ED छापे के बाद ममता की इमरजेंसी-मीटिंग में क्या हुआ: I-PAC स्टाफ के लिए ‘सीक्रेट गाइडलाइंस’ लागू, क्या रेड से BJP को नुकसान होगा

स्टाफ को सख्त आदेश

ED की छापेमारी के बाद I-PAC की इमरजेंसी मीटिंग में तीन गाइडलाइंस लागू हुईं: डिजिटल क्लिनिंग पर फोकस, किसी भी कर्मचारी से सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना।
 
बात है इस छापेमारी की, तो मुझे लगता है कि इसकी जरूरत भी थी। I-PAC जैसे संगठनों में इतनी राजनीतिक गतिविधि होती है, तो कुछ ऐसा करने की जरूरत थी ताकि सब कुछ व्यवस्थित हो। लेकिन अब यह तीन गाइडलाइंस लागू होने पर मुझे लगता है कि इससे उनके पास अपने आप को सोशल मीडिया जैसे चुनौती से बचने का एक तरीका मिल गया है। डिजिटल क्लिनिंग पर ध्यान देना अच्छा है, लेकिन किसी भी कर्मचारी से सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट करने से पहले उनकी परवाह नहीं करनी चाहिए। इससे उनके पास अपने आप को दोषसिद्ध करने का एक तरीका मिल गया है।
 
क्या यह देखकर मन में खुशी हुई कि एसडीई ने इ-पीएसीसी की इमरजेंसी मीटिंग पर रुकवाली लगाई। तो यार, अब सोशल मीडिया पर लोगों को अपने करियर और निजी जीवन को अलग रखने का मौका मिल गया है। डिजिटल क्लिनिंग पर फोकस करने से अच्छे नतीजे होने चाहिए। तो चलिए देखें कि आगे कैसे मुड़ती है इस स्थिति।
 
मैंने क्या पढ़ा! यह तो ED की छापेमारी के बाद I-PAC की इमरजेंसी मीटिंग की चर्चा कर रहा है 🤯। लेकिन फिर सोचता हूँ, अगर उनके पास इतनी गंभीर जानकारी है तो फिर वे क्यों नहीं बताते? मैंने देखा होगा, ED ने चुनाव आयोग और कुछ और लोगों पर ध्यान केंद्रित किया। यह तो किसी भी पार्टी के लिए नहीं बोला जा सकता! 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि अगर वे ऐसे गाइडलाइंस बनाते हैं तो फिर उनका उद्देश्य सोशल मीडिया पर पार्टी के नाम पर रेड करने वालों को पकड़ना नहीं है, बल्कि यह दिखाना है कि वे कितने सख्त हैं और कैसे उनके पास इतनी जानकारी है! 😏
 
मुझे लगता है कि यह एक बड़ा निर्णय है, ED की छापेमारी के बाद I-PAC को इतने गाइडलाइंस देना तो जरूरी है परंतु उनकी अनुपालन कराने की जिम्मेदारी कैसे होगी? क्या वे अपने कर्मचारियों से भी इन गाइडलाइंस को पालन करने के लिए कहेंगे? यह एक बड़ा सवाल है और मुझे लगता है कि उनकी अनुपालन की जिम्मेदारी कौन लेगा? 🤔
 
न्यूज़ है एड ने I-PAC पर छापेमारी की तो वो लोग सोच लग जाते! ED की यह छापेमारी का मुख्य उद्देश्य स्टाफ को सख्त आदेश देना है, बिल्कुल समझ में आता है। अब इन तीन गाइडलाइंस को लागू कर उन्होंने डिजिटल क्लिनिंग पर फोकस करने की कहा, यह तो सचमुच जरूरी है क्योंकि एड को सिर्फ पैसा कमाना है, न कि किसी भी तरह के विवाद में ले जाना। और दूसरा गाइडलाइन है किसी भी कर्मचारी से सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना, यह तो साफ साफ समझ आ गया है। वो लोग जिन्होंने कुछ गलत किया है उन्हें अब ऐसा मानना पड़ेगा।
 
क्या हुआ इसी देश में, इंसानों की जिंदगी तो ऐसी है मानो, हम सब बोलते-सुनते, टिप्पणियां करते-मानने का, लेकिन फिर कभी-कभी लगता है की, व्यक्तिगत और पार्टी के काम से अलग रखना चाहिए।

नयी दफ्तर में ऐसा एक नियम बन गया है, जिसमें सोशल मीडिया पर बोलने को रोकने की बात कही गई, लेकिन क्या ये हमारी खुद की गली का मामला है? तो फिर कौन है जो यह नियम बना रहा, और किसी को भी उनका पालन करने के लिए मजबूर कर रहा।

ज़रूरत है, कुछ इस तरह से, जहां हम सब अपनी खुद की गली में राहत पा सकें, और फिर वाकई कोई बिगड़बत न हो।
 
यह तो बहुत ही जरूरी कदम है ED की छापेमारी के बाद। I-PAC की इमरजेंसी मीटिंग में तीन गाइडलाइंस लागू होना तो किसी और की चिंताओं को नहीं बांध रहा 🙏। सबसे पहले, डिजिटल क्लिनिंग पर फोकस करना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि पार्टी के नाम पर कोई भी गलत काम नहीं हो रहा है। दूसरा, किसी भी कर्मचारी से सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना बहुत जरूरी, ताकि पार्टी का गौरव बचाया जा सके। और तीसरा, पार्टी के सभी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर एक ही नीति अपनानी चाहिए, ताकि एक दूसरे की बातें लोगों को समझ आ सकें। यह तो I-PAC के लिए बहुत जरूरी कदम है।
 
ED की छापेमारी के बाद इ-PAC की इमरजेंसी मीटिंग में तीन गाइडलाइंस दिए गए हैं... सोचता है यह बहुत ही जरूरी है कि हम सब अपने सोशल मीडिया पर सावधानी बरतें। लेकिन ये सवाल उठता है कि इतने सख्त आदेश क्यों लगाए जा रहे हैं? ED की छापेमारी ने कई सवाल उठाए हैं, लेकिन अब इ-PAC को अपने अधिकारियों को डिजिटल क्लीनिंग पर ध्यान देने के लिए कहा गया है। मुझे लगता है कि यह एक अच्छी बात है, लेकिन फिर से सवाल उठता है कि क्या हमारे पास वैकल्पिक विकल्प नहीं हैं?
 
ED की छापेमारी से I-PAC पर दबाव होने का यह खुलासा दिलचस्प है 😐। तीन गाइडलाइंस जैसे डिजिटल क्लिनिंग पर फोकस, सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना, यह सब कहाँ से आया? कौन ने I-PAC को यह सलाह दी? और क्यों? 🤔

मुझे लगता है कि यह तीन गाइडलाइंस थोड़ी जल्दबाजी में लागू की गई हैं। क्या हमें पता है कि I-PAC ने इन गाइडलाइंस को कैसे विकसित किया और कौन सी राजनीतिक दबावों ने उन्हें इस तरह बनाया? 🤷‍♂️

एक बात तो साफ है कि I-PAC को अपनी गोपनीयता की जानकारी सुरक्षित करने की जरूरत है। लेकिन यह दूसरों पर भी ध्यान चढ़ाना चाहिए कि उनके मुंह से निकलने वाली बातें कभी नहीं रुकतीं। 💬
 
वाह, यह तो ED की छापेमारी हुई थी, अब I-PAC को भी सख्त आदेश मिल गए हैं! 😂🚫 परन्तु ये गाइडलाइंस तो बहुत ही उपयोगी लग रही हैं। डिजिटल क्लिनिंग पर ध्यान देना और सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना, यह तो हमेशा से सही था। 🤦‍♂️ अब I-PAC के लोगों को तो सोशल मीडिया पर अपनी छवि बनाने का मौका मिल गया है। वाह, यह तो मुझे भी खुश कर देता है! 😊
 
बात है ED की छापेमारी, जैसे ही उसके बाद I-PAC की इमरजेंसी मीटिंग तय हुई, तो स्टाफ को सख्त आदेश मिले 🚫। खैर, लगता है यह तय हुआ है कि अब डिजिटल क्लिनिंग पर ध्यान देना चाहिए और किसी भी कर्मचारी से सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करने देना चाहिए। तो अब वो भी पता चलेगा कि इंसान क्या कर सकता है 🤣
 
क्या दिलचस्प है कि आईपीएस ने स्टाफ को सख्त आदेश दिए हैं! तीन गाइडलाइंस जिनमें डिजिटल क्लिनिंग पर ध्यान देना शामिल है, यह तो समझने लायक है। अब तो सोशल मीडिया पर कोई भी कर्मचारी से रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करने चाहे, और फिर भी क्या हुआ? यह कानून की शुरुआत है तो अच्छा है, लेकिन इससे पहले कि हम इसे समझ सकें, आईपीएस की प्रेस रिलीज़ में भी ऐसी जानकारी नहीं दी गई।
 
बड़ी बात हुई है I-PAC के स्टाफ को, ED की छापेमारी के बाद। वो तीन गाइडलाइंस लागू कर दिए हैं जो हमें सोचने पर मजबूर कर रहे हैं। सबसे पहले, डिजिटल क्लिनिंग पर ध्यान देना चाहिए, यह जरूरी है। सोशल मीडिया पर हमेशा ताजगी लानी चाहिए और हर कदम पर सावधानी बरतनी चाहिए। दूसरा, किसी भी कर्मचारी से सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना। इससे हमारी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता बचाई जा सकती है। तीसरा, सभी स्टाफ को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर सक्रिय रहना चाहिए और नेटवर्किंग भी करनी चाहिए, लेकिन यह सभी के लिए जरूरी नहीं। हमें अपने पेशे को बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना चाहिए। 😊 #IpacSafai #DigitalClaning #SocialMediaAwareness
 
नहीं, यह तो जरूरी है... सोशल मीडिया पर हमेशा ऐसी चीजें देखने को मिलती हैं जो हमें सोचने पर मजबूर करती हैं। तीन गाइडलाइंस लागू होने से पहले, मुझे लगता है कि यह एक अच्छा निर्णय है। डिजिटल क्लिनिंग पर फोकस करना जरूरी है, इससे हम अपने देश की छवि को सुधार सकते हैं और अन्य देशों की तुलना में आगे बढ़ सकते हैं।

किसी भी कर्मचारी से सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट करना बिल्कुल नहीं चाहिए। इससे हम अपने देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। और तीसरा गाइडलाइन, यह जरूरी है... सोशल मीडिया पर हमेशा खुद को पेश करना चाहिए। हमें अपने देश और समाज के प्रति गर्व महसूस करना चाहिए और खुद को एक सकारात्मक तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए।

मुझे उम्मीद है कि यह गाइडलाइंस हमें सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से व्यवहार करने के लिए प्रेरित करेंगी।
 
ये तो स्टाफ के लिए बहुत बड़ा चुनौतीपूर्ण है अब, ED की छापेमारी के बाद यह तीन गाइडलाइंस लगाई गईं। सबसे पहले, डिजिटल क्लिनिंग पर खास ध्यान देना जरूरी है, हमें अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को साफ रखना चाहिए, जिससे लोग हमारी पार्टी की सच्चाई को समझ सकें। दूसरा, हमारे कर्मचारियों से कहा गया है कि वे अपने काम से संबंधित किसी भी कारण से सोशल मीडिया पर कोई रेड या कमेंट न करें, इससे हमारी प्रतिष्ठा और छवि पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। तीसरा, सभी कर्मचारियों को अपने व्यक्तिगत जीवन से संबंधित किसी भी चीज़ से बचना होगा, ताकि हमें कभी भी सरकारी दबाव में नहीं आना पड़े।
 
मेरा मन ही रहता है यह सवाल, क्या हम अपने जीवन को डिजिटल क्लिनिंग में बीत रहे हैं? ED की छापेमारी से I-PAC की इस इमरजेंसी मीटिंग में तीन गाइडलाइंस लागू हुईं, इसमें हमें अपने डिजिटल जीवन को साफ करना होगा। लेकिन अगर हम सचमुच अपने डिजिटल जीवन को साफ करना चाहते हैं, तो पहले अपने अंदरूनी जीवन को साफ करें।

तीन गाइडलाइंस में से एक का मतलब है कि हमारे किसी भी कर्मचारी से सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना चाहिए। लेकिन क्या यह सचमुच सही है? क्या हमारे देश में लोकतंत्र है, तो नहीं। अगर हम अपने राजनीतिक नेताओं से खुलकर बात कर सकते हैं, तो फिर सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कहे जाने से कुछ गलत नहीं है।
 
न्यूज़ में देखा जा रहा है कि I-PAC ने ED की छापेमारी के बाद सख्त आदेश दिए हैं। तीन गाइडलाइंस लागू हुईं, जो हैं?

पहली, डिजिटल क्लिनिंग पर ध्यान देना जरूरी है। इससे हमें अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों खातों से मिलने वाली चीजों को समझने में मदद मिलेगी। अब यह सवाल उठता है कि I-PAC का क्या नेतृत्व कर रहा था, जिसने ऐसी स्थिति उत्पन्न किया।

दूसरी, कोई भी कर्मचारी सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना है। यह एक अच्छी आदत है और हमें अपने डिजिटल जीवन को साफ रखने में मदद करेगी।

इन गाइडलाइंस ने साबित कर दिया है कि I-PAC अभी भी अपने काम पर ध्यान देता है 🤔
 
ED ki chaapemari ke baad I-PAC ki emergency meeting mein kuch galat si guidelines layi gayi hain 🤔. Tena logon ko digital cleaning par focus hona chahiye, toh hum iska abhiyan kaise lete hai? Aur kya koi officer se social media par comment nahi kar sakta? Yah toh kya wajib hota ki wo kisi bhi office mein party ka kuch kare, ya toh woh sahi hona chahiye. Main sochta hoon ki ye guidelines kuch galat si hai, kyunki logon ko apni personal life ko alag rakna chahiye. AISA KAYI LOGON KO ASANA NAHIN LAGEGA 🤷‍♂️
 
क्या ये टाइम्स गेट इंडिया है? ED की छापेमारी के बाद तीन गाइडलाइंस, डिजिटल क्लिनिंग पर फोकस, और सोशल मीडिया पर रेड या पार्टी के काम को लेकर कमेंट नहीं करना। तो अब I-PAC के लोगों को अपने अकाउंट्स को साफ कर देना होगा, और फिर भी कोई जांच होती है? यही मेरा सवाल है।
 
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