जम्मू के डोडा में रहने वाली अनीता राज ने कहा, 'हमें पहली बार ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीखी है।' इस ट्रेनिंग में हमें सिखाया गया कि कैसे हथियार चलाने और फिर जोड़ने की जानकारी मिलेगी।
अनीता ने बताया, 'ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को सेना की मदद करने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।' पुलिस और सेना के अधिकारियों ने बताया कि जम्मू के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही है।
विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) नामक एक संगठन है जिसका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करना है।
इस ट्रेनिंग में भाग लेने वाली कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें हथियार चलाने और जोड़ने की जानकारी दी गई है।
विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) को 1995 में जम्मू और कश्मीर में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करना है।
मैंने देखी है कि जम्मू-कश्मीर की पहाड़ी इलाकों में रहने वालों को हथियार चलाने की जानकारी देने वाले संगठन का उद्देश्य कौनसा है? यह सोचते समय मैं सोचता हूँ कि क्या ऐसी ट्रेनिंग बहुत जरूरी है? लेकिन फिर भी, अगर इसे प्रशिक्षण दिया जाता है तो शायद हमें सही जानकारी मिलेगी। मुझे लगने लगा कि ये संगठन वास्तव में जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
ऐसे अच्छी बातें सुनकर तो मन में खुशी होती है... जम्मू के डोडा में रहने वाली अनीता राज जैसे लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षण देना एक अच्छा काम है।
मुझे लगता है कि यह ट्रेनिंग जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। अगर हमारे देश के हर इलाके में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं तो आतंकवाद से लड़ने के लिए हमारे लोगों को तैयार किया जा सकता है।
मुझे उम्मीद है कि विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) जैसे संगठन और सरकार द्वारा चलाए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम हमारे देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान करेंगे।
ऐसी बात है तो शायद हमारे जम्मू कश्मीर के इलाकों में रहने वाले लोगों को हथियार चलाने की जानकारी देने से उनकी सुरक्षा बढ़ेगी। यह ट्रेनिंग उन्हें आतंकवाद से लड़ने के लिए तैयार कर रही है। मैं सोचता हूँ कि अगर हमारे ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को हथियार चलाने की जानकारी दी जाए तो उनकी सुरक्षा बढ़ेगी।
ये तो दिलचस्प, जम्मू की लड़कियाँ अब ऑटोमैटिक राइफल चलाने में महारत हासिल कर रही हैं , फिर भी कोई सोचता है कि यह तो खेल ही है ।
मुझे लगता है कि ऐसे संगठन जैसे कि विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) में शामिल होने वाले लोगों को अपने परिवार और समुदाय की सुरक्षा के बारे में पता होना चाहिए, न कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का।
यह तो एक अच्छा काम है, लेकिन अगर ऐसे लोगों को ऑटोमैटिक राइफल चलाने की जानकारी देने से पहले उन्हें अपने परिवार और समुदाय की सुरक्षा के बारे में पता होना चाहिए, तो यह एक अच्छा विचार होगा।
भाई, ये जानकर बेहद खेद हुआ कि हमारे जम्मू की इलाकों में रहने वाले लोगों को अब ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीखनी पड़ रही है। यह बहुत बुरा है क्योंकि युवाओं को इतनी जटिल चीजें सिखानी पड़ती हैं।
मुझे लगता है कि हमें अपने जम्मू क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने का तरीका ढूंढना चाहिए। क्या नहीं तो हमारे युवाओं को बाहरी मदद लेनी पड़ेगी।
मुझे विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) नामक संगठन की बात करने में दुःख हुआ। 1995 में शुरू होने वाला यह संगठन आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने का तरीका ढूंढने में असफल रहा।
अब हमें अपने युवाओं को ऐसी चीजें सिखानी चाहिए जिससे वे अपने इलाके की सुरक्षा के लिए मदद कर सकें।
मैंने यह पढ़ा तो दिल दहल गया। पहली बार ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीखने वाली महिलाएं, ये तो हमेशा सोच में आ गई थी। लेकिन क्या यह सही है? क्या हमें लगता है कि एक हथियार चलाने की जानकारी कुछ भी है?
मैंने पढ़ा कि जम्मू के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही है, लेकिन मुझे लगता है कि यह सही नहीं है। हमें सोचना चाहिए कि क्या हमें आतंकवाद से लड़ने के लिए हथियार चलाने की जरूरत है?
लेकिन फिर, मैंने विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) नामक संगठन का बारे में पढ़ा तो मुझे लग गया। यह संगठन जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने का उद्देश्य रखता है, जो सही है।
लेकिन, फिर मैंने महिलाओं की बात सुनी तो मुझे लगता है कि यह भी गलत नहीं है। उन्हें हथियार चलाने और जोड़ने की जानकारी देना सही है, लेकिन हमें सोचना चाहिए कि क्या हमें आतंकवाद से लड़ने के लिए ही हथियार चलाने की जरूरत है?
मुझे लगता है कि सब कुछ सही नहीं है, और मैं भी सही नहीं हूँ।
ऐसी बातें सुनकर मुझे लगता है कि जम्मू के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने का यह तरीका अच्छा लग रहा है। तो यार, जैसी ट्रेनिंग के बाद उन्हें ऑटोमैटिक राइफल चलानी में आता है, तो फिर क्यों ना? विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) से जुड़े लोगों की मदद करने के लिए इस तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह अच्छी बात है कि जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है।
मुझे फैक्ट्री में तेज़ इंजनों की आवाज़ सुनने कैसे लगती है जैसे कि डोडा में रहने वाली अनीता राज को ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीख रही है । मैं कभी नहीं सोचा था कि पुलिस और सेना के अधिकारियों को विलेज डिफेंस गार्ड्स जैसे संगठन शुरू करने की जरूरत होगी। लेकिन शायद जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने का मौका देने से हमें कुछ अच्छा हो सकता है।
ऐसी ताज़ा खबर सुनकर मैं बहुत खुश हुआ। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा कदम है जम्मू और कश्मीर के लोगों को आतंकवाद से निपटने के लिए प्रशिक्षित करना। यह ट्रेनिंग हमें सिखाती है कि हम अपने इलाके की रक्षा कैसे कर सकते हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है कि हमारे देश में ऐसे पहलू को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए मैं बहुत बधाई देता हूँ।
मुझे याद है जब मैं छोटा था, दादी ने मुझे बांधूक सिखाने की कोशिश की, लेकिन मैंने अच्छाई से खेला , और वो ही चीज़ लग गई। फिर मेरी आंखें सड़ी हुई थीं, तो निश्चित रूप से बांधूक नहीं चल पाती।
फिर क्या बोलिये, जम्मू में रहने वालों को आतंकवाद से लड़ने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है, तो यह बहुत अच्छा है... लेकिन मुझे लगता है कि अगर मैं भी बांधूक चलाने का तरीका सीख सकता, तो मैं भी अपने पड़ोसी के खिलाफ लड़ सकता।
क्या कोई जानता है, कैसे सुबह 6 बजे तक कॉफ़ी पीने के लिए देर न करें, फिर दिन भर थक जाते हैं...
यह बहुत अच्छी बात है कि जम्मू के डोडा में रहने वाली अनीता राज ने ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीखी, तो हमारे देश में महिलाओं को भी सेना में शामिल होने का मौका मिलेगा। इससे हमारे देश की सुरक्षा बढ़ेगी। विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) नामक संगठन ने जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने का काम बहुत अच्छी तरह से कर रहा है।
अब हमारे देश में भी ऐसे संगठन होने चाहिए जो हमें आतंकवाद से लड़ने की तैयारी करें। इससे हमारे देश की सुरक्षा बढ़ेगी और हमारे युवाओं को भी अपने देश की सेवा करने का मौका मिलेगा। यह बहुत अच्छा समय है जब हम अपने देश की सुरक्षा के लिए लड़ने वालों को प्रोत्साहित करेंगे।
बड़ा अच्छा निर्णय तो ये है! सेना और पुलिस की मदद से हमारे इलाकों में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने की जानकारी दिलाना बहुत जरूरी है। #आतंकवादसेनिपटना #जम्मूकश्मीरकीज़िम्मेदारी
हमारे देश में ऐसे कई संगठन हैं जो हमारे रहने वाले लोगों को प्रशिक्षित करने का प्रयास करते हैं। जैसे कि विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) नामक संगठन का भी बहुत अच्छा काम हो रहा है। #विलेजडिफेंसगार्ड्स #आतंकवादके खिलाफ
हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोगों को आतंकवाद से लड़ने की जानकारी दी, उनके इलाकों में आतंकवादी गतिविधियाँ कम होंगी। #आतंकवादमुक्तभारत #हमसीनाएमिलकर
ऐसे तो बहुत अच्छा काम किया जा रहा है! लेकिन मुझे लगता है कि युवाओं को भी शिक्षा और रोजगार के अवसर देने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आतंकवाद से निपटने के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन को सामाजिक और आर्थिक रूप से स्थिर बनाने के लिए भी। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि युवाओं को उनके करियर के अवसरों पर ध्यान दिया जाए, ताकि वे अपने समाज को सकारात्मक तरीके से योगदान दें।
यह तो बहुत अच्छी बात है कि जम्मू के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित कराया जा रहा है। अनीता राज जैसी महिलाओं की बात सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई। विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) नामक संगठन की बात सुनकर भी मुझे अच्छा लगा। यह तो जम्मू और कश्मीर के लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
कोई बात नहीं , तो देखो जम्मू-कश्मीर में रहने वाली महिलाओं को अब भी हथियार चलाने की जानकारी देना शुरू कर दिया गया है? अरे, यह तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन क्या ये महिलाएं अपने परिवार की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पिताजी की सुरक्षा के लिए भी सीख रही हैं? मुझे लगता है कि यह एक अच्छा निर्णय है, लेकिन इसके पीछे क्या सच्चाई है? क्या जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने की ज़रूरत है?
ऐसी खुशनुमा बातें सुनकर तो लग जाता है कि जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने का एक अच्छा तरीका है - विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) की तरह।
ऐसी ट्रेनिंग में महिलाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वे भी अपने परिवारों की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित हो सकें। और यह बात याद रखनी चाहिए कि आतंकवाद से लड़ने का तरीका हथियार चलाने से नहीं होता, बल्कि शांतिपूर्ण तरीकों से भी।
आजकल ट्रेनिंग में न केवल हथियार चलाने की जानकारी दी जाती है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की रणनीतियों को भी सिखाया जाता है। यह बहुत अच्छी बात है!
बड़ा मजाक , जम्मू की पहाड़ी इलाकों में रहने वाली महिलाएं अब ऑटोमैटिक राइफल चलाने सीख रही हैं? यार, यह तो एक बड़ा बदलाव है । पहले उनका काम घर पर बच्चों को दूध पिलाना था, अब वे हथियार चलाने का शिक्षक बन गयी हैं।
लेकिन मैं समझता हूं, जम्मू और कश्मीर में रहने वाले लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करना एक अच्छा विचार है। हमें उन्हें सुरक्षा देनी चाहिए।
लेकिन इस ट्रेनिंग में भाग लेने वाली महिलाओं को पहले यह समझना चाहिए कि हथियार चलाने का मतलब खुद को खतरे में डालना नहीं है। हमें उन्हें सुरक्षित और आत्मसमर्थन देना चाहिए।