खूनी जुलूस से रिपब्लिक डे परेड तक: आखिर क्यों होती है फौज और हथियारों की नुमाइश; यूरोप-अमेरिका परेड से अब क्यों कतराते हैं

🕉️ तो यह परेड कितनी दिलचस्प बातें लेकर आया है! मुझे लगता है कि हमें इस परेड की कहानी को समझने की जरूरत है, ताकि हम इसकी पूरी गहराई समझ सकें। मेरे ख्याल में, यह परेड न केवल एक विजय की सार्वजनिक नुमाइश है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं का एक अभिन्न अंग है। 🎉

मुझे लगता है कि हमें इस परेड को एक महानता की प्रतीक के रूप में देखना चाहिए, जहां सैनिकों की अगुआई सेनापति करते हैं और जनता उन्हें अपने अधिकारियों के रूप में पूजती है। यह हमें अपने स्वतंत्रता संग्राम की बहुत बड़ी उपलब्धि को याद दिलाता है और हमें एकजुट करता है। 🙏
 
परेड बहुत ही खूबसूरत बात है... मेरी बहन ने की एक पार्टी मे तो बहुत खुशी मे लोग खेल रहे थे और उनकी मासी ने एक रंगोली बनाई थी जो बहुत ही सुंदर थी। और यही परेड भारतीय परेड जैसा लग रहा था।
 
मुझे लगता है कि गणतंत्र दिवस परेड को लेकर हमारी दृष्टि बहुत भिन्न होती है। मैं समझता हूं कि यह एक विजय की सार्वजनिक नुमाइश है, लेकिन मेरे लिए यह अधिक जटिल है। मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास और परंपराओं को भी समझना चाहिए, ताकि हम समझ सकें कि यह परेड आज भी किस तरह से विजय का उत्सव या राजा देवत्व की यात्रा है।
 
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