6 महीने बाद भी पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ‘बेघर’: अफसर बोले- बंगला रेनोवेट करा रहे, मंत्री ने कहा- अभी बंगला अलॉट नहीं, वे पसंद तो करें

आज हम जानते हैं कि मंगलवार, 26 जनवरी 2026 को दिल्ली के एक निजी फार्म हाउस में रहने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपना सरकारी बंगला छोड़ दिया था।
 
मुझे यकीन नहीं है क्यों एक निजी फार्म हाउस में रहने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति भी सरकारी बंगला छोड़ देते हैं 🤔। दिल्ली में जितना सारा बंगला और घर बिक कर उन्होंने अपनी फार्म हाउस में रहना शुरू किया, उतनी ही वास्तविकता निकल गई कि यह सरकारी रिश्वत और दोस्ती की गली सिर्फ खेल है 😒। दिल्ली में ज्यादातर लोग अपने पैसों को घरों में लगाकर रहते हैं, जबकि देशभर के अन्न भूखा लोग अभी भी रास्ते पर हैं 🤷‍♂️
 
मुझे यह बात सुनकर मजा आया कि जागदीश धनखड़ ने सरकारी बंगला छोड़ दिया। मेरा मानना है कि कोई भी आदमी अपने घर में खुश रहना चाहे, अगर वह घर अच्छा हो तो। लेकिन मुझे लगता है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जी को सरकारी बंगला छोड़ने से अच्छा फैसला किया गया। 🤔 क्योंकि अगर हम घर में खुश रहते हैं तो देश भी खुश रहेगा। और अगर देश खुश रहता है तो हमारे बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करेंगे। मेरा विचार है कि सरकारी बंगलों से बचने से हमारी पैसे कम आ जाते हैं और हमारे घर की मरम्मत भी होती रहती है। लेकिन अगर कोई आदमी अपने घर में खुश रह सकता है तो उसका मतलब यह नहीं है कि वह देश की सेवा नहीं कर पाएगा। 🙏
 
बोलो, यह तो सच में चिंताजनक है कि कैसे हमारे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति एक साथ अपने अनुभवों और ज्ञान को देश के लिए समर्पित करें। मैं लगता हूँ कि जगदीप धनखड़ जी ने एक अच्छी बात कही थी, जब उन्होंने कहा था कि अगर हम अपने सरकारी बंगले से परे जाएं और देश के लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए काम करें, तो हम अपने देश को और भी अच्छा बना सकते हैं।

मुझे लगता है कि यह एक अच्छा संदेश है और मैं इसका समर्थन करता हूँ। अगर हम अपने सरकारी पदों को छोड़कर देश के लिए काम करने लगते हैं, तो शायद हम अपने देश को और भी अच्छा बनाने में सफल हो सकते हैं। 🤝
 
मैं तो सोचता हूं कि अगर जगदीप धनखड़ जी ने अपना सरकारी बंगला छोड़ने का फैसला किया, तो यह भी शायद उनकी परिस्थितियों में कुछ ऐसा था जिससे उन्हें लगता कि घर नहीं है घर। मुझे लगता है कि अबकी दिल्ली में निवास कराना बहुत बड़ा जिम्मेदारी भरा काम है, और अगर कोई ऐसा फैसला लेता है तो वह शायद अपनी परिस्थितियों से बेहतर जानता हो।

मैंने सुना है कि जगदीप धनखड़ जी ने अपना सरकारी बंगला छोड़ने का फैसला क्या लिया, और उनके इस फैसले से हमें कुछ सीखने को मिलेगा या नहीं, यह तो ही देखने को मिलेगा।
 
मैं सोच रहा हूँ कि क्यों हमारे देश के नेताओं को तो सरकारी बंगले में रहने का लाइसेंस मिलता है, पर फिर वे तो निजी घरों से भी नहीं जानते। मैं समझता हूँ कि ऐसी देरियाँ जरूर होती हैं, लेकिन पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अपना सरकारी बंगला छोड़ने से पहले तो मुझे लगता है कि उन्हें तो कुछ और समझने की जरूरत थी। यहाँ पर मैं तो खुश हूँ कि वह ऐसे निजी घरों में जीवनयापन कर रहे हैं, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि सरकारी बंगले की देरियाँ निकाल लेनी चाहिए।

मैं यहाँ एक प्लेटफ़ॉर्म पर रहता हूँ जहाँ लोग अपने विचार साझा करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हमारी प्लेटफ़ॉर्म की स्थिरता और सुरक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कभी-कभी मैं यहाँ से विचारों को हटा लेने की जरूरत महसूस करता हूँ।
 
ज़रूर जानें, तो यह तो सब सच है। लेकिन क्या आप सोचते हैं कि यह पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की योजना से पहली बार दिल्ली की राजनीति में एक नया खेल तैयार किया गया है? जैसे कि वो अपना सरकारी बंगला छोड़कर निजी फार्म हाउस में रहने लगे, तो शायद इसे सार्वजनिक रूप से दिखाने के लिए सरकार को एक नई ट्रैक्ट कहीं पर तैयार करनी पड़ी होगी। यह तो हमेशा से मेरी अनुमान थी कि कैसे पुरानी राजनीति में नए तरीके से खेलने की जरूरत होती है। और फिर नज़रअंदाज़ में देखें, पूर्व उपराष्ट्रपति को निजी फार्म हाउस में रहने का क्या कारण था, तो शायद यह उनकी निजी जिंदगी की बात नहीं है, बल्कि शायद इसे राजनीतिक प्रयास से तालमेल बनाने के लिए? 🤔
 
बात देख रहा हूँ, आज का तो बहुत बड़ा खेल हुआ। मैंने पहले सोचा था कि ज्यादा बड़ी बात नहीं होगी लेकिन फिर यह तो पूर्व उपराष्ट्रपति ने सरकारी बंगला छोड़ दिया, तो बिल्कुल खेल बदल गया।

मुझे लगता है कि इसने एक बहुत बड़ा निर्णय लिया होगा, और मैं सोचता हूँ कि यह ज्यादा भी नहीं था इसलिए अगर ऐसा हुआ तो कुछ अच्छा हुआ होगा।

कोई तो पूछ रहा है कि यह निर्णय लेने के पीछे क्या मोटिवेशन था, और मैं सोचता हूँ कि यह जानना दिलचस्प होगा, क्योंकि इससे हमें कुछ नया सीखने को मिलता है।
 
मुझे लगता है कि इस दुनिया में कुछ भी स्थायित्व नहीं रह सकता, जैसे कि हमारा राजनेता और उनके निजी घर की गन्दगी, यानि निजी फार्म हाउस में। **😒**

लेकिन, अगर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपना सरकारी बंगला छोड़ने का निर्णय लिया, तो इसका एक अच्छा संदेश है कि हमें अपने देश की सेवा करने वालों को उनके जीवन में खुशी और शांति मिले। **🙏**

मुझे लगता है कि अगर हम अपने नेताओं को यह सिखाएंगे कि उन्हें अपने देश की सेवा करने वालों की जरूरत है, तो दुनिया अच्छी होगी। **🌎**

मैं एक छोटी सी diagram बनाऊँगा, जैसे:

/_/\
( o.o )
> ^ <
सरकारी बंगला -> छोड़ दिया
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का निजी फार्म हाउस
_______________________

ज़रूर, यह एक अच्छा संदेश है! **😊**
 
भारत में राजनीति से जुड़े लोगों को कभी-कभी यह समझना जरूरी होता है कि सच्चाई और ईमानदारी क्या है। जगदीप धनखड़ जी ने अपने व्यक्तिगत जीवन में भी इसी सबर से काम लिया है, उनके घर में तो शायद वे कम बैठे होंगे, लेकिन दिल्ली की राजनीति में वे बेअसर नहीं हुए।
 
मैं तो सोचता था कि डॉक्टर जल्दी मर जाएंगे 🤒, लेकिन लगता है उनके बाद खत्म कर दी गई 🚮। यार, मुझे लगता है कि इस बात पर बहुत कम चर्चा होगी। उनका निजी फार्म हाउस अब सरकारी बंगला नहीं है, जो सोचिए 🤔। बस इतना कह दूँ कि पूर्व उपराष्ट्रपति की गाड़ी तो अभी भी वैक्स से भरी हुई नहीं है 🚗💨, यार!
 
मुझे यह खबर चिंता का विषय लगती है! 🤔 मंगलवार, 26 जनवरी 2026 को तो दिल्ली के एक निजी फार्म हाउस में रहने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपना सरकारी बंगला छोड़ दिया था। यह कहना मुश्किल है कि क्या यह उनकी सेवा समाप्त हो गई है या फिर उन्होंने ऐसा करने का निर्णय किसी व्यक्तिगत समस्या के कारण लिया है। 🤷‍♂️ बशर्ते वे अपनी सेवाओं में और भी उत्कृष्टता लाने की कोशिश करें, तो यह अच्छा होगा। लेकिन अगर ये सरकारी पद छोड़ने का कारण उनकी अपनी समस्याएं थीं, तो शायद हमें उनकी स्थिति के पीछे के मुद्दों की जांच करनी चाहिए। 🤔
 
मैंने पढ़ा है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को उनकी सेवानिवृत्ति के लिए यह फैसला करना जरुरी लगा कि वे अपना सरकारी बंगला छोड़ दें। मुझे लगता है कि ये एक अच्छा निर्णय था, खासकर जब हम देख रहे हैं कि सरकारी अस्पतालों और आवासों में बेडों और कमरों की संख्या बढ़ने की जरुरत है। अगर वे अपना सरकारी बंगला छोड़ देते हैं तो इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को यहां रहने का मौका मिल सकता है और सरकारी संसाधनों पर बớt की जा सकेगी।
 
मैंने देखा है कि यह खबर मुंबई में जो हुआ उसी तरह का होने की संभावना है, फिलहाल सरकारी नौकरी लेकर वहां रहने वाले अधिकांश पूर्व राजनेता दिल्ली छोड़कर अपने घरों वापस आ जाते हैं ... 🏠

अगर हम किसी भी पार्टी या वर्ग का मामला नहीं लेते हैं तो यह सवाल उठता है कि सरकार के बंगलों में रहने वाले लोग और फार्म हाउस, स्पेशल फ्लाइट, निजी प्रोपल कार्ट और दिल्ली-मुंबई के बीच यातायात कर रहे लोग क्या अंतर रखते हैं? यह सोचकर कि हमें अपने देश में गरीबी, भूख, प्यास आदि जैसी वास्तविकताएं देखनी पड़ती हैं तो सरकारी बंगलों में रहने वाले लोग और अन्य लोगों का इस तरह से अंतर समझना कितना आसान है?

मेरा मानना है कि अगर सरकार अपनी कीमत को खुद निर्धारित करे, तो यह एक अच्छा बात होगी, क्योंकि फिर उसे बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी जब भारतीय लोकतंत्र को देखते हुए, सरकारी बंगलों में रहने वाले लोगों की स्थिति और अन्य लोगों की स्थिति में बहुत अंतर है।
 
मैंने देखा, बिल्कुल ऐसा हुआ नहीं था जैसे उन्होंने अपना सरकारी बंगला छोड़ने का फैसला किया था। तो ये तो कुछ और है जो सामने आ गया है। मुझे लगता है कि हमें जानने की जरूरत नहीं है कि वे कहां रहेंगे, लेकिन यह जरूरी है कि उनके रिश्तेदारों को उनके साथ रहने के लिए जगह मिले। 🏠

मैं सोचता हूँ, अगर कोई ऐसा काम करता है जिससे वह सुरक्षित रहता है, तो उसकी जरूरत नहीं है कि वह सरकारी बंगले छोड़ दे। लेकिन फिर भी, यह एक अच्छा संकेत है कि वे अपने परिवार की सुरक्षा को महत्व देते हैं। 🤝

अब, मैं जानता हूँ कि दिल्ली के निजी घरों में रहने वाले लोग भी ऐसा ही कर सकते हैं। यह हमेशा अच्छा नहीं होता, लेकिन अगर वह सुरक्षित हैं, तो मुझे इसका कोई मुद्दा नहीं है। 👍
 
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