भारत से दोस्ती या दुश्मनी, चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा: लूटे हथियारों से खून-खराबे का खतरा, हिंदुओं को जमात की जीत से डर

चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव शांति से और निष्पक्ष होंगे, इस पर शक है। लोग दुविधा में हैं। डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार को भेदभाव का आरोप लगाया गया है। बांग्लादेश में कई सुपरपावर जैसे अमेरिका, चीन और तुर्किय का बड़ा दखल है, लोगों को लगता है कि डॉ. यूनुस पश्चिमी देशों का एजेंडा पूरा कर रहे हैं।

इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल है कि अवामी लीग के वोटर और अल्पसंख्यक किसे वोट देंगे। बीएनपी अवामी लीग के वोटर्स को अपने पाले में ला सकती है। ऐसा होता है तो बीएनपी जीतने से कोई नहीं रोक सकता।

अगर चुनाव में धांधली हुई, तो सेना के लिए मौका हो सकता है।
 
क्या यह सच है कि चुनाव में कुछ भी बदल गया है? 🤔 सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमारा निर्वाचन प्रणाली तयार हुई है? 🙅‍♂️ चुनाव शांति से और निष्पक्ष होना बिल्कुल जरूरी है, लेकिन दुविधा में लोगों को लगता है कि यह सवाल देखने को मिलता है। 🤷‍♂️

बांग्लादेश में सुपरपावर्स का दखल आ रहा है, लेकिन हमें लगता है कि डॉ. यूनुस वास्तव में अपने देश की दिशा में चल रहे हैं। 🌟

निर्वाचन आयोग से ज़रूर सवाल उठाना चाहिए। अवामी लीग और बीएनपी दोनों ने अपने समर्थकों को वोट देने के लिए क्या प्रस्ताव रखा है? 🤝

चुनाव में धांधली होने से सेना को कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि हमारी Democracy को नुकसान पहुंचेगा। 🙅‍♂️ #निष्पक्ष_चुनाव, #सरकार_तयार, #निर्वाचन_आयोग
 
मुझे लगता है कि चुनाव शांति से और निष्पक्ष होने का सवाल बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनाव आयोग और अन्य अधिकारी देखें तो कुछ भी संदेह नहीं है। लेकिन जब बोले जाते हैं तो कुछ व्यक्तियों के शब्दों में शक उत्पन्न होता है ।


मुझे यह सवाल लगने लगता है कि अवामी लीग और अन्य पार्टियाँ अपने वोटर्स को कैसे निर्धारित कर रही हैं ?

मेरे मानने से, चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष होना जरूरी है ताकि हर किसी का वोट समान रूप से गिना जा सके।
 
क्या हमें यह विश्वास करना चाहिए कि चुनाव शांति से और निष्पक्ष होंगे? मैंने देखा है कि लोग दुविधा में हैं, और डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया गया है। यह एक बड़ा सवाल है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चुनाव के नतीजे लोगों की इच्छाओं और जरूरतों को पूरा करने वाले होने चाहिए। बांग्लादेश में कई शक्तिशाली देशों का दखल है, और यह सवाल उठता है कि डॉ. यूनुस पश्चिमी देशों का एजेंडा पूरा कर रहे हैं या नहीं।
 
चुनाव में ज्यादा धांधली न होनी चाहिए, अगर ऐसा होता तो सेना और पुलिस को एकदम काम पर होना पड़ता। लेकिन अगर डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार सच्चाई बताएगी, तो अवामी लीग के वोटर्स को बीएनपी के साथ में नहीं बांधना चाहिए। हमें यह देखना होगा कि डॉ. यूनुस की सरकार सच्चाई से काम कर रही है या नहीं।
 
अरे दोस्त 🤔, यह तो बहुत गंभीर सवाल है... चुनाव शांति से और निष्पक्ष होंगे, ये पर शक ही नहीं करना चाहिए। लोगों की एकजुटता की जरूरत है, हमें अपने मतपत्रों का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए। बांग्लादेश में इतनी कई दुनिया की सरकारें ध्यान दे रही हैं तो यह तो एक बड़ा सवाल है... और अवामी लीग के वोटरों को वोट देने की जिम्मेदारी, यह भी बहुत महत्वपूर्ण है। हमें अपना मतपत्र निर्वाहित करना चाहिए, बस ये तो सोचकर ही चलना चाहिए।
 
चुनाव में कुछ गड़बड़ी लग रही है 🤔। अवामी लीग और बीएनपी के बीच यह लड़ाई हो रही है, लेकिन दुविधा में लोग कैसे फंसेंगे, यह तो कहना मुश्किल है। डॉ. यूनुस की सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाना और पश्चिमी देशों का एजेंडा पूरा करने का आरोप लगना, यह तो सभी को चिंतित कर रहा है 🤕

चुनाव में जीतने के लिए कोई भी पक्ष धांधली करने की सोच सकता है, इससे सेना को भी मौका मिल सकता है। लेकिन अगर चुनाव शांति से और निष्पक्ष होता है, तो यह सब समस्या नहीं होगी। लोगों को यह तय करना होगा कि उनके वोट पर कब जोर देना चाहिए।
 
चुनाव में भेदभाव का आरोप लगाने पर निराश हूँ। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार को इतनी धमकी दी जा रही है। चुनाव शांति से और निष्पक्ष होने की उम्मीद थी, लेकिन लगता है कि इससे भी कम ही हो सकता है।

बांग्लादेश में यह सब देखकर आश्चर्य हुआ है। अमेरिका, चीन और तुर्किय जैसे बड़े देशों का धखा होने पर लोगों को लगता है कि डॉ. यूनुस की सरकार पश्चिमी एजेंडे को पूरा कर रही है। लेकिन मुझे लगता है कि यह तो सब कुछ ही है।

अवामी लीग के वोटर और अल्पसंख्यकों के बीच संतुलन बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है, खासकर अगर बीएनपी अवामी लीग के वोटर्स को अपने पाले में लेती है। इससे चुनाव में जीत का रास्ता आसान हो सकता है।

चुनाव में धांधली होने पर, तो सेना के लिए यह एक अच्छा अवसर हो सकता है। लेकिन मुझे लगता है कि इससे भी कम ही हो सकता है।
 
चुनाव के पीछे कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए, लेकिन अगर लोगों को लगता है कि चुनाव में भेदभाव हुआ है, तो यह बहुत बड़ी समस्या है। डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार को आरोप लगाना आसान है, लेकिन सच्चाई यह है कि हर किसी पर आरोप लगाने से फायदा नहीं होता।

अगर बीएनपी अवामी लीग के वोटर्स को अपने पाले में लेती है, तो यह बहुत बड़ी समस्या है। ऐसा करने से चुनाव की सincerता खत्म हो सकती है और देश को नुकसान पहुंच सकता है।

चुनाव में धांधली होने पर सेना के लिए मौका नहीं होता, बल्कि चुनाव आयोग को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और चुनाव की अखंडता बनाए रखनी चाहिए।
 
चुनाव में सबकुछ सही न लगे, खासकर जब हमारे देश की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो जाती है ... क्या हमें उम्मीद करनी चाहिए कि चुनाव शांतिपूर्वक और निष्पक्ष होंगे? दुविधा में लोग हैं, और डॉ. यूनुस पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन यह तो सब अच्छा नहीं है। बांग्लादेश में अमेरिका, चीन, तुर्की जैसे शक्तिशाली देशों का हस्तक्षेप देखने को मिलता है, और लोगों को लगता है कि डॉ. यूनुस कुछ विदेशी एजेंडे को पूरा कर रहे हैं।

अगर अवामी लीग के वोटरों को बीएनपी पक्ष में आकर बिठाया जाता है, तो यह चुनाव की अखंडता को खतरे में डाल देगा। और अगर धांधली होती है तो सेना को भारी मुश्किल होगी। लेकिन हमें उम्मीद रखनी चाहिए, कि चुनाव शांतिपूर्वक और निष्पक्ष होंगे और देश के वोटर अपने बोलते और डाल रहे हैं। 🤞
 
मुझे लगता है कि चुनाव शांति से और निष्पक्ष होने का सवाल बहुत मुश्किल है। मैंने ऐसा महसूस किया है कि सरकार को अपने फैसलों पर खुद ही संदेह करना चाहिए। लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि अगर हमें सुनिश्चित करना होता है, तो हमें अपने देश की स्थिति को समझने की जरूरत है।
 
🤣🤪 पार्टियों के बीच भ्रष्टाचार की खिलवाड़ पर गज़ल बनाने की ज़िम्मेदारी हमारी देशभक्ति को चुनौती करती है...

👊🔥 भाई, मैं तो सोचता हूँ कि चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यह है कि हम लोग अपने वोटों पर खुद क्या भरोसा कर रहे हैं? 🤷‍♂️

🚨👮‍♂️ पार्टियों को अपनी राजनीतिक नैतिकता को साबित करने का मौका नहीं देना चाहिए... हमें वोटों की गन्दगी को रोकना होगा।

💔👥 अल्पसंख्यकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी आवाज़ सुनी जाए या नहीं? 🗣️
 
मुझे लगता है कि इस चुनाव में बहुत सारी गड़बड़ी होने वाली है, तो खैर स्थिति कुछ भी न हो, लोगों को अपने मतपत्र देने से पहले बहुत सोच-विचार करें। बांग्लादेश में इतना शक है कि यहाँ के लोग इस चुनाव में डॉ. यूनुस की पार्टी को नहीं वोट देंगे, बल्कि उनकी बेअनसूरत सोच से।

मुझे लगता है कि अगर अवामी लीग और बीएनपी के बीच भ्रष्टाचार की बात कही जाए तो बहुत सारे लोग उसकी सच्चाई में नहीं देख पाएंगे, यह नीतीश कुमार जैसी गड़बड़ी है।
 
यार, ये चुनाव तो बहुत बड़ा सवाल है! डॉ. यूनुस पर भेदभाव का आरोप लगाने से और बांग्लादेश में पश्चिमी देशों का दखल लेने से लोगों को बहुत परेशानी हुई। यह तो निश्चित रूप से चुनाव की सफाई के खिलाफ है। और बीएनपी अवामी लीग के वोटर्स को अपने पाले में लेने की बात! यार, यह बहुत बड़ा खतरा है, अगर ऐसा होता तो सेना के लिए सीधा मौका मिल जाएगा।
 
मुझे लगता है कि इस चुनाव में बहुत बड़ा सवाल यह है कि चुनाव शांति से और निष्पक्ष होंगे या नहीं। लोग दुविधा में हैं और डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया गया है। यह तो बहुत बड़ा सवाल है कि क्या चुनाव में धांधली हुई है और अगर हुआ है तो इसके लिए सेना पर क्या काम करना पड़ेगा।

मुझे लगता है कि इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अल्पसंख्यक वोटर्स को कौन वोट देगा। अगर अवामी लीग वोटर्स बीएनपी पर विश्वास कर देते हैं तो इससे उनके लिए बहुत फायदा हो सकता है। और अगर चुनाव में धांधली हुई है तो सेना को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ेगी।
 
ਮुझे ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਗੁੱਸਾ ਹੈ। ਅंतरिम ਸਰਕਾਰ 'ਤੇ ਭੇਦ ਵਿਚਾਰ ਆਉਣ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਪਛਾਣਣਾ ਖ਼ਰਾਬ ਹੈ। ਅਜਿਹੀ ਸੁਨੇਹੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਮਨ ਵਿੱਚ ਘੁਰਾਉਣੀ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦੀ।
 
🤔 चुनाव में सबसे बड़ा सवाल क्या है? यह सवाल इतना आसान नहीं है कि हम जान सकें कि किसने वोट दिया और किसने नहीं। बांग्लादेश में ऐसी स्थिति तो पहले कभी नहीं देखी गई। अमेरिका, चीन और तुर्किय का बड़ा दखल है, लेकिन यह सवाल है कि डॉ. यूनुस क्यों उनके एजेंडे में आ गया?

बीएनपी अवामी लीग के वोटर्स को अपने पाले में लाने की बात तो सच है, लेकिन यह सवाल है कि अल्पसंख्यकों को क्या चिंता है? उनके वोट पर भार डालने से कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन यह सवाल है कि उनके वोट की जानबूझकर खपत कैसे होगी।

चुनाव में धांधली हुई, तो सेना के लिए मौका हो सकता है, लेकिन यह सवाल है कि हमें अपने देश की राजनीति में नहीं मिला पाने की ज़रूरत है? हमें यह सोचने की जरूरत है कि चुनाव में क्यों हार रहे हैं और कैसे जीत सकते हैं।
 
मुझे लगता है कि इस चुनाव में बहुत ज्यादा शक है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शांति और निष्पक्षता मिलेगी या नहीं। डॉ. यूनुस को भेदभाव का आरोप लगाना एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पर कैसे प्रतिक्रिया होगी।

बांग्लादेश में ऐसे कई शक्तिशाली देश जैसे अमेरिका, चीन और तुर्की का हस्तक्षेप हो सकता है, लेकिन यह सोचते समय हमें नहीं भूलना चाहिए कि इस चुनाव में वोटरों का मनोबल बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर अवामी लीग और बीएनपी दोनों अपने मतदाताओं को एकजुट कर लेंगी, तो यह चुनाव बहुत खतरनाक हो सकता है।

सेना के लिए मौका होने से पहले, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव शांति और निष्पक्षता से हों। अगर धांधली होती है, तो बहुत बड़ा दुःख हो सकता है।
 
मुझे भी चिंता है कि इस चुनाव में पार्टियों को अपने राजनीतिक और आर्थिक व्यवसाय ही बढ़ावा देने की बजाय चुनावी निष्पक्षता पर ध्यान देना चाहिए। अगर भेदभाव और धांधली हो रही है, तो लोगों की प्रतिक्रियाएं बहुत गंभीर होंगी।
 
मैंने देखा है कि लोग बहुत उत्साहित हैं चुनाव के लिए, लेकिन मुझे लगता है कि हमें सबसे ज्यादा चिंता यह होनी चाहिए कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष होंगे। अगर चुनाव में धांधली होती है तो इससे हमारी राजनीतिक स्थिति को बहुत प्रभावित करेगी। लेकिन अगर हम सभी एकजुट होकर चुनाव में भाग लेते हैं और निष्पक्ष वोट देते हैं, तो यह हमारे लिए एक अच्छा अवसर होगा।
 
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