6 महीने बाद भी पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ‘बेघर’: अफसर बोले- बंगला रेनोवेट करा रहे, मंत्री ने कहा- अभी बंगला अलॉट नहीं, वे पसंद तो करें

अभी-अभी उपराष्ट्रपति पद छोड़ने वाले जगदीप धनखड़ 'बेघर' हैं - सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ, मंत्री ने कहा- पसंद तो करें
 
जगदीप धनखड़ की स्थिति बहुत दुखद है 🤕। उन्होंने अपने लंबे सेवानिवृत्ति के बाद भी एक अच्छा जीवन बनाने की उम्मीद में थी, लेकिन अब वो 'बेघर' महसूस कर रहे हैं। सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ तो फिर क्या? यह सच्चाई बहुत दुखद है 🤔। मुझे लगता है कि हमें उन्हें इस स्थिति से निकालने के लिए एक समाधान ढूंढना चाहिए। शायद कुछ अलग-थलग रूप से उनकी मदद करनी चाहिए, जैसे कि विशेष परिसर या आवास प्रदान करना। इस तरह हम उन्हें अपने जीवन को फिर से बनाने में मदद कर सकते हैं। 🤞
 
🤔 मुझे लगता है कि जो लोग बोल रहे हैं, वह पूरी तरह से सही कह रहे हैं... सरकार को अपने अधिकारियों को देने वाले बंगले अलॉट करने में बहुत समय लगता है, और अगर उनके पास यह जानकारी नहीं है तो फिर भी उन्हें पता चलता है कि जिस व्यक्ति ने पद छोड़ दिया है... उसके बंगले में स्थानापन्न होना चाहिए, खैर इस बात पर कुछ नहीं कहना चाहता
 
🤔 भाई, ये बड़ा मजाक है! जब तक हमारे पास सरकारी बंगले की सुविधा नहीं है, तब तक 'बेघर' क्यों कहते? Jagadish Dhankhar ke alawa koi aur bhi government official ko bhi sarkari bungalow di gayi hai, toh kyunki unka aage kuchh nahi hai. 🙄

Mantri ki baat sach hai, lekin ye kaise ho raha hai? Kya humari sarkar mein abhi to logon ke liye aur bhi kuchh nahi hai? Dhankhar ko bungalow di gayi hai, par unke alawa koi aur bhi hain jo isse prabhavit hain. 🤷‍♂️
 
अरे, यह तो बहुत दुखद की बात है जगदीप धनखड़ की। उनका उपराष्ट्रपति पद छोड़ना बहुत बड़ा झटका है। लेकिन मुझे लगता है कि उनकी स्थिति को देखकर हमें सरकारी नीतियों को और भी अच्छा बनाने की जरूरत है। उन्हें बंगला अलॉट नहीं मिला, तो यह तो एक बड़ा मुद्दा है। लेकिन मुझे लगता है कि अगर हम सब मिलकर सोचते हैं और सरकार को अपनी बात समझाने की कोशिश करते हैं, तो शायद कुछ अच्छा होगा। उन्हें भी कुछ करने का मौका देना चाहिए, जैसे कि सरकारी नौकरियों में रिक्ति को कम करने की कोशिश करनी।
 
अध्यापक जगदीश के बाद फिर से उपराष्ट्रपति पद छोड़ने वाले जगदीप धनखड़ का यह दौर, हमारे राजनीतिक माहौल में ही नहीं, अपने परिवार और समाज के लिए भी बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बेघर होना, शायद उसके लिए एक बड़ा नुकसान नहीं है - ऐसा कहा जा रहा है कि सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ, लेकिन देखें तो मनोरंजन और आर्थिक सुरक्षा के लिए पैसे कमाने के लिए कई संग्रहालयों और कला शिविरों में भाग लेना पड़ सकता है।
 
मुझे लगता है कि यह बड़ी चीज़ है कि उन्हें सरकारी बंगला अलॉट नहीं मिला 🤷‍♂️, जैसे कि हमें उम्मीद थी कि उन्हें न्यूनतम ही मान्यता दी जाएगी। यहाँ तक कि मंत्री ने कहा कि अगर वे चाहते हैं तो खुश रहें, लेकिन यह बात समझ में नहीं आती, जैसे कि अगर मुझे घर नहीं मिला तो मैं दूसरे शहर चल जाऊँ? 🤦‍♂️ सरकारी जीवन निकम्मा है तो लोगों के पास तो बस अपने परिवार और दोस्तों का साथ रहता है।
 
जगदीप धनखड़ को सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ, वो कैसे 'बेघर' हैं? यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है 🤕
 
बिल्कुल सुनकर राहत हुई कि जगदीप धनखड़ जी उपराष्ट्रपति पद छोड़ रहे हैं। उनकी उम्र बीतने लगी है और मैं समझ नहीं पा रहा था कि आगे क्या करें।

लेकिन जब सरकार ने बताया कि उनको बंगला अलॉट नहीं हुआ तो मुझे यह बात पसीना आ गई। उनका पद छोड़ना भी अच्छा है लेकिन अगर उन्हें अपना घर नहीं मिल पाया तो इसका मान जाना कठिन होगा। हमें उम्मीद होनी चाहिए कि सरकार ने सही तरीके से उनकी समस्या का समाधान दिया हो।

अब जब जगदीप धनखड़ जी उपराष्ट्रपति पद छोड़ रहे हैं तो मुझे लगता है कि अब देश के लिए चुनावों में उनकी पार्टी के उम्मीदवार को बहुत महत्व देना होगा।
 
जगदीप जी की बात सुनकर मुझे लगता है कि ये देश हमारे पास नौकरी के लिए चाहे और ना चाहे, हर किसान, व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता को अपना काम ढूंढना पड़ता है। अगर उनके पास सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ तो फिर भी वे 'बेघर' नहीं हैं - उनके दिमाग में कुछ काम है जिसे वह करना चाहते हैं।

मुझे लगता है कि अगर सरकार वास्तव में उनकी सेवाओं को महत्व देना चाहती है, तो उन्हें कोई नौकरी दिलानी चाहिए, फिर बंगला अलॉट करना शुरू होता। और अगर उनके पास पसंद है तो फिर भी उन्हें उसका अधिकार मिलना चाहिए। सरकार को अपने लोगों की जरूरतों को समझना चाहिए, न कि केवल वोटबैंकिंग करें।
 
ये तो सचमुच जोर देने की जरूरत नहीं... शायद जगदीप धनखड़ को अपने भविष्य के लिए यही सबसे अच्छा विकल्प समझ आया होगा, सरकारी बंगलों में अलॉट न होने से। तो बस इतना कहना कि अगर वह 'बेघर' हैं, तो शायद उनके पास और भी बहुत कुछ है जो हमें जानना चाहिए... 🤔

मुझे लगता है कि यह मामला थोड़ा जटिल है, लेकिन अगर सच्चाई निकल आए तो जरूर सुनने लायक होगा। सरकारी पद छोड़ने वालों को अपने फैसले के पीछे क्या दोस्ती है...? 🤑
 
अरे, जान-मान व्यक्ति की सपनों की दुनिया है भारतीय राजनीति 🤷‍♂️। जगदीप धनखड़ जी ने उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद तो एक नई पहचान खोज लेनी चाहिए, परन्तु सरकारी बंगला अलॉट नहीं होने से वे अब 'बेघर' की तरह दिख रहे हैं 🏠। मंत्री जी ने कहा कि उनका पसंदीदा रूम तो पहले से खाली है, वास्तव में यह एक मजाक है जिसने सब को मुस्कराया 😂

अगर उन्हें बंगला अलॉट नहीं मिल रहा है तो फिर उन्हें घर की समस्या कैसे समझानी है? सरकार से निकलकर अब उनकी दायित्वों की भावना कहाँ जा रही है? यह एक दिलचस्प सवाल है जिसका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है 🤔
 
सच्चा दुख है जागदीश जी के उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के, उनके लिए यह एक बड़ा संकट हो सकता है। सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ तो वह कैसे रहन? मुझे लगता है कि मंत्री जी ने सही कहा, अगर वे उसे पसंद करें तो दूसरा विकल्प ढूंढ लें, शायद उनके पास और भी अच्छा अवसर होगा। उपराष्ट्रपति पद छोड़ने से पहले वह कितने समय तक सरकार में रहे, उनकी योजना क्या है? मुझे लगता है कि उन्होंने अच्छी तरह सोचा होगा, लेकिन अब यह उनके लिए एक बड़ा चुनौती है। 🤔
 
अरे, देखिए, अब तक जी को उपराष्ट्रपति पद छोड़ने का फैसला करना पड़ा... और फिर यह बात सुनाई दे रही है कि उनका सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ? तो क्या, मंत्रीजी ने सोचा कि वे हमेशा के लिए 'बेघर' रहेंगे? चाहे वह किसी भी पद पर हों... उनकी सरकारी रूम अलॉट करना जरूरी है, तो फिर यह कैसे संभव?

मुझे लगता है कि देश में बेरोजगारी बढ़ने की बात तो चलने-फुलने वाली बात हो गई है, और अब राजनेताओं पर भी इसका दबाव पड़ रहा है। हमें ऐसी स्थितियों को स्वीकार नहीं करना चाहिए, जहां देश के नेता अपनी जिम्मेदारियों से निकलने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

क्या, मंत्रीजी को सोचकर कुछ भी गलत महसूस नहीं हुआ? 🤔
 
अरे, ये तो मजेदार है! सरकार द्वारा उन्हें बंगला अलॉट नहीं करने का मतलब यही है कि वो 'बेघर' हैं? 🤔 लेकिन मुझे लगता है कि शायद उनकी पसंद तो अलग है। और फिर क्यों नामुमकिन होने दें? अगर उन्हें बंगला अलॉट नहीं मिल रहा है, तो शायद किसी और को भी नहीं। सरकार द्वारा ऐसी बातें सुनने से लोगों को लगना लगता है कि वो असमानता पर चुपचाप जाने के लिए तैयार हैं। 🙄
 
मेरी राय में उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद जगदीप धनखड़ की जिंदगी थोड़ी सा दुखद होने वाली है 🤕। उनको सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ, लेकिन यह तो नाटकीय है। मैं समझता हूं कि राजनीतिज्ञों को अपने लिए भूमिकाएँ बनानी पड़ती हैं, लेकिन जब उनके खिलाफ ऐसा दावा होता है तो लगता है कि यह थोड़ा झूठा हो सकता है।
 
जगदीप धनखड़ की यह कोई बड़ी बात नहीं है कि उन्होंने उपराष्ट्रपति पद छोड़ दिया है, जो है उनकी मर्ज़ी में या फिर उनकी खुशी से। मुझे लगता है कि अगर वे अपना पद छोड़ना चाहते थे तो फिर क्यों हमने उन्हें बेघर नहीं कहा होगा। सरकारी बंगला अलॉट न होने पर उनकी जिंदगी में कुछ भी बदलाव नहीं आया है, बस एक-दूसरी जगह से खाना पकाना है।
 
अगर भारत के नेताओं को भी ऐसी स्थिति में डाला जाता है तो क्या यह सही है? एक दिन उपराष्ट्रपति पद पर बैठने, अगले हफ्ते स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ने के लिए अस्पताल में भर्ती, फिर भी वाकई 'बेघर' होना जाना सुनहरी पक्षी की तुलना नहीं है। सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ तो यह एक त्रुटि है, लेकिन अगर मंत्री ने खुलकर कहा कि 'पसंद तो करें' तो यह और भी गलत है 🤔💸

कोई भारतीय नेता अपनी स्थिति पर खुश होना चाहिए, परन्तु अगर ऐसा लगता है तो उसके बारे में लोगों की चिंता बढ़ जाती है। सरकारी पदों पर आने वाले नेताओं को अपने भविष्य के संकेत देने के बजाय प्रतिभागियों को भी खुश रखने का ध्यान रखना चाहिए। 🙏💼
 
अरे, यह बात बहुत गंभीर है... उपराष्ट्रपति पद छोड़ने वाले जगदीप धनखड़ की स्थिति देखकर मन में कई सवाल उठते हैं... बेहद निराश हूँ... सरकारी बंगला अलॉट नहीं हुआ तो फिर क्या करना? यह सवाल हम सभी को सोचने पर मजबूर करता है... क्या देश में अभी भी ऐसे लोग हैं जिनके पास इतनी जगह नहीं है?
 
अरे, यह तो बहुत दुखद देख रहा हूँ... जगदीप धनखड़ जी को उपराष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा और अभी भी उन्हें सरकारी बंगला अलॉट नहीं मिल पाया। यह सोचता हूँ कि क्या उनके पास अन्य विकल्प थे? शायद सरकार ने उनको कुछ अच्छी जानकारी दी होगी, लेकिन फिर भी उन्हें बungalow नहीं मिली। यह तो बहुत शर्मिंदगी है। मुझे लगता है कि अगर हमारी सरकार सचमुच उन्हें मदद करना चाहती थी, तो उनको कुछ अच्छा अवसर देना चाहिए था। फिर भी, मैं उनके लिए सम्मान करता हूँ, वे हमेशा अपने देश के लिए कुछ नया-नया कर रहे हैं।
 
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