खूनी जुलूस से रिपब्लिक डे परेड तक: आखिर क्यों होती है फौज और हथियारों की नुमाइश; यूरोप-अमेरिका परेड से अब क्यों कतराते हैं

भारत की राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी के हर साल परेड, जिसे गणतंत्र दिवस परेड कहा जाता है, एक ऐतिहासिक घटना है। यहां भारतीय सैन्य बलों और राष्ट्रीय पत्रिकाओं ने अपने इतिहास को दर्शाया है।

रोम की ट्रायम्फ यानी परेड का इतिहास 2072 साल पहले शुरू हुआ था, जब रोमन सेनापति जूलियस कैजार ने अपने पल्स्ट्रिएं (प्रतिष्ठित प्रतिनिधी) और अपने सैनिकों को सड़क पर लाया था। वहां परेड में केवल विजयी सेनापति ही शामिल थे, लेकिन इसके साथ ही राजा द्वारा दिया गया आदेश भी इसमें शामिल था, जिसमें यह कहा जाता था कि विजेताओं को पहले उनकी जीत पर गर्व करना चाहिए और फिर उन्हें अपने सैनिकों को मारना चाहिए।

रोमन सेनापति की नुमाइश, जिसे ट्रायम्फ कहा जाता था, एक ऐसा तमाशा था जहां राज्य द्वारा रचा गया और जनता के सामने अपनी विजय पर गर्व करने के लिए लिया गया। इसी दौरान पालमायरा साम्राज्य में भी ट्रायम्फ परेड होता था, जिसमें राजा को उनकी सेना और उनके परिवार के सदस्यों को सम्मानित करना पड़ता था।

आजकल, 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना की नुमाइश होती है, लेकिन इसके पीछे एक विशाल इतिहास और ऐतिहासिक महत्व है।
 
अरे, यह तो मजेदार है! रोमन सेनापति जूलियस कैजार ने अपने परेड में केवल विजेता ही शामिल करते थे, लेकिन फिर भी उनके सैनिकों को मारना पड़ता था, यह तो बिल्कुल सही प्रकार का गर्व है! 🤣

लेकिन सिर्फ़ रोम नहीं बल्कि पालमायरा जैसे कई अन्य साम्राज्यों ने भी अपने ट्रायम्फ परेड को देखा था, यह तो एक अच्छी बात है कि लोगों को अपनी विजय का गर्व करने का मौका मिलता था।

लेकिन आजकल, भारतीय सेना की नुमाइश परेड में शामिल होने वाली है, और यह तो एक बहुत अच्छी बात है कि वह अपने देश की स्वतंत्रता और प्रगति के लिए लड़ रही है।
 
परेड का यह इतिहास बहुत ही रोचक है .. मुझे लगता है कि यह दिल्ली में शुरू होने वाली परेड से पहले रोम में शुरू हुआ था .. जूलियस कैजार की नुमाइश को ट्रायम्फ कहा जाता है और इसके पीछे बहुत ही अनोखा तरीका था .. विजेताओं को पहले उनकी जीत पर गर्व करना चाहिए और फिर उन्हें अपने सैनिकों को मारना चाहिए .. यह देखकर मुझे लगता है कि पालमायरा साम्राज्य में भी ऐसा ही होता था .. आजकल 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना की नुमाइश होती है, लेकिन इसके पीछे एक विशाल इतिहास और ऐतिहासिक महत्व है जिसे हमें समझना चाहिए .. 💡👍
 
क्या मुझे लगता है कि दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड की तैयारी करना एक बड़ा काम है, लेकिन फिर भी याद रखना जरूरी है कि रोम की ट्रायम्फ परेड का इतिहास बहुत पुराना है और इसमें बहुत सारे बदलाव आये हैं। मुझे लगता है कि हमें यह समझना चाहिए कि इसके पीछे क्या विचार थे, लेकिन अब इसे एक सम्मानजनक और शांतिपूर्ण परेड में बदल दिया जाए।
 
परेड की बात करें, यार यह तो बहुत रोमांचक है 😊। मुझे लगता है कि हमें अपने देश के इस ऐतिहासिक परेड को और भी ज्यादा महत्व देना चाहिए। परेड के पीछे एक विस्तृत इतिहास है, जिसमें हमारे सैनिकों की बहादुरी, हमारे राष्ट्रीय पत्रिकाओं की मजबूती और हमारे देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में हमारे योगदान शामिल है। 🙏

और यह तो सच है कि रोम की ट्रायम्फ यानी परेड का इतिहास 2072 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन हमारा गणतंत्र दिवस परेड इसके मुख्य और महत्वहीन नहीं है, ना 🤔। यह हमें अपने देश की स्वतंत्रता और समृद्धि के बारे में याद दिलाता है।
 
🎉 यह ट्रायम्फ परेड तो बहुत रोमांचक है! मुझे लगता है कि हमें भी अपने देश के इस ऐतिहासिक इतिहास से बहुत प्यार करना चाहिए। जूलियस कैजार ने इतनी समय पहले यह ट्रायम्फ परेड शुरू किया था, और आज भी हमें इसका आनंद लेने को मिलता है। 🎊 भारतीय सेना की नुमाइश परेड में दिखाई देती है, जो बहुत गर्व की बात है! 💪

मुझे लगता है कि हमें अपने देश की इस ऐतिहासिक परंपरा को बनाए रखना चाहिए, और हर साल 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेना चाहिए। यह हमें एकजुट करेगा और हमारे देश की विविधता को बढ़ावा देगा। 🎉
 
जान लीजिए ये 26 जनवरी की परेड बहुत ही खूबसूरती से मनायी जाती है ना? दिल्ली में हर साल तो यह परेड बहुत ही सुंदर होती है, जहां हमारे सैनिकों को अपने इतिहास को दर्शाने का मौका मिलता है। लेकिन मुझे लगता है कि रोम की ट्रायम्फ यानी परेड का इतिहास बहुत ही दिलचस्प है, जब जूलियस कैजार ने अपने पल्स्ट्रिएं और सैनिकों को सड़क पर लाया था। यह तो एक ऐसा तमाशा था जहां राज्य द्वारा रचा गया था, और जनता के सामने उनकी विजय पर गर्व करने के लिए लिया जाता था। लेकिन आजकल, हमें ये परेड बहुत ही खूबसूरती से मनायी जाती है, जहां हमारे सैनिकों को अपने इतिहास को दर्शाने का मौका मिलता है। 🏴‍☠️
 
नहीं तो यह बात याद नहीं आ रही कि गणतंत्र दिवस परेड में राजा और उनके सैनिकों की नुमाइश कैसे शुरू हुई? 2072 साल पहले ट्रायम्फ यानी परेड का इतिहास शुरू हुआ था, लेकिन यह तो एक बहुत ही रोमांचक और विल्क्षण दृश्य था। आज भी हमें पता नहीं चला है कि 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस परेड में कौन-कौन से महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं और इसके पीछे क्या तर्क थे।

मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को अच्छी तरह से समझने की जरूरत है, ताकि हमारे देश के भविष्य को बेहतर ढंग से निर्धारित कर सकें। लेकिन जब तक हमारे पास इन सभी जानकारियों का एक विश्वसनीय स्रोत नहीं है, तो यह जानना मुश्किल है कि 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए हमारे पास क्या तर्क थे।

ट्रायम्फ यानी परेड के बारे में इतनी जानकारी नहीं है, इसलिए मुझे लगता है कि हमें इस विषय पर और अधिक शोध करने की जरूरत है।
 
मैंने बार-बार 26 जनवरी को देखा है तो मुझे लगता है कि यह इतनी सुंदर नहीं लग रही थी। रोम में ट्रायम्फ यानी परेड का इतिहास 2072 साल पहले शुरू हुआ था, जब जूलियस कैजार ने अपने पल्स्ट्रिएं और सैनिकों को सड़क पर लाया था। वहां परेड में केवल विजयी सेनापति ही शामिल थे, लेकिन इसके साथ ही राजा द्वारा दिया गया आदेश भी इसमें शामिल था।

मुझे लगता है कि आजकल यह परेड बहुत प्यारा लग रहा है, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह इतना ऐतिहासिक महत्व रखता है। मेरे दादाजी ने मुझे कहा था कि जब वह बच्चे थे, तो उन्होंने राष्ट्रीय परेड को देखा था, लेकिन उस समय यह बहुत बड़ा और सुंदर नहीं लग रहा था।
 
रोमन सेनापति जूलियस कैजार की ट्रायम्फ परेड का इतिहास 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस परेड को याद करते समय भारत में बोले जाने वाले राष्ट्रवाद के साथ जुड़ गया। अगर हम देखें, तो यहां नेताओं और उनके सैनिकों की नुमाइश एक आदेश था, लेकिन भारत में राष्ट्रीय परेड का उद्देश्य केवल विजय पर गर्व करना नहीं है, बल्कि एक समाज को जोड़ने और देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए।
 
बात तो यह है कि रोमन सेनापति जूलियस कैजार की नुमाइश कैसी थी, लेकिन भारत में 26 जनवरी परेड का मतलब कुछ और है। यहां हमारे देश की स्वतंत्रता और समृद्धि को दर्शाता है, जिसने हमें अपने साथियों के साथ मिलकर आगे बढ़ने का मौका दिया है।

मुझे लगता है कि भारत में 26 जनवरी परेड का महत्व इसलिए अधिक है, क्योंकि यहां हमारे सैनिकों ने अपने देश और समाज की रक्षा के लिए कई लड़ाइयाँ जीतीं हैं। इसमें हमारे सेनापति, जवान, और उनके परिवार के सदस्यों को सम्मानित करना जरूरी है।
 
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