क्या भारत ने ट्रम्प के टैरिफ की काट निकाल ली: यूरोपियन यूनियन के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ हुई; इससे आप पर कितना असर

भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आज मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हो गया है। 16वें भारत-यूरोपीय समिट के दौरान पीएम मोदी ने इसका ऐलान किया। इससे 200 करोड़ लोगों का साझा मार्केट तैयार होगा, जो दुनिया की 25% GDP कवर करेगा। इस समझौते से भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ का जवाब माना जा रहा है।
 
मुक्त व्यापार समझौते से हमें बहुत पैसा कमाने का मौका मिलेगा। लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी फैक्ट्रियों और कारखानों में निर्माण की मशीनरी तेजी से चल रही हो। यूरोप को भारत की बाजारों में दिल खोलने की जरूरत है।
 
क्या यह अच्छी खबर है! अब हमारे देश और यूरोप के बीच व्यापार बढ़ सकता है, जिससे लोगों की आय बढ़ेगी। मैं सोचता हूं कि इससे भारतीय उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, ताकि हम अपने देश को एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना सकें। प्रधानमंत्री जी ने बहुत अच्छी बात कही हैं, और यह समझौता हमारे देश के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।
 
मैं समझ नहीं पाया कि ये FTA तभी हुआ जब हमारे देश को इतनी बड़ी बाजारों का स्वागत करने के लिए इंतजार किया गया था। मुझे लगता है कि यह समझौता न केवल भारत के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि हमें विश्व बाजार में एक नए दृष्टिकोण से आगे बढ़ने का मौका देगा।
 
😊 यह तो बहुत बड़ी बात है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐसा समझौता हुआ है, लेकिन मुझे लगता है कि इसके पीछे एक बड़ा दृश्य छुपा है। हमारी अर्थव्यवस्था को ये समझौता बहुत फायदेमंद लगेगा, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इससे हमारे गरीबों और किसानों को भी फायदा हो। 🤑

मुझे लगता है कि सरकार ने इस समझौते पर बहुत ज्यादा जोर दिया, लेकिन मैं चाहता हूँ कि इसके साथ-साथ हमें अपने गरीबों और किसानों की समस्याओं को भी हल करने की जरूरत हो। 🤝 हमारे देश में बहुत सारे किसान अपने खेतों में लंबे समय तक खड़े रहते हैं, इसलिए उन्हें भी इस समझौते का फायदा होना चाहिए। 💪

क्या यह समझौता हमारे देश को अमेरिकी टैरिफ की तरह मजबूत बनाएगा? मुझे लगता है कि हां, लेकिन इसके साथ-साथ हमें अपने खिलाफ काम करने वालों को भी रोकने की जरूरत है। 🚫
 
यह समझौता बहुत ही अच्छी बात है, लेकिन क्या हमारे देश की अर्थव्यवस्था तैयार है? भारत को अपनी खाद्य सुरक्षा और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर समझौता करना चाहिए, न कि केवल सौदे पर नज़र देना। और यूरोपीय लोगों की बात समझने की जरूरत है, क्या वे हमारे उत्पादों को खरीदने के लिए तैयार हैं?
 
FTA से लोगों को फायदा नहीं होगा। यूरोपियन कंपनियां भारत में आसानी से आयात कर लेगी और हमारी छोटी-छोटी दुकानों पर हमला कर देगी। प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि इससे 200 करोड़ लोगों का साझा मार्केट तैयार होगा, लेकिन मुझे लगता है कि वास्तविकता और भी बदतर है। हमारे स्थानीय उद्योगों पर यह समझौता नुकसान पहुंचाएगा। और फिर देखो, 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कह लेने के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति जी ने टैरिफ बढ़ाने की बात नहीं की।
 
🤔 समझौता तो अच्छा है लेकिन इसके पीछे क्या साजिश है? 200 करोड़ लोगों का शेयर करने की बात बड़ी है लेकिन इससे कौन फ़ायदा उठेगा, कौन खुदा? और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष को माँडर ऑफ ऑल डील्स कहकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने जवाब देने की क्या जरूरत थी, भारत और अमेरिका के बीच सुलझाने की जरूरत नहीं होती। इसके लिए किसी भी पार्टनर को माँडर ऑफ ऑल डील्स कहना चोट पहुँचाता है।
 
तो ये फ्री ट्रेड एक्सप्रेस (FTA) क्यों नहीं था, तो लोगों ने जो चाहा, उसे दिया। अब भारत और यूरोप की आर्थिक साझेदारी तैयार है। लेकिन सवाल यह उठता है कि विदेशी निवेश बढ़ेगा या नहीं। अगर सरकार में सुधार होगा, तो यह समझौता और भी फायदेमंद हो जाएगा। लेकिन जैसे ही हमारे देश के अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान न दिया जाए, तो ये सब फायदे ख़त्म हो जाएंगे।
 
बात करते समय भारत और यूरोपीय संघ के बीच समझौते हो गया है 🙌। इससे जुड़े 200 करोड़ लोगों का साझा मार्केट तैयार हो सकता है, जो दुनिया की 25% GDP कवर करेगा। मुझे लगता है कि यह समझौता भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए एक अच्छा मौका होगा।
 
🤝 इस समझौते से देश को बहुत फायदा होगा, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसका फायदा सभी को मिले, न कि एक दूसरे के। हमें यह सोचकर चलना होगा कि 200 करोड़ लोगों को जिस तरह से इस समझौते से फायदा होगा, वैसा ही उन्हें खिलाना होगा।
 
🤔 ये फ्री ट्रेड एग्रीमेंट निकलने पर मुझे कुछ और सोचता हूँ। भारत-यूरोपीय रिश्तों को देखकर लगता है कि हमारे देश के पास अब वैश्विक बाजार पर बहुत अधिक पहुँच होगी। लेकिन क्या यह समझौता हमारे खिलाड़ी स्तर को बढ़ाएगा या नहीं? 🤝 मुझे लगता है कि अगर हम अपनी फार्मास्यूटिकल्स, टेक्नोलॉजी, और अन्य उत्पादों को बेहतर तरीके से विकसित कर लें, तो यह समझौता निश्चित रूप से हमें आगे बढ़ाएगा। 🚀
 
यार, यह बिल्कुल सही है! भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने हमें दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में पहुंचाया है। अब हम अपने उत्पादों को यूरोपीय लोगों तक पहुंचने के लिए सीधा रास्ता खोजने वाले हैं 🚀 और यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा मौका है। पीएम मोदी जी ने इस समझौते पर बहुत ही अच्छा काम किया है... यूरोपीय लोग भी उन्हें बहुत पसंद कर रहे हैं! 🤝 और भारत को अमेरिका के टैरिफ के जवाब में यह बात करनी ही पड़ी थी, लेकिन मुझे लगता है कि हमने इस पर अच्छा काम किया है। अब हम अपने उत्पादों को दुनिया भर में बेचकर पैसा कमाने के लिए तैयार हैं! 💸
 
मुझे लगता है कि यह समझौता बिल्कुल सही है, लेकिन हमें इससे पहले एक सवाल उठाना चाहिए कि इसके पीछे क्या एजेंडा है? क्या वास्तव में अमेरिका और यूरोपीय संघ को अपने हितों की रक्षा करनी है, या फिर यह सिर्फ एक राजनीतिक खेल है जिसमें भारत को फायदा होगा।

मुझे लगता है कि इस समझौते में अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच एक गुप्त समझौता होने की संभावना है। शायद वे एक दूसरे के व्यापारिक हितों को बढ़ाने के लिए इस समझौते में अपने हस्तक्षेप कर रहे हैं, ताकि भारत को फायदा न हो। लेकिन हमें इसकी पूरी जानकारी नहीं मिली है और इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए।
 
🤣📦🚀 भारत और यूरोपियन यूनियन को एक साथ प्लग कर दिया गया है! 🚗💨 अब हमारे ग्राहकों को दुनिया भर में उत्पाद खरीदने की ज़िंदगी खुल चुकी है! 😄

[ਸੰਯੁਕਤ ਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਅੱਗੇ ਵਲ ਇੱਕ ਖਿਆਲ ਹੈ] 🤔 200 करोड़ लोगਾਂ ਦਾ ਸੰਯੁਕਤ ਮਾਰਕੀਟ... ਭवੇਸ਼ੋਗਤ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਇਹ ਦਿਖਾਈ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਮਜਬੂਤ ਅਰਥਵਿਧੀ ਲਈ ਨਾ ਸਿਰਫ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ, ਬਲਕਿ ਅਮਲੀਕਰਣ ਤੇ ਵਿਚਾਰ ਦੀ ਨਿਯਜ਼ਤ ਭੀ! 💡
 
अरे, ये फ्रेंड्स, देखिए तो भारत और यूरोपियन यूनियन ने आज एक बड़ा समझौता किया है... मुक्त व्यापार समझौता 📈। अब तो हमारे देश से जितनी चीजें यूरोप में बेचने जा रही हैं, 100% टैक्स मुक्त हो गई हैं। और यूरोप से भारत में उतनी ही चीजें आयात करने की सुविधा मिलेगी, जितनी हमारे देश में बेचते थे। यह तो बहुत अच्छा नियम है। अब 200 करोड़ लोगों का साझा मार्केट तैयार है... अरे, ये सुनकर मन भाग गया। दुनिया की 25% GDP कवर करेगा... अरे वाह! इसका मतलब है, अगर हमारे देश की अर्थव्यवस्था 25% बढ़ जाएगी, तो सबकुछ अच्छा चलेगा।
 
मुझे याद आया जब मैं बच्चा था और दादाजी हमारे घर से बाहर गए तो उन्हें ब्रिटिश सरकार ने बनाए हुए खेत का पता लगाना पड़ता था। अब भारत और यूरोपियन यूनियन एक-दूसरे के बीच इतना आसानी से व्यापार कर सकते हैं! यह तो दादाजी की मेहनत निकल गई होगी।

मुझे लगता है कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा प्रभावित करेगा। पहले हमें यूरोप से चीनी व्यापार करना पड़ता था, अब हम अपने ब्रिटिश दोस्तों से ही व्यापार कर सकते हैं! यह मेरे बचपन की यादें लेकर आ रहा है जब मैं छोटा था और माताजी हमारे घर में एक छोटी सी दुकान चलाते थे।

मुझे उम्मीद है कि इस समझौते से हमारा देश अपने अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएगा। लेकिन मुझे लगता है कि बेटियों की शिक्षा और उनके करियर के अवसरों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
 
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