भारत-EU की डील से अमेरिका इतना भड़का क्यों है: मंत्री बोले- इसमें भारत का ज्यादा फायदा; क्या ट्रम्प का टैरिफ बेअसर हो जाएगा

भारत और यूरोप का इस तरह फैसला करने से अमेरिका पर बोझ पड़ सकता है जिससे उसका आर्थिक मकसद भी प्रभावित होगा।
 
अरे, यह तो बहुत सही कहा गया है... भारत और यूरोप दोनों एक साथ फैसला करें तो अमेरिका के लिए बोझ बन सकता है। पहले यूरोप और भारत मिलकर कुछ नया करने का प्रयास करें, फिर अमेरिका की ओर देखें। अरे, अमेरिका तो अपने आर्थिक उद्देश्यों को नहीं छूने देंगे।
 
मुझे लगता है कि यूरोप और अमेरिका के बीच ऐसे समझौतों की बात करना अच्छा नहीं है। हमारे देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में शायद यह फैसला भारत के लिए सहायक होगा, लेकिन अमेरिका पर इसका बोझ पड़ने की संभावना है ताकि वह अपने आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सके। मैं समझता हूँ कि यह एक वैश्विक अर्थव्यवस्था है, लेकिन ऐसे समझौतों में हमारे देश की रोजगार और आर्थिक विकास पर भी ध्यान रखना चाहिए।
 
ये तो सचमुच बड़ी समस्या है... अमेरिका को हमारे इस तरह के फैसले से बोझ लेना पड़ेगा तो उसका आर्थिक मकसद निश्चित रूप से प्रभावित होगा। मुझे लगता है कि भारत और यूरोप की बातचीत करने के लिए हमें थोड़ा और समय चाहिए, नहीं तो हमारे इस तरह के फैसले से अमेरिका पर बहुत बड़ा बोझ पड़ सकता है। मुझे लगता है कि हमें अपनी आर्थिक स्थिति और इसके प्रति लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि हमारे फैसले अमेरिका पर बोझ न डाले।
 
अमेरिका को अपनी आर्थिक रणनीतियों को फिर से बनाने की जरूरत है, भारत और यूरोप दोनों के फैसलों ने शायद एक-दूसरे पर निर्भर नहीं करेगा। अमेरिका को खुद अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए, फिक्र तो दुनिया भर के देशों के बारे में नहीं।
 
मुझे लगता है कि यह बिल्कुल सही नहीं है, लेकिन फिर भी मैं सोचता हूँ कि यूरोप और भारत के बीच इस तरह के समझौते से अमेरिका को कुछ फायदा हो सकता है... नहीं, नहीं, मुझे लगता है कि यह एक बड़ा खतरा है! 🤔

मैंने देखा है कि जब यूरोप और भारत के बीच ऐसे समझौते होते हैं, तो अमेरिकी खिलौनों की बाजार में खपत बढ़ जाती है, लेकिन फिर यह हमेशा अमेरिकी उद्योगों के लिए फायदेमंद नहीं होता। 🤑

लेकिन फिर भी, मैं सोचता हूँ कि यूरोप और भारत के बीच इस तरह के समझौते से अमेरिका को अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव करने का अवसर मिल सकता है, जिससे वह अपने खुद के उद्योगों को मजबूत बना सके। 💡

लेकिन... नहीं, मुझे लगता है कि यह एक बड़ा खतरा है! 😅
 
ये दुनिया कैसी चल रही है... अमेरिका को भारत और यूरोप के इस फैसले से कितना बोझ लगेगा, यह तो साफ है ... आर्थिक मकसद पर प्रभाव पड़ेगा तो इसका कोई अच्छा नतीजा नहीं निकलेगा ... ये अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाल देगा।
 
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की अस्थिरता की बात हो तो हमें खुश रहना चाहिए, लेकिन देश के बड़े-बड़े निर्णयों से जुड़ी भावनाएं बहुत गहरी होती हैं। 🤔

मुझे लगता है कि ऐसे निर्णय लेने से पहले हमें अपने पड़ोसियों को पूछना चाहिए, ताकि उनकी जरूरतें और समस्याएं समझी जा सकें। भारत और यूरोप के बीच व्यापार और संबंध मजबूत होने चाहिए, लेकिन यह तो सही सीमा पर ही हो सकता है।

अगर हम ऐसा निर्णय लेते हैं जिससे अमेरिका पर आर्थिक बोझ पड़े, तो यह हमारे देश के लिए फायदेमंद नहीं होगा। हमें अपने पड़ोसियों की मदद करनी चाहिए, न कि उनके ऊपर बोझ डालना। 🤝
 
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर यह सोचकर यूरोप और भारत के इस फैसले से मुझे थोड़ा डर लग रहा है 🤔। हमारे देश में आर्थिक स्थिरता बहुत जरूरी है, तो अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, तो इसका लाभ किसका? क्या हमारे देश में भी ऐसा होने का खतरा नहीं है? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि यूरोप और भारत ने अच्छी तरह सोचा होगा, लेकिन फिर भी इस फैसले को समझने में थोड़ा समय लगेगा। अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, तो हमें देख रहे होंगे, कि कैसे हमारे देश की आर्थिक स्थिति पर इसका असर पड़ेगा। 🤑

लेकिन एक बात जरूर है, अगर हम अपने देश की आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखेंगे, तो यह फैसला कुछ भी नुकसान नहीं पहुंचाएगा। 😊
 
अरे, यह तो सचमुच एक बड़ा मुद्दा है। यूरोप और भारत का इस तरह फैसला करना अमेरिका पर बहुत बोझ पड़ेगा, शायद वह अपने आर्थिक लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाएगा। अमेरिका की अर्थव्यवस्था बहुत ही जटिल है, और उसके लिए यह फैसला करना मुश्किल होगा। शायद वह अपने देश के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने पर विचार करेगा, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
 
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