दिल्ली में जहां पत्थरबाजी, मस्जिद के पास उसके कागज नहीं: 113 साल पुराने पेपर गायब, मस्जिद कमेटी बोली- शायद वक्फ के पास होंगे

दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद के बारात घर पर हिंसा हुई, 5 पुलिसवालों को घायल कर दिया। मामले की जांच में 11 लोग गिरफ्तार हुए।
 
बड़ा त्रासदी 🤕 हुआ दिल्ली में। फैज-ए-इलाही मस्जिद के बारात पर घरों में हिंसा हो गई, और 5 पुलिसवालों को घायल कर दिया। यह बहुत बड़ा दुःख है 🤕। मैं तो सोचता था कि हमारी देशभक्ति और सामाजिक शांति के रास्ते पर चलने वाले लोग ये ऐसा नहीं करेंगे।

क्या यह घटना हिंसा की शिकार हुई मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाती है? नहीं, नहीं, हमें यह नहीं स्वीकार करना चाहिए। ये एक व्यक्तिगत घटना थी, और इसके लिए दोषी सजा मिलनी चाहिए। 🚔

मस्जिद के बारात पर हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए हमें अपने समाज में शांति और समझदारी का संदेश देने की जरूरत है।
 
क्या लोगों ने सोचा था कि अगर फैज-ए-इलाही मस्जिद का आयोजन हो तो किसी भी तरह की बुराई नहीं होगी, लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं हुआ। घर पर हिंसा होने की बात तो सुनकर मजाक नहीं है, लेकिन पुलिसवालों को घायल कर देना और 11 लोगों को गिरफ्तार करना तो बहुत बड़ा निराशाजनक है। मुझे लगता है कि ऑनलाइन यात्रा पर लोग अपनी बेचैनी पर ही नहीं, लेकिन भीड़भावित जगहों पर भी ऐसी व्यवहार करते हैं जो तolerent नहीं होती।
 
क्या चपलता है यह?! तीन दिन पहले दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद को घायल कर दिया था, और अब बारात की निकाल लेने पर घरों में हिंसा होने लगी। पुलिसवालों को घायल किया गया! यह अच्छा नहीं है, भाई। हमें अपने शहर को शांतिपूर्ण रखना चाहिए, तो फिर कैसे सुधार सकते हैं। 11 लोग गिरफ्तार हुए, लेकिन इससे और भी बड़ी समस्या होनी चाहिए। हमें अपनी सरकार से नियमों को लागू करने की मांग करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं हों।

मैंने इस मामले की जानकारी प्राप्त की, और लगता है कि मस्जिद के बाहर बहुत सारे लोग जमा हुए थे, तो कुछ लोगों ने आग उकड़ने लगी। इसके बाद पुलिसवालों ने भी आग लगने की सलाह दी, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि आग कहाँ से आ रही है।

यह तो बहुत बड़ी समस्या है, और हमें इसे हल करने की आवश्यकता है।
 
अरे, यह तो बहुत दुखद संगति है 🤕। ऐसा लगता है कि बारात पर होने वाली हिंसा का सबब क्यों ना उस व्यक्ति की भावनाओं और मानसिकता पर नज़र डालना चाहिए? जिसे भावनात्मक संतुलन नहीं हो पाया, वह दूसरों की भावनाओं को समझने में असमर्थ है। 🤔

लेकिन, अगर इस घटना को एक संदेश के रूप में लें, तो यह हमें विभिन्न समुदायों और धर्मों के बीच संवाद और समझ की जरूरत की याद दिलाता है। अगर हम अपने मतभेदों को छोड़कर एक-दूसरे के साथ सहानुभूति और प्यार के साथ व्यवहार करें, तो यहाँ तक कि सबसे बड़ी भीड़ में भी शांति बनाए रखना आसान है। 🙏

अगर हम ऐसी बातचीत करने लगें जिसमें दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना, तो शायद इस तरह की घटनाएँ कम हो जाएंगी।
 
अरे भाई, यह तो बहुत बुरा हुआ है मस्जिद के बारात पर घर पर हिंसा सुनकर मुझे अच्छी तरह से खेद लगी। दिल्ली में ऐसी गड़बड़ी कैसे हुई? पुलिसवालों को घायल कर दिया गया, 5 जवान इस तरह आपने चोट लगाई, यह तो बहुत ही दर्दनाक बात है। और फैज-ए-इलाही मस्जिद की विशेषता यह तो पूरी तरह से बर्बाद हो गई। मुझे लगता है कि ऐसी घटनाओं से हमारी समाज में शांति और एकता की भावना कैसे फैलेगी।
 
मुस्लिम युवकों और उनकी दादी-दादी ने फैज-ए-इलाही मस्जिद के बारात पर भीड़ का सामना करने वाले पांच पुलिसवालों को घर पर हिंसा करते देखा। यह तो बहुत बड़ी चिंता की बात है कि पुलिस को अपने काम में शांति और सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी नहीं मानी गई।
 
अरे, यह तो बहुत ही चिंताजनक है 🤕 एक दिन जब हम सब अपने-आप को सुरक्षित महसूस कर रहे थे, तभी ऐसा मामला सामने आ गया है। घर पर हिंसा क्यों होती है, यह समझ नहीं आता। किसी भी तरह की घटना के बारे में जानकारी होने पर हमें सावधान रहना चाहिए। पुलिसवालों को घायल कर देना और 11 लोग गिरफ्तार करना सबकुछ सही नहीं लग रहा है। यह एक ऐसी घटना है जिसके पीछे बहुत सारे सवाल हैं। मुझे लगता है कि हमें इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एकजुट होना चाहिए।
 
अरे, मैंने सुना है यह मस्जिद की बात, तो मुझे लगता है कि फैज-ए-इलाही मस्जिद वालों ने बेरामद हो गए, 5 पुलिसवालों को घायल कर दिया, यार यह तो बहुत भी गलत नहीं हो सकता 🤦‍♂️। लेकिन मैं सोचता हूँ कि अगर कोई मजदूर रात में गाड़ी की बिक्री करने जा रहा है, तो वह भी दिल्ली से नहीं हो सकता, बस इसलिए कि वहाँ निरीक्षण कराना बहुत मुश्किल होता है 🚗

और, चुनौती लेने वालों पर नज़र रखें, अगर मजदूर किसी को घायल कर देते, तो उसे सजा मिलनी चाहिए, नहीं तो सब कुछ फेल हो जाएगा।
 
कोई नहीं समझता क्यों होती है ऐसी बातें। तो यह भी तय हो गया है कि फैज-ए-इलाही मस्जिद के मेले पर घर में कुछ लोग दंगाइयों का स्वागत कर रहे थे। अच्छे नेताओं को अपने बेटों की हालत को समझना चाहिए। तो ये 11 लोग कौन? और वे घर में क्यों घुस गए? जानकर बहुत दुख हुआ।
 
अरे, यह तो बहुत ही दुखद खबर है 🤕। फैज-ए-इलाही मस्जिद की बारात पर घरों में हिंसा होना इसके लिए नहीं आ रहा, ये लोग भारत की एकता और शांति को कैसे नुकसान पहुंचा रहे हैं ? 🤔

मुझे लगता है कि जिस व्यक्ति की बारात पर ऐसा हुआ, वह सोच रहा था कि कुछ अच्छा कर रहा हूँ, लेकिन इसके लिए दूसरों को चोट पहुंचाना जरूरी नहीं है। अगर हम सभी एक दूसरे के प्रति मिलकर समझ और सहानुभूति रखने लगें, तो यह तरह की घटनाएं कम होतीं।

कोई भी व्यक्ति अपने मतभेदों को दिखाने के लिए घरों में घुसना नहीं चाहेगा, लेकिन ऐसा हुआ, तो इसका मतलब है कि हमारी समाज में अभी भी बहुत सारे समस्याएं हैं।
 
🤕 यह तो बहुत ही दुखद खबर है। दिल्ली में ऐसा हिंसक घटनाक्रम तो पहले भी हुआ है, लेकिन अब इस तरह की घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। मस्जिदों की बारात पर घुसपैठ करना और घर पर हिंसा करना एक बहुत बड़ी गलती है।

मैं समझता हूँ कि दिल्ली में लोग तो गर्मियों की होली जैसे त्योहार मनाने के लिए उत्साहित होते हैं, लेकिन ऐसा करना एक दूसरे के साथ नफरत पैदा कर रहा है। इसके लिए हमें अपनी धार्मिक भावनाओं को अच्छी तरह से समझने और समाज में शांति और एकता बनाए रखने की जरूरत है।

पुलिस को घटना की जांच करनी चाहिए और पीड़ितों को सहायता देनी चाहिए। हमें यह भी सोचना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हमारी सामूहिक मेहनत की जरूरत है। 🤝
 
मैं तो सोचता हूँ कि यहाँ क्या हुआ? फैज-ए-इलाही मस्जिद के बारात पर घरों में हिंसा हुई, ये बात नहीं समझ सकता। 5 पुलिसवाले घायल हो गए और गिरफ्तार हुए 11 लोगों में से कौन से लोग इन्हें ऐसा कर गए? यह तो बहुत भयानक है। मैं अपनी बहन के पति के चाचा ने फैज-ए-इलाही मस्जिद की पूजा-अर्चना की थी, वह अभी घर पर नहीं है और मेरे मन में बहुत सोचने की बात है।
 
इस तरह की घटनाएं तो हमेशा होती रहती हैं... जब तक हम अपने देश के बारे में नहीं सोचते, तब तक हमें पता नहीं चलता कि यहां क्या चल रहा है। पुलिसवालों पर घायल करने वाले लोग तो फिर क्या चाहते थे? कुछ भी नहीं, बस अपने हिसाब से काम करने लगे। और अब दिल्ली में खुशियां नहीं होगी, क्या... 11 लोग गिरफ्तार, यह तो अच्छी बात है, लेकिन पूरा मामला हल नहीं हो सकता। क्योंकि जिंदगी में ऐसे ही घटनाएं होती रहती हैं और हमें सीखने को मिलती रहती हैं।
 
दिल्ली की बेगुनाही 🤦‍♂️ तो फिर भी हिंसा होती है... सीरियल शूटर्स से तो हम ज्यादा डरना पड़ता है, लेकिन दिल्ली में भी इतनी नुकसान कैसे? पुलिसवालों पर घायल कर देने वाली जिम्मेदार कौन? 🚔😬
 
यह तो बहुत खेद करने वाली बात है! दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद के बारात पर हिंसा की खबर सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। ऐसी घटनाएं होती रहती हैं तो लेकिन आजकल जैसे कुछ लोगों का व्यवहार देखकर मुझे खेद होता है। पुलिसवालों को घायल कर देना और फिर 11 लोगों को गिरफ्तार करना सही नहीं है। ऐसे लोग जो शांति का संदेश फैलाने की कोशिश करते हैं उनके पीछे से विवाद तो उगना चाहिए।
 
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