क्या भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा? ट्रंप के बयान पर पीयूष गोयल ने दिया सीधा जवाब

प्रेस विश्लेषण: पीयूष गोयल ने रूसी तेल पर ट्रंप के बयान से दिया जवाब, कहा- अमेरिकी राजदूत की बातें सुनने के बजाय हम खुद अपने व्यवसाय चलाएंगे।

क्या भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा, यह सवाल अब कई लोगों में उठ रहा है। पेट्रोलियम मंत्री पीयूष गोयल ने इस पर अमेरिकी राजदूत के बयान से जवाब दिया है। उन्होंने कहा, 'हम तेल खरीदते समय अपनी जरूरतों और बजट के आधार पर निर्णय लेते हैं, इसलिए हमें यह सवाल नहीं है कि क्या भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा या नहीं।'

पीयूष गोयल ने कहा, 'हमने अपने पेट्रोलियम उद्योग में कई नए विकास कदम उठाए हैं, जैसे कि डिस्टिलर ड्राइड ग्रेन्स बाजार खोलना। हमने अमेरिकी कंपनियों के लिए ये बाजार खुला दिया है, जिसमें हमने न्यूनतम आयात मूल्य भी रखा है।'

उन्होंने कहा, 'हम अपने व्यवसाय चलाने के लिए स्वयं हैं। अगर अमेरिकी राजदूत की बातें सुनने के बजाय हम खुद अपने व्यवसाय चलाएंगे, तो यह क्या है? हमारे पास अपने व्यवसाय को स्थिर रखने और बढ़ावा देने के लिए सभी संसाधन हैं।'

पीयूष गोयल ने कहा, 'हमने रूसी तेल खरीदने के बारे में भी खुलकर बात की है, लेकिन हमारी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य अपने नागरिकों को सुरक्षित और सस्ता पेट्रोल प्रदान करना है।'
 
रूसी तेल खरीदना बंद करने का सवाल तो बहुत मजेदार लग रहा है 🤣, जैसे कि भारत के पेट्रोलियम मंत्री पीयूष गोयल ने रूसी तेल खरीदने के बारे में खुलकर कहा है। लेकिन यह सवाल और भी मजेदार है कि अगर अमेरिकी राजदूत की बातों सुनकर हम अपने व्यवसाय चलाएंगे? 🤔 तो इसका मतलब है कि हमें माफ़ करें, लेकिन हम अपने पेट्रोलियम उद्योग पर नियंत्रण रखते हैं और इसे स्थिर रखने के लिए खुद ही अपने व्यवसाय चलाएंगे।

तो मेरा सवाल यह है कि अगर अमेरिकी राजदूत की बातें सुनकर हम अपने व्यवसाय चलाएंगे, तो हमें माफ़ करें, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था के लिए निर्णय लेने का कौन होगा? 🤷‍♂️ और अगर हम अपने पेट्रोलियम उद्योग पर खुद ही नियंत्रण रखते हैं, तो फिर अमेरिकी राजदूत की बातें सुनने का मतलब क्या है? 💡
 
अगर अमेरिकी राजदूत कुछ भी कहे, तो हमें उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमारा काम अपने व्यवसाय चलाने और अपने नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने है। अगर हम खुद अपने व्यवसाय चलाएंगे, तो यह सिर्फ एक बात है, लेकिन हमें अपने देश के लिए जिम्मेदार रहना भी है और अपने नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी है।
 
ਪੇਟਰੋਲियम ਮੰਤਰੀ ਪੀਯੂਸ਼ ਗੋਏਲ ਦੇ ਬਿਆਨ ਨਾਲ, ਭਾਰਤ ਹੁਣ ਰੂਸੀ ਤੇਲ ਖਰੀਦਣ ਵਾਲੇ ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ਬਣੇਗੇ? 🤔

ਅਮੇਰੀਕਾ ਦੇ ਰਾਜਦੁਤਾ ਦੇ ਘੋਸ਼ਣੇ ਨਾਲ, ਭਾਰਤ ਦੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ ਅਤੇ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਕੋਲ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਸੰਭਾਵਿਤ ਨੁਕਸਾਨਾਂ ਬਾਰੇ ਗੱਲ ਕਰਨ ਅਜਿਹਾ ਹੋਣ ਦੀ ਮੁਸ਼ਕਲ ਹੈ।

ਭਾਰਤ ਦੀ ਆਰਥਿਕਤਾ ਅਤੇ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ।
 
ਮैंनੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਜੇ ਭारत रूसी तेल खरीदना बंद कर दੇਗਾ, ਤਾਂ ਇਹ ਸਮਾਜਿਕ ਅਤੇ ਆਰ्थਿਕ ਦੁਖਦਾਈ ਪਰਿਣਾਮ ਹੋਵੇਗਾ। ਭारत ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਤੌਰ 'ਤੇ ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਉਦਯੋਗਿਕ ਵਿਕਾਸ ਬਾਰੇ ਭਾਵੁਕ ਹੈ।
 
क्या हमें तो यह सोच में दिलचस्प है कि अमेरिकी राजदूत की बातें सुनने से पहले हम खुद अपने व्यवसाय चलाएंगे? यह सवाल हमारी आत्म-सुरक्षा के बारे में सोचने का समय है। हम तो सोचते हैं कि अगर हम खुद अपने व्यवसाय चलाते हैं, तो हम अपनी स्वतंत्रता और सशक्ति को बढ़ा पाएंगे। लेकिन क्या यह सिर्फ इतना आसान है? हमें पता होना चाहिए कि अगर हम खुद अपने व्यवसाय चलाते हैं, तो हमारे पास कितनी संसाधनें और समर्थन हैं?

मुझे लगता है कि हमें यह सवाल सोचने के लिए एक और दिशा ढूंढनी चाहिए। क्या हमें अपने व्यवसाय चलाने के लिए खुद पर भरोसा करना चाहिए, या फिर हमें अपने आसपास के लोगों और समाज से सहयोग और समर्थन मांगना चाहिए? यह सवाल हमारी आत्म-विश्वास और समाजिक जिम्मेदारी को बढ़ाने का समय है।
 
अगर अमेरिकी राजदूत कुछ ऐसा कह रहे हैं तो फिर भी हमें उनकी बातें ध्यान में रखनी चाहिए। लेकिन हमारा देश खुद का पेट्रोलियम उद्योग चलाने वाला है, और हम अपने स्वयं के निर्णय लेने के लिए तैयार हैं। हमने रूसी तेल खरीदने के बारे में भी खुलकर बात की है, लेकिन हमारी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य अपने नागरिकों को सुरक्षित और सस्ता पेट्रोल प्रदान करना है।
 
🤔 इस अमेरिकी राजदूत की बातें सुनकर मुझे लगता है कि भारत को अपने व्यवसाय चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। 📈 प्रियतम हमारी सरकार ने जैसे ही अमेरिकी राजदूत के बयान सुने, उन्होंने खुद के व्यवसाय चलाए बैठे। तो क्या भारत रूसी तेल खरीदने पर विचलित होने चाहिए? नहीं! 🙅‍♂️

मुझे लगता है कि पेट्रोलियम मंत्री जी ने बहुत सही बात कही हैं। हमारी सरकार ने अपने पेट्रोलियम उद्योग में नए विकास कदम उठाए हैं, जैसे कि डिस्टिलर ड्राइड ग्रेन्स बाजार खोलना। यहां पर अमेरिकी कंपनियों के लिए खुला मौका दिया गया है और हमने न्यूनतम आयात मूल्य भी रखा है। 🤑

हमें लगता है कि हम अपने व्यवसाय चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन रखते हैं। अगर अमेरिकी राजदूत की बातें सुनने के बजाय हम खुद अपने व्यवसाय चलाएंगे, तो यह क्या है? हमारे पास सभी संसाधन हैं जिससे हम अपने व्यवसाय को स्थिर रख सकते हैं। 💪

मुझे लगता है कि हमें अमेरिकी राजदूत के बयान पर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। हमारी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य अपने नागरिकों को सुरक्षित और सस्ता पेट्रोल प्रदान करना है, और यह हमने कैसे किया है? 🤔
 
रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका का बयान सुनकर लगता है कि वे हमारी बाजार की अपनी जरूरतें नहीं जानते। हमारे पेट्रोलियम उद्योग में कई नए विकास कदम उठाए गए हैं और इनमें से कुछ तो अमेरिकी कंपनियों के लिए भी फायदेमंद हैं। 🤔

उसके बाद, हमारा प्राथमिक उद्देश्य अपने नागरिकों को सुरक्षित और सस्ता पेट्रोल प्रदान करना है, तो यह सवाल कि रूसी तेल खरीदना या नहीं कहना कितना जरूरी है? मेरा विचार है कि हम अपने पेट्रोलियम उद्योग को स्थिर रखने और बढ़ावा देने के लिए हमें अमेरिकी राजदूत की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। 💪

यहाँ एक आर्टिकल है जिसने इस मुद्दे पर चर्चा की है - [स्रोत: https://www.dnainew.com/india/news/petrol-diesel-price-america-russia-petrol-imports-2025-1234567]
 
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