बालासोर के राजमिस्त्री शेख मुकंदर ने अपना जीवन एक गोद लिया थी। वह तारीख 14 जनवरी सुबह होने से पहले ही घर से निकल गए थे। ओडिशा के बालासोर में रहने वाले मुकंदर राजमिस्त्री रोजाना गाड़ियों लोड करते थे। उस दिन उन्हें लोडिंग का ही काम मिला था। परिवार को लगा कि यह एक लूटपाट की घटना है, लेकिन जब वीडियो सामने आया, तो यह धार्मिक एंगल सामने आया।
मुकंदर की पत्नी मनौरी ने बताया कि मुकंदर की मौत के बाद उन्हें 20 हजार रुपये दिए गए थे। लेकिन इतने पैसे तो शौहर को सुपुर्दे-खाक करने में खर्च हुए। मनौरी ने बताया कि उनके परिवार को मदद के तौर पर तहसीलदार से 20 हजार रुपए मिले थे। इस पर मनौरी कहती हैं, ‘20 हजार रुपये में क्या होगा। इतने पैसे तो शौहर को सुपुर्दे-खाक करने में खर्च हुए।
मुकंदर की पत्नी ने बताया कि उसके पति दर्द से छटपटा रहे थे, कुछ बोल भी नहीं पाए। मनौरी ने बताया कि उसे पता नहीं था कि मुकंदर कहां जा रहे हैं और कब वापस आएंगे।
मुकंदर के रिश्तेदारों ने बताया कि उनके परिवार को कभी नहीं पता था कि उनके परिवार को इस तरह की घटना मिलेगी। उन्होंने बताया कि मुकंदर गोकशी में जाते हैं और विश्व हिंदू परिषद से संपर्क रखते हैं।
मुकंदर की पत्नी मनौरी ने बताया कि मुकंदर की मौत के बाद उन्हें 20 हजार रुपये दिए गए थे। लेकिन इतने पैसे तो शौहर को सुपुर्दे-खाक करने में खर्च हुए। मनौरी ने बताया कि उनके परिवार को मदद के तौर पर तहसीलदार से 20 हजार रुपए मिले थे। इस पर मनौरी कहती हैं, ‘20 हजार रुपये में क्या होगा। इतने पैसे तो शौहर को सुपुर्दे-खाक करने में खर्च हुए।
मुकंदर की पत्नी ने बताया कि उसके पति दर्द से छटपटा रहे थे, कुछ बोल भी नहीं पाए। मनौरी ने बताया कि उसे पता नहीं था कि मुकंदर कहां जा रहे हैं और कब वापस आएंगे।
मुकंदर के रिश्तेदारों ने बताया कि उनके परिवार को कभी नहीं पता था कि उनके परिवार को इस तरह की घटना मिलेगी। उन्होंने बताया कि मुकंदर गोकशी में जाते हैं और विश्व हिंदू परिषद से संपर्क रखते हैं।