्पना है... लेकिन तेजी से बदलने वाले प्रगति के नाम पर, जब हम अपने प्राचीन धरोहर को बनाए रखने के प्रयास करते हैं... तो यह देखना ज्यादा दर्दनाक लग रहा है। मंदिर की ऊंचाई बढ़ाने से ज्यादा ये बात मुझे विचलित करती है कि हमारी प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए क्यों इतनी तेजी नहीं? 🤔

जैसे ही हम अपने पर्यावरण को साफ-सफाई में रखते हैं... वैसे ही, हमारे प्राचीन धरोहर को भी साथ लेकर चलना चाहिए। यह एक अच्छा मौका है कि हम अपनी विरासत को बढ़ावा देने के लिए कुछ नया और रचनात्मक करें... शायद तो अयोध्या और मोतिहारी जैसे स्थानों पर एक साथ प्रदर्शन किया जा सकता है।
 
मैंने भी यह पढ़ लिया। तो यारों कितने शिवलिंग बन रहे हैं। यह तो वास्तव में एक अद्वितीय बात है जिसे हम अपने देश में नहीं देखा है। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा संदेश है, की हमारे पास इतनी ऊंचाई और तकनीक है ताकि हम ऐसे बड़े-बड़े शिवलिंग बना सकें। लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी बात है, जिस पर सोचना चाहिए।
 
राम मंदिर से लेकर विराट रामायण मंदिर तक, यादा आता है जब हमारे पूर्वजों ने भारतीय उपमहाद्वीप को बांटते समय भगवान राम की स्थापना पर इतनी दीवानगी थी। आजकल की इस बहुत बड़ी चीज़ का मुंह खोलना ताकि यह शिवलिंग दुनिया भर में प्रसिद्ध हो। लेकिन ये सवाल उठता है कि, अगर अयोध्या के राम मंदिर से बन रहा शिवलिंग दुनिया का सबसे ऊंचा है, तो यह कहाँ तक बेहतर है? जैसा की हमने विश्वासघाती दीवारों के पीछे और अटूट प्राचीन स्थानों में खोए हुए इतिहास को देखा है।
 
बिहार के मोतिहारी जिले में ये वास्तव में चिंताजनक बात है 🤔। अगर हमें लगता है कि हमारी प्राचीन संस्कृति और धरोहर को बढ़ावा देना है, तो फिर इतनी जल्दी अपने जिले में ऐसी बड़ी भावनात्मक निवेश कर लेना ठीक है? 💸। क्या हमारे पास पर्याप्त स्थान और संसाधन नहीं थे? क्या अयोध्या में विराट रामायण मंदिर बनाने की जरूरत थी? यह सवाल है कि क्या हमने अपने जिले को भूल दिया और अब वहां से पैसे इकट्ठा कर लिए गए हैं? 🤑
 
राम मंदिर की बनावट से हमारा देश-विदेश में फैल रहा है... 🌟 ये एक बहुत अच्छा काम है, जिसने लाखों लोगों को खुश कर दिया है। यह शिवलिंग न केवल एक पवित्र स्थल की विशेषता है, बल्कि हमारे समाज में भाईचारे और एकता की भावना को बढ़ावा देता है... 🙏 लोग अब अपने बीच के अंतर को छोड़कर, एक-दूसरे के साथ जुड़ने लगे हैं। यह एक बहुत बड़ी चीज है और मुझे हमेशा इसी तरह के प्रयासों के लिए खुशी होती है।
 
😮 भारतीय इतिहास का यह कोई नया पल नाहीं। हमेशा से हमारे देश के लोग अपने त्योहारों और धार्मिक महत्वाकांक्षाओं को दुनिया भर में प्रदर्शित करते आये हैं। लेकिन इस बार कुछ नया है। मुझे लगता है कि हमें यह पल थोड़ा सोच-विचार करना चाहिए। 56 फीट ऊंचाई का शिवलिंग लगाने में हमें देश की संस्कृति, परंपरा और प्रयोगशीलता को भूलना पड़ गया।
 
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