मुरैना में निर्माणाधीन मंदिर की छत गिरने से हादसा, प्रसाद ले रहीं 3 बच्चियों की मौत, 5 घायल

मध्य प्रदेश के मुरैना में एक दुखद घटना घटी। सोमवार को अष्टमी के दिन निर्माणाधीन चामड़ माता मंदिर में पूजा करने वाले सतीश गौड़ के पति-पत्नी सहित ५ बच्चियों को गंभीर घायल होने की खबर आई।

इस दौरान मंदिर की छत गिरने से तीन बच्चियों की मृत्यु हो गई जबकि प्रसाद वितरण करते हुए उन्हें घायल होना पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही, स्थानीय विधायक पंकज उपाध्याय ने तत्काल पहुंचा और चिकित्सकों से बेहतर इलाज का अनुरोध किया।

तीन बच्चियों का मृतक मंडल जारी करने पर उनके परिजनों को शव दिया गया है। कैलारस अस्पताल में दो गंभीर घायल बच्चियों की इलाज की जा रही है, जबकि पांच बच्चियों को मुरैना लाया गया है जिनमें सतीश और उनकी पत्नी भी शामिल हैं।
 
बधाई देने वाली घटना तो सिर्फ मन को दर्दनाक कर देती है। यह बात मुझे हमेशा याद रहती है कि जिंदगी में सबसे जरूरी चीज शारीरिक स्वास्थ्य से नहीं बनती, लेकिन हमारा मन तो हमेशा पहले। इन ५ बच्चियों को खोने वाले परिवार को हम सब अपनी प्रार्थना और सहानुभूति देनी चाहिए।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ी चोट लगने की बात है। लेकिन क्या हम यह कभी नहीं सोचते थे कि निर्माणाधीन मंदिर में पूजा करने वाले लोगों को भी खतरा होता है? तो अब जब तीन बच्चियाँ मर गईं, तो सब ने समझने की जरूरत है कि यह एक बड़ी समस्या है।

और फिर स्थानीय विधायक पंकज उपाध्याय ने तत्काल पहुंचा और चिकित्सकों से बेहतर इलाज का अनुरोध किया, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है कि यह कैसे हुआ? तो मुझे लगता है कि हमें इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नियमों और प्रोटोकॉल को सख्त करने की जरूरत है। 🤕
 
😔 यह घटना बहुत दुखद है। मैं जानता हूँ कि अष्टमी के दिन मंदिरों में पूजा-अर्चना का एक महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं कभी-कभी हमारे आसपास घटित होती हैं। मैं उम्मीद करता हूँ कि चिकित्सकों और अस्पतालों में तेजी से इलाज की जाए ताकि बच्चियों की स्थिति सुधरे। यह एक दुखद याद दिलाता है कि हमारी समाज में अभी भी बहुत कुछ बदलने की जरूरत है।
 
अरे यह तो बहुत दुखद! क्या हुआ था मंदिर की छत? इतनी सारी बच्चियां एक ही जगह पर घायल, यह तो समझ नहीं आ रहा है। पंकज उपाध्याय ने जल्द से जुटाई इलाज की, लेकिन मृतक बच्चियों का शव देने का फैसला हुआ। कलरास अस्पताल में दो घायल बच्चियां ठीक होने वाली हैं तो? उनकी पत्नी साथ में है ना। मुरैना लाई गई पांच बच्चियों में कौन सी गंभीरता है? सब कुछ जल्द ही ठीक हो जाएगा, परन्तु अभी फिक्र करने वाले नहीं हैं।
 
અરે ઓઢા! એક નવો તાપ મધ્ય પ્રદેશમાં લગાવી ગયો છે. ખુબ હળવે ભેળવે કરતા અને સૌથી પહેલા મામલો એ છે. ઘણા જ ગંભીર આવે છે અને દિલથી તપ્યુ થઈ જાય છે.
 
😔 बेटियों की यह घटना बहुत दुखद है। मैं अपने दिल से उन परिवारों के लिए प्रार्थना कर रहा हूँ जिन्हें इस दर्दनाक खोपने का सामना करना पड़ रहा है। चामड़ माता मंदिर की यह घटना हमें सबक सिखाती है कि हम अपने आसपास के लोगों और परिवारों के प्रति खुले दिल के साथ जीने की कोशिश करें।

मैं तुरंत मंदिर में शव वाहन भेजने का निर्देश देना चाहता हूँ, ताकि बच्चियों के परिजन जल्द से जल्द अपने प्रियजनों को विदाई दे सकें। चिकित्सकों और नर्सों की जानबूझकर और निरंतर देखभाल इस दुखद घटना में मदद करेगी।
 
अगर तीन बच्चियों के मृत्यु होने से पहले कोई उपचार न हुआ होता, तो फिर यह घटना सही तरीके से नहीं सामने आई। लेकिन अब उनके परिजनों को शव देने और बच्चियों को इलाज करवाने की बात करना आसान नहीं है। हमें पता है कि चिकित्सक अपने मामले की जिम्मेदारी समझते हैं और अगर वे गलती से कर सकते हैं, तो उनको खुद पर भरोसा रखना भी जरूरी है।

मैं यह सोचकर उदास हूं कि ऐसी घटनाएं होने की बात कहीं नहीं सुनी जाती। लेकिन अगर मैं सच्चाई बताऊं, तो मैं खुश हूं कि चिकित्सकों ने तत्काल पहुंचकर बच्चियों का इलाज करवाने का फैसला किया।
 
अभी तक ये खबर बहुत दुखद लग रही है। यह तो एक बड़ा दौरा था जिससे सात बच्चियों को घायल होने की बात सुनकर हर किसी का दिल टूट गया। यह मंदिर बनाने वालों को तय कर लेना चाहिए कि या तो मंदिर बनाने के पहले अच्छे नियोजन और सुरक्षा उपाय करें या फिर कभी ऐसा हादसा न हो।
 
😱 क्या बात हो रही है? इस दुखद घटना से पहले भी मंदिर में पूजा करने वालों को घायल होने की बहुत समस्या थी, लेकिन कोई नहीं सुनने के लिए। तीन बच्चियाँ मर गईं, यह तो बहुत दुखद है... 🤕 मैं यही कहूंगा, हमें मंदिरों की सुरक्षा को लेकर जागरूक होना चाहिए। सरकार और विधायक भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि ऐसी दुखद घटनाएं कभी न हों। 🤝
 
यह तो एक बहुत बड़ा दुख है। मैंने देखा है कि यहाँ पर पूजा-अर्चना करने वालों को कितनी बुरी तरह से धमकाया जाता है, और तब भी कुछ लोग निर्माणाधीन मंदिरों में पूजा करते हैं। मैं समझ नहीं पाता कि हमारे देश में ऐसे कई मंदिर बन रहे हैं और फिर भी इतने कई बच्चे मर रहे हैं।

मंदिर की छत गिरने से तीन बच्चियों की मृत्यु हो गई, यह बहुत ही दुखद है। मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों की सुरक्षा पर और भी अधिक ध्यान देना चाहिए।
 
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