India's Oil Procurement: विक्रम मिसरी बोले- कच्चा तेल खरीदने के जितने अधिक विकल्प, हम उतने ही अधिक सुरक्षित

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति विविधता पर जोर देते हुए, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और सुनिश्चित करना है कि उन्हें उचित मूल्य पर पर्याप्त ऊर्जा मिले।

विदेश सचिव ने कहा, हमारी आयात नीति पूरी तरह से इन उद्देश्यों से प्रेरित है। हम इसके लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं हैं और न ही हमारा ऐसा कोई इरादा है। बाजार की परिस्थितियों के आधार पर स्रोतों का मिश्रण समय-समय पर बदलना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में हम जितने अधिक विविध हों, उतने ही अधिक सुरक्षित होंगे। हमारी ऊर्जा नीति के प्रमुख आधार पर्याप्त उपलब्धता, उचित मूल्य निर्धारण और आपूर्ति की विश्वसनीयता हैं।

विदेश सचिव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को लेकर भी प्रतिक्रिया जताई, उन्होंने कहा, हमारी ऊर्जा नीति पूरी तरह से इन उद्देश्यों से प्रेरित है।

कांग्रेस ने इस मामले पर सरकार के बयानों पर निशाना साधा, उन्होंने कहा, सरकार का रवैया होल इन गवर्नमेंट जैसा है, लेकिन वास्तविकता इससे उलट है।

वाणिज्य मंत्री और विदेश मंत्री एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि पेट्रोलियम मंत्री अन्य मुद्दों में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा, इस पूरे मामले में स्पष्ट नीति और समन्वय की कमी नजर आती है।
 
अरे, मुझे लगता है कि सरकार को अपनी ऊर्जा नीति पर बहुत ध्यान देना चाहिए, ताकि हमें पर्याप्त ऊर्जा मिल सके। लेकिन यह सवाल है, कि हमने ऐसे स्रोतों को खोज लिया है जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। मुझे लगता है कि हमें अपने ऊर्जा स्रोतों पर और अधिक रिसर्च करना चाहिए। 😊
 
मैंने देखा कि सरकार खुद को ऊर्जा सुरक्षित साबित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि हमें अपने उपभोक्ताओं को सही मूल्य पर ऊर्जा देने के लिए और भी बहुत प्रयास करने पड़ेंगे। 🌟

मुझे लगता है कि सरकार को अपनी नीतियों में स्पष्टता और समन्वय की कमी को समझने की जरूरत है। हमें ऊर्जा की विविधता बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन इसके साथ ही उपभोक्ताओं की जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा। 💡

आपको कभी भी अपने ऊर्जा बिल पर दबाव महसूस नहीं करना चाहिए, इसलिए हमें सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सरकार और पेट्रोलियम मंत्री दोनों एक-दूसरे के लिए जवाबदेह हैं और उपभोक्ताओं को सही मूल्य पर ऊर्जा देने के लिए काम कर रहे हैं। 💯
 
अरे दोस्त 🤔, यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है! ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति विविधता पर जोर देना काफी जरूरी है, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हर स्रोत को उनके फायदे-नुकसान के अनुसार मूल्यांकन करना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर प्रतिक्रिया देना भी अच्छा है, लेकिन हमें अपनी ऊर्जा नीति को ऐसे नहीं तय करना चाहिए जिससे हमारे देश के वास्तविक रुचियों और जरूरतों पर ध्यान न दें। सरकार के बयानों में भी थोड़ी सा स्पष्टता और समन्वय जरूरी है, लेकिन लगता है कि यह तो एक बड़ा काम है। 🤝
 
मैंने याद किया था जब हमारे देश में ईंधन की डिमांड बहुत अधिक थी, तो सरकार ने अपनी पहल ऊर्जा संचय योजना शुरू की थी। मेरे पिताजी ने बताया था, वह व्यापार करते थे और हमेशा ऊर्जा की बढ़ती मांग को लेकर चिंतित रहते थे।

आज भी, जब हमारे देश में विदेश सचिव जी ने कहा है कि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करनी चाहिए, तो मैंने याद किया है कि जब मैं छोटा था, तो हमारे घर में सिर्फ गैस का उपयोग करते थे।

लेकिन आज की ऊर्जा नीति में बदलाव होना अच्छा है, अगर यह वास्तविक उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की दिशा में हो। विदेश सचिव जी ने बाजार की परिस्थितियों के आधार पर स्रोतों का मिश्रण समय-समय पर बदलने का भी उल्लेख किया, यह तो बहुत अच्छा है।

लेकिन एक बात भी ध्यान देनी चाहिए, हमारे पेट्रोलियम मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर प्रतिक्रिया जताई, और सरकार ने अपने बयानों पर निशाना साधा, लेकिन वास्तविकता इससे उलट है।
 
मेरा फ़ेसबुक पेज पर देखें, बोलते हैं विदेश सचिव कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति में विविधता बढ़ानी चाहिए, लेकिन जिस तरह से उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जवाब दिया, वह अच्छी नहीं लगा। विदेश सचिव ने कहा कि हमारी आयात नीति पूरी तरह से इन उद्देश्यों से प्रेरित है, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने सरकार को यह बात करने देनी चाहिए कि क्या वास्तव में हमारी ऊर्जा नीति में कोई बदलाव आ रहा है। मेरा कहना है कि सरकार को अपने बयानों पर स्पष्टता लानी चाहिए।
 
🤣 तो यह तो बहुत अच्छा है कि ऊर्जा मंत्री इतने बुद्धिमान हैं कि अपने देश को अमेरिका से ऊर्जा बनाने के लिए कह रहे हैं। 🙄 यार, भारत में टिकिट मशीन तो हमारे खिलाड़ी की तरह से चाल चलने का शौक कर दिया है! 😂 यह ऊर्जा नीति तो सिर्फ एक नया मंच बनाने की तरह है, ताकि विदेश सचिव अपनी हरकतों को जिम्मेदार ठहरा सके। 🤥 लेकिन याद रखें, भारत की ऊर्जा नीति में हमेशा तीन चीजें शामिल रहती हैं - चोरी, गले लगाना, और पेट्रोलियम मंत्री! 😜
 
अरे, देखो कैसे सरकार ने अपनी ऊर्जा नीति पर ध्यान केंद्रित किया है! लेकिन फिर भी कांग्रेस ने उन्हें ठहराया है कि पूरी स्पष्टता नहीं है। मैं समझता हूँ कि सरकार को अपने निर्णयों पर खुलकर बात करनी चाहिए। लेकिन एक बात तो जरूरी है कि हमें ऊर्जा की विविधता और सुरक्षा को महत्व देना चाहिए। मैं यही कहूँगा कि अगर हम अपने आपसी सहयोग पर ध्यान केंद्रित करें, तो हम जल्द ही अपने ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं!
 
अरे, मुझे लगता है की सरकार को अपनी ऊर्जा नीति को बेहतर बनाने के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए। जैसे की विदेश सचिव ने कहा, हमें अपने आपूर्ति मिश्रण में बदलाव करना चाहिए ताकि हमारे देश के लोगों को उचित ऊर्जा मिल सके।

लेकिन, सरकार की प्रतिक्रिया सुनकर भी लगता है कि उन्हें अपनी नीति को बेहतर बनाने के लिए कुछ नहीं करना चाहती। और यह देखकर भी खेद होता है, वाणिज्य मंत्री और विदेश मंत्री एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि पेट्रोलियम मंत्री अन्य मुद्दों में व्यस्त हैं।

मुझे लगता है, की सरकार को इस मामले में अपनी नीति को स्पष्ट करना चाहिए और देश के लोगों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए। हमें उम्मीद है की सरकार जल्द से जल्द ऐसा करेगी।
 
मुझे लगता है कि यह तो एक अच्छा फैसला है, लेकिन क्या वास्तव में इसके पीछे कुछ सही रणनीति नहीं है? सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा पर बहुत बोला, लेकिन कहाँ तक हमारी आयात नीति हमारे ऊर्जा संकट को दूर कर सकती है? मुझे लगता है कि यह तो एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन हमें अभी भी बहुत कुछ सुधारने की जरूरत है।

कांग्रेस ने बोलते समय, मैं समझ गया हूँ कि सरकार का रवैया अलग है और वास्तविकता अलग है, लेकिन यह तो हमें चिंतित कर देता है। वाणिज्य मंत्री और विदेश मंत्री एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, लेकिन क्या इसके पीछे स्पष्ट नीति नहीं है?

मुझे लगता है कि यह तो हमें ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति विविधता पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन हमें अभी भी अपनी आयात नीति को ठीक करने की जरूरत है। यह एक जटिल मुद्दा है, लेकिन मुझे लगता है कि अगर हम इसे सावधानी से देखेंगे, तो यह हमारे लिए अच्छा हो सकता है। 🤔💡
 
राष्ट्रपति की ऊर्जा नीति पर जोर देने से अच्छा है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसका फायदा सभी वर्गों में विभाजित नहीं हो रहा। पेट्रोलियम कीमतें बढ़ रही हैं तो क्या सरकार अपने आप से बात कर रही है? हमें ऊर्जा की खपत कम करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि इसका शौक छुड़ाने में।
 
आज की ऊर्जा स्थिति तो सोच-समझकर बनाई जानी चाहिए, सरकार द्वारा की गई बातें सुनने से पहले अपने घर में गैस के बिलों की भी बात कर लेनी चाहिए 🤔. विदेश सचिव की बातों से मैं समझता हूँ कि सरकार की प्राथमिकता किसी एक जगह निर्भर नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसके बाद भी हमें अपने देश की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति विविधता पर जोर देना ठीक है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे पास अपनी खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति विविधता को स्थापित करने में भी बहुत काम करना है। सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सच्चाई बताना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही हमें अपने नेताओं को भी उनकी जिम्मेदारियों को समझने में मदद करनी चाहिए।
 
मैं तो हमेशा कहता हूँ कि सरकार की बातें और सच्चाई की दूरी बहुत ज्यादा होती है... 🤔 मुझे लगता है कि विदेश सचिव ने बिल्कुल सही कहा है, हमारी आयात नीति तो बस एक ही उद्देश्य से बनाई गई है - भारतीय उपभोक्ताओं की रक्षा। और फिर भी सरकार द्वारा ऐसी कई बातें कही जा रही हैं... मेरी पत्नी ने कल बोलते हुए तो मुझसे कहा कि अगर मैंने रास्ते पर थोड़ा सा ध्यान दिया, तो उसके हाथों में घाव नहीं आये। 🤦‍♀️ और लेकिन सरकार की बातें सुनते हुए, मुझे लगता है कि हम फिर से एक बार उसी तरह की गड़बड़ी में पड़ जाएंगे। 😬
 
એમ કર્યું છે, બાળકો માટે દૈનિક જીવનમાં અત્યારે ઉપલબ્ધ સરસ શુદ્ધ પાણી ન હોવું કેટલીયે મુશ્કેલીઓ થઈ જાય.

એસ ઐયુ કરેન્ટ્સ કરવા બંધાવણી કરતી હતી, પરંતુ ફરીથી આ લાજિયન ભવનમાં એટલાં સરળતાથી કરવામાં આવે છે.

બાળકો દ્વારા શિખવવામાં આવતી ગણિત, ભાષા અને સાહિત્યકલાઓમાં ફોટોશોપ, ઈન્ટરનેટ અને સોશિયલ મીડિયાનું વધુવિધાઈ પ્રભાવ જોવા મળે છે.
 
मैं तो लगता है कि सरकार अपनी ऊर्जा नीति पर बोलते समय तो बहुत ही जिम्मेदार और स्पष्ट होते हैं, लेकिन अभी तक वाकई में क्या बदलाव आया? किसी भी तरह की नई नीति को लागू करने में इतनी देर लगती है... 🤔

और बोलते हुए, सरकार कहती है कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति विविधता पर जोर देते हैं, लेकिन क्या वास्तव में उन्होंने अपनी नीतियों को बदलने की कोशिश की है? या फिर यह सब तो बस भाषा था... 🙄

कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उनकी नीति में स्पष्टता और समन्वय की कमी है, लेकिन मैं सोचता हूँ कि यह तो एक पुरानी कहावत है। जैसे ही सरकार कोई नया कदम उठाती है, वे हमेशा दूसरों पर आरोप लगाते हैं... 🙃
 
बात यह तो समझ में आ गई, सरकार का दावा कि वे आम आदमियों के हितों पर ध्यान देते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय बिना जनता की जानकारी में ही लिए जाते हैं। 🤔

जल्द ही यह सवाल उठेगा कि सरकार द्वारा बताए गए उद्देश्य वास्तव में क्या हैं और उन्हें कैसे प्राप्त किया जाएगा। आम आदमी को सुनना और उनकी बात मानना भी महत्वपूर्ण है, लेकिन एक समय में सबकुछ तेजी से हो रहा है और यह बहुत थकाऊ है।

क्या हमारी सरकार को अपने पार्टी के नेताओं की राजनीति पर ध्यान देने की बजाय आम आदमियों की जरूरतों को समझने पर ध्यान देना चाहिए? यह सवाल वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है।
 
मुझे लगता है कि सरकार को अपनी ऊर्जा नीति पर थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। यानी जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को लेकर प्रतिक्रिया कर रहे हैं, तो वह भी एक मौका है कि सरकार अपने बयानों पर स्पष्टता लाए। लेकिन ऐसे में लगता है कि विदेश सचिव जी की बात सच्ची है, हमें अपनी आयात नीति से दूर नहीं रहना चाहिए।

मुझे लगता है कि सरकार को यह तय करना चाहिए कि हम अपने ऊर्जा स्रोतों में कितनी विविधता लाना चाहते हैं और कैसे लाना। अगर ऐसा नहीं करते हैं, तो फिर क्या नतीजा निकलेगा?

मुझे लगता है कि हमें अपनी ऊर्जा नीति पर पूरी तरह से विश्वास करना चाहिए।
 
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