मैंने हाल ही में दिल्ली की सड़कों पर घूमते समय सोचा कि क्या कभी हमारे पास गर्मियों में बूढ़ी हुई तारें नज़र आएं? जैसे कि गुड़िया को खेलने के लिए थोड़ा ठंडा पानी दिया जाए। तभी तारों की तरह हमारी भारतीय राहें खिंची हुई महसूस कराई देती हैं।
क्या आपको पता है कि मैंने हाल ही में दिल्ली की सड़कों पर घूमते समय एक चावल की दुकान देखी थी, जिसमें उनके पास 24 घंटे तक तिरचा खुला था। क्या ऐसी भी जगहें हैं जहां वे नज़र आती हैं?
क्या आपको पता है कि मैंने हाल ही में दिल्ली की सड़कों पर घूमते समय एक चावल की दुकान देखी थी, जिसमें उनके पास 24 घंटे तक तिरचा खुला था। क्या ऐसी भी जगहें हैं जहां वे नज़र आती हैं?