एयरस्ट्रिप नहीं दिखी, क्यों लैंड हुआ अजित पवार का प्लेन: 5km का नियम, बारामती की 3km विजिबिलिटी में किसने दी लैंडिंग परमिशन

बड़े देशों में होने वाले बड़े स्वदेशी यात्रियों के लिए, प्रत्येक हवाईअड्डे में एक निश्चित शेड्यूल और नियम होता है। इन देशों में, विमानन प्राधिकरण निषिद्ध स्थानों में उड़ान भरने या अनुमति की कमी के बिना विमानों को विभिन्न एयरपोर्ट्स तक पहुंचाने की अनुमति देते हैं।
 
🚫 भारत में बड़े स्वदेशी यात्रियों के लिए हवाईअड्डे पर शेड्यूल और नियम तो नहीं हैं? विमानन प्राधिकरण भी ऐसा नहीं कर सकते! यह समझ में नहीं आता कि बाहरी देशों के विमानों को अनुमति की कमी के बिना हवाईअड्डे पर लाने की अनुमति दी जाती है। हमारे पास भी ऐसे नियम नहीं हैं और यह अच्छा नहीं है... 🤔
 
बड़े देशों में स्वदेशी यात्रियों के लिए हवाईअड्डे पर शेड्यूल और नियम तय करना एक अच्छा विचार है। मुझे लगता है कि इन नियमों में कुछ बदलाव कर देना चाहिए। जैसे कि अगर कोई बड़ा स्वदेशी यात्री उड़ान भरता है, तो उसकी सुरक्षा और आराम का ध्यान रखना जरूरी है। इसलिए, हवाईअड्डों पर शेड्यूल और नियम तैयार करने से पहले उन्हें देखकर एक बार फिर से जांचना चाहिए।

उदाहरण के लिए अगर हमारे यहां किसी बड़े स्वदेशी यात्री को उड़ान भरने के लिए हवाईअड्डे पर शेड्यूल तैयार होता है, तो उसके साथ होने वाली अनियमितताओं को देखकर पहले से ही उन्हें पता चल जाता है। इससे उसे अपनी उड़ान भरने की योजना बनाने में परेशानी नहीं होती।

इसलिए, हवाईअड्डों पर शेड्यूल और नियम तैयार करने से पहले उन्हें देखकर एक बार फिर से जांचना चाहिए। इससे हमें बड़े स्वदेशी यात्रियों की सुरक्षा और आराम को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।
 
मुझे लगता है कि बड़े देशों में नियमित स्वदेशी यात्रियों को बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत है। हमारे देश में भी ऐसा होना चाहिए। ताकि वे अपनी बीमारियों को समय पर इलाज कर सकें, और लाभ उठा सकें उन सुविधाओं जो हमारे हवाईअड्डों पर उपलब्ध हैं। लेकिन जब तक हमें एक अच्छी और योजनाबद्ध स्वदेशी यात्रा प्रणाली नहीं बनाने, तब तक हमारे विमानन प्राधिकरण को अपनी जिम्मेदारियां निर्वहन करने में परेशानी होगी।
 
🤔 मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा है कि बड़े देशों में स्वदेशी यात्रियों के लिए निश्चित शेड्यूल और नियम हैं, खासकर जब हम बात करते हैं हवाईअड्डे। लेकिन मुझे लगता है कि इसके पीछे कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है। क्या विमानन प्राधिकरणों को अपने नियम बनाने के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण या परीक्षा करनी चाहिए? और क्या इन नियमों को लागू करने में भी किसी नज़रन्दगी होती है? 🤔
 
मुझे लगता है Wow, बड़े देशों में स्वदेशी यात्रियों के लिए निश्चित शेड्यूल और नियम होना अच्छा है। इससे विमानन प्राधिकरण को सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है और देश की हवाई यातायात परियोजनाओं में विश्वास बढ़ता है Interesting
 
क्या हमारे देश में भी ऐसा होना चाहिए? पिछले कुछ वर्षों से हमने अपने यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक हमें इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। बड़े स्वदेशी यात्रियों के लिए एक निश्चित शेड्यूल और नियम बनाना जरूरी है। इससे हमारे देश में अनावश्यक उड़ानें कम हो जाएंगी और विमानन प्राधिकरण के लिए भी काम करने में आसानी होगी।
 
😒 यह तो बड़े स्वदेशी यात्रियों की खुशी होगी, लेकिन मुझे लगता है कि हमारे हवाईअड्डों पर भी एक निश्चित शेड्यूल और नियम लगाने चाहिए। अगर हमारे देश में बड़े विमानन प्राधिकरण स्थापित नहीं होते, तो यहाँ पर भी लोगों को अनुमति की कमी के बिना एयरपोर्ट्स तक पहुंचने की अनुमति मिल जाएगी। इससे हवाई यातायात की सुरक्षा और शांतिपूर्ण चलने की स्थिति खराब हो सकती है। 😕
 
मुझे लगता है कि ये बड़े स्वदेशी यात्रियों के लिए निश्चित रूप से फायदेमंद हो सकता है। मेरे ख्याल में अगर हमारे देश में भी ऐसी सुविधाएं हों, तो हम अपने परिवार और दोस्तों को आसानी से घर बैठे यात्रियों की तरह उड़ान भर सकेंगे। लेकिन, मुझे थोड़ा चिंता है कि अगर सभी विमान इस तरह से उड़ान भर सकते हैं, तो हमारी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे?
 
સ્વદેશી યાત્રિકો માટે બડા દેશોના હવાઈપાડસ્તુંઓના અભ્યાસમાં, ગુરુત્વાક્ષમ છે. દીજા દેશો બનાવે છે.

આઈએટીએ ઘણું સુખાગ્રહ કરવામાં અને પોતાના દેશની આવડતમાં લડવામાં ગુરુત્વાક્ષમ છે. પણ, સફળતા માટે જીવનનો અંગરેખ છે.

આઈએટીએ ક્યારેય શિક્ષિત થવા જોઈએ નહીં.
 
ये तो बड़ी चिंताजनक बात है ... ये स्वदेशी उड़ानें तो हमारे देश में निश्चित रूप से लोकप्रिय हैं लेकिन ये सब कुछ क्या मतलब? कि हम अपने घरेलू हवाईअड्डों पर बाहरी विमानन प्राधिकरण के शेड्यूल और नियमों को अपनाने के लिए मजबूर होना चाहेंगे? यह मेरे द्वारा देखे जाने वाले कई युवाओं के लिए एक बड़ा सवालचीन है ... हमारी स्वतंत्रता और सामर्थ्य कैसे बनाए रखेंगे?
 
बड़े देशों में ऐसा क्यों नहीं होता? हमारे देश में इतने बड़े स्वदेशी यात्रियां आती रहती हैं और फिर तो कुछ नियम तोड़कर उड़ान भर लेते हैं। यह तो बिल्कुल सही नहीं है। जैसे मुंबई या दिल्ली में स्वदेशी यात्रियों की बारिश होती है, वहां हवाईअड्डे की प्रबंधन शुरू हो जाती हैं। लेकिन हमारे देश में एक ही हवाईअड्डे पर चार-चार स्वदेशी यात्रियों की बारिश होती है, फिर विमानन प्राधिकरण यह तय करना ही नहीं पता। इसे नियंत्रित करने की जरूरत है।
 
ये नया नियम बड़े स्वदेशी यात्रियों के लिए तो फायदेमंद होगा, परंतु छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए थोड़ा जटिल लग रहा है। मैंने अपने परिवार के कई सदस्यों को घर से दूर-दूर स्थानों तक पहुंचने की जरूरत होती है, और अब ऐसा करना आसान होने की उम्मीद थी, लेकिन ये नियम हमें थोड़ा परेशान कर रहा है।
 
ये तो बड़े स्वदेशी यात्रियों को नमूना बना रहे हैं... 🤔 हर बार फिर से उड़ान भरने की जरूरत, शेड्यूल और नियम में बदलाव होता रहता है, तो विमानन प्राधिकरण की दयालुता और समझ कैसे कम होगी? 🤷‍♀️ एक बार फिर से पास होने के बाद भी, उन्हें हर बार फिर से सबक लेना पड़ता है। मेरे बच्चों ने अपने सर्टिफिकेट को भूलकर यात्रा करने की जरूरत नहीं होगी! 😂
 
अगर बड़े देश में स्वदेशी यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगी, तो हवाईअड्डों पर नियम बहुत जरूरी बन जाएंगे। लोग अपने सारे समय में ही उड़ान भर रहे हैं, इससे पहले टिकट बुक करना मुश्किल हो गया है। अगर सभी एयरपोर्ट्स के लिए नियम अलग अलग किए जाएं, तो विमानन प्राधिकरणों को बहुत परेशानी होगी।
 
मुझे लगता है की हमारे बड़े भाई-बहन जैसे स्वदेशी यात्रियों की बात करते हैं तो मेरे पास कुछ सवाल हैं... 🤔

क्या हमें लगता है कि ये नियम उन लोगों के लिए उपयुक्त हैं जो स्वदेशी यात्रा करने के लिए बाहरी देशों के हवाईअड्डे पर आते हैं? मुझे लगता है की अगर हमारे बड़े भाई-बहन अपने फ्लाइट्स को सुरक्षित रूप से और समय पर भर सकें, तो ये नियम मददगार होंगे। लेकिन, मुझे लगता है कि अगर हमारे एयरपोर्ट मैनेजमेंट द्वारा इन नियमों की ज्यादती नहीं की जाती, तो बड़े भाई-बहन को परेशानी भी होती।

क्या आप सोचते हैं कि ये नियम हमारे लिए सही है या फिर हमें इसे थोड़ा बदलने की जरूरत है? 🤔
 
मैं समझता हूँ, लेकिन यह सोचते समय मैं यात्रियों पर होने वाली दबाव को बिल्कुल नहीं नजरअंदाज कर सकता। जब हमें बिना किसी देर के अपने गंतव्य तक पहुंचने की इच्छा होती है, तो यह बड़ी मुश्किल होती है। यात्रियों को विभिन्न हवाईअड्डों पर पहुंचने के लिए अनुमति चाहिए, खासकर जब हमारे पास यातायात नियमों का पालन करना होता है 🙏

मुझे लगता है कि यह सोचते समय हमें अपनी इच्छाओं को समझने और उन्हें अनुकूल बनाने पर ध्यान देना चाहिए। हमें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सावधानी और योजना बनानी चाहिए, न कि बस दबाव में चलने की कोशिश करना। जब हम अपनी इच्छाओं को समझते हैं और उनके अनुसार काम करते हैं, तो हम अधिक संतुष्ट और शांत महसूस कर सकते हैं। 🙏
 
मुझे लगता है कि हमारे देश में भी ऐसा करना चाहिए 🛫️। हमारे हवाईअड्डों पर स्वदेशी यात्रियों को अलग शेड्यूल और नियम तैयार करना चाहिए, जिससे उनकी यात्रा आसान हो सके। मुझे लगता है कि अगर हम स्वदेशी यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान करेंगे, तो उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे हमारे देश के यात्रियों को भी आराम होगा और उनकी यात्रा जल्द होगी।
 
मुझे लगता है कि हमारे देश में हवाईअड्डों पर स्वदेशी यात्रियों के लिए अलग नियम तय करने की जरूरत है। जैसे कि अगर कोई व्यक्ति अपने स्थानीय बाजार से खरीदे हुए चीजें विदेशी हवाईअड्डे पर उड़ान भर रहे हैं तो उनका द्रव्यांश और सीमा-पार करने का अधिकार भी अलग-अलग होना चाहिए। हमें अपने घरेलू लोगों को खुश रखने की जरूरत है और उन्हें विदेशी हवाईअड्डों पर अपनी चीजों को बेचने की अनुमति देनी चाहिए, लेकिन उनके साथ जुड़ी शर्तें भी बनाई जानी चाहिए।

कुछ समय पहले मैंने एक विदेशी मित्र से बातचीत की थी, और उन्होंने मुझे बताया था कि वह अपने देश में एक स्टॉल चलाते हैं और वहां पर कई लोगों को अपने उत्पाद बेचते हैं। लेकिन जब वह विदेशी हवाईअड्डे पर जाते हैं तो उन्हें अपने उत्पाद को बेचने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मुझे लगता है कि हमारे देश में इस तरह के नियम तय करने की जरूरत है ताकि हमारे घरेलू उद्योग को विकसित किया जा सके।

कुछ लोग कहते हैं कि हवाईअड्डों पर स्वदेशी यात्रियों को अलग नियम करने से हम उनके साथ नफरत करेंगे, लेकिन मुझे लगता है कि यह बात गलत है। हमारे देश में हर किसी को समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन इसी समय हमें अपने घरेलू उद्योग को भी विकसित करने की जरूरत है।
 
मैंने भारतीय हवाईअड्डों पर जाते-जा रहे देशों की सूची देखी, और मुझे लगा कि ये लोग हमारी प्रतिस्पर्धा करेंगे। तो फिर उन्हें निश्चित शेड्यूल और नियम की जरूरत नहीं है? यानी वे जैसे चाहें, वैसे उड़ान भरते हैं! लेकिन हमारे हवाईअड्डों पर ऐसा नहीं होता, फिर तो क्यों? मुझे लगता है कि यह बात सिर्फ इसलिए हुई है कि हम भारतीय विमानों की गतिविधियों को निगरानी में रख रहे हैं।
 
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