'कांग्रेस‑भाजपा की लव स्टोरी': तेलंगाना नगरपालिका चुनाव से पहले ओवैसी का वार, दलित और पिछड़े वर्गों पर भी बोले

तेलंगाना में 11 फरवरी को होने वाले नगरपालिका और नगर निगम चुनावों पर सेना और सुरक्षा मुद्दों पर बोले ओवैसी। उन्होंने कहा कि जब चीनी सैनिक लद्दाख में आए, तो पूर्व सेना प्रमुख ने पीएम मोदी से पूछा कि क्या कदम उठाएंगे। तब पीएम मोदी ने कहा कि जो उचित है वही करें। ओवैसी ने कहा कि उन्हें साफ-साफ कहना चाहिए था कि उन्हें पीछे हटाओ।

तेलंगाना नगरपालिका चुनाव, एक नजर।

तेलंगाना में 11 फरवरी को होने वाले नगरपालिका और नगर निगम के लगभग 2,996 वार्डों में मतदान होने हैं। इसमें प्रमुख दल के तौर पर भाजपा, कांग्रेस, एआईएमआईएम और बीआरएस को देखा जा रहा है।

नगरपालिका चुनाव के नतीजों का दिन 13 फरवरी सामने आने वाला है।

इस चुनाव में 7 नगर निगम और 116 नगर पालिकाओं से 12,993 उम्मीदवार मैदान में हैं।
 
सेना और सरकार को तेलंगाना नगरपालिका चुनावों पर देखने वाला लगता है कि उन्हें यहाँ किसी भी निर्णय लेने से पहले अपने खिलाफी और अस्थिरता फैलने की गाड़ी चलाने की तैयारी कर रहे हैं। जैसे ही चुनावों की तारीख 11 फरवरी नजदीक आ रही है, तो मुझे लगता है कि सरकार और सेना को यहाँ किसी भी वोट के लिए दबाव डालने की कोशिश करने वाली है। क्या वास्तव में चुनावों में वोटों की गिनती नहीं होगी?
 
बोलो! तेलंगाना में नगरपालिका चुनाव, यह तो हो सकता है कि ये चुनाव इतने मजेदार होंगे कि लोग मतदाता बनने जैसे भी नहीं दिख पाएंगे। और मुझे लगता है कि एआईएमआईएम ने इस चुनाव को तो खेलने के लिए तैयार कर दिया होगा। 😂🤣
 
बिल्कुल समझ आया कि ओवैसी को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस तरह जवाब देना चाहिए... लेकिन यह सवाल और जवाब तेलंगाना विशेष हैं और वहां किसी भी राजनीतिक दल या नेता को यह समझना चाहिए कि उनके गौरव और सम्मान की बात करना जरूरी है... लेकिन फिर देखिये, इस तरह की बातें पुलिस स्टेशन में भी होती हैं नहीं... तो यह सोच-समझकर मतदाताओं के दिमाग पर क्या विचार कर रहे हैं, यह समझने की जरूरत है कि चुनावों में जीत हासिल करने के लिए...

अगर पूरे देश में एक साफ-सफाई करें, तो तेलंगाना में भी इस तरह के मुद्दों पर चर्चा नहीं होती। और यह तो न केवल ओवैसी की बात, बल्कि समाज की बात है। दूरदеш के राजनेताओं को भी अपनी पार्टी के नाम पर अपने मुद्दों को आगे बढ़ाना चाहिए... लेकिन यह जरूरी नहीं कि उनके मुद्दों में किसी दूसरे नेता की बात हो।
 
बहुत गंभीर बात है 🤔 तेलंगाना में नगरपालिका चुनाव की तैयारियों में। मैं समझता हूँ कि सेना और सुरक्षा मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन चुनाव के दौरान इनमें बात करने से पहले अपने वोट का सही तरीके से फैसला करना जरूरी है 🗳️

मुझे लगता है कि चुनाव में जो भी उम्मीदवार चुने जाए, वह अपने समाज और राज्य के लिए अच्छा काम करे और उसकी जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लें। चुनाव में जीत या हार किसी भी उम्मीदवार के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह यह तय करने का मौका है कि वह अपने समाज और राज्य को कैसे आगे बढ़ाए। 🚀

तेलंगाना की नगरपालिका चुनाव के नतीजों का दिन 13 फरवरी सामने आने वाला है, मैं उम्मीद करता हूँ कि वह दिन अच्छे और शांतिपूर्ण होगा। 🙏
 
बोलते बोलते ये देश तो चल रही है! क्या हमारे चुनावों में भी ऐसा ही होने वाला है? तेलंगाना में नगरपालिका और नगर निगम चुनाव, यही सोचते हैं कि कुछ लोग प्रधानमंत्री जैसा ही बोलें। अगर उन्होंने तो अपने देश की सुरक्षा के लिए सेना के बारे में ये बात कह रहे हैं, तो खैर, हमें बस चुनाव में मतदान करना चाहिए और अपने वोटों का सही उपयोग करना चाहिए।
 
बड़े से बड़े देश को बदलने के लिए तो हमें अपना वोट डालना ही चाहिए 🗳️। लेकिन आज का युवा तो बस सोशल मीडिया पर नाचता-गाता रहता है, पार्टी के हिसाब से मतदान नहीं कर पाता। तेलंगाना में नगरपालिका चुनावों का माहौल बिल्कुल ठीक है। लेकिन चुनाव से पहले भी कई ऐसे मुद्दे जो राज्य की समृद्धि और विकास में असर डालने के लिए महत्वपूर्ण हैं, उन पर ध्यान देना चाहिए।

ओवैसी जी ने बोला है कि हमें अपने प्रधानमंत्री से कहा चाहिए कि अगर चीन वापस आ गया, तो क्या हम उनके खिलाफ खड़े होंगे। लेकिन ओवैसी जी को यह कहना चाहिए था कि अगर हम अपने देश की सुरक्षा के बारे में नहीं सोच रहे हैं, तो आगे चलने वाले समय में हमें बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
 
बस बात करो, यह तो तेलंगाना की नगरपालिका चुनावों में बहुत रुचि है ना, मैंने भी देखा है, वोट डालने का माहौल तो अच्छा होना चाहिए, लेकिन यार, यह तो सुरक्षा और सेना की बात है, हमें जरूर सावधान रहना चाहिए, चीनी सैनिकों ने भी लद्दाख में ऐसा ही किया था, हमें यह देखना होगा कि तेलंगाना के लोग अपने वोटों का सही उपयोग करें।

मैंने ये सोचा है कि इन चुनावों में भाजपा, कांग्रेस, एआईएमआईएम और बीआरएस जैसे दल देखने आएंगे, लेकिन मुझे लगता है कि यार, ये तो बस पहला प्रभाव है, फिर भी हमें अपने वोटों को सोच-समझकर देना चाहिए।
 
बोले तो बोले, लेकिन क्या उन्होंने कभी सोचा है कि उनकी बातें कैसे प्रभावित कर सकती हैं? ओवैसी ने कहा था कि सेना और सुरक्षा पर जोर देने की जरूरत है, लेकिन मुझे लगता है कि इससे तेलंगाना के लोगों को खुश नहीं किया जा सकता। ये चुनाव न केवल नगरपालिकाओं के लिए हैं, बल्कि यह स्थानीय सरकार की मजबूती और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि ओवैसी को अपनी बातें अच्छे से सोचकर कही चाहे, लेकिन ऐसा मुझे नहीं लगा।
 
बिल्कुल तो ये चुनाव किसी भी दल के लिए बड़ा मौका होगा, परंतु सुरक्षा और सेना मुद्दों के बारे में ओवैसी जी ने कहा है कि उन्हें पीछे हटाओ, तो यह एक बहुत बड़ा सवाल है, क्या अन्य दल भी उनके कदम को काबू में कर सकेंगे।
 
नगरपालिका चुनाव तेलंगाना की जानबूझकर चुनौती पर आ रहा है 🤔 तो यह देखना रोचक होगा कि प्रदर्शनकारियों और चुनाव मैदान से बाहरी लोग कैसे सहयोग करते हैं। ओवैसी जी ने अच्छी बात कही थी, क्या उन्हें तेलंगाना के लोगों को सूचित करना था कि चीनी सैनिक की तुलना में भारतीय सेना में और अधिक सुरक्षा है 🙌
 
ओवैसी को लगता है कि PM Modi के जवाब से भला क्या तय हुआ? चीनी सैनिक लद्दाख में आए और पूर्व सेना प्रमुख ने पूछा था कि कदम उठाएंगे, लेकिन PM Modi ने कह दिया कि जो उचित है वही करें। तेलंगाना नगरपालिका चुनाव में भी ऐसा ही स्थिति बनती देखें, तो उम्मीद नहीं है। क्या वोट डालने वाले लोगों की बात सुनने के लिए हमारे प्रमुख नेताओं में दीवार बन जाने लगी है? 😐
 
बोलते बातते भी खेद क्या, ओवैसी जी को पता था कि कुछ लोग सेना और सुरक्षा पर ध्यान देते रहते हैं? 🤔 तेलंगाना में नगरपालिका चुनावों में भी ऐसा होने का क्या मतलब, कि हम सब अपने मतपत्र डालते समय सेना और सुरक्षा पर विचार करते हैं? 🤷‍♂️ लेकिन अगर हमारे देश की राजनीति में ऐसा होने का अर्थ है कि हम अपने प्रधानमंत्री से भी कह रहे हैं कि जो उचित है वही करें, तो मुझे लगता है कि कुछ चीजें सही से नहीं चल रही हैं। 🚨
 
अरे भाई, तेलंगाना में नगरपालिका चुनाव की बात कर रहे हैं... मुझे लगता है कि यहाँ पर बहुत से लोग अपने देश को देखकर आंसू भी निकलते हैं। जैसे जब चीनी सैनिक लद्दाख में आए, तो पूर्व सेना प्रमुख ने पीएम मोदी से कहा था कि क्या कदम उठाएंगे, फिर पीएम मोदी ने जवाब दिया कि जो उचित है वही करें। यहाँ पर भी यही बात होगी, लेकिन ओवैसी की बात सुनकर लगता है कि उन्हें जरूर कहना चाहिए था कि पीछे हटाओ, नहीं तो देश को और भी खतरे में डाल देंगे।
 
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